Friday, 11 August 2017

राज्यसभा में उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू का स्वागत

        प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यसभा के सदस्यों के साथ मिलकर एम. वेंकैया नायडू का सदन के सभापति के तौर पर स्वागत किया। 

      प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य की शुरूआत 11 अगस्त के उस दिन को याद करते हुए की जिस दिन स्वतंत्रता संग्राम के युवा क्रांतिकारी श्री खुदीराम बोस को अंग्रेजो ने फांसी पर चढ़ा दिया था। उन्होंने कहा कि यह घटना हमें उन शहीदों का बलिदान याद कराती है, जो आजादी के लिए लड़े, और उस परिप्रेक्ष्य में हम सबका दायित्व कितना बढ़ जाता है। 
       प्रधानमंत्री ने कहा कि वेंकैया नायडू पहले ऐसे उपराष्ट्रपति हैं जिन्होंने स्वतंत्र भारत में जन्म लिया। नायडू के पास काफी लंबा अनुभव है, और वह संसदीय प्रक्रियाओं की बारीकियों से भली-भांति परिचित हैं।
         वेंकैया नायडू से अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नायडू ग्रामीण क्षेत्रों, गरीबों एवं किसानों की जरूरतों को लेकर हमेशा संवेदनशील रहे हैं। इन मुद्दों पर उनकी जानकारी अत्यधिक मूल्यवान है। 
       प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत में शीर्ष संवैधानिक पदों पर ऐसे लोग बैठे हैं जिनकी पृष्ठभूमि सामान्य परिवार और ग्रामीण परिवेश वाली है, यह भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता और भारतीय संविधान की ताकत को दर्शाता है।