Sunday, 8 September 2019

लद्दाख के लिए नई पर्यटन नीति में सहयोग

   केंद्रीय संस्‍कृति एवं पर्यटन राज्‍य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि पर्यटन मंत्रालय लद्दाख के लिए नई पर्यटन नीति बनाने में स्‍थानीय प्रशासन को पूर्ण सहयोग देगा। 

   उन्‍होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो मंत्रालय के अधिकारी इस मामले में समर्थन व सहायता प्रदान करने के लिए प्रति महीने लद्दाख की यात्रा करेंगे।
   लेह यात्रा में केंद्रीय संस्‍कृति एवं पर्यटन राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) प्रहलाद सिंह पटेल ने लद्दाख में सभी स्‍थानीय हितधारकों के साथ बैठक की। बैठक में पर्यटन विभाग की डीजी श्रीमती मीनाक्षी शर्मा; पर्यटन विभाग की एडीजी सुश्री रुपिन्‍दर बरार जम्‍मू-कश्‍मीर पर्यटन के प्रधान सचिव नवीन कुमार चौधरी तथा पर्यटन मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारी एवं स्‍थानीय निकायों के अधिकारी उपस्थित थे।
   श्री पटेल ने कहा कि वर्तमान में लद्दाख क्षेत्र के केवल 14 स्‍मारक एएसआई के संरक्षण में हैं। मंत्रालय यह संख्‍या दोगुनी या तीन गुनी करना चाहता है। लद्दाख और कारगिल क्षेत्र में कई ऐसे स्‍मारक हैं जिसका संरक्षण एएसआई द्वारा किया जाना चाहिए।
   बैठक में स्‍थानीय हितधारकों ने श्री पटेल की लद्दाख यात्रा की सराहना की। स्‍थानीय लोगों ने पर्यटन उद्योग को प्रोत्‍साहन देने के लिए बेहतर कनेक्टिवीटि, बेहतर अवसंरचना, टैक्‍स में छूट आदि की मांग की। श्री पटेल ने उन्‍हें मंत्रालय तथा भारत सरकार के पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया।
   बैठक में पर्यटक मंत्रालय के संयुक्‍त महानिदेशक विकास रुस्‍तगी ने लद्दाख क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने की कार्य योजना विषय पर एक प्रस्‍तुति दी। इसमें यह दिखाया गया कि लद्दाख में पूरी दुनिया से पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता है। अतुल्‍य भारत अभियान में लद्दाख को विशेष स्‍थान दिया गया है।

विश्वविद्यालय नए भारत की प्रगति के पावर हाउस

   उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि राष्ट्रपति के भाषणों में बार-बार शिक्षा की बात होती है। उनके लिए शिक्षा सशक्तिकरण का माध्यम है। वह चाहते हैं कि हमारे विश्वविद्यालय नए भारत की दिशा में प्रगति का पावर हाउस बनें। वह वैज्ञानिक संस्थानों से आशावान रहते हैं। 
 
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपति के चुने हुए भाषणों की पुस्तकें उनकी ज्ञानधारा का संकलन हैं। देश की संप्रभुता की रक्षा के प्रति भारत के संकल्प पर पुस्तक से उद्धरण पेश करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने हमेशा शांति और सहयोग के मूल्यों का पालन किया है।
   उन्होंने चेतावनी दी कि भारत पर आक्रमण करने वालों को माकूल जवाब दिया जाएगा।उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने सामाजिक बुराईयों पर चिंता व्यक्त करते हुए लोगों से अश्पृश्यता तथा लैंगिग भेदभाव जैसी सामाजिक बुराईयों को दूर करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि देश में उपलब्ध आसाधारण प्रतिभा, विचारों और नवाचारी क्षमताओं को एक साथ लाने की आवश्यकता है ताकि समावेशी और सतत विकास सुनिश्चित हो सके।
   उपराष्ट्रपति नई दिल्ली के प्रवासी भारतीय केन्द्र में राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द के चुनिंदा भाषणों पर दो पुस्तकों ‘द रिपब्लिकन एथिक’ (खंड-2) तथा ‘लोकतंत्र के स्वर’(खंड-2) का विमोचन कर रहे थे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत इतिहास के उस मोड़ पर खड़ा है जहां से वह प्रमुख चुनौतियों और बाधाओं का सामना करते हुए समावेशी विकास की दिशा में छलांग लगा सकता है।
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में मूल्यों और नीतियों को बनाए रखना लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस बारे में राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की और मेरी सोच एक समान है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने अनेक अवसर पर राष्ट्रपति के संबोधनों में राष्ट्र का सार, विज़न, महत्वकांक्षा, आशाओं और स्वभाव को देखा है। उनमें विचारों की स्पष्टता है, विश्लेषण करने की क्षमता है। राष्ट्रपति के सभी भाषणों में, चाहे वह राष्ट्र के नाम संबोधन हो या विदेश यात्राएं हो या शिक्षा की बात हो, सभी में तालमेल देखने को मिलता है।
    श्री नायडू ने कहा कि राष्ट्रपति हमेशा हमें अन्नदाताओं यानी किसानों, वैज्ञानिकों, पेशेवर लोगों और बहादुर जवानों के योगदान की याद दिलाते हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपति के भाषणों में बार-बार शिक्षा की बात होती है। उनके लिए शिक्षा सशक्तिकरण का माध्यम है। वह चाहते हैं कि हमारे विश्वविद्यालय नए भारत की दिशा में प्रगति का पावर हाउस बनें। वह वैज्ञानिक संस्थानों से आशावान रहते हैं। 
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक वकील के नाते राष्ट्रपति वकालत पेशे की शक्तियों और चुनौतियों के प्रति सचेत हैं। राष्ट्रपति संवैधानिक तौर-तरीकों से सामाजिक परिवर्तन में विश्वास रखते हैं। राष्ट्रपति कोविन्द गरीब से गरीब लोगो को न्याय प्रदान करने में कानूनी पेशे की क्षमता पर बल देते हैं। 
   उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति अधिकारियों से उच्च स्तर के संकल्प की आशा रखते हैं, क्योंकि अधिकारी लोगों को लोकतांत्रिक संविधान के फल प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि श्री कोविन्द ने विभिन्न सेवाओं के सैकड़ों युवा अधिकारियों को सामाजिक न्याय प्रदान करने के लिए प्रेरित किया है। 
   उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रपति के भाषणों के संकलन को प्रकाशित करने के लिए सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और उनकी टीम को बधाई दी।
   इस अवसर पर पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन और सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत, सूचना और प्रसारण सचिव अमित खरे तथा प्रकाशन विभाग की प्रधान महानिदेशक श्रीमती साधना राउत तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।