Sunday, 16 April 2017

हज प्रक्रिया आसान व पारदर्शी, 1,70,025 यात्री भारत से यात्रा पर जायेंगे

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि आने वाले दिनों में समुद्री मार्ग से हज यात्रा दोबारा शुरू कराने हेतु “सक्रिय विचार" चल रहा है। इस सम्बन्ध में पोत परिवहन मंत्रालय से बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

         केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री नकवी ने यह बात मुंबई में हज हाउस में हज 2017 के सम्बन्ध में आयोजित किये जा रहे एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कही। नकवी ने कहा कि हज नीति 2018 तय करने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति यात्रियों को पानी के जहाज से पुनः सऊदी अरब के जेद्दा शहर भेजने के विकल्प पर “सक्रिय विचार" कर रही है। नकवी ने कहा कि सरकार समुद्री मार्ग सहित सभी विकल्पों पर गौर कर रही है। अगर चीजें तय होती हैं तो यह एक क्रांतिकारी और हजयात्रियों के हित में फैसला होगा।

                हजयात्रियों के मुंबई से समुद्री मार्ग के जरिये जेद्दा जाने का सिलसिला 1995 में रुक गया था। हज यात्रियों को जहाज (समुद्री मार्ग) से भेजने पर यात्रा संबंधी खर्च करीब आधा हो जाएगा। मौजूदा समय में मुंबई और दिल्ली सहित 21 स्थानों से हज की उड़ानें जेद्दा के लिए जाती हैं। नई तकनीक एवं सुविधाओं से युक्त पानी का जहाज एक समय में चार से पांच हजार लोगों को ले जाने में सक्षम हैं। मुंबई और जेद्दा के बीच 2,300 नॉटिकल मील की एक ओर की दूरी सिर्फ दो-तीन दिनों में पूरी कर सकते हैं। जबकि पहले पुराने जहाज से 12 से 15 दिन लगते थे। नकवी ने कहा कि उच्च स्तरीय कमेटी अपनी रिपोर्ट जल्द ही सौंप देगी। नई हज पालिसी का उद्देश्य हज की संपूर्ण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना है। 

                इस नई पालिसी में हज यात्रियों के लिए विभिन्न सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जायेगा। नकवी ने कहा कि इस बार अल्पसंख्यक मंत्रालय ने सम्बंधित एजेंसियों के साथ मिल कर हज 2017 की तैयारी बहुत पहले से शुरू कर दी थी। अल्पसंख्यक मंत्रालय का उद्देश्य है कि हज यात्रा के दौरान हाजियों को विश्वस्तरीय सुविधाएँ मिलें। नकवी ने कहा कि हज 2017 आवेदन की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के जबरदस्त नतीजे सामने आये हैं। इस वर्ष कुल प्राप्त आवेदनों में 1,29,196 ऑनलाइन आवेदन किये गए जो "डिजिटल इंडिया" की ओर भारत के बढ़ते कदम का उदाहरण हैं। 

                  नकवी ने कहा कि सऊदी अरब द्वारा भारत से वार्षिक हज पर जाने वाले यात्रियों के कोटे में बढ़ोतरी किये जाने का लगभग सभी राज्यों को फायदा हुआ है। और राज्यों से इस वर्ष जाने वाले हज यात्रियों के कोटे में बड़ी बढ़ोतरी कर दी गयी है। सऊदी अरब ने 2017 के लिए भारत के वार्षिक हज कोटे में 34,005 की वृद्धि कर दी है। इस सम्बन्ध में इस वर्ष 11 जनवरी को सऊदी अरब के जिद्दा में द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किये गए थे। वर्षों बाद भारत से हज पर जाने वाले यात्रियों के कोटे में इतनी बड़ी वृद्धि की गई है। हज 2016 में भारत भर में 21 केंद्रों से लगभग 99,903 हाजियों ने हज कमेटी ऑफ इंडिया के जरिये हज किया और लगभग 36 हजार हाजियों ने प्राइवेट टूर ऑपरेटरों के जरिये हज की अदायगी की थी। 

                हज 2017 के लिए सऊदी अरब द्वारा कोटे में की गई वृद्धि के बाद हज कमेटी ऑफ इंडिया के माध्यम से 1,25,025 हाजी हज यात्रा पर जायेंगे। जबकि 45,000 हज यात्री प्राइवेट टूर ऑपरेटरों के माध्यम से हज पर जायेंगे। इस तरह इस वर्ष कुल 1,70,025 हज यात्री भारत से हज यात्रा पर जायेंगे। तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में हज 2017 के लिए चुने गए प्रशिक्षकों को हज कमिटी ऑफ इंडिया, मुंबई में किंगडम ऑफ सऊदी अरब के रॉयल कांसुलेट, मुंबई नगर पालिका, सऊदी एयरलाइन्स, एयर इंडिया, कस्टम्स, आप्रवासन के अधिकारियों एवं डॉक्टरों ने हज यात्रा के दौरान "क्या करें/क्या ना करें" की जानकारी दी।

               इसमें यातायात, जेद्दा में आवास, सऊदी अरब के कानूनों की जानकारी शामिल थी। इस कार्यक्रम में 500 से अधिक प्रशिक्षकों ने भाग लिया। ये प्रशिक्षक देश भर में ट्रेनिंग कैंप लगा कर हाजियों को प्रशिक्षण देंगे।

अभी तक 65 अनुसूचित जाति उद्यमियों को 236.66 करोड़ ऋण

            अनुसूचित जातियों के लिए 2014-15 में उद्यम पूंजी निधि कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसकी विशिष्टता यह है कि इसके अंतर्गत अनुसूचित जाति के उद्यमियों को 50 लाख रुपये से लेकर 15 करोड़ रुपये तक के उच्चतर ऋण प्रदान किए जाते हैं। 

          इस कार्यक्रम के अंतर्गत अभी तक 65 अनुसूचित जाति उद्यमियों को 236.66 करोड़ रुपये की ऋण राशि मंजूर की जा चुकी है, जो सौर ऊर्जा, जल शोधन संयंत्रों, खाद्य प्रसंस्करण और पेय पदार्थों, होटल आदि से सम्बद्ध हैं। यह जानकारी केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने “प्रमुख सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों” के बारे में आयोजित सम्मेलन में दी। 9 परियोजनाओं में लाभार्थियों ने ऋणों की अदायगी प्रारंभ कर दी है।

               अन्य अजा उद्यमियों को भी इस स्कीम का कई गुना लाभ हुआ है। जहां तक कौशल विकास का सवाल है, सभी राज्य सरकारों द्वारा अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त और विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) द्वारा प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया है। 2014-15 से 2016-17 की अवधि में करीब 1.5 लाख लाभार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इसके अंतर्गत 48.42 प्रतिशत लोगों को दिहाडी-स्व-रोजगार प्राप्त हुआ।

              उद्यमशीलता के तहत अनुसूचित जाति उप योजना के अंतर्गत पिछले तीन वर्षों में आर्थिक गतिविधियों हेतु लिए गए ऋण पर दी गई सब्सिडी से 17 लाख से भी ज्‍यादा लोग लाभान्वित हुए हैं। पिछले तीन वर्षो के दौरान उद्यमशीलता के लिए निगमों द्वारा 12 लाख से भी ज्‍यादा लाभार्थियों को ऋण दिए गए हैं।

अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़े वर्गों के 3.54 करोड़ विद्यार्थियों को डिजिटल भुगतान

                 अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़े वर्गों (अपिव) विमुक्त, घुमंतु और अर्द्ध-घुमंतु जातियों के विद्यार्थियों के लिए 14 स्कालरशिप योजनाएं डिजिटल भुगतान के अंतर्गत संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ 3.54 करोड़ विद्यार्थियों को मिल रहा है। 

            छात्रवृत्ति की समस्त राशि विद्यार्थियों के बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। अजा विद्यार्थियों के 60 प्रतिशत बैंक खाते आधार से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि छात्रवृत्तियों, विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों, प्रशिक्षण सुविधाओं, परिसरों, संस्थानों के निर्माण-उन्नयन के लिए पूंजी प्रदान करने आदि उपायों के जरिए अनुसूचित जातियों से सम्बद्ध विद्यार्थियों का शैक्षिक सशक्तिकरण किया जा रहा है। यह जानकारी केंद्रीय सामाजिक न्याय, अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने “प्रमुख सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों” के बारे में आयोजित सम्मेलन में दी। 

             सामाजिक न्याय, अधिकारिता मंत्रालय अलग अलग तरह की सात छात्रवृत्तियां कार्यान्वित करता है, जिनमें मैट्रिक-परवर्ती और मैट्रिक-पूर्ववर्ती छात्रवृत्तियां, टॉप क्लास स्कालरशिप, राष्ट्रीय विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति, अनुसूचित जातियों के लिए यूजीसी द्वारा संचालित राष्ट्रीय फेलोशिप, अस्वच्छ व्यवसायों में लगे व्यक्तियों के बच्चों के लिए प्री-मैट्रिक स्कालरशिप, अनुसूचित जातियों और अपिव के लिए निशुल्क कोचिंग (70 : 30 अनुपात में) और योग्यता उन्नयन छात्रवृत्तियां शामिल हैं। भारत सरकार का यह विश्वास है कि सब के लिए शिक्षा सशक्तिकरण की कुंजी है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय अपने बजट का करीब 54 प्रतिशत अनुसूचित जातियों के लिए छात्रवृत्तियों पर खर्च करता है। 

             सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की प्रत्‍येक शाखा को वित्‍त मंत्रालय द्वारा एक उद्यमी के रूप में कम से कम एक अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति के युवक की सहायता करने की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है जिससे कि उनके बीच अधिक रोजगार का सृजन किया जा सके।

ब्रिटिश प्रशासक-जमींदारों ने तीन कठिया प्रथा कायम की थी

               केन्‍द्रीय कृषि और किसान कल्‍याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि गांधी जी के नेतृत्‍व में किसानों ने अंग्रेजों के अन्‍याय और दमन के खिलाफ जो शांतिपूर्ण संघर्ष किया उसकी उसका कोई दूसरा उदाहरण मानव सभ्‍यता के इतिहास में नहीं मिलता। वे चम्‍पारण में राष्‍ट्रीय किसान मेले के अवसर पर एकत्र लोगों को संबोधित कर रहे थे।

          उन्‍होंने कहा कि निर्दोष, निहत्‍थे किसानों ने सत्‍याग्रह के ज़रिए अंग्रेजों के इन अत्‍याचारों, शोषण, दमन और जबरन वसूली के खिलाफ आवाज उठायी और उन्‍हें यह प्रथा समाप्‍त करने के लिए मज़बूर किया। उन्‍होंने कहा कि नील की खेती करने वाले ब्रिटिश काश्‍तकारों ने किसानों की एक लाख एकड़ से अधिक उपजाऊ भूमि जब्‍त कर ली थी और वहां अपनी कोठियां खड़ी कर ली थीं। उन्‍होंने खुर्की और तीनकातिया प्रणालियों के अंतर्गत विभिन्‍न तरीकों से किसानों का शोषण किया। खुर्की प्रणाली के अंतर्गत ब्रिटिश काश्‍तकार कुछ धन देकर किसानों की जमीन और मकान रेहन रखते थे और उन्‍हें नील की खेती करने करने के लिए मजबूर करते थे। 

              कृषि मंत्री ने कहा कि ब्रिटिश प्रशासक और जमींदारों ने ''तीन कठिया'' प्रथा कायम की थी, जिसके अंतर्गत एक बीघा जमीन में से तीन कट्ठा जमीन नील की खेती के लिए रिजर्व करनी पड़ती थी। किसानों को नील की खेती का खर्च उठाना पड़ता था और अंग्रेज बिना किसी मुआवजे के उपज की वसूली करते थे। इतना ही नहीं विभिन्‍न करों के माध्‍यम से भी किसानों को उत्‍पीडि़त किया जाता था। मंत्री ने कहा कि 15 अप्रैल, 1917 को गांधीजी मोतीहारी पहुंचे थे। अगले दिन जब उन्‍हें चम्‍पारण के लिए रवाना होना था, तभी उन्‍हें सरकारी आदेश मिला कि वे मोतीहारी के एसडीओ के समक्ष पेश हों। आदेश में कहा गया था कि वे तत्‍काल उस क्षेत्र को छोड़कर अन्‍यत्र कहीं चले जायें। परन्‍तु गांधीजी ने सरकारी आदेश का उल्‍लंघन किया और चम्‍पारण के लिए अपनी यात्रा जारी रखी।

             आदेश के उल्‍लंघन के लिए गांधी जी के विरुद्ध मुकद्दमा चलाया गया। चम्‍पारण पहुंचकर गांधीजी ने जिला कलेक्‍टर को लिख कर दिया कि जब तक नील की खेती से संबंधित मुद्दे का समाधान नहीं होगा, वे चम्‍पारण नहीं छोड़ेंगे। इस प्रकार, गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन का एक ज्‍वलंत उदाहरण पेश किया। मंत्री ने बताया कि 1907 में शेख गुलाब और सीतल राय ने नील की खेती के खिलाफ आवाज उठायी। परन्‍तु, गांधी जी ने किसानों के शोषण को स्‍वतंत्रता आंदोलन का हिस्‍सा बनाया और किसानों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलन के लिए प्रेरित किया। गांधी जी के सत्‍याग्रह के चलते नील की खेती समाप्‍त हो सकी और फिर किसान अपने खेतों में गन्‍ना और धान उगाने लगे।