Thursday, 30 November 2017

वायुसेना के विमान में हवा से हवा में ईंधन भरने में असाधारण उपलब्धि

      नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने आसमान में त्वरित चेतावनी और नियंत्रण (एईडब्ल्यू एंड सी) कार्य करने वाले एमब्रियर परिवहन विमान में उसकी निर्धारित क्षमता से अधिक अवधि के लिए उड़ान भरने के वास्ते हवा से हवा में ईंधन भरने (एएआर) में सफलता हासिल की है। 

    एमब्रियर प्लेटफार्म पर पहली बार हवा से हवा में ईंधन भरा गया है। 
    भारतीय वायु सेना के पायलटों द्वारा किए गए हवा में ही तलाश कर लंगर डालना यानि "प्रोब और ड्रोग" एएआर पद्धति में असाधारण उड़ान कौशल की आवश्यकता होती है, क्योंकि ईंधन देने वाले विमान को ईंधन भरने वाले विमान के टैंकर के पीछे की टोकरीनुमा संरचना को तलाश कर उसमें सटीक तरीके से ईंधन डालना होता है। 
        एएआर की प्रक्रिया के दौरान दोनों ही विमानों में सटीक उड़ान मानदंड कायम रखे जाते हैं। ऐसी क्षमता वाली दुनिया की कुछ वायु सेना में से एक भारतीय वायुसेना है।
     हवा में उड़ान भरते हुए केवल 10 मिनट ईंधन भरने से विमान अतिरिक्त 4 घंटे उड़ान भर सकता है। इस उपलब्धि से भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमता को काफी बढ़ावा मिला है।

मिजोरम संपूर्ण विश्‍व के लिए एक प्रेरणा स्रोत

     मिजोरम। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज मिजोरम की राजधानी आईजोल में शहरी निर्धनो के लिए मिजोरम सरकार की आधारभूत सेवा योजना के अंतर्गत कमजोर वर्गों के लिए आवासीय परिसरों का उद्घाटन किया।

    इस अवसर पर राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि सभी के लिए आवास के साथ-साथ दिन प्रतिदिन बढ़ती शहरी जनसंख्‍या के लिए योजना का कार्य न केवल मिजोरम बल्कि पूरे विश्‍व के लिए एक चुनौती है।
   यह केंद्र सरकार का प्रमुख केंद्र बिंदु है। गरीबों के लिए शहरी आधारभूत ढांचे के निर्माण की दिशा में कुछ उपलब्धियो को प्राप्त करने से वर्ष 2022 में स्‍वतंत्र भारत के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर लक्ष्‍य प्राप्ति में सहायक होगा। नवीन मिजोरम के बिना नवीन इंडिया का होना संभव नहीं है। 
    राष्‍ट्रपति कोविंद ने कहा कि मिजोरम समाज की जीवटता सराहनीय है। मिजोरम राजनीतिक मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में संपूर्ण विश्‍व के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। वर्ष 1986 की मिजो संधि का सभी ने सम्‍मान किया और उग्रवाद का अंत हुआ। संधि के तहत सभी साझीदारों द्वारा राज्‍य और स्थानीय निवासियो के लिए शांतिपूर्ण कार्य करने पर सहमति बनी। यह वर्तमान समय का चमत्‍कार है।
     उन्‍होंने मिजोरम के लोगों के साथ-साथ गिरजाघरों, संबद्ध संगठनों, युवा और महिला समूहों, नागरिक समाज समूहों और राजनीतिक दलों को इस भाईचारे और सहयोग की भावना के लिए बधाई दी। राष्‍ट्रपति कोविंद ने कहा कि भारत की अर्थव्‍यवस्‍था आज विश्‍व में सबसे तेजी से बढती हुई अर्थव्‍यवस्‍थाओं में एक है। कृषि में नवाचार से लेकर डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था,उत्‍पादन से लेकर सेवा क्षेत्र में बढ़ोत्तरी तक सफलता की कई गाथाए हैं। 
     मिजोरम के युवा इस गाथा के अभिन्न अंग हैं। मिजोरम के युवाओ ने देश के अलग-अलग भागो में सूचना प्रौद्योगिकी, अतिथि सत्‍कार और अन्‍य सेवा क्षेत्र उद्योगों में अपनी पहचान बनाई है। उनका कार्य मिजोरम के लिए सराहनीय है। राज्य के युवाओ की शिक्षा और साक्षरता कौशल की हर जगह प्रशंसा हुई है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में साक्षरता दर 91 प्रतिशत है जो सच में प्रशंसा योग्य है। मिजोरम के युवा महिला एवं पुरूषों की मूल्‍य,मान्‍यताएं, कार्यनीति, पेशेवराना अंदाज भी सराहना के योग्य है।
      राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि हमें मिजोरम के युवाओं से बहुत सी उम्‍मीदें हैं। वे मिजोरम और भारत के भविष्‍य का निर्माण करेंगे। वे जोखिम लेने वाले, उद्यमी, रोजगार सृजनकर्ता हैं जो हमारे भाग्‍य का सृजन करेंगे। मिजोरम में ओर भी अवसर सृजन की क्षमता है। मिजोरम अन्‍य पूर्वोत्‍तर राज्‍यों की तरह देश की एक्‍ट ईस्‍ट पॉलिसी की कुंजी है। 
      इस नीति से व्‍यापार बढ़ेगा और सभी लाभान्वित होंगे। मिजोरम के पास देने के लिए बहुत कुछ है। उचित रूप से उगाने पर बांस एक अद्भुत फसल बन सकता है। मूल्‍य संवर्धन द्वारा इसका प्रयोग विभिन्न उत्‍पादों को बनाने और रोजगार के नए अवसर सृजन में किया जा सकता है। 
      बागवानी भी बड़ी संभावनाओं वाला एक अन्‍य प्रमुख क्षेत्र है। मिजोरम में अन्‍नानास और पेशन फल की पैदावार बहुतायत में होती है। इनका बड़ा बाजार है। इसका स्‍थानीय खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग में व्यापाक प्रयोग संभव है और इससे राज्य के निवासियों के अद्भुत पारंपरिक कौशल को प्रौद्योगिकी से जोड़ा जा सकता है।

Wednesday, 29 November 2017

भारत का रूस अति विश्वसनीय मित्र

       मॉस्को/नई दिल्‍ली। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कल मॉस्को में भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की। गृह मंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए अपने रूस के दौरे और विभिन्न रूसी नेताओं के साथ बातचीत पर संतुष्टि जताई।

 उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा से भारत और रूस के बीच सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला, कट्टरता विरोधी, नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने, जाली मुद्रा और सूचनाओं के आदान-प्रदान के क्षेत्र में विशेषज्ञों को प्रशिक्षण दिए जाने में और सहयोग किया जा सकेगा। 
   राजनाथ सिंह ने भारत और रूस के बीच रिश्तों और मैत्रि के दीर्घ इतिहास के बारे में बात करते हुए रूस को भारत का ‘अति विश्वसनीय मित्र’ कहा। उन्होंने रूस में रह रहे प्रत्येक भारतीय के कार्यों की प्रशंसा की और उन्हें भारत के ‘सांस्कृतिक दूत’ की संज्ञा दी। 
     उन्होंने कहा कि उनकी और भारत के बीच भौतिक दूरी लंबी हो सकती, किंतु भावनात्मक दूरी कभी भी नहीं हो सकती। उन्होंने उपस्थित जन समुदाय को भारत सरकार द्वारा आंतकवाद और आतंकवादियों की घुसपैठ को रोकने के प्रयासों और सैन्य बलों के दृढ़ संकल्प तथा संयम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने आतंकवाद को विश्व द्वारा झेला जा रहा सबसे बड़ा खतरा कहा।
    उन्होंने देश के विकास के लिए विभिन्न क्षेत्रों में जन-धन योजना, मेक-इन-इंडिया जैसे भारत सरकार के प्रयासों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आधार का उपयोग करके देश को आर्थिक प्रगति पर लाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत विश्व में आर्थिक शक्ति का अग्रणी बनने की दिशा में अग्रसर है। 
      उन्होंने भारतीय संस्कृति की दृढ़ता के बारे में उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति संपूर्ण विश्व को एक परिवार – ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ मानती है, जो भविष्य में भारत को उदार शक्ति बनाने की आधारशिला है। भारत सरकार ने पिछले तीन वर्षों में अवसंरचना के विकास से निर्माण के लिए विशेष योगदान दिया है और भारतीय लोगों की साख को बढ़ाया है।

भारत–अफगान सांस्‍कृतिक महोत्‍सव

    नई दिल्‍ली। संस्‍कृति राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा और अफगानिस्‍तान इस्‍लामिक गणतंत्र के संस्‍कृति और सूचना मंत्री प्रोफेसर मोहम्‍मद रसूल बावरी ने नई दिल्‍ली में भारत-अफगान सांस्‍कृतिक महोत्‍सव का उद्घाटन किया। 

   इस महोत्‍सव का आयोजन अफगानिस्‍तान सरकार और दूतावास तथा भारत सरकार और अंतर्राष्‍ट्रीय सांस्‍कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) ने संयुक्‍त रूप से किया है।
    डॉ. महेश शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि भारत-अफगानिस्‍तान के बीच सदियों पुराने सांस्‍कृतिक और सभ्‍यतागत संबंध है तथा संगीत, कला, वास्‍तुकला, भाषा एवं व्‍यंजन के क्षेत्र में गहरे संबंध दोनों देशों के लोगों के बीच की मित्रता के लिए महत्‍वपूर्ण है।
   डॉ. महेश शर्मा ने बताया कि जहां अफगानिस्‍तान के उस्‍ताद सरहंग जैसे प्रसिद्ध शास्‍त्रीय संगीतज्ञ पटियाला घराना में प्रशिक्षित हैं, वहीं बॉलीवुड का लोकप्रिय भारतीय संगीत अफगानिस्‍तान के घरों में सुनाई देता है। 
     उन्‍होंने कहा कि अफगानिस्‍तान का केन्‍द्रीय बमयान प्रांत हमारी साझा बौद्ध विरासत का केन्‍द्र है। डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि गुरुदेव रवीन्‍द्रनाथ टैगोर के ‘काबुलीवाला’ के जरिए भारतीय, ईमानदार और बड़े दिलवाले अफगानियों के साथ जुड़े हैं। दोनों देशों के साझा सामान्‍य मूल्‍यों को रेखांकित करते हुए भारतीय संस्‍कृति मंत्री ने कहा कि काबुल में ही चार गुरुद्वारे और दो मंदिरों का होना अफगानिस्‍तान के सहिष्‍णु और विवि‍धता भरे समाज का साक्ष्‍य है।
    भारत द्वारा अफगानिस्‍तान के लोगों के विकास के लिए की जा रही भागीदारी पर बल देते हुए डॉ. महेश ने कहा कि अफगानिस्‍तान की सांस्‍कृतिक विरासत का पुनरुद्धार और इसके सांस्‍कृतिक संस्‍थानों को सुदृढ़ करना वहां के पुनर्निर्माण में हमारी सहायता का महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। 
    मंत्री ने कहा कि काबुल में स्‍टोरे पेलेस का पुनरुद्धार और अफगान राष्‍ट्रीय संगीत संस्‍थान की सहायता करना ऐसे कुछ उदाहरण हैं।
    डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि भारत-अफगान महोत्‍सव का आयोजन असाधारण कार्यक्रम है और इससे कला, हस्‍तशिल्‍प, नृत्‍य, संगीत तथा अन्‍य शैलियों के जरिए दोनों देशों के बीच समानता को सामने लाया जाएगा। तीन दिवसीय महोत्‍सव में अफगानिस्‍तान और भारत के सांस्‍कृतिक कार्यक्रम, हस्‍तशिल्‍प, प्रदर्शनियां, व्‍यंजन तथा सांस्‍कृतिक शो का प्रदर्शन किया जाएगा।

एक वर्ष में रिकॉर्ड दस लाख घरों का निर्माण

     नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 नवंबर, 2016 को आगरा से प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का शुभारंभ किया था। 

  इस योजना के तहत 31 मार्च 2019 तक एक करोड़ नये घरों का निर्माण सुनिश्चित किया जाना है। इनमें से 31 मार्च 2018 तक 51 लाख मकान बनाए जाने हैं। इस चुनौती को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 51 लाख आवास मार्च 2018 तक बनाने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय राज्य सरकारों के साथ मिलकर कई कदम उठा रहा है। 
    इसके लिए मासिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि आवासों का निर्माण किया जा सके। नवंबर, 2017 तक 10 लाख घर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लक्ष्य की अंतिम तिथि से पहले ही आज 29 नवंबर, 2017 को यह लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। आशा व्यक्त की जा रही है कि 31 दिसंबर, 2017 तक 15 लाख घरों का निर्माण हो जाएगा। 31 जनवरी, 2018 तक 25 लाख, 28 फरवरी, 2018 तक 35 लाख और 31 मार्च, 2018 तक 51 लाख घरों के निर्माण हो जाने की आशा व्यक्त की जा रही है। 
    मार्च, 2018 तक 51 लाख आवासों के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए 56.90 लाख लाभार्थियों को मकानों की स्वीकृति दी गई है। 51.39 लाख लाभार्थियों को पहली किस्त मिल चुकी है। 31.03 लाख लाभार्थियों ने अपने आवासों की छत बना ली है और 16.05 लाख लाभार्थियों का गृह निर्माण लगभग समाप्ति की ओर है।
     छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिसा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लाभार्थियों की संख्या सर्वाधिक है। इन राज्यों के लोगों ने निर्धारित समयसीमा के भीतर अपने आवासों का निर्माण किया है।
    बेहतर गुणवत्ता के आवासों के तेजी से निर्माण के लिए लाभार्थियों के खातों में प्रत्यक्ष हस्तांतरण के जरिए आईटी-डीबीटी के जरिए सहायता राशि मुहैया कराई गई है। बेहतर गुणवत्ता के घरों के निर्माण के लिए ग्रामीण मजदूरों और मिस्त्रियों को प्रशिक्षण दिया गया है। अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी और सूचना प्रौद्योगिकी के जरिए घरों के निर्माण की पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जा रही है। 
    लाभार्थियों के मकानों के निर्माण कार्य के विभिन्न चरणों पर नजर रखी जा रही है। राज्यों ने निर्माण सामग्री को रियायती दामों पर उपलब्ध कराने के लिए कई कदम उठाए हैं, ताकि आवासों का निर्माण कार्य और उसकी गुणवत्ता प्रभावित न हों। 
    इन आवासों में शौचालय, एलपीजी कनेक्शन और पीने के पानी की सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। कुछ राज्यों में इस योजना के तहत कलस्टर और कॉलोनियां भी बनाई गई हैं, जिससे आमतौर पर भूमिहीन लाभार्थी लाभांवित होंगे। इन आवासों का निर्माण दिल्ली के यूएनडीपी-आईआईटी ने किया है और संबंधित राज्यों के लाभार्थियों को यह सुविधा दी गई है कि वे अपनी पसंद के अनुरूप आवासों का डिजाइन चुन सकें।

Tuesday, 28 November 2017

शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार, इसमें दुनिया को बदलने की ताकत

     आंध्रप्रदेश। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा है कि शिक्षा सबसे ताकतवर हथियार है इसमें दुनिया को बदलने की क्षमता है। वे आज अमरावती में वैल्लोर तकनीकी संस्थान के आंध्रप्रदेश परिसर के उद्घाटन के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे। 

   इस अवसर पर आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्री डॉ. कामिनेनी श्रीनिवास और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। 
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान विद्या के मंदिर हैं और जो भी यहां प्रवेश करता है उसे गुरुओं के आदर के साथ-साथ समूची शिक्षा प्रक्रिया के प्रति समर्पण और अनुशासन का भाव रखना चाहिए। 
     उन्होंने कहा कि हमारी प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा में अध्यापक का सर्वाधिक पूज्यनीय स्थान है। नायडू ने कहा कि आज भले ही छात्र गूगल पर एक क्लिक से सारी जानकारी हासिल कर सकते हों लेकिन गुरू का स्थान गूगल कभी नहीं ले सकता। 
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनका दृढ़ विश्वास है कि शिक्षा मुक्ति, ज्ञान, सशक्तिकरण, रोजगार और सहानुभूति के लिए होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक बदलाव का शाक्तिशाली वाहक बनना चाहिए।
     नायडू ने कहा कि तकनीक तेजी से बदली रही है। उन्‍होंने कहा कि छात्रों को सिर्फ भविष्‍य से ही उम्‍मीद रखने की आवश्‍यकता नहीं है बल्कि उन्‍हें भविष्‍य के लिए तकनीक विकसित करने की भी जरूरत है। उप राष्‍ट्रपति ने कहा भारत की 65 फीसदी आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है जो कि देश के लिए लाभ की स्थिति है। उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों और विश्‍वविद्यालयों को उनकी ऊर्जा को सही दिशा देने का कार्य करना चाहिए।
    उप राष्‍ट्रपति ने कहा वीआईटी का अर्थ भले ही वैल्‍लोर इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी हो लेकिन उन्‍हें आशा है कि वीआईटी का आंध्र प्रदेश कैंपस अपने यहां प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए वी से विजन, आई से इनोवेशन, टी से ट्रांसफॉरमेशन साबित होगा।

सैन्य कर्मियों की तलाकशुदा बेटियों को भी परिवारिक पेंशन

     नई दिल्ली। सैन्य कर्मियों की तलाकशुदा बेटियों को भी परिवारिक पेंशन की सुविधा मिलेगी, वैसी स्थिति में भी जब तलाक की अर्जी माता-पिता के जीवनकाल में ही दाखिल की गई हो।
 
   सितंबर 2015 में जारी रक्षा मंत्रालय के एक पत्र के अनुसार, वर्तमान में केवल उन्ही बच्चों को परिवारिक-पेंशन का पात्र माना जाता है जो माता-पिता पर आश्रित हैं और सरकारी कर्मचारी या उसकी पत्नी/पति के मृत्यु के समय अन्य शर्ते को पूरा करते हैं।
    इसी संदर्भ में, तलाकशुदा बेटियाँ परिवारिक-पेंशन के योग्य हैं जो अन्य शर्ते पूरा करती हों यदि सक्षम न्यायालय ने उनके माता व पिता में से किसी एक के जीवन काल में तलाक का निर्णय दिया हो। सरकार को शिकायतें मिली है कि तलाक प्राप्त करने की कार्यवाही एक लम्बी प्रक्रिया है जिसके पूरे होने में कई वर्ष लग जाते हैं। 
   ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें सरकारी कर्मचारी/पेंशन भोगी की बेटी ने माता-पिता दोनों के या किसी एक के जीवित रहते ही तलाक की अर्जी सक्षम न्यायालय में दाखिल की थी लेकिन तलाक के अंतिम आदेश आने तक दोनों में से कोई भी जीवित नहीं था। 
     मामले की जाँच की गई और रक्षा मंत्रालय के पत्र दिनांक 17 नवंबर, 2017 के माध्यम से यह निर्णय लिया गया है कि सैन्य कर्मियों की उन बेटियों को, वैसे मामलों में पारिवारिक पेंशन की सुविधा दी जानी चाहिए जिसमें बेटियों ने सक्षम न्यायालय में माता-पिता के या दोनों में से किसी एक के जीवनकाल में या अपने पति/पत्नी के जीवित रहते ही तलाक की अर्जी दायर कर दी हो और तलाक का अंतिम आदेश उनकी मृत्यु के पश्चात् आया हो, बशर्ते कि दावेदार पारिवारिक पेंशन पाने के अन्य सभी शर्तों को पूरा करता हो। ऐसे मामलों में पारिवारिक पेंशन, तलाक का आदेश मिलने के दिन से लागू माना जाएगा।

Monday, 27 November 2017

नशीली दवाओं द्वारा उत्पन्न खतरे का मुकाबला करने के लिए समझौता

    मास्को/नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह तीन दिवसीय यात्रा के दौरान मास्को रूस पहुंचे। नुकोवो अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे मास्को में उनका स्वागत स्टेट सेक्रेट्री एवं रूसी संघ के आंतरिक मामलों के उपमंत्री आगोर जुबोव ने किया। 

    राजनाथ सिंह ने रूसी संघ के आंतरिक मामलों के मंत्री ब्लादीमीर क्लोबोकोत्सेव से मुलाकात की जिस दौरान दोनों मंत्रियों ने भारत और रूस के बीच संबंधों की मजबूती पर जोर दिया जो पिछले 70 वर्षों के दौरान सभी क्षेत्रों में लगातार मजबूत होता गया है। 
     मंत्री ने रेखांकित किया कि सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग इस द्विपक्षीय संबंध का एक महत्वपूर्ण पहलू है जो आतंकवाद, उग्रवाद एवं चरमवाद का मुकाबला करने के लिए आपसी सहयोग को और मजबूत बनाएगा। 
     उन्होंने नई चुनौतियों का सामना करने, सूचना के आदान-प्रदान में बढ़ोतरी करने, डाटाबेस के निर्माण में सहयोग करने एवं पुलिस तथा खोजी एजेंसियों के प्रशिक्षण में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि 2018 में भारत और रूस के बीच आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए अगले संयुक्त कार्य समूह की बैठक का आयोजन किया जाए। दोनों मंत्रियों द्वारा भारत के गृह मामले मंत्रालय तथा रूसी संघ के इंटीरियर मंत्रालय के बीच सुरक्षा पर सहयोग पर एक अद्यतन एवं अधिक व्यापक समझौते पर हस्ताक्षर किया गया।
    यह समझौता सूचना प्रौद्योगिकी अपराधों, नकली करेंसी, नशीली दवाओं तथा मादक पदार्थों की अवैध तस्करी, मानवों की तस्करी, आर्थिक अपराध, बौधिक संपदा से संबंधित अपराध, सांस्कृतिक संपदा अपराध समेत सुरक्षा संबंधी मुद्दों में सहयोग के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण सुलभ कराता है। इस अवसर पर भारत के गृह मंत्रालय के मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो एवं रूसी संघ के इंटीरियर मंत्रालय के बीच 2018-20 की अवधि के लिए एक संयुक्त कार्य योजना पर भी रूसी संघ में भारत के राजदूत पंकज सरन एवं स्टेट सेक्रेट्री एवं रूसी संघ के आंतरिक मामलों के उपमंत्री आगोर जुबोव द्वारा हस्ताक्षर किया गया।
     अपनी यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह रूसी संघ के सुरक्षा परिषद के सचिव निकालाई पत्रुसेव, रूसी संघ के नागरिक रक्षा, आपातकालीन स्थिति तथा आपदा राहत मंत्री ब्लादीमीर पुचकोव एवं रूस की फेडरल सिक्यूरिटी सर्विस के निदेशक एलेक्जेंडर बोर्तनीकोव के साथ भी मुलाकात करेंगे। वह रूस के सिचुऐशंस मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय संकट प्रबंधन केंद्र (ईएमईआरसीओएम) की यात्रा भी करेंगे।

Sunday, 26 November 2017

विश्व में सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वाला देश बना भारत

     नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने राष्ट्रीय दुग्ध दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि भारत विश्व में उस पटल पर पहुँच गया है जहाँ दुग्ध व्यवसाय में वैश्विक स्तर पर उद्यमियों के लिए अनेक संभावनाएँ उभर कर सामने आ रही है।

   पिछले 15 वर्षों से भारत विश्व में सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वाला देश बना हुआ है। इस उपलब्धी का श्रेय दुधारू पशुओं की उत्पादकता बढाने हेतु भारत सरकार द्वारा प्रारम्भ की गई अनेक योजनाओं को जाता है विश्व में सर्वाधिक दूध उत्पादन करने वाला देश बन गया है।
    सिंह ने कहा कि 2013-14 में दूध उत्पादन करीब 137.7 मिलियन टन दूध का उत्पादन हुआ था, वह बढकर वर्ष 2016-17 में 163.6 मिलियन टन हो गया है। वर्ष 2013-14 की तुलना में 2016-17 की अवधि में दुग्ध उत्पादन में 18.81ऽ की वृद्धि हुई है।
   इसी तरह प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता वर्ष 2013-14 में 307 से बढ़कर वर्ष 2016-17 में 351 ग्राम हो गई है। वर्ष 2011-14 के बीच दूध उत्पादन की वार्षिक वृद्धि दर 4ऽ थी जोकि अब 2014-17 में 6ऽ हो गई है। जबकि विश्व में दूध उत्पादन की वार्षिक वृद्धि दर 2014-17 में 2ऽ रही। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि भूमिहीन एवं सीमांत किसानों के लिए डेयरी व्यवसाय उनके जीवनयापन एवं सुरक्षा चक्र प्रदान करने का जरिया बन गया है। 
    करीब 7 करोड ऐसे ग्रामीण किसान परिवार डेयरी व्यवसाय से जुडे हुए है जिनके पास कुल गायों की 80ऽ आबादी है। उन्होंने बताया कि कामकाज करने वाली महिलाओं का 70ऽ हिस्सा (करीब 44 लाख) डेयरी व्यवसाय में कार्य कर रहा है। इनमे से करीब 3 लाख 60 हजार महिलाएँ डेयरी सहकारी संस्थाओं का नेतृत्व कर रही है जबकि 380 महिलाएँ जिला दुग्ध संघों एवं राज्य दुग्ध फ़ेडरेशन के बोर्ड में प्रतिनिधित्व कर रही है। 
     सिंह ने कहा कि आज भारत में दूध की मांग घरेलु स्तर पर लोगों की खरीदने के क्षमता, तेजी से बढते शहरीकरण, खानपान की आदतें एवं रहने की शैली के कारण लगातार बढ रही है। दूध, जो अपनी अनेक विशेष फायदों के लिए जाना जाता है, हमारे अधिकतर शाकाहारी जनसंख्या के लिए पशु प्रोटीन का एकमात्र स्त्रोत है। साथ ही उपभोक्ताओं की रुचि धीरे धीरे अधिकप्रोटीन वाले उत्पादों की ओर बढ रही है एवं मूल्य वृर्द्धि उत्पादों का चलन भी बढने के कारण दूध की मांग तेजी से बढ रही है।
    गत 15 वर्षों में दुग्ध सहकारी संस्थाओं ने अपने कुल उपार्जित दूध के 20ऽ हिस्से को मूल्य वृर्द्धि दुग्ध पदार्थों मे परिवर्तित किया है जिससे तरल दूध की अपेक्षा 20ऽ अधिक आय होती है। ऐसी अपेक्षा है कि वर्ष 2021-22 तक 30ऽ दूध को मूल्य वृर्द्धि पदार्थों मे परिवर्तित किया जाएगा। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कहा कि विभिन्न कारणों से देश में दूध की मांग जो बढ रही है, उसे घरेलु उत्पादन से ही पूरा करने हेतु सरकार ने विभिन्न डेयरी विकास योजनाओं का क्रियांवयन किया है जिसमें विशेष ध्यान दुधारु पशुओं की उत्पादकता एवं उत्पादन बढाने पर जोर दिया जा रहा है।
     देश में पहली बार देशी नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु एक नई पहल राष्‍ट्रीय गौकुल मिशन की शुरुआत की गई जिसके अंतर्गत 18 गोकुल ग्राम विभिन्न 12 राज्यों मे स्थापित किए जा रहे हैं।
      साथ ही 2 अवार्ड ‘गोपाल रत्न अवार्ड’ - देशी नस्लों के सबसे अच्छे पशु का रखरखाव करने हेतु एवं ‘कामधेनु अवार्ड’ - संस्थाओं द्वारा सर्वोत्तम रूप से रखे जा रहे देशी नस्ल के पशु यूथ हेतु रखे गए है। इस वर्ष विश्‍व दुग्‍ध दिवस के अवसर पर 10 गोपाल रत्‍न अवार्ड एवं 12 कामधेनु अवार्ड दिए गए। देश में हमारी देशी नस्लों के संरक्षण हेतु दो "नेशनल कामधेनु ब्रीडिंग सेंटर" आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में स्थापित किए जा रहे है।
      इसके तहत 41 गोजातीय नस्लों और 13 भैंस की नस्लों को संरक्षित किया जाएगा। दुग्ध उत्पादन व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाने हेतु राष्ट्रीय बोवाइन उत्पादकता मिशन की शुरुआत की गई जिसके तहत ई पशु हाट पोर्टल स्थापित किया गया है। यह पोर्टल देशी नस्लों के लिए प्रजनकों और किसानों को जोड़ने मे एक महतवापूर्ण भूमिका निभा रहा है।
     सिंह ने कहा कि रू 10881 करोड़ की डेयरी प्रसंस्करण एवं अवसंरचना विकास कोष (डीआईडीएफ) योजना का क्रियान्वयान किया जा रहा है जिसके अंतर्गत अतिरिक्त दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता तथा बल्क मिल्क कूलर के माध्यम से दुग्ध अवशीतन क्षमता का सृजन किया जाएगा। साथ ही इलेक्ट्रानिक दुग्ध मिलावट परिक्षण उपकरण एवं दूध को मूल्य वर्धित दुग्ध पदार्थों में परिवर्तित करने की क्षमता का भी प्रावधान रखा गया है।
     केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने हेतु हमारी कार्यप्रणाली में धीरे धीरे आधुनिक तकनीक सहित वातावरण का समावेश करने हेतु एक राष्ट्रीय कार्य योजना विजन 2022 की रचना कर रहे हैं, जिसमे संगठित क्षेत्र द्वारा गाँवो एवं दुग्ध उत्पादकों की संख्या के साथ साथ दुग्ध उत्पादन में लगातार बढोतरी को मद्देनजर रखते हुए दुग्ध प्रसंस्करण एव मूल्य वर्धित दुग्ध पदार्थों की मांग को पूर्ण करने हेतु अतिरिक्त अवसंरचना के लिए समुचित वित्तिय प्रावधान रखे गए है। इस योजना का मुख्य लक्ष्य दुग्ध उत्पादकों की आय को दोगुना करने का है।

Monday, 20 November 2017

सोलर पार्क परियोजना के लिए 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ऋण समझौता

    नई दिल्‍ली। सोलर पार्क परियोजना के लिए साझा बुनियादी ढांचा’ हेतु 98 मिलियन अमेरिकी डॉलर के आईबीआरडी/सीटीएफ ऋण के लिए एक गारंटी समझौते और 2 मिलियन अमेरिकी डॉलर के लिए अनुदान समझौते पर यहां विश्‍व बैंक के साथ हस्‍ताक्षर किए गए।

   इन समझौतों पर भारत सरकार की ओर से आर्थिक मामलों के विभाग में संयुक्‍त सचिव (एमआई) समीर कुमार खरे और विश्व बैंक की ओर से विश्व बैंक भारत के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्‍टर हिशाम ए.अब्‍दो ने हस्‍ताक्षर किये। 
   एक अन्‍य ऋण समझौते पर भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी लिमिटेड (इरेडा) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक श्री के.एस. पोपली और विश्व बैंक की ओर से विश्व बैंक भारत के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्‍टर हिशाम ए.अब्‍दो ने दस्‍तखत किये। 
     इस परियोजना में ये दो घटक हैं, सोलर पार्कों के लिए साझा बुनियादी ढांचा (75 मिलियन अमेरिकी डॉलर के आईबीआरडी ऋण और 23 मिलियन अमेरिकी डॉलर के सीटीएफ ऋण सहित 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर की अनुमानित कुल परियोजना लागत) और तकनीकी सहायता (सीटीएफ अनुदान के रूप में 2 मिलियन अमेरिकी डॉलर)।
     इस परियोजना का उद्देश्‍य देश में बड़े पार्कों की स्‍थापना के जरिये सौर ऊर्जा उत्‍पादन क्षमता में बढ़ोतरी करना है। इस परियोजना से बड़े सोलर पार्कों की स्‍थापना में मदद मिलेगी और इसके साथ ही वर्ष 2022 तक 175 गीगावाट के कुल नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्‍य में से 100 गीगावाट सौर ऊर्जा की क्षमता स्थापित करने संबंधी सरकारी योजना को आवश्‍यक सहयोग भी मिल सकेगा।

एक करोड़ नये मकानों का निर्माण मार्च 2019 तक पूरा करने का लक्ष्‍य

      नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री ने एक साल पहले 20 नवंबर, 2016 को आगरा से ‘प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)’ का शुभारंभ किया था। 

    लाभार्थियों के पंजीकरण, भू-टैगिंग और खाता सत्‍यापन के बाद एक करोड़ नये मकानों का निर्माण कार्य 31 मार्च, 2019 तक पूरा करने का लक्ष्‍य रखा गया था। इनमें से 51 लाख मकानों का निर्माण कार्य 31 मार्च, 2018 तक पूरा करने का लक्ष्‍य रखा गया था। 
     इस योजना के शुभारंभ के बाद लाभार्थियों के पंजीकरण, भू-टैगिंग, खाता सत्‍यापन, इत्‍यादि की प्रक्रिया पूरी करने में कुछ महीने लग गये। 55.85 लाख मकानों को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। इस दिशा में कार्य प्रगति पर है। इनमें से लगभग 30 लाख मकानों का निर्माण कार्य छत तक पूरा हो चुका है, जबकि 15 लाख मकानों का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में है। 20 नवम्‍बर, 2017 तक 9.03 लाख मकानों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। 
      यह उम्‍मीद की जा रही है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 10 लाख मकानों का निर्माण कार्य 30 नवम्‍बर 2017 तक, 15 लाख मकानों का निर्माण कार्य 31 दिसम्‍बर 2017 तक, 25 लाख मकानों का निर्माण कार्य 31 जनवरी 2018 तक, 35 लाख मकानों का निर्माण कार्य 28 फरवरी 2018 तक और 51 लाख मकानों का निर्माण कार्य 31 मार्च 2018 तक पूरा हो जाएगा। छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्‍यों में बड़ी संख्‍या में मकानों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। 
     नये डिजाइनों, स्‍थानीय भवन निर्माण सामग्री, ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत राजमिस्त्रियों के प्रशिक्षण, परिसम्‍पत्तियों की भू-टैगिंग और आईटी-डीबीटी प्‍लेटफॉर्म के जरिये लाभार्थियों के खातों में भुगतान सीधे भेजने से पारदर्शितापूर्ण, बाधामुक्‍त और गुणवत्‍तापूर्ण कार्यक्रम क्रियान्‍वयन सुनिश्चित हुआ है। सभी राज्‍य और केन्‍द्र शासित प्रदेश संबंधित लाभार्थियों की सहूलियत के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं, ताकि उनके मकानों का निर्माण कार्य समय पर पूरा हो सके।
    सामाजिक-आर्थिक जनगणना (एसईसीसी 2011) के उपयोग, ग्राम सभा द्वारा सत्‍यापन और भू-टैगिंग के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से इसमें न्‍यूनतम समावेशी त्रुटियां सुनिश्चित हुई हैं। इस गरीब हितैषी कार्यक्रम के तहत केवल वही लोग लाभार्थी हैं, जो बेघर हैं अथवा कच्‍ची छत एवं एक कमरे वाले कच्‍चे घरों में या कच्‍ची छत एवं दो कमरों वाले कच्‍चे घरों में रहते हैं। गरीबों को सशक्‍त करने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्‍तेमाल किया गया है। सामान्‍य मौजूदा स्‍थानीय डिजाइनों का अध्‍ययन करने के बाद सर्वश्रेष्‍ठ संस्‍थानों द्वारा इन घरों के डिजाइन तैयार किये गये हैं।
     इन मकानों का निर्माण लाभार्थियों द्वारा अपनी जरूरतों के अनुसार किया जाता है। इन मकानों से न केवल ग्रामीण परिदृश्‍य बदल रहा है, बल्कि देश भर के गांवों में सामाजिक बदलाव भी सुनिश्चित हो रहा है। गरीबों को सुरक्षित घर मिल रहे हैं। अब वे शौचालय, एलपीजी कनेक्‍शन, बिजली कनेक्‍शन, पेयजल सुविधा इत्‍यादि के साथ सम्‍मान से जीवन यापन कर सकते हैं।
    प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत गवर्नेंस संबंधी सुधारों और विकास पर इस्‍पात एवं सीमेंट की बढ़ती मांग के असर का अध्‍ययन नई दिल्‍ली स्थित राष्‍ट्रीय सार्वजनिक वित्‍त एवं नीति संस्‍थान द्वारा किया जा रहा है।
     सामाजिक बदलाव पर अलग से अध्‍ययन कराया जा रहा है, ताकि एक ‘बढ़िया आवास’ कार्यक्रम के असर को सही ढंग से समझा जा सके। कोई भी व्‍यक्ति प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की प्रगति के बारे में जानकारी प्राप्‍त कर सकता है, जिस पर भू-टैग की गई फोटो और लाभार्थियों के साथ-साथ उन्हें किये गये भुगतान का पूर्ण ब्‍यौरा उपलब्‍ध है।

Sunday, 19 November 2017

पुस्तक सोशल एक्सक्लूजन एण्ड जस्टिस इन इंडिया का विमोचन

   नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि हम एक विकसित भारत का निर्माण नही कर सकते यदि समाज में जाति, पंथ, धर्म और लिंग पर आधारित असमानताएं विद्यमान हैं।

  श्री पी.एस.कृष्णन द्वारा लिखित पुस्तक ‘सोशल एक्सक्लूजन एण्ड जस्टिस इन इंडिया’ का विमोचन करने के बाद उपराष्ट्रपति उपस्थित जनसमुदाय को यहां संबोधित कर रहे थे। केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री थावर चन्द गहलोत व अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे। 
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले सात दशकों से लेखक समाज के वंचित वर्गों की समस्याओं का अध्ययन कर रहे है। इन्होंने भारतीय समाज में भेदभाव को नजदीक से अनुभव किया है।
   पुस्तक इस तथ्य का साक्ष्य है कि उन्हे वंचित वर्गों, दलितों आदिवासियो और सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गो के मामलों की गहरी जानकारी है। लेखक को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में रहने वाले पिछड़े सामाजिक वर्गों की कठिनाईयों का लम्बा अनुभव है और वे इनके निदान के लिए व्यवहारिक और प्रभावी तरीके भी सामने रखते हैं।
     उपराष्ट्रपति ने कहा कि लेखक ने गांधीजी और डॉ. अम्बेडकर के बीच संवादों का पता लगाया है। पुस्तक में इस बात का वर्णन है कि भारतीय संविधान के अंतिम प्रारूप में इन दोनों व्यक्तियों के पृथक विचारों का किस प्रकार समायोजन किया गया है। 
    पुस्तक संविधान के प्रावधानों का गंभीरता से वर्णन करती है कि किस प्रकार प्रावधानों को अधिनियमों में परिवर्तित किया गया है। उन्होंने कहा कि दलितों, आदिवासी और पिछड़े वर्गों को सशक्त बनाने के पश्चात ही हमारा देश प्रगति के पथ पर अग्रसर हो सकेगा।

कोचीन वैश्विक जहाज मरम्मत का केन्द्र

      कोचीन। केंद्रीय जहाजरानी, सड़क परिवहन व राजमार्ग तथा जल संसाधन एवं नदी विकास तथा गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि कोचीन, वैश्विक जहाज मरम्मत का केन्द्र बनने के लिए तैयार है।

    कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड की 970 करोड रूपये की लागत से निर्मित होने वाली अंतर्राष्ट्रीय जहाज मरम्मत सुविधा की आधारशिला रखने के बाद वे आज कोचीन में इस अवसर पर उपस्थित जन-समुदाय को संबोधित कर रहे थे। 
  यह सुविधा कोचीन पोर्ट ट्रस्ट में निर्मित की जा रही है, जहां सीएसएल ने 40 एकड़ भूमि पट्टे पर दी है। अंतर्राष्ट्रीय जहाज मरम्मत सुविधा केंद्र आधुनिकतम तकनीक से सुसज्जित होगा, जो छोटे और मध्यम आकार के जहाजों की अधिकांश संख्या को परिचालित करने में सक्षम होगा।
      सीएसएल 130 मीटर न् 25 मीटर की आकार वाले एक लिफ्ट प्रणाली का निर्माण करेगा, जो 6 हजार टन की भार क्षमता को उठाने में सक्षम होगा। इसमें 6 कार्य-स्टेशन होंगे। यह सुविधा 85 जहाजों को मरम्मत कर पाएगी और इस प्रकार सीएसएल अपनी मरम्मत क्षमता को दो गुना कर लेगा।
      अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाज मरम्मत बाजार में भारत के हिस्से को बढ़ाने के महत्व को रेखांकित करते हुए गडकरी ने कहा कि इस उद्योग से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 6 हजार नौकरियों का सृजन होगा। इसके अतिरिक्त राज्य में कई अनुषांगिक इकाईयों की स्थापना होगी। इससे रोजगार और अर्थव्यवस्था में गुणात्मक बदलाव होगा।
        गडकरी ने कोचीन में जहाज मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘बिल्ड द शिप-2017’ सम्मेलन का उद्घाटन किया। यह सम्मेलन जहाज निर्माण, जहाज डिजाइन, जहाज मरम्मत और समुद्री सहायक उद्यमों के विकास के लिए किए गए एक अध्ययन की अनुसंशाओं पर आधारित है। इस सम्मेलन में मंत्री ने समुद्री और जहाज निर्माण के क्षेत्र में कौशल विकास के लिए एक उत्कृष्टता केन्द्र (सेंटर फॉर एक्सेलेंस इन मेरीटाइम एण्ड शिप बिल्डिंग) के स्थापना की घोषणा की। 
    सीईएमएस के मुम्बई और विशाखापट्टनम में परिसर होंगे। इसे सीमेंस के सहयोग से जहाजरानी मंत्रालय सागरमाला कार्यक्रम के तहत निर्मित कर रहा है। सीईएमएस पोर्ट और समुद्री क्षेत्र में छात्रों की इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षमता का विकास करेगा। इस सुविधाओं से जहाजों के निर्माण, डिजाइन, परिचालन और प्रबंधन के क्षेत्र में घरेलू जरूरतों की मांग भी पूरी की जा सकेगी। 
     यह संस्थान दक्षिण एशिया में एक अंतरराष्ट्रीय नोडल केंद्र बनना चाहता है, जहां श्रीलंका, बांग्लादेश, थाईलैंड, मलेशिया जैसे देशों के छात्रों को आकर्षित किया जा सके। पोर्ट और समुद्री क्षेत्र में कौशल विकास के लिए इंडोनेशिया यह पहल समुद्री क्षेत्र में मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया के प्रयासों को भी जोड़ देगा। आज कोचीन के लॉन्च समारोह में श्री गडकरी ने सीईएमएस के लोगो का भी अनावरण किया।
     कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड सीएसएल और एचडीपीईएल-हुगली का एक संयुक्त उद्यम है। एचसीएल में सीएसएल और एचडीपीईएल की हिस्सेदारी क्रमशः 74 प्रतिशत और 26 प्रतिशत है। सम्मेलन के दौरान सीएसएल और एचडीपीईएल के बीच एक समझौता हुआ। 
    इसके तहत सीएसएल कोलकाता में एचडीपीईएल की निर्माण सुविधाओं का अधिग्रहण कर लेगा। इस प्रकार सीएसएल कोलकाता की समुद्री विरासत को पुनर्जीवित करेगा और मजबूती प्रदान करेगा। गडकरी ने आज मन्नार का दौरा किया, जहां उन्होंने बोडेमट्टू से मन्नार तक एनएच 85 के नवीनीकरण की आधारशिला रखी। 42 किलोमीटर लम्बी इस परियोजना की अनुमानित लागत 380.76 करोड़ रुपये है।

भाषाओं को ज्ञान का सेतु बनने में सहायता करनी चाहिए

     हैदराबाद। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि भाषा सुशासन में सहायता कर सकती है क्योंकि सूचना और ज्ञान मिलकर एक प्रबुद्ध नागरिक का निर्माण कर सकते हैं। 

  नायडू आज हैदराबाद में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के 16वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।
   इस अवसर पर तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मोहम्मद महमूद अली, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, चेन्नई के उपाध्यक्ष, एच हनुमंतप्पा, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के अध्यक्ष, बी ओबिया और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। 
     इस अवसर पर, उपराष्ट्रपति ने कहा कि हिंदी ने भारत की एकता, अखंडता और भाषाई सद्भावना के विकास में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि देश के एकीकरण के लिए अधिकांश भारतीयों द्वारा बोली जाने वाली भाषा से अधिक शक्तिशाली घटक कोई नहीं है।
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 1936 में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा का कार्यालय विजयवाड़ा में स्थापित किया गया था। इस सभा के अध्यक्षों के रूप में, कोंडा वेंकापापैया पंतलु, आंध्र केसरी तुंगतुरी प्रकाश पंटुलु, बेजवाड़ा गोपालरेड्डी, स्वामी रामानंद तीर्थ ने शानदार कार्य किया। 
     उन्होंने कहा यह जानकर बेहद हर्ष हो रहा है कि हिंदी प्रचार सभा ने सिर्फ हिंदी का प्रचार-प्रसार ही नहीं किया बल्कि बड़ी संख्या में हिंदी अध्यापकों, अनुवादकों एवं प्रचारकों को तैयार किया है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, आंध्र एवं तेलंगाना आज अपना 16वाँ दीक्षांत समारोह मना रही है।
     उन्होंने गाँधी जी की पंक्तियाँ को भी याद किया जिसमें उन्होंने कहा था कि कोई भी देश सच्चे अर्थों में तब तक स्वतंत्र नहीं है, तब तक वह अपनी भाषा में नहीं बोलता है। उपराष्ट्रपति ने हिंदी में राष्ट्रभाषा विशारद और राष्ट्रभाषा प्रवीण की डिग्री प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई दी।

Friday, 17 November 2017

स्वतन्त्रता के मूलभूत मूल्यों का अनुसरण करना चाहिए

    नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया ने कहा कि वर्तमान में पत्रकारों को सटीकता, निष्पक्षता, वस्तुपरकता, समाचार के महत्व एवं स्वतन्त्रता के मूलभूत मूल्यों का अनुसरण करना चाहिए।

   वह यहां राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर भारतीय प्रेस परिषद के समारोह के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। 
  इस अवसर पर केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा कपड़ा मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
  उपराष्ट्रपति ने कहा कि जब अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता की लड़ाई में गति आई तो प्रेस लोगों की आकांक्षाओं और उनकी उम्मीदों को स्वर देने का एक महत्वपूर्ण वाहक बन गया। 
     उन्होंने यह भी कहा कि कई समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं, विशेष रूप से भाषायी समाचार पत्रों ने स्वतंत्रता आन्दोलन में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि पत्रकारिता एक महान व्यवसाय है और आप सभी लोग इस व्यवसाय के ध्वजावाहक हैं जिन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लोगों को सही और निष्पक्ष जानकारी मिले।

टीबी ग्रसित लोगों की संख्या 28.2 लाख से घटकर अब 27 लाख

   नई दिल्ली। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने संशोधित राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम (आरएनटीसीपी) के अन्तर्गत हाल में पूरे देश में तपेदिक रोग पीडितों के लिए दवा की दैनिक खुराक व्यवस्था लागू करने की घोषणा की है। 

   मंत्रालय ने पहले तपेदिक बीमारी के इलाज के लिए दवा की खुराक सप्ताह में तीन बार लेने को कहा था लेकिन अब टीबी रोगियों के लिए इलाज में बदलाव करने का निर्णय लिया गया है और इलाज के लिए मिश्रित दवाओं की तय खुराक का इस्तेमाल करते हुए सप्ताह में तीन बार के स्थान पर दैनिक खुराक की व्यवस्था की गई है।
    इस परिवर्तन से तपेदिक बीमारी से लडने के दृष्टिकोण में बदलाव आयेगा। तपेदिक के कारण प्रत्येक वर्ष 4.2 लाख लोग मर जाते हैं। तपेदिक रोधी दैनिक मिश्रित दवा खुराक निजी फार्मेसी और प्राइवेट प्रेक्टिस करने वाले डाक्टरों को उपल्बध करवाई जाएगी ताकि दवाओं की खुराक उन रोगियों को दी जा सके जो निजी क्षेत्र में अपनी सुविधा अनुसार इलाज करा रहे हैं।
    स्वास्थ्य मंत्रालय टीबी के सभी मरीजों तक मिश्रित दवाओं की तय खुराक दैनिक रूप से उपलब्ध कराने के लिए इसका विस्तार सभी बड़े अस्पतालों, आईएमए, आईएपी, तथा पेशेवर चिकित्सा संगठनों तक करेगा। इलाज के इस तरीके की विशेषता यह है कि सभी रोगियों को निरंतर चरणों में इथैन ब्यूटॉल दिया जाएगा।
   दवायें रोजाना दी जाएंगी। दवायें पहले सप्ताह में तीन बार दी जाती थी। मिश्रित दवाओं की तय खुराक से मरीजों को कम गोलियां खानी पडेंगी उन्हें पहले सात अलग-अलग टैबलेट खाने पडते थे। बच्चों के लिए घुलनशील टैबलेट होंगे।
     विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2017 में कहा गया है कि टीबी ग्रसित लोगों की संख्या 28.2 लाख से घटकर 27 लाख हो गई है और पिछले एक वर्ष में मृत्यु में 60 हजार की कमी आयी है। भारत सरकार का टीबी रोधी अभियान की पुष्टि है।

महिला मुद्दों पर ध्‍यान देना आवश्‍यक

      नई दिल्ली। उपराष्‍ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि देश में महिलाओं के मुद्दों पर ध्‍यान देना आवश्‍यक है। 

    उन्‍होंने आज यहां भारतीय विधि आयोग के पूर्व संयुक्‍त सचिव तथा ‘जर्नी ऑफ वीमेन लॉ रिफॉर्म्‍स एंड दी लॉ कमीशन ऑफ इंडिया’ नामक पुस्‍तक के लेखक डॉ पवन शर्मा द्वारा उक्‍त पुस्‍तक की प्रति प्राप्‍त करते हुए यह कहा।
    उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि लेखक ने अपनी पुस्‍तक में शानदार विशलेषण किया है। उन्‍होंने कहा कि इस तरह के अध्‍ययनों से वैवाहिक कानून, संपत्ति कानून, विरासत के कानून, उत्‍तराधिकार सहित अप्रवासी भारतीयों के विवा‍ह तथा यौन हिंसा जैसे मुद्दों पर ध्‍यान देने में विशेष सहायता मिलेगी। 
     उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि इस पुस्‍तक से आने वाले वर्षों में महिला मुद्दों पर ध्‍यान देने के लिए लोगों को प्ररेणा मिलेगी।

Thursday, 16 November 2017

भारत और पोलैंड के बीच नागरिक उड्डयन सहयोग

      नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने नागरिक उड्डयन सहयोग के प्रोत्‍साहन के लिए भारत और पोलैंड के बीच एमओयू पर हस्‍ताक्षर करने के लिए अपनी मंजूरी दी दी है।

     इस एमओयू पर दोनों देशों की सरकारों द्वारा उनकी मंजूरी के पश्‍चात दोनों देश हस्‍ताक्षर करेंगे। इस एमओयू की अवधि पांच वर्ष की होगी। इस एमओयू का उद्देश्‍य भारत में क्षेत्रीय हवाई संपर्क स्‍थापित करने और सुधार करने में विशिष्‍ट महत्‍व वाले नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में सहयोग के आपसी लाभ की पहचान करना है। 
   इसके अलावा दोनों पक्ष पर्यावरण जांच या अनुमोदनों, फ्लाइट सीम्‍युलेटरों मॉनिटरिंग और अनुमोदन, हवाई जहाज अनुरक्षण सुविधा अनुमोदन, कार्मिक अनुरक्षण अनुमोदन और हवाई दल सदस्‍य और अनुमोदन के आपसी लाभों की भी पहचान करेगा।
     भारत और पोलैंड के बीच में सहयोग को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकने वाले किसी भी कानूनी और प्रक्रियागत मामले की समीक्षा करके नागरिक उड्डयन बाजार को सहायता करना। हवाई यातायात की रक्षा और सुरक्षा को बढ़ाने के लिए उड्डयन विनियमों, क्षेत्रीय हवाई संचालन, उड़ान योग्‍यता जरूरतें और सुरक्षा मानकों से संबंधित मंत्रालयों और संबंधित नागरिक उड्डयन प्राधिकरणों के बीच सूचना और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान करना।
    संगठन या उड्डयन सुरक्षा पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन, सुरक्षा निरीक्षण, उड़ान योग्‍यता, लाइसेंसिंग, वैधानीकरण और प्रवर्तन जैसे विषयों पर सहयोग या संयुक्‍त विकास। उड्डयन संबंधित परामर्श, सिविल एविएशन के क्षेत्र से संबंधित पक्षों के प्रतिनिधियों की भागीदारी के सहयोग के साथ उड्डयन सुरक्षा जैसे कार्यकलापों पर सम्‍मेलनों और व्‍यावसायिक संगोष्ठियों, परिचर्चाओं का संयुक्‍त आयोजन या संचालन।
      दोनों देशों के आपसी हितों के विकास से संबंधित मंत्रालयों और नागरिक उड्डयन सुरक्षा के बीच सूचना और ज्ञान के आदान-प्रदान, विशेषज्ञता और अनुभवों के आदान-प्रदान के लिए नियमित संवाद या बैठकों का आयोजन। आपसी हितों के उड्डयन सुरक्षा से संबंधित विषयों और मुद्दों पर अनुसंधान और अध्‍ययन का सहयोग। उपर्युक्‍त क्षेत्रों में सहयोग से संबंधित अन्‍य मामले।

वायुसेना के 223 स्क्वाड्रन, 117 हैलिकॉप्टर इकाई को स्टैंडर्ड

     पंजाब। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने पंजाब के अदमपुर स्थित एयरफोर्स स्टेशन में भारतीय वायुसेना के 223 स्क्वाड्रन और 117 हैलिकॉप्टर इकाई को स्टैंडर्ड प्रदान किए। राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी यह पहली पंजाब यात्रा है।
  इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि देश को भारतीय सेना का और सेना को पंजाब का योगदान असाधारण है। सशस्त्र सेनाओं के सुप्रीम कमांडर के रूप में वे पंजाब आकर तथा भारतीय वायुसेना के 223 स्क्वाड्रन और 117 हैलिकॉप्टर इकाई को स्टैंडर्ड प्रदान करके प्रसन्न है।
   उन्होंने कहा कि दोनों इकाइयों का इतिहास पेशेवर उत्कृष्टता का है। राष्ट्र उन्हें प्रतिकूल परिस्थितियों में समर्पण और साहस के लिए कृतज्ञता और प्रशंसा के साथ सम्मान देता है। 
      राष्ट्रपति ने कहा कि विश्व पटल पर भारत के उदय के अनेक आयाम है परन्तु यह प्रमुख रूप से हमारे सशस्त्र सेनाओं है। यद्यपि हम शांति के लिए प्रतिबद्ध है तथापि हम पूरी ताकत से अपने राष्ट्र की संप्रभुता की रक्षा के लिए दृढ़संकल्प हैं। जब भी जरूरत पड़ी है हमारी सेना के जवानों ने बहादुरी से मुकाबला किया है। देश का प्रत्येक नागरिक चैन की नींद सोता है क्योंकि वह जानता है कि सशस्त्र सेनाएं उसकी रक्षा के लिए मौजूद हैं।
      राष्ट्रपति ने 223 स्क्वाड्रन और 117 हैलिकॉप्टर इकाई के सैन्यकर्मियों, अवकाशप्राप्त सैन्यकर्मियों और उनके परिजनों की राष्ट्र के प्रति समर्पण के लिए प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत को उन पर गर्व है। राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद यह मेरी पहली पंजाब यात्रा है। मैं इतनी समृद्ध विरासत वाले राज्म में आकर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। यह सैनिकों, संतों और धर्म गुरूओं की भूमि है। मैं नवम्बर के महीने में यहां आकर खास तौर से खुद को भाग्यशाली मान रहा हूं, क्‍योंकि इसी महीने में गुरू नानक देव जी का जन्मदिन और गुरू तेग बहादुर जी का शहीदी दिवस होता है। मैं पंजाब के इन महान राष्ट्र निर्माताओं को नमन करता हूं। 
     राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी सशस्त्र सेना में पंजाब का, और हमारे देश में हमारी सशस्त्र सेना का योगदान असाधारण है। यही कारण है, मुझे इस बात की खुशी है कि सशस्त्र सेना के सर्वोच्च कमांडर की भूमिका में मुझे पंजाब की पहली यात्रा के दौरान भारतीय वायु सेना के 223 स्क्वाड्रन और 117 हेलीकॉप्टर यूनिट को स्ट्रेंडर्ड प्रदान करने के लिए आदमपुर वायु सेना स्टेशन आने का अवसर मिला है।
       राष्ट्रपति ने कहा कि वायु सेना स्टेशन आदमपुर हमारी वायु सेना के सबसे पुराने और सर्वश्रेष्ठ वायु सैनिक अड्डों में से एक है। यह एक छोटी एयर स्ट्रिप से विकसित होकर पूरी तरह संचालित वायु सैनिक अड्डे में परिवर्तित हुआ है जहां अनेक तरह की हथियार प्रणालियां है। वायु सैनिक अड्डा अपने अस्तित्व में आने के बाद से कार्य कर रहा है। 1947, 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान वायु सेना ने बहादुरी का परिचय दिया।
      राष्ट्रपति ने कहा कि आज सम्मानित दोनों यूनिटों का पेशेवर उत्कृष्टता का इतिहास है। देश प्रतिकूल परिस्थितियों में समर्पण और साहस के लिए उनके प्रति आभार प्रकट करता है और उनकी सराहना करता है। मैं वायु सैनिकों को बधाई देता हूं।
      राष्ट्रपति ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में भारत के उदय के अनेक पहलू हैं लेकिन यह हमारी वायु सेना की क्षमताओं और बहादुरी के कारण हैं। हांलाकि हम शांति के प्रति प्रतिबद्ध हैं, हम अपने राष्ट्र की प्रभुसत्ता की रक्षा करने के लिए अपनी पूरी शक्ति का इस्तेमाल करने के लिए दृढ़ हैं। जब भी कभी ऐसा समय आया है वर्दी में हमारे बहादुर पुरूषों और महिलाओं ने चुनौतियों का मुकाबला किया है। भारत का प्रत्येक नागरिक सुरक्षित सोता है क्योंकि वह जानता है कि आप उनकी रक्षा के लिए तैनात हैं। वायु सैनिकों के साथ हमारी सशस्त्र सेनाओं ने हमारे लोकतांत्रिक संविधान में निहित मूल्यों, परम्पराओं और विश्वास को सुरक्षित रखा है।
      राष्ट्रपति ने कहा कि 223 स्क्वाड्रन अथवा ट्राइडेंट का गठन आदमपुर में 10 मई 1982 को किया गया था। आरम्भ में इसके पास मिग-23 एमएफ विमान थे। आज चाहे मिग-23 विमान अथवा मिग-29 अपग्रेड विमान उड़ाना हो, स्क्वाड्रन का जबरदस्त संचालन रिकार्ड है। यह स्क्वाड्रन उनमें से एक है जो वर्ष के 365 दिन सतर्क रहता है। यह अपने आदर्श वाक्य ‘विजय अमोग अस्त्र’ के अनुसार कार्य करता है जिसका अर्थ है विजय के लिए अंतिम हथियार। 
    राष्ट्रपति ने कहा कि 117 हेलीकॉप्टर यूनिट, अथवा हिमालयन ड्रैगन की स्थापना वायु सैनिक स्टेशन, बरेली में 1 फरवरी 1971 में की गई थी। यूनिट को आरम्भिक अनुभव 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में हुआ। यह 1983 में हासीमारा चली गई और उसने बड़े पैमाने पर पूर्वोत्तर में हताहतों को निकालने के मिशन में कार्य किया। यूनिट इसके बाद जनवरी 1988 में अपने वर्तमान स्थान वायु सैनिक स्टेशन सरसावा आ गई। 
   राष्ट्रपति ने कहा कि ऑपरेशन राहत, ऑपरेशन मेघ राहत, और अनेक अन्य मानवीय सहायता और आपदा राहत मिशनों में यूनिट ने नागरिकों की सहायता के लिए दिन रात कार्य किया। इसका आदर्श वाक्य है ‘आपात्सू मित्रम’ जिसका अर्थ है परेशानी में मित्र।
     राष्ट्रपति ने कहा कि इनके उत्कृष्ट प्रदर्शन को स्वीकार करते हुए और उसे मान्यता देते हुए मुझे 223 स्क्वाड्रन और 117 हेलीकॉप्टर यूनिट को स्टेंडर्ड प्रदान करने में खुशी हो रही है। मैं 223 स्क्वाड्रन, 117 हेलीकॉप्टर यूनिट के जवानों, सेवा निवृत्त सैनिकों और उनके परिवारों तथा वायु सैनिक स्टेशन आदमपुर को राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण के लिए बधाई देता हूं। भारत को आप पर गर्व है।

Wednesday, 15 November 2017

बच्चों का यौन उत्पीड़न रोकने के लिए नया कानून

     अर्जेटीना। महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा है कि भारत सरकार बाल श्रम के उन्मूलन के लिए सतत विकास लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरन्तर कार्य करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 

    श्रीमती मेनका गांधी आज अर्जेटीना में ब्यूनस आयर्स में बाल श्रम के निरन्तर उन्मूलन के बारे में चौथे वैश्विक सम्मेलन के पूर्ण सत्र में वक्तव्य दे रही थी।
      सम्मेलन का आयोजन अर्जेटीना सरकार और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने संयुक्त रूप से किया। इस वक्तव्य से बाल अधिकार और बाल श्रम विषय पर सरकार और देश की स्थिति स्पष्ट होती है। 
  श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा कि भारत नीतिगत और कानूनी सुधारों, स्थिर आर्थिक विकास, श्रम मानकों के सम्मान, समान शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा पहलों के जरिए बाल श्रम की रोकथाम, उसे कम करने और उसके उन्मूलन के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बाल श्रम कानून 1986 में संशोधन कर इस दिशा में व्यापक कदम उठाया है।
      इस संशोधन में किसी भी काम में 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से काम कराने पर रोक है। इसमें किसी भी खतरनाक धंधे में 14-18 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों को रोजगार देने पर भी रोक लगाई गई है। 
     श्रीमती मेनका गांधी ने कहा कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) कानून, 2015 बाल श्रम को ‘देखभाल और संरक्षण की जरूरत में बच्चों’ के रूप में देखता है। जिला स्तर की बाल कल्याण समितियों को उनके सम्पूर्ण कल्याण का अधिकार प्रदान करता है। 
     महिला और बाल विकास मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून, 2013 और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी कानून, 2005 दो अन्य महत्वपूर्ण कानून हैं जो अतिसंवेदनशील समुदायों को सुरक्षा नेटवर्क प्रदान करते हैं। बाल श्रम की रोकथाम में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यह किसी भी देश द्वारा किए गए दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा उपायों में से है।
      उन्होंने बच्चों के लिए हेल्प लाइन (चाइल्ड लाइन-1098) की भूमिका को उजागर किया, जो परेशानी में पड़े बच्चों को निकालने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी सुविधा है। 
     श्रीमती मेनका गांधी ने कहा कि बच्चों के व्यावसयिक यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए भारत सरकार तस्करी पर एक नया कानून लाने की प्रक्रिया में है, जिसमें न केवल दंडात्मक उपायों पर जोर दिया गया है बल्कि तस्करी की रोकथाम, तस्करी करके ले जाए गए बच्चों के पुनर्वास और उन्हें परिवार से मिलाने के उपाए भी किए जाएंगे। उन्होंने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए अर्जेटीना सरकार और आईएलओ को बधाई दी।

शहरी इलाकों में 18.76 मिलियन मकानों की कमी

    नई दिल्‍ली। आवास और शहरी मामलों के राज्य मंत्री हरदीप एस. पुरी ने कहा है कि रियल एस्टेट कानून एक पथ प्रदर्शक कानून है, जिससे आने वाले समय में कायापलट होगी।

       उन्होंने कहा कि सरकार ने एक ऐसा तंत्र बनाया है जिसमें रियल एस्टेट क्षेत्र का उचित तरीके से संचालन और खरीददार को मजबूत बनाना सुनिश्चित किया जा रहा है। ‘मुझे इस बारे में कोई संदेह नहीं है कि भारत में रियल एस्टेट का इतिहास दो खंडों में देखा जाएगा, रेरा से पूर्व और रेरा के बाद। रेरा से पूर्व के चरण का वर्णन अनेक लोगों के घर का सपना और महत्वाकांक्षा के रूप में किया जा सकता है जिस सपने को कुछ लोगों ने थोड़े से समय में चकनाचूर कर दिया। हम अभी उस चरण से नहीं निकले हैं।’ 
    पुरी ‘नीति, सुधार और नियंत्रणः भारतीय रियल एस्टेट की रीढ़’ विषय पर आरआईसीएस रियल एस्टेट सम्मेलन को आज यहां संबोधित कर रहे थे। पुरी ने कहा कि धनराशि का अभाव मकान लेने में एक समस्या है। आवासीय क्षेत्र में बहुत कम पारदर्शिता है। झूठे वादे, अपूर्ण आवासीय परियोजनाएं उन अभागे नागरिकों की अनकही विपत्तियों को दर्शाती है जिन्होंने अपनी पूरी जमा पूंजी मकान खरीदने में लगा दी है।
     हम अभी भी उन थोड़े से लोगों के सफाये की प्रक्रिया के आखिरी चरण में है जिनकी चूक के कारण अनेक ऐसे डेवलपरों की छवि धूमिल हुई है जो अपना क्रय-विक्रय सही तरीके से कर रहे हैं। 2011 में कराए गए एक तकनीकी अध्ययन का जिक्र करते हुए जिसमें शहरी इलाकों में 18.76 मिलियन मकानों की कमी की जानकारी दी गई थी, जिसमें 96 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस खंड और एलआईजी हाउसिंग में थी, पुरी ने कहा कि इसके बाद किए गए आकलनों में इस आंकड़े में संशोधन हुआ है और इसका अंतिम विश्लेषण किया जा रहा है, मकानों की कमी 10 मिलियन इकाइयों के आस-पास अथवा इससे अधिक हो सकती है जिसे प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के जरिए दूर किया जाएगा। 
     पुरी ने कहा कि इस मिशन का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस), कम आय वाले समूह (एलआईजी) और मध्यम आय वाले समूह (एमआईजी) के लोगों के लिए आवास उपलब्ध कराना है। ‘हमने निजी भागीदारी के जरिए आवास को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न पीपीपी मॉडल जारी किए है। इस योजना की विशेषता है कि सरकार भूमि उपलब्ध कराएगी और प्रत्येक एलॉटी को सब्सिडी प्रदान करेगी और शेष धनराशि बैंकों से आसान शर्तों पर लेने में सहायता करेगी। 
    आवास महिला के नाम पर अथवा परिवार के पुरुष सदस्य के साथ संयुक्त रूप से होगा। इससे महिलाओं को अधिकार संपन्न बनाने में मदद मिलेगी। इसमें एक रसोई और शौचालय होगा तथा बालिका की सुरक्षा की व्यवस्था होगी।’
     आवासीय क्षेत्र के महत्व पर जोर देते हुए पुरी ने कहा कि आवास और देश में बुनियादी ढांचे की मांग को पूरा करने में यह उत्प्रेरक की भूमिका निभा रहा है और कृषि के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है जिसमें देश में 6.86 प्रतिशत कामगारों को रोजगार मिला हुआ है।

विकास व पर्यावरण संरक्षण एक साथ होना चाहिए

    नई दिल्‍ली। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, जहाजरानी, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि सरकार दिल्ली एनसीआर में राजमार्ग परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि क्षेत्र में भीड़भाड़ कम हो और वाहनों से होने वाले प्रदूषण के स्तर को 50 प्रतिशत तक कम किया जा सके। 

     गडकरी ने एक ऐसी ही परियोजना एनएच 24 का मौके पर जाकर निरीक्षण किया। गडकरी ने कहा कि एनएच 24 परियोजना का पहला चरण, जिसके तहत अक्षरधाम मंदिर से दिल्ली-यूपी सीमा तक कार्य हो रहा है इस वर्ष दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। 9 किलोमीटर, 14 लेन वाला राजमार्ग रिकॉर्ड 14 महीनें में तैयार हो रहा है, जो कि 30 महीने में पूरा होने का अनुमान था।
    इस राजमार्ग में कई ऐसी विशेषताएं हैं, जिससे प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। राजमार्ग में 2.5 मीटर चौड़ा साईकिल ट्रैक, यमुना पुल पर एक उद्यान, सौर प्रकाश व्यवस्था और ड्रिप सिंचाई के माध्यम से पौधों को पानी देने की व्‍यवस्‍था शामिल है। 
   गडकरी ने कहा कि यह राजमार्ग लखनऊ तक विकसित किया जाएगा, जोकि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए जीवन रेखा के तौर पर साबित होगा। इस राजमार्ग से दिल्ली-मेरठ मार्ग पर जाम कम होगा, जिससे इस क्षेत्र में प्रदूषण के स्तर में कमी आएगी। 
    गडकरी ने बताया कि दिल्ली के चारों ओर पूर्वी और पश्चिमी एक्सप्रेसवे का काम भी तेजी से चल रहा है और यह अगले वर्ष 26 जनवरी से पहले पूरा होने की उम्‍मीद है। एनएच -24 और एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद, पड़ोसी राज्यों की ओर आने-जाने वाले वाहन दिल्ली से बाईपास होकर जाएंगे, जिससे प्रदूषण में 50 प्रतिशत तक कमी आएगी।
    उन्‍होंने कहा कि दिल्ली को जाम मुक्‍त करने के लिए 40,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं। इसमें धौला कुआं खंड, द्वारका एक्सप्रेसवे और दिल्ली के लिए एक रिंग रोड की योजना शामिल है, इसकी निर्माण लागत का भुगतान केंद्र और दिल्ली सरकार संयुक्त रूप से करेंगी। मंत्रालय राजमार्गों के तेजी से निर्माण के अलावा इस क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए भी कदम उठा रहा है।
      इसके तहत जैव ईंधन चलित वाहनों और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को सक्रियता से प्रोत्‍साहित करना, राजमार्गों को हराभरा बनाना, धूल को रोकने के लिए निर्माण स्थलों को ढ़कना और जलमार्गों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
      उन्होंने कहा कि यमुना नदी से गाद को निकालने और जलमार्ग से दिल्ली और आगरा को जोड़ने के लिए निविदाएं जारी की गई हैं। गडकरी ने कहा कि पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और विकास साथ-साथ चलना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि यह परियोजनाएं विकास, रोजगार सृजन, साफ-सुथरा वातावरण और लोगों के लिए सुविधाजनक यात्रा का मार्ग प्रशस्त करेंगी।

Tuesday, 14 November 2017

जीवनशैली में बदलाव, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए

   नई दिल्‍ली। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि जीवन शैली में बदलाव और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। 

   वे आज यहां पब्लिक हेल्‍थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया और इंस्टिट्यूट फॉर हेल्‍थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूऐशन (वाशिंगटन विश्वविद्यालय, सिएटल) के सहयोग से भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की पहल 'भारत राज्य स्तरीय रोग बोझ रिपोर्ट और तकनीकी पत्र' जारी करने के बाद एकत्रित लोगों को संबोधित कर रहे थे।
     इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। 
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि सामाजिक और आर्थिक विकास के आधार के रूप में देश की पूरी आबादी के लिए बेहतर स्वास्थ्य हासिल करना भारत सरकार का महत्वपूर्ण लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि किसी भी भारतीय राज्य में अधिकतम आयु संभाव्‍यता और न्‍यूनतम आयु संभाव्‍यता के बीच का अंतर वर्तमान में 11 वर्ष है और उच्चतम शिशु मृत्यु दर और सबसे कम शिशु मृत्यु दर के राज्यों के बीच अंतर 4 गुना है। 
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकास के संदर्भ में समान स्तर के अन्‍य देशों की तुलना में भारत में कई स्वास्थ्य सूचकांक की स्थिति दयनीय है। उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि भारत में महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुधार हुआ है, लेकिन हम इस क्षेत्र में और बेहतर कार्य कर सकते हैं। 
     उन्होंने कहा कि भारत के पास अन्य स्रोतों से उपलब्‍ध महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सर्वेक्षण और आंकड़े हैं, जो देश के विभिन्न हिस्सों के बीच कुछ बीमारियों के बोझ में महत्वपूर्ण अंतर दर्शाते हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज जारी भारत राज्य स्तरीय रोग बोझ पहल की रिपोर्ट में पहली बार 1990 से 2016 तक देश के प्रत्येक राज्य के व्यापक अनुमान उपलब्‍ध कराए गए हैं। 
    उन्होंने कहा कि तकनीकी वैज्ञानिक पत्र के साथ आज जारी की गई रिपोर्ट में प्रत्‍येक राज्‍य की स्‍वास्‍थ्‍य स्थिति और विभिन्‍न राज्यों के बीच स्वास्थ्य असमानताओं पर व्यवस्थित अंतर्दृष्टि डाली गई है। उन्‍होंने कहा कि भारतीयों की अगली पीढ़ी को सक्षम बनाने के लिए कुपोषण के कारण होने वाले उच्‍च रोग बोझ से जल्‍द ही निपटना होगा, ताकि पूरी सक्षमता से भारतीयों के व्यक्तिगत विकास के साथ ही राष्‍ट्र का विकास किया जा सके।

विदेशी निवेश 36 बिलियन डॉलर से बढ़कर 60 बिलियन डॉलर

    नई दिल्‍ली। राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नई दिल्‍ली में 37वें भारतीय अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार मेला–2017 का उद्घाटन किया। 

     इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने कहा कि आईआईटीएफ एक व्‍यापार मेला या प्रदर्शनी से अधिक महत्‍वपूर्ण है। प्रतिवर्ष 14 नवंबर को शुरू होने वाला यह मेला वैश्विक मंच पर भारत को प्रदर्शित करता है।
    यह अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार के प्रति भारत की प्राचीन और चिरस्‍थाई प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।
    राष्‍ट्रपति ने कहा कि हमारा समाज सहज रूप खुला है, जिसके द्वार मुक्‍त व्‍यापारिक प्रवाह और सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान के लिए हमेशा खुले हैं। हमने हमेशा ही उदारवादी नियम आधारित अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार को महत्‍व दिया है। यह हमारे डीएनए का हिस्सा है और यह एक विरासत है जिस पर आधुनिक भारत तथा आईआईटीएफ का निर्माण हो रहा है।
    राष्‍ट्रपति ने कहा कि इस वर्ष आईआईटीएफ ऐसे समय आयोजित किया जा रहा है जब वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था में भारत को उभरती हुई अर्थव्‍यवस्‍था के रूप में मान्‍यता दी गई है। विश्‍व ने भारत में कारोबार के वातावरण में परिवर्तन तथा व्‍यापार करने में सुगमता को स्‍वीकार किया है। वस्‍तु और सेवा कर शुरू करना एक असाधारण कदम है। इससे राज्‍यों के बीच की बाधाएं दूर हुई है। 
     इससे आम बाजार और अधिक औपचारिक अर्थव्‍यवस्‍था तैयार करने के साथ ही विनिर्माण क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण को बढ़ावा मिला है। इन प्रयासों के परिणाम से पिछले तीन वर्ष में प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में काफी बढ़ोतरी हुई है, जो 2013-14 में 36 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2016-17 में 60 बिलियन डॉलर हो गया। 
       राष्‍ट्रपति ने कहा कि 222 विदेशी कंपनियों सहित 3,000 प्रदर्शक आईआईटीएफ-2017 में शामिल हो रहे हैं। इसमें भारत के 32 राज्‍य और केंद्रशासित प्रदेश प्रतिनिधित्‍व कर रहे हैं। स्‍वयं सहायता समूह से लेकर बड़े व्‍यापारिक घरानों और लघु तथा मध्‍यम विनिर्माण उद्यमों से लेकर डिजीटल स्‍टार्ट-अप्‍स संस्‍थान इसमें भाग ले रहे हैं।
   आईआईटीएफ एक छोटा भारत है। यह विविधता का चित्र और उपमहाद्वीप की संपूर्ण ऊर्जा है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत के आर्थिक सुधारों और नीतियों का केंद्र बिंदु गरीबी हटाना तथा लाखों सामान्‍य परिवारों को समृद्ध करना है।
     व्‍यापार से आम आदमी की मदद होनी ही चाहिए। वे ही अंतिम हितधारक हैं। भारत सरकार की मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, स्किल इंडिया, स्मार्ट सिटीज और किसानों की आमदनी दोगुनी करने के संकल्प जैसी प्रमुख पहलें जमीनी स्तर के लोगों के लिए अधिक सार्थक आर्थिक सुधार करने का प्रयास हैं।

Monday, 13 November 2017

भारत की प्रथम एयर डिस्पेंसरी पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्‍थापित की जाएगी

     नई दिल्ली। देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में ही भारत की प्रथम एयर डिस्पेंसरी स्‍थापित की जाएगी, जो एक हेलिकॉप्‍टर में अवस्थित होगी।

 केन्‍द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (डोनर) मंत्रालय ने इस पहल के लिए आरंभिक वित्त पोषण के एक हिस्‍से के रूप में 25 करोड़ रुपये का योगदान पहले ही कर दिया है।
    इस आशय की जानकारी यहां देते हुए केन्‍द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार), पीएमओ, कार्मिक, जन शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्‍य मंत्री डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय इस तरह के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में हेलिकॉप्‍टर आधारित डिस्पेंसरी-ओपीडी सेवा सुलभ कराने की संभावनाएं तलाश रहा था।
      उन्होंने कहा कि ऐसे सुदूरवर्ती क्षेत्रों में यह सेवा उपलब्‍ध कराई जाएगी जहां कोई भी डॉक्‍टर या चिकित्‍सा सुविधा सुलभ नहीं होती है और जरूरतमंद मरीजों को किसी भी तरह की चिकित्‍सा सेवा नहीं मिल पाती है। 
    उन्‍होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय का यह प्रस्‍ताव स्‍वीकार कर लिया गया है और यह अब केन्‍द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय में अनुमोदन के अंतिम चरण में है। डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने विमानन क्षेत्र और हेलिकॉप्‍टर सेवा/पवन हंस के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद ये बातें कहीं।
    डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि केन्‍द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय इस प्रस्‍ताव को गंभीरता के साथ आगे बढ़ा रहा है, ताकि वर्ष 2018 के आरंभ में यह केन्‍द्र सरकार की ओर से पूर्वोत्तर क्षेत्र की आम जनता को एक अनुपम उपहार के रूप में प्राप्‍त हो सके।
   डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने यह जानकारी दी कि आज भी भारत की लगभग एक तिहाई आबादी को अस्‍पतालों में समुचित ढंग से बिस्तर उपलब्‍ध नहीं हो पाता है जिसके चलते दूरदराज के इलाकों में रहने वाले निर्धन मरीजों को आवश्‍यक चिकित्‍सा सेवा सुलभ नहीं हो पाती है।
     उन्‍होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की पहल पर पूर्वोत्तर क्षेत्र में किए जा रहे इस प्रयोग को अन्‍य पहाड़ी राज्‍यों जैसे कि हिमाचल प्रदेश और जम्‍मू-कश्‍मीर में भी अपनाया जा सकता है। डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि आरंभ में इस योजना के तहत हेलिकॉप्‍टर को दो स्‍थलों यथा मणिपुर के इम्‍फाल और शिलांग के मेघालय में अवस्थित किया जाएगा।
     इन दोनों ही शहरों में प्रमुख स्नातकोत्तर चिकित्सा संस्थान हैं जहां के विशेषज्ञ डॉक्टर आवश्‍यक उपकरणों एवं सहायक कर्मचारियों के साथ हेलिकॉप्‍टर के जरिए पूर्वोत्तर क्षेत्र के सभी आठों राज्‍यों के विभिन्‍न स्‍थानों पर पहुंच कर डिस्‍पेंसरी/ओपीडी सेवा मुहैया करा सकते हैं।
      उन्‍होंने कहा कि वापसी के दौरान उसी हेलिकॉप्‍टर से जरूरतमंद मरीज को शहर में लाकर संबंधित अस्‍पताल में भर्ती भी कराया जा सकता है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए अन्‍य नई हेलिकॉप्‍टर सेवाएं उपलब्‍ध कराने की योजनाओं का उल्‍लेख करते हुए उन्‍होंने कहा कि आरंभ में इम्‍फाल, गुवाहाटी और डिब्रुगढ़ के आसपास अवस्थित क्षेत्र में छह मार्गों पर दोहरे इंजन वाले तीन हेलिकॉप्‍टरों का परिचालन सुनिश्चित किया जाएगा।

सामाजिक आधारभूत ढांचे के विकास में शिक्षा की अहम भूमिका

   नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि सामाजिक आधारभूत ढांचे के विकास में शिक्षा की अहम भूमिका है। 
  शिक्षा निर्धनता और पिछड़ेपन के दुष्चक्र को रोकने में सफल रहती है। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू इस्कॉन के संस्थापक और आचार्य श्रील भक्तिवेदांता स्वामी प्रभुपाद की 121 वीं जयंती के अवसर पर आयोजित पूर्व पश्चिम संस्कृति समारोह को संबोधित कर रहे थे।
   उपराष्ट्रपति नायडू ने कहा कि सदियों से भारत ने ज्ञान के साथ-साथ अपनी समृद्ध संस्कृति का केंद्र होने के कारण असंख्य लोगों को जीवन के सही मार्ग पर चलने की शिक्षा दी है। 
     उन्होंने कहा कि भारत महापुरूषों को धरती रहा है, जिन्होंने मानवता की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। वेंकैया नायडू ने कहा कि वैश्वीकरण और प्रौद्योगिकी के कारण आज विश्व एक दूसरे के संपर्क में है। बहुसंस्कृतिवाद सार्वलौकिक है।
       उन्होंने कहा इन सब की शुरूआत से पहले स्वामी प्रभुपाद ने पूर्व और पश्चिम के बीच एक सेतु का निर्माण किया था जोकि संस्कृति का सेतु था। इसने भारत की विशाल सांस्कृतिक विरासत से पश्चिम का परिचय कराया। 
     उपराष्ट्रपति ने कहा कि हम एक विशेष समय में मिल रहे है जहा एक और दुनियाभर में विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से प्रगति हो रही है और वही दूसरी और आतंकवाद पर्यावरण में गिरावट, नशीले पदार्थों का सेवन, घृणा, भूखमरी और निर्धनता चुनौतियों के रूप में हमारे सामने खड़ी है।
    उन्होंने कहा कि संस्कृति दूसरे मायनों में सामाजिक आधारभूत ढांचे को संभालने वाला शक्ति है और यह नैतिक और न्यायसंगत मूल्यों में जान डाल देती है। ये मूल्य आज के आधुनिक जीवन शैली में तेजी से विलुप्त हो रहे हैं।

Sunday, 12 November 2017

भारत-फिलिपींस के बीच कृषि समझौता

  नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि और संबंधित क्षेत्रों में भारत और फिलिपींस के बीच समझौता पर हस्‍ताक्षर को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। 

   इस एमओयू से कृषि के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग में सुधार आएगा और यह दोनों देशों के लिए परस्‍पर लाभकारी होगा।
   इससे दोनों देशों के बीच सर्वोत्‍तम कृषि पद्धतियों को समझने में बढ़ावा मिलेगा। इससे बेहतर उत्‍पादकता के साथ-साथ उन्‍नत वैश्‍विक बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। 
    इस एमओयू में धान उत्‍पादन और प्रसंस्‍करण, बहुफसली प्रणाली, शुष्‍क भूमि खेती प्रणाली, जैविक खेती,सॉलिड और जल अनुरक्षण एवं प्रबंधन, मृदा की उर्वरकता, रेशम कीट पालन, कृषि वाणिकी, पशुधन सुधार आदि के क्षेत्रों में सहयोग के लिए प्रावधान किया गया है। 
    इस एमओयू में संयुक्‍त कार्यदल के गठन का प्रावधान है जिसमें समान संख्‍या में प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस संयुक्‍त कार्यदल की प्रत्‍येक दो वर्षों में एक बैठक होगी, जो बारी-बारी से फिलीपींस और भारत में आयोजित की जाएगी।

गुरू का स्थान नहीं ले सकता गूगल

    भुवनेश्वर। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा है कि गूगल कभी भी गुरू का स्थान नहीं ले सकता। वे ओडिशा में भुवनेश्वर में स्थित कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी युनिवर्सिटी के 13वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

  ओड़िशा के राज्यपाल एस.सी. जमीर और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे। 
  उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा की प्रक्रिया कक्षाओं, खेल मैदानों, घर, इंटरनेट के माध्यम और मीडिया तथा अपने आसपास के लोगों के साथ बातचीत के साथ चलती रहती है।
  उन्होंने कहा कि सभी औपचारिक और अनौपचारिक तौर-तरीके हमें शिक्षित करने में अपना योगदान देते हैं।
  नायडू ने कहा कि आज के ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के दौर में नए कौशल और नवीन ज्ञान को प्राप्त करना बेहद महत्तवपूर्ण है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि अपनी क्षमताओं और ज्ञान में वृद्धि तथा तेजी से बदल रहे कामकाज के तौर-तरीकों के हिसाब से स्वयं को ढालना बेहद जरूरी हो गया है। 
    उन्होंने छात्रों को कुछ नया और अलग तरह से सोचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज पहले की तुलना में सूचना और ज्ञान के ज्यादा संसाधन मौजूद हैं, छात्रों को इनका सटीक इस्तेमाल करना चाहिए और अपने-अपने क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ बनने का प्रयास करना चाहिए। 
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि नए विचारों का सृजन, नए विचारों को अपनाना और उसके अनुसार स्वयं को ढालना भारत की ताकत रही है और इस मार्ग को अपनाकर हमें अपनी मातृभूमि के गौरव को बढ़ाना होगा।

अहिंसा से ही स्वस्थ समाज की रचना

   नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि अहिंसा के पथ पर चलकर ही स्वस्थ समाज का निर्माण हो सकता है।

   वे आज नई दिल्ली में अहिंसा विश्व भारती द्वारा 13वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित अहिंसा दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।
    इस अवसर पर अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य डॉ. लोकेश मुनि और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। 
  उप राष्ट्रपति ने कहा कि विश्व भारती संस्थान की स्थापना का उद्देश्य देश और पूरे विश्व में अहिंसा, शांति और सद्भभाव की स्थापना करना है।
    उन्होंने यह भी कहा कि धर्म को समाज सेवा से जोड़कर हम सामाजिक बुराईयों को दूर कर सकते हैं और धर्म को आध्यात्म जोड़ सकते हैं। उपराष्ट्रपति एम. वेकैंया नायडू ने यह भी कहा कि विकास के लिए समाज में शांति और सद्भाव की आवश्यकता है।
       उन्होंने कहा कि अहिंसा बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हिंसा से किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। हिंसा से प्रत्युत्तर में भी हिंसा ही मिलती है इस कारण हिंसा में और बढ़ोतरी होती है। उप राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे देश में भगवान महावीर, भगवान बुद्ध जैसी कई महान विभूतियां हुई है जिन्होंने अहिंसा पर बल दिया है। 
      उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी ने अहिंसा के शस्त्र से ही भारत को आजादी दिलाई। उन्होंने यह भी कहा की अहिंसा का अर्थ कायरता नहीं है। उप राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय संस्कृति बहुवादी है और इसके मूल में बहुलता में एकता है। इसका मूल मंत्र सर्व धर्म सद्भाव है।
    उपराष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि अहिंसा विश्व भारती संस्थान समाज सेवा के जरिए और विशेष रूप से युवाओं को अहिंसा के पथ पर जोड़कर देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

Friday, 10 November 2017

राष्‍ट्रीय ग्रामीण पेयजल के लिए 23,050 करोड़

     नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्‍ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम को जारी रखने और इसे निर्णायक, प्रतिस्‍पर्द्धी और ग्रामीण लोगों को अच्‍छी गुणवत्‍तापूर्ण जल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए योजनाओं पर निर्भरता (कार्यशीलता) पर ज्‍यादा जोर देते हुए बेहतर निगरानी के साथ जारी रखने को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है।

    चतुर्थ वित्‍त आयोग (एफएफसी) अवधि 2017-18 से 2019-20 के लिए इस कार्यक्रम के लिए 23,050 करोड़ रूपए की राशि मंजूर की गयी है। यह कार्यक्रम देश भर की सारी ग्रामीण जनसंख्‍या को कवर करेगा। पुन: संरचना से यह कार्यक्रम लोचदार, परिणामोन्‍नमुख, प्रतिस्‍पर्द्धी बन सकेगा और इससे मंत्रालय सतत पाइप के जारिए पानी की आपूर्ति बढ़ाने के लक्ष्‍य को प्राप्‍त कर पाएगा।
     राष्‍ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्‍ल्‍यूपी) चतुर्थ वित्‍त आयोग चक्र मार्च 2020 के अनुरूप जारी रखा जाएगा। राष्‍ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्‍ल्‍यूपी) की पुन:संरचना के फल स्‍वरूप जापानी एनसीफॅलाइटीस (जेई)/ एक्‍यूट एंसेफॅलाइटीस सिंड्रोम (एईस) प्रभावित क्षेत्रों के लिए 2 प्रतिशत धन की व्‍यवस्‍था रखी जाएगी।
    राष्‍ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्‍ल्‍यूपी) के अंतर्गत एक उप-कार्यक्रम अर्थात राष्‍ट्रीय जल गुणवत्‍ता उप-मिशन, जिसे फरवरी, 2017 में पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्रालय द्वारा प्रारंभ किया गया था, के चलते करीब 28 हजार अरसेनिक और फ्लोराड प्रभावित लोगों को (पूर्व चयनित) स्‍वच्‍छ पेयजल उपलब्‍ध कराने की तत्‍काल जरूरत को पूरा किया जा सकेगा।
     अनुमानों के अनुसार चार वर्षों अर्थात मार्च 2021 तक करीब 12,500 करोड रूपए की राश‍ि की केंद्रीय अंश के रूप में आवश्‍यकता होगी। इसे राष्‍ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्‍ल्‍यूपी) के अंतर्गत आवंटन से वित्‍त-पोषित किया जा रहा है। सहमति वाली योजनाओं के लिए इस राशि की दूसरी किस्‍त की आधी सीमा तक राज्‍य सरकारों द्वारा पूर्व वित्‍तपोषण के लिए उपलब्‍ध कराया जाएगा।
      जिसे बाद में केंद्रीय वित्‍तपोषण से उनको प्रति-पूर्ति की जाएगी। यदि राज्‍य वित्‍तीय वर्ष में 30 नवंबर से पूर्व इस राशि का दावा करने में विफल रहते हैं तो ये निधियॉं सामान्‍य पूल का हिस्‍सा बन जाएगी जो उच्‍च कार्य निष्‍पादक राज्‍यों को जारी की जाएगी जिन्‍होंने पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर भारत सरकार को पहले से पूर्व वित्‍त पोषित कर दिया है।
        निधियों की दूसरी किस्‍त की अन्‍य आधी राशि पाइप के जरिए जल की आपूर्ति के कार्यकरण के पूरा हो जाने के आधार पर राज्‍यों को जारी की जाएगी जिसका मूल्‍यांकन किसी तृतीय पक्ष के माध्‍यम से किया जाएगा।
     मंत्रिमंडल ने एफएफसी अवधि 2017-18 से 2019-2020 के लिए इस कार्यक्रम हेतु 23050 करोड राशि की मंजूरी दी है। एनडब्‍ल्‍यूक्‍यूएसएम का उद्देश्‍य अरसेनिक/फ्लोराड प्रभावित समस्‍त ग्रामीण जनसंख्‍या को मार्च, 2021 तक स्‍वच्‍छ पेयजल की आपूर्ति निर्वाधरूप से सुनिश्चित करना है। राज्‍यों को इस कार्यक्रम के अंतर्गत घटकों की संख्‍या में कमी करके एनआरडीडब्‍ल्‍यूपी के उपयोग में कहीं ज्‍यादा नरमी प्रदान की गयी है।
      पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्रालय के एकीकृत प्रबंधन सूचना प्रणाली (आईएमआईएस) के अनुसार भारत में करीब 77 प्रतिशत ग्रामीण जनसंख्‍या को इसके अंतर्गत लाने का पूर्ण लक्ष्‍य (एफसी) (प्रति व्‍यक्ति प्रति दिन 40 लीटर) और सार्वजनिक नलों के माध्‍यम से 56 प्रतिशत ग्रामीण जनसंख्‍या तक 16.7 प्रतिशत घरेलू कनेक्‍शनों के भीतर पानी की पहुँच उपलब्‍ध है। एनआरडीडब्‍ल्‍यपी कार्यक्रम 2009 में प्रारंभ किया गया था, जिसमें मुख्‍य जोर पीने योग्‍य पानी, पर्याप्‍तता, सुविधा, व्‍यहन करने की क्षमता तथा साम्‍यता की दृष्टि से पानी की सतत उपलब्धता (स्रोत) पर दिया गया था।
     एनआरडीडब्‍ल्‍यपी एक केंद्र प्रायोजित योजना है। जिसमें केंद्र और राज्‍यों के बीच 50:50 के अनुपात में निध‍ि वहन की जाती है। गत वर्षों में इससे प्राप्‍त सफलता से सबक लेते हुए और एनआरडीडब्‍ल्‍यपी के कार्यान्‍वयन के दौरान महसूस की गयी कमियों के दृष्टिगत इस कार्यक्रम को कहीं ज्‍यादा परिणामोन्‍नमुख और प्रतिस्‍प‍र्द्धी बनाने के लिए राज्‍यों को निधियॉं जारी करने के लिए वर्तमान मार्गदर्शी निर्देशों और प्रक्रिया में कतिपय संशोधन किए जाने की आवश्‍यकता है।
     इस बात को ध्‍यान में रखते हुए कि एनआरडीडब्‍ल्‍यपी को ज्‍यादा परिणामोन्‍नमुख बनाने की जरूरत, राज्‍यों के बीच प्रतिस्‍पर्द्धा को प्रोत्‍साहित करने और इसकी व्‍यवहारिता और ध्‍यान केंद्रीत करने के लिए राज्‍यों, विभिन्‍न स्‍टेक होल्‍डरों/स्‍थानीय विशेषज्ञों/अंतरराष्‍ट्रीय संस्‍थानों और नीति आयोग के साथ विचार-विमर्श की एक लंबी श्रृंखला रखने के पश्‍चात इस कार्यक्रम के मार्गदर्शी निर्देशों में कुछ संशोधनों को लागू किया गया है।
    ये इस कार्यक्रम के अंतर्गत घटकों की संख्‍या में कमी कर‍के एनआरडीडब्‍ल्‍यपी के इस्‍तेमाल में राज्‍यों को कहीं ज्‍यादा नरमी प्रदान कर रहे हैं।
     पाइप के जरिए पानी की आपूर्ति सेवा के बढ़ते स्‍तर पानी की गुणवत्‍ता से प्रभावित आबादी को स्‍वच्‍छ जल सुविधा के अंतर्गत लाने (अरसेनिक और फ्लोराइड प्रभावित आबादी, जेई/एईएस क्षेत्रों की समस्‍या को हल करने, राष्‍ट्रीय जल गुणवत्‍ता उप-मिशन), खुले में शौच से मुक्‍त घोषित (ओडीएफ) गांवों की कवरेज, एसएजीवाई, जीपीएस, गंगा जीपीएस, एकीकृत कार्य योजना (आईएपी) जिलों, सीमावर्ती चौकियों (बीओपी) को पाइप के जरिये पानी की आपूर्ति तथा जल आपूर्ति परिसंपत्तियों के लिए समुचित ओएनएम हेतु संस्‍थागत व्‍यवस्‍था की स्‍थापना को शुरू किया गया है।