Tuesday, 27 February 2018

राजस्‍थान में स्‍वजल योजना की दूसरी परियोजना

   राजस्‍थान। केन्‍द्रीय पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्री सुश्री उमा भारती ने आज राजस्‍थान में करौली जिले के भीकमपुरा गांव में स्‍वजल पायलट परियोजना का शुभारंभ किया। 

  इस परियोजना से पूरे वर्ष स्‍वच्‍छ पेयजल की उपलब्‍धता सुनिश्चित होने के अलावा रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। सुश्री उमा भारती ने लोगों से आग्रह किया कि वे जल्‍द ही शुरू होने वाली परियोजना को पूरे मन से अपनायें।
   उन्‍होंने याद दिलाया कि चन्‍द्रशेखर आजाद की पुण्‍यतिथि है और सरकार उनके स्‍वराज के सपने को पूरा करने की कोशिश कर रही है। उन्‍होंने भीकमपुरा में 54.17 लाख रूपये से अधिक के बजट की स्‍वजल परियोजना का उद्घाटन किया। स्‍वजल परियोजना सतत पेयजल आपूर्ति के लिए समुदाय के स्‍वामित्‍व वाला पेयजल कार्यक्रम है।
   इस योजना के अंतर्गत परियोजना की लागत का 90 प्रतिशत खर्च सरकार उठाएगी और समुदाय के योगदान से शेष 10 प्रतिशत व्‍यय किया जाएगा। परियोजना के परिचालन और प्रबंधन की जिम्‍मेदारी स्‍थानीय ग्रामीणों की होगी। योजना के अनुसार गांवों में चार जलाशयों का निर्माण किया जाएगा और लगभग 300 आवासों में नल के कनैक्‍शन उपलब्‍ध कराये जाएंगे।
   भीकमपुरा गांव में पेयजल की अत्‍यधिक कमी है और ग्रामीणों को पेयजल के लिए कम से कम तीन किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। गर्मी के दौरान टैंकरों से जलापूर्ति की जाती है। नई परियोजना से लोगों की कठिनाई कम होगी और पूरे साल प्रत्‍येक व्‍यक्ति के लिए पेयजल की उपलब्‍धता सुनिश्चित होगी।
      मंत्री ने जिले की विभिन्‍न परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। करौली 115 आकांक्षी जिलों में से एक है। इसका उद्देश्‍य केन्‍द्र और राज्‍य सरकार की योजनाओं का उचित कार्यान्‍वयन तथा अभिसरण के जरिये जिले का सम्‍पूर्ण विकास सुनिश्चित करना है।
    उन्‍होंने स्‍वास्‍थ्‍य, पोषण, शिक्षा, कौशल विकास, कृषि, वित्‍तीय समावेशन और मूलभूत बुनियादी ढांचे सहित छह महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों में प्रगति की समीक्षा की तथा अधिकारियों को कार्यक्रम के त्‍वरित कार्यान्‍वयन के लिए आवश्‍यक कार्रवाई करने का सुझाव भी दिया।
  पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्रालय इस परियोजना की प्रगति पर नजर रखेगा। बैठक में हिंडन की विधायक राजकुमारी जाटव, पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्रालय में सचिव परमेश्‍वरन अय्यर और अन्‍य गणमान्‍य भी उपस्थि‍त थे।

दुनिया को बदलने के लिए शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार

   नई दिल्ली। उपराष्‍ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है, जिसका इस्‍तेमाल दुनिया को बदलने के लिए किया जा सकता है।

  उपराष्‍ट्रपति आज यहां दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के मैत्रेयी कॉलेज के स्‍वर्ण जयंती समारोहों के उद्घाटन के अवसर पर छात्राओं को संबोधित कर रहे थे। 
  उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि स्‍कूल और कॉलेज युवा मस्तिष्‍क को आकार प्रदान करने, चरित्र को ढालने और मूल्‍य आधारित सही शिक्षा देने में बदलाव की भूमिका निभाते हैं। 
  उन्‍होंने कहा कि देश का भविष्‍य साक्षरता और शिक्षा की मजबूत नींव पर निर्भर करता है। छात्रों को मजबूत नैतिक और मूल्‍य आधारित शिक्षा देने के अलावा शिक्षा व्‍यापक संकल्‍पना, बुद्धि को तेज करने, विश्‍लेषण संबंधी कौशल को मस्तिष्‍क में बैठाने, सृजनात्‍मकता सुधारने, नये-नये अविष्‍कारों के बारे में सोचने और एक समग्र दृष्टिकोण विकसित करने में मदद कर सकती है। 
   उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि देश की कुल आबादी की लगभग आधी आबादी महिलाओं की है। देश के विकास में तेजी लाने के लिए उन्‍हें अधिकार संपन्‍न बनाना महत्‍वपूर्ण है। जैसा कि अक्‍सर कहा जाता है, यदि आप एक पुरुष को शिक्षित करते हैं, तो आप एक व्‍यक्ति को शिक्षित करते हैं, लेकिन यदि आप एक महिला को शिक्षित करते हैं, तो आप पूरे परिवार को शिक्षित करते हैं।’ 
    उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि आजादी के 70 साल बाद भी देश निरक्षरता, लिंग असमानता, भ्रष्‍टाचार, जातिवाद और शहरी-ग्रामीण विभाजन जैसी अनेक समस्‍याओं का सामना कर रहा है। उन्‍होंने कहा कि समय की मांग है कि इन चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाए। 
     उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि जब-जब भारतीय महिलाओं को अवसर प्रदान किए गए हैं, उन्‍होंने अनेक क्षेत्रों में उच्‍च मानक कायम किए हैं और साबित कर दिया है कि वह अपने पुरुष सहयोगियों से कम नहीं है। सबसे नवीनतम उदाहरण अवनी चतुर्वेदी का है, जो लड़ाकू विमान उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला बन गई है।
      उपराष्‍ट्रपति ने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने माता-पिता, अपनी मातृभाषा, मातृभूमि, जन्‍म के पैतृक स्‍थान और गुरु को नहीं भूलें, जो आपके चरित्र और करियर के निर्माण में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। याद रखें कि गूगल आपको सूचना प्रदान कर सकता है लेकिन आपके गुरु का स्‍थान नहीं ले सकता, जो आपको शिक्षा प्रदान करता है।

Monday, 26 February 2018

भारत में स्‍मार्टफोन इस्‍तेमाल करने वालों की संख्‍या 53 करोड़

     नई दिल्ली। केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा वस्‍त्र मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी ने कहा है कि दूरदर्शन को गुणवत्‍ता युक्‍त सामग्री तैयार करने तथा विज्ञापन के जरिए राजस्‍व बढाने के लिए फ्री डिश द्वारा बनाई गयी पहुंच का लाभ उठाना चाहिए ताकि करदाताओं पर बोझ कम हो सके।

  श्रीमती ईरानी आज यहां (ब्रॉडकास्ट इंजीनियर्स सोसाइटी) द्वारा नान लीनियर ब्रॉडकास्टिंग टेक्नोलॉजीस एंड बिज़नेस मॉडल' विषय पर टेरेस्‍टीरियल और सेटेलाइट ब्रॉडकास्टिंग प्रसारण के 24 वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी बीईएस एक्‍सपो 2018 के उद्घाटन अवसर पर बेाल रही थीं। 
   श्रीमती ईरानी ने इस मौके पर कहा कि‍ भारत में स्‍मार्टफोन इस्‍तेमाल करने वालों की संख्‍या इस साल के अंत तक 53 करोड़ हो जाएगी जो कि चीन के बाद स्‍मार्टफोन के दूसरे सबसे ज्‍यादा उपभोक्‍ता होंगे। उन्‍होंने कहा कि‍ 40 प्रतिशत से अधिक सामग्री का ऑनलाइन इस्‍तेमाल किया जाता है।
    उन्होंने यह भी कहा कि इस साल विज्ञापन पर होने वाला खर्च पिछले साल के 9.6 प्रतिशत से बढ़कर 12.5 प्रतिशत ​​हो जाने की संभावना है। सूचना प्रसारण मंत्री ने बीईएस से ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग संस्थानों के छात्रों और शिक्षकों के साथ संपर्क विस्‍तार का कार्यक्रम संचालित करने का भी अनुरोध किया।
   उन्‍होंने कहा कि भारत में प्रसारण क्षेत्र की क्षमता को केवल उपलब्ध चैनलों की संख्या के आधार पर नहीं बल्कि इसके द्वारा उपलब्‍ध करायी गयी सामग्री की गुणवत्ता के आधार पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने प्रसार भारती के सभी ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने का बीईएस से अनुरोध किया। बीईएस एक्सपो 2018 ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग सोसाइटी (इंडिया) द्वारा आयोजित किया गया है।
     इस एक्सपो को भारत में प्रसारण प्रौद्योगिकी का सबसे बड़ा आयोजन माना जा रहा है।  25 देशों की लगभग 300 कंपनियां बीईएस एक्सपो 2018 में सीधे तौर पर या फिर भारत में डीलरों और वितरकों के माध्यम से अपने उत्पाद प्रदर्शित करेंगी। 
    प्रदर्शनी में ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, कनाडा, चीन, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, हांगकांग, भारत, इज़राइल, इटली, जापान, कोरिया, नीदरलैंड, नॉर्वे, सिंगापुर, स्पेन, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, ताइवान, यूके और अमेरीका की कंपनियां शामिल हो रही हैं।
    एक्‍सपो के उद्घाटन अवसर पर सूचना एंव प्रसारण सचिव एन के सिन्‍हा,प्रसार भारती के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी शशि शेखर वेमपति तथा प्रसारण प्रौद्योगिकी क्षेत्र के वरिष्‍ठ अनुसंधानकर्ता डेविड गोम्‍ज बरक्‍यूऐरो भी उपस्थित थे।

15 शहरों में अंतरमॉडल स्टेशन बनेंगे, नागपुर व वाराणसी की तैयारी

    नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने नागपुर और वाराणसी में अंतरमॉडल स्टेशन (आईएमएस) स्थापित करने के लिए विस्तृत संभावना अध्ययन किया है और इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयारी के अंतिम चरण में है। 

  अंतरमॉडल स्टेशन विकसित करने के लिए देश के 15 शहरों को प्राथमिकता दी गई है जिसमें से नागपुर और वाराणसी को पायलट परियोजना के लिए चुना गया है। 
    अंतरमॉडल स्टेशन एक टर्मिनल संरचना है, जहां एक ही स्थान पर रेल, सड़क, मास रैपिड ट्रांजिट प्रणाली, बस रैपिड ट्रांजिट प्रणाली, अंतर्देशीय जल मार्ग, ऑटोरिक्शा, टैक्सी और निजी वाहन एकत्रित होते हैं ताकि लोग बिना किसी बाधा के ऑटोमोबाइल के न्यूनतम उपयोग के साथ एक से दूसरे साधन से आवाजाही कर सकेंगे।
    अभी अधिकतर शहरों में बस अड्डे, रेलवे स्टेशन तथा अन्य पड़ाव एक दूसरे से अन्य स्थानों पर हैं। इसलिए पहले से भीड़भाड़ वाली सड़कों पर अंतरमॉडल आवाजाही से दबाव बनता है। परिवहन के विभिन्न साधनों को एक स्थान पर लाकर अंतरमॉडल स्टेशन सड़कों पर भीड़भाड़ कम करेंगे और वाहन प्रदूषण में भी कमी आएगी। अंतरमॉडल स्टेशन लोगों को सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को प्रोत्साहित कर तथा अंतर शहर बस यातायात के प्रवेश और निकास के लिए रिंगरोड़ और राष्ट्रीय राजमार्गों के कारगर इस्तेमाल करके भीड़भाड़ कम करने में मददगार साबित होंगे।
    अंतरमॉडल स्टेशन नई जोड़ने वाली सड़कों, पुलों तथा फ्लाइओवरों के जरिये सड़क नेटवर्क विकास के साथ-साथ एकीकृत रूप में बनाए जायेंगे। ये स्टेशन अगले 30 वर्षों के लिए यात्रियों की संख्या भार सहन करेंगे और इसमें ट्रैवेलेटरों के साथ फुटओवर ब्रिज, सब वे, साझा प्रतीक्षालय, स्वच्छ शौचालय और विश्राम गृह, एकीकृत सार्वजनिक सूचना प्रणाली, आधुनिक अग्निशमन सुविधा तथा आपातक्रिया सेवा, उपयोगी सामान भंडार, कॉनकोर्स तथा स्केलेटर, पर्याप्त सर्कुलेशन स्थान तथा वाणिज्यीक प्रतिष्ठान होंगे।
   अकेले टर्मिनलों की तुलना में अंतरमॉडल स्टेशन विकसित करने के अनेक लाभ हैं। एकत्रित आवागमन: अगल-अलग परिवहन टर्मिनलों की तुलना में अंतरमॉडल स्टेशनों पर अधिक लोगों का आवागमन होगा। सुधरा यात्री अनुभव :  अनेक भागों के सहयोग के कारण सुविधाओं का बेहतर प्रबंधन होता है और वाणिज्यिक विकास एकत्रिक आवागमन से प्रेरित होता है।
     इसके अतिरिक्त यात्रियों को विभिन्न टर्मिनलों के बीच यात्रियों के आने-जाने के लिए समय और धन की आवश्यकता नहीं होती। संसाधनों को साझा करना: फुटआवर ब्रिज, प्रतीक्षालय, कॉनकोर्स, सार्वजनिक सुविधा जैसी साझा आधारभूत संरचना से निवेश में कमी आती है और जमीन की आवश्यकता भी कम होती है। परिणामस्वरूप निवेश की कम जरूरत होती है और प्रणाली में आपसी तालमेल बढ़ता है।
    अंतरमॉडल स्टेशनों के विकास से शहरों में वाणिज्यिक विकास होगा, आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और इससे विकास के क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक स्वरूप बदलेगा। अंतरमॉडल स्टेशनों का क्रियान्वयन और संचालन राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के माध्यम से सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, रेल मंत्रालय तथा संबंधित राज्य सरकारों के बीच स्पेशल पर्पस व्हेकिल (एसपीवी) से किया जाएगा। 
   एसपीवी के सदस्य प्रद्त पूंजी या जमीन एसपीवी के इक्विटी योगदान के रूप में उपलब्ध कराएंगे। सड़क परिवहन मंत्रालय/ एनएचएआई रेल अवसंचरना सहित टर्मिनल अवसंरचना, आईएसबीटी, साझा क्षेत्र (कॉनकोर्स, प्रतीक्षालय, परिवहन), पार्किंग तथा अन्य स्टेशन सुविधाओं के निर्माण के लिए धन देगा।
  निर्माण तथा संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी निजी छूटग्राहियों को हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) आधार पर बोली के जरिये दी जाएगी। अंतरमॉडल स्टेशनों का संचालन प्रारंभ होने के बाद वाणिज्यिक विकास आधिकार पीपीपी मोड पर बोली के जरिये दिए जाएंगे। वाणिज्यिक विकास से प्राप्त होने वाली राशि का इस्तेमाल निर्माण लागत को पुनः प्राप्त करने में किया जाएगा।

12 लाख से भी ज्‍यादा पीएलएचआईवी लाभान्वित होंगे

    नई दिल्ली। केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने आज यहां आयोजित एक समारोह में ‘एचआईवी/एड्स (पीएलएचआईवी) से पीडि़त लोगों के लिए वायरल लोड टेस्‍ट’ का शुभारंभ किया।

   इसके साथ ही उन्‍होंने इसे ऐतिहासिक दिन बताया। इस पहल से देश में इलाज करा रहे 12 लाख पीएलएचआईवी का नि:शुल्‍क वायरल लोड टेस्‍ट साल में कम से कम एक बार अवश्‍य कराया जा सकेगा। 
   श्री नड्डा ने यह भी घोषणा की कि ‘सभी का इलाज (ट्रीट ऑल)’ के बाद वायरल लोड टेस्‍ट एचआईवी से पीडि़त लोगों के इलाज एवं निगरानी की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्‍होंने कहा कि यह वायरल लोड टेस्‍ट आजीवन एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी करा रहे मरीजों के इलाज की प्रभावशीलता की निगरानी करने की दृष्टि से विशेष महत्‍व रखता है। स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण राज्‍य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल भी इस अवसर पर उपस्थित थीं। 
    श्री नड्डा ने यह भी कहा कि नियमित वायरल लोड टेस्‍ट ‘फर्स्‍ट-लाइन रेजिमेंस (नियमानुसार परहेज)’ के उपयोग को अनुकूलित करेगा, जिससे एचआईवी से पीड़ित लोगों में दवा प्रतिरोध का निवारण हो सकेगा और उनकी दीर्घायु सुनिश्चित होगी। 
   उन्‍होंने कहा कि वायरल लोड टेस्‍ट एआरटी से जुड़े चिकित्‍सा अधिकारियों को फर्स्‍ट-लाइन इलाज की विफलता के बारे में पहले ही पता लगाने में सक्षम बनाएगा और इस तरह यह पीएलएचआईवी को दवा का प्रतिरोध करने से बचाएगा। यह एलएफयू (लॉस टू फॉलो अप) पीएलएचआईवी पर नजर रखने के मामले में ‘मिशन संपर्क’ को मजबूत करने में भी मददगार साबित होगा। 
    केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 में भारत ने एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) उपचार प्रोटोकॉल को संशोधित किया था, ताकि एआरटी वाले समस्‍त पीएलएचआईवी के लिए ‘ट्रीट ऑल’ का शुभारंभ हो सके। 
    श्री नड्डा ने कहा कि यह ‘ट्रीट ऑल’ पहल इसलिए की गई थी, ताकि उपचार जल्‍द शुरू हो सके और व्‍यक्तिगत एवं समुदाय दोनों ही स्‍तरों पर वायरस के संचरण को कम किया जा सके। वर्तमान में लगभग 12 लाख पीएलएचआईवी 530 से भी अधिक एआरटी केन्‍द्रों में मुफ्त उपचार का लाभ उठा रहे हैं।

Sunday, 25 February 2018

कनाडा के प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति से मुलाकात की

   नई दिल्ली। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। 

   राष्ट्रपति भवन में कनाडा के प्रधानमंत्री की अगवानी करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि कनाडा के साथ हम अपने संबंधों को उच्च प्राथमिकता देते हैं। लोकतंत्र, बहुलतावाद और कानून का राज हमें एक दूसरे से बांधता है।
     हाल के समय में निवेश, शिक्षा, ऊर्जा और सम्पर्कता के क्षेत्रों में हमारे सहयोग में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। 
   राष्ट्रपति ने कहा कि भारत-कनाडा आर्थिक साझेदारी में अपार क्षमता मौजूद है। भारतीय अर्थव्यवस्था तेज गति से बढ़ रही है। यहां कनाडा के निवेश के नए अवसरों के द्वार खुल रहे हैं। भारत कनाडा की कंपनियों को मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्मार्ट सिटी, संरचना विकास और स्किल इंडिया जैसी पहलों में साझेदारी करने के लिए आमंत्रित करता है।
    राष्ट्रपति ने बल देकर कहा कि दोनों देशों को अपने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने और उसमें विविधता लाने की दिशा में काम करना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और कनाडा जैसे लोकतांत्रिक और बहुलतावादी समाजों को आतंकवाद और उग्रवाद जैसी ताकतों की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। रणनीतिक साझेदार होने के नाते हमें आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के विरूद्ध मिलकर खड़ा होना होगा।

फिल्‍मों को बदलाव का साधन बनना चाहिए

    चेन्‍नई। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि फिल्मों को बदलाव का साधन बनना चाहिए। सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा देना चाहिए तथा अपनी लोकप्रियता को कम किए बिना सांप्रदायिक सौहार्द, राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति को भी बढ़ावा देना चाहिए।

  उप राष्‍ट्रपति आज चेन्‍नई में श्री बी नागी रेड्डी पर एक डाक टिकट और एक पुस्‍तक जारी करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित, राज्‍य के उच्च शिक्षा मंत्री के.पी.अनबलागन, तमिलनाडु के चीफ पोस्ट मास्टर जनरल एम. संपत और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे। 
    उप राष्ट्रपति ने कहा कि श्री नागी रेड्डी एक जाने-माने प्रकाशक, सफल फिल्म निर्माता, समाजसेवी और एक महान मानवतावादी थे। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे सफल परियोजनाओं में से एक 1947 में बच्चों की पत्रिका 'चंदामामा' का शुभारंभ करना था। सच्‍चाई यह है कि नेत्रहीनों के लिए चंदामामा का चार भाषाओं में ब्रेल संस्करण भी था, इससे उनके अंदर नेत्रहीनों के प्रति मानवीयता दृष्टिकोण झलकता है। 
     उपराष्ट्रपति ने फिल्म निर्माताओं का आह्वान किया कि वे भ्रष्टाचार, जातिवाद, शराब और नशीले पदार्थों की लत, महिलाओं पर अत्याचार, लिंग आधारित भेदभाव, सामंतवाद और धार्मिक या वैचारिक अतिवाद के खतरे जैसी बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रयास करें।
    उन्होंने कहा कि फिल्म व्यवसाय से जुड़े लोगों को खुद से सवाल करना चाहिए कि क्या फिल्में समाज में होने वाली घटनाओं का आईना हैं? उन्होंने कहा कि सोचना एकदम गलत है कि हिंसा, अपराध और अश्लीलता का चित्रण किए बिना साफ और विशुद्ध रूप से मनोरंजक फिल्में नहीं बनाई जा सकती हैं। 
      उपराष्ट्रपति ने कहा कि मनोरंजन के नाम पर हिंसा और अश्लीलता को असंगत तरीके से बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए, खासतौर से जब फिल्मों का जनता पर काफी असर पड़ता है। उन्होंने आगे कहा कि सभी जानते हैं कि सिनेमा संचार का एक शक्तिशाली माध्यम है। हिंसा, असहिष्णुता और अपराध के वर्तमान समय में, फिल्म निर्माताओं की बड़ी जिम्मेदारी है कि वे संदेश देने वाली फिल्में बनाएं और फिल्में मनोरंजक भी होनी चाहिए।

शिशु बिना शिक्षा के वयस्क के रूप में विकसित नहीं हो सकता

    नई दिल्ली। केंद्रीय मानव संसाधन विकास एवं जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने फिजी के नादी में आयोजित राष्ट्रकुल शिक्षा मंत्रियों के 20वें सम्मेलन (20 सीसीईएम) में भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व किया।

  सम्मेलन की थीम थी ‘अनुकूलता एवं लचीलापन: क्या शिक्षा कारगर हो सकती है? डॉ. सिंह ने फिजी के यूनिवर्सिटी ऑफ साऊथ पैसिफिक के कुलपति डॉ. राजेश चंद्रा द्वारा ‘20 सीसीईएम विषयगत मुद्वों‘ पर प्रस्तुति पर ‘प्रतिक्रिया वक्तव्य‘ दिया था।
    मंत्री ने उल्लेख किया था कि सतत विकास लक्ष्यों का मूल उद्वेश्य हमारे शिक्षकों एवं छात्रों में भी सार्वभौमिक, मानवतावादी, नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों को अंतर्निविष्ट करना एवं उनका पोषण करना है। 
   उन्होंने जोर देकर कहा कि अच्छी शिक्षा को एक वैश्विक एजेंडा बन जाना चाहिए। जब तक सभी देशों के बच्चे अच्छी तरह से शिक्षित, कुशल नहीं हो जाते एवं रोजगार से नहीं जुड़ जाते, विश्व शांति सुनिश्चित करने की संभावना अस्पष्ट बनी रहेगी।
     मंत्री ने सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी4) पर विचार विमर्शों के दौरान ‘वयस्क शिक्षा एवं अध्ययन‘ पर भी एक वक्तव्य दिया था। डॉ. सिंह ने प्रतिभागी राष्ट्रकुल सदस्यों को भारत सरकार द्वारा वयस्क शिक्षा के लिए ‘राष्ट्रीय साक्षरता मिशन‘, ‘साक्षर भारत‘ ; मतदाता साक्षरता (मतदान करने का प्रतिशत बढ़ाने के लिए), वित्तीय साक्षरता (प्रधानमंत्री जन धन योजना), सीमांत वर्गों के लिए कानूनी साक्षरता और वयस्कों के लिए स्व रोजगार प्रशिक्षण (कौशल विकास) पाठ्यक्रमों, आईसीटी-इनैबल्ड अध्ययन रूपांतरण (मैसिव ओपेन ऑनलाइन लर्निंग कोर्सेस (एमओओसीएस/स्वयम), राष्ट्रीय डिजिटल लाईब्रेरी, आदि जैसी आरंभ की गई विभिन्न योजनाआं के बारे में जानकारी दी। 
    उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कोई भी शिशु बिना शिक्षा के वयस्क के रूप में विकसित नहीं हो सकता। मंत्री महोदय के वक्तव्यों एवं टिपण्णियों की सभी प्रतिभागी देशों द्वारा काफी सराहना की गई। डॉ. सिंह ने सम्मेलन के दौरान फिजी के प्रधानमंत्री रियर एडमिरल (सेवानिवृत्त) माननीय जोसेइया वोरेक बैनीमारामा से मुलाकात की। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी जी की तरफ से, डॉ. सिंह ने 11 मार्च, 2018 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले सौर शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। फिजी के प्रधानमंत्री ने धन्यवाद दिया एवं शिखर सम्मेलन में अपनी प्रतिभागिता की पुष्टि की। 
    डॉ. सिंह ने फिजी के शिक्षा मंत्री श्री अयाज सैयद खैयूम के साथ भी विचार विमर्श किया। डॉ. सिंह की 21 फरवरी, 2018 को ब्रिटेन के शिक्षा मंत्री डॉ. निक गिब; ऑस्ट्रेलिया की सहायक शिक्षा मंत्री सुश्री केरेन एंड्रज; एवं टोंगा के शिक्षा मंत्री पेनिसीमनी इपेंसिया के साथ भी द्विपक्षीय सार्थक बैठक हुई। मंत्री ने 24 फरवरी, 2018 को विभिन्न द्विपक्षीय मुद्वों पर चर्चा करने के लिए न्यूजीलैंड की सहायक शिक्षा मंत्री सुश्री जेनी सलेसा से भी मुलाकात की। 
    डॉ. सिंह की 21 फरवरी, 2018 को बहुपक्षीय सहयोग पर विचार विमर्श करने के लिए राष्ट्रकुल के महासचिव सुश्री पैट्रिसिया स्कॉटलैंड के साथ भी अच्छी बैठक हुई। डॉ. सिंह ने रामकृष्ण मिशन द्वारा संचालित विवेकानंद महाविद्यालय का भी दौरा किया जहां उन्होंने महाविद्यालय के छात्रों/शिक्षकों से बातचीत की। 22 फरवरी, 2018 को मंत्री ने भारतीय उच्चायोग में भारतीय डायसपोरा के प्रतिनिधियों से मिलने के लिए सुवा की यात्रा की जहां ‘विश्व हिन्दी दिवस‘ का आयोजन किया गया।
     उन्होंने फिजी के तीन नागरिकों को पुरस्कार प्रदान किया जो फिजर में हिन्दी भाषा को बढ़ावा देने एवं प्रसार करने में बेशुमार योगदान दे रहे हैं। ‘हिन्दी भाषा एवं संस्कृति‘ पर डॉ. सिंह के भाषण ने भारतीय डायसपोरा के दिलों को छू लिया। 22 फरवरी, 2018 को मंत्री ने तवुवा में राबुलु सनातन के एक नए विद्यालय परिसर का उद्घाटन किया।
    इस अवसर पर, फिजी के शिक्षा मंत्रालय की स्थायी सचिव सुश्री एलिसेन ब्रुचेल भी उपस्थित थीं। यह विद्यालय 2016 के फरवरी महीने में कैट-5 तूफान ‘विंस्टन‘ के कारण बुरी तरह ध्वस्त हो गया था। डॉ. सिंह ने 23 फरवरी, 2018 को लौटोका में गिरमिट सेंटर का दौरा किया जहां उन्होंने केंद्र के पुस्तकालय को 100 किताबें उपहारस्वरूप भेंट कीं तथा गिरमिट सेंटर के अधिकारियों से मुलाकात की।
     इसके बाद मंत्री ने लौटोका में फिजी विश्वविद्यालय के रविंद्रनाथ टैगोर सेंटर का भ्रमण किया जहां उन्होंने केंद्र को 100 किताबें उपहारस्वरूप भेंट कीं। फिजी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रेम मिसिर द्वारा संपादित पुस्तक ‘द सुबालटर्न इंडियन वूमेन‘ (गिरमिट महिलाओं पर) की प्रस्तुति के दौरान भारतीय डायसपोरा के साथ उनकी शानदार मुलाकात रही।
     मॉरीशस की शिक्षा मंत्री श्रीमती लीला देवी भी इन सामुदायिक मुलाकातों के दौरान उपस्थित रहीं और उन्होंने भारतीय डायसपोरा से अगस्त, 2018 में मॉरीशस में आयोजित होने वाले ‘विश्व हिन्दी सम्मेलन‘ में बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की। डॉ. सिंह ने‘ संस्कृति, समाज एवं सभ्यता के विकास में महिलाओं की भूमिका‘ एवं ‘स्वास्थ्य, भाषा एवं संस्कृति का संरक्षण‘ पर भाषण दिया जो भारतीय डायसपोरा को बहुत प्रेरणादायक लगा।

Friday, 23 February 2018

राष्‍ट्रीय गंगा सफाई मिशन: करीब 4,000 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी

  नई दिल्ली। राष्‍ट्रीय गंगा सफाई मिशन (एनएमसीजी) की कार्यकारी समिति की नौवीं बैठक में करीब 4,000 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

   इसमें उत्‍तर प्रदेश में कानपुर के जाजमऊ स्थित चमड़ा शोधन कारखानों के लिए 20 एमएलडी सार्वजनिक अपशिष्‍ट जल शोधन संयंत्र शामिल है। 629 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली तीन चरणों की इस परियोजना में 380 अलग-अलग चमड़ा शोधन इकाइयों में पूर्व शोधन इकाई, एक 20 सीईटीपी होगा, जिसमें प्राकृतिक, जैविक और उन्‍नत शोधन की व्‍यवस्‍था होगी।
  इसके अलावा जीरो लिक्विड डिस्‍चार्ज (जेडएलडी) आधारित 200 केएलडी क्षमता का प्रमुख संयंत्र होगा। इस परियोजना में केन्‍द्र की हिस्‍सेदारी 472 करोड़ रुपए है। कानपुर औद्योगिक शहर से गंगा में होने वाले प्रदूषण को खत्‍म करने के लिए यह एक प्रमुख कदम है। इस परियोजना को विशेष उद्देश्‍य वाहन (एसपीवी) –जाजमऊ चमड़ा शोधन एसोसिएशन द्वारा अमल में लाया जाएगा। 
      कानपुर के जाजमऊ, बिनगवां, साजरी में सीवेज शोधन बुनियादी ढांचे के पुनर्वास और समेकन के लिए हाईब्रिड एन्‍युईटी-पीपीपी मोड के अंतर्गत 967.23 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली एक अन्‍य परियोजना को मंजूरी दी गई है।
     इस परियोजना में पंखा में 30 एमएलडी एसटीपी का निर्माण शामिल है। केंद्र सरकार पूंजीगत निवेश और 15 वर्ष संचालन तथा रख-रखाव करेगी। इलाहाबाद में नैनी, सलारी, नुमायादही, राजापुर, पोनघाट, पोडरा सीवरेज क्षेत्रों में सीवेज शोधन बुनियादी ढांचे के पुनर्वास और समेकन के लिए हाईब्रिड एन्‍युईटी-पीपीपी मोड के अंतर्गत 904 करोड़ रुपए की एक परियोजना को मंजूरी दी गई है। उपयुक्‍त कार्यान्‍वयन के लिए सभी एसटीपी और एसपीएस के लिए एक ऑन लाइन निगरानी प्रणाली को भी मंजूरी दी गई है।
     केंद्र सरकार पूंजीगत निवेश और 15 वर्ष संचालन तथा रख-रखाव करेगी। गंगा नदी में जाने वाले नालों के मूल स्‍थान/मूल स्‍थान से दूर जैव उपचारात्‍मक शोधन की एक परियोजना को भी मंजूरी दी गई है, जिस पर अनुमानत: 410 करोड़ रुपए लागत आएगी। एनएमसीजी ने सीपीसीबी और अन्‍य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के जरिए प्रदूषण फैलाने वाले अन्‍य प्रमुख नालों की पहचान की है, जो मुख्‍य पाइप में जाकर मिल जाते हैं। यहां टेक्‍नोलॉजी सेवा प्रदाता गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के प्रदूषण को कम करने के लिए कंटेनराइज्‍ड मॉडयूलर शोधन संयंत्रों सहित शोधन सुविधाएं स्‍थापित करेंगे। 
     पहचान गए नालों को इसके बाद प्राथमिकता वाले नालों में वर्गीकृत किया गया है, जहां तत्‍काल हस्‍तक्षेप की जरूरत है। परियोजना के पहले चरण में शोधन के लिए 20 नालों को ध्‍यान में रखा गया है। बुनियादी ढांचे के विकास की अंतरिम अवधि के लिए नालों में प्रदूषण के दबाव का प्रबंध करने के लिए मूल स्‍थान पर/मूल स्‍थान के बाहर तेजी से, तकनीकी-आर्थिक और सतत टेक्‍नोलॉजी अपनाने तथा गंगा नदी में सीधे सीवेज छोड़े जाने के संचयी प्रभाव के प्रबंध के लिए यह कदम उठाया गया है। यह समग्र दृष्टिकोण नमामि गंगे कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए अपनाया गया है, ताकि गंगा नदी में सीवेज का प्रवाह रोका जा सके।
     पश्चिम बंगाल में हाईब्रिड एन्‍युईटी मोड के अंतर्गत गार्डन रीच एसटीपी (57 एमएलडी) और केवड़ापुकुर एसटीपी (50 एमएलडी) के लिए 15 वर्ष के संचालन और रख-रखाव के साथ पुनर्वास की एक परियोजना को भी मंजूरी दी गई है। इस पर 165.16 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत आएगी। केंद्र सरकार पूंजीगत निवेश और 15 वर्ष संचालन तथा रख-रखाव करेगी।
     बिहार में बेगुसराय, हाजीपुर और मुंगेर में तीन सीवेज बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को क्रमश: 230.06 करोड़ रुपए, 305.18 करोड़ रुपए और 294.02 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत की संशोधित मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं में केन्‍द्र की हिस्‍सेदारी क्रमश: 161.04 करोड़ रुपए, 213.63 करोड़ रुपए और 205.81 करोड़ रुपए होगी।
     केंद्र सरकार पूंजीगत निवेश और 15 वर्ष संचालन तथा रख-रखाव करेगी। बैठक की अध्‍यक्षता जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय में सचिव और एनएमसीजी महानिदेशक यू.पी. सिंह ने की। बैठक में मंत्रालय और एनएमसीजी के वरिष्‍ठ अधिकारी मौजूद थे।

गांगेय क्षेत्र अत्यधिक उपजाऊ

     पटना। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना, न केवल धान, गेहूँ या दलहन, तिलहन के क्षेत्र में कार्य कर रहा है बल्कि फसल विविधीकरण, पशुधन विकास, मत्स्य प्रबंधन, जल प्रबंधन, बागवानी, कृषि-वानिकी तथा मृदा विज्ञान के क्षेत्र में भी सराहनीय कार्य कर रहा है।

  आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना का उद्धेश्य सातों पूर्वी राज्यों में टिकाऊ खेती के लिए कार्य करना है जिसका भौगोलिक क्षेत्रफल मात्र 22.5 प्रतिशत है जबकि जनसंख्या 34 प्रतिशत है। इसी प्रकार, कुल पशुधन का 31 प्रतिशत पशुधन भी इस क्षेत्र में पाया जाता है।
   राधा मोहन सिंह ने यह बात आज भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के 18वें स्थापना दिवस के अवसर पर कही। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि पूर्वी भूभाग पर पूरे देश की खाद्य सुरक्षा निर्भर करती है। गांगेय क्षेत्र अत्यधिक उपजाऊ होने के कारण पूरे देश की खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने में सक्षम है। इसी क्रम में पूर्वी पठारी भूभाग दलहन, फलों, सब्जियों की पैदावार बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। 
     श्री सिंह ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में पूर्वी क्षेत्र चावल, सब्जी एवं मीठे जल की मछलियों के उत्पादन में अग्रणी है। यह क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर चावल, सब्जी एवं मछली उत्पादन में क्रमशः 50 प्रतिशत, 45 प्रतिशत एवं 38 प्रतिशत की भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है। यदि इस क्षेत्र के समुचित विकास पर ध्यान दिया जाए तो यह क्षेत्र अनाज के साथ दलहन, तिलहन, फल-सब्जियों, दुग्ध एवं मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम है।
   केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि कृषि यांत्रिकीकरण, जलवायु परिवर्तन का खेती पर दुष्प्रभाव, आर्द्र भूमि की अधिकता, अत्यधिक जनसंख्या घनत्व, भूमिहीन किसानों की आजीविका, 100 लाख हेक्टेयर, परती भूमि का विकास एक महत्वपूर्ण चुनौती है जिसपर पूरे जोर-शोर से कार्य करने की आवश्यकता है। इसी प्रकार भूजल, जो कि पूर्वी क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, परंतु भूजल दोहन ऊर्जा की कमी के कारण बहुत कम मात्रा में किया जा रहा है। केंद्र सरकार में उर्जा उत्पादन की बढोत्तरी तथा घरों को बिजली के अलावा खेती के लिए अलग से देश के किसानों के लिए पर्याप्त राशि की व्यवस्था के कारण इस समस्या से भी शीघ्र निदान मिलेगा। 
    श्री सिंह ने कहा कि आईसीएआर द्वारा समेकित फार्मिंग प्रणाली पर गहन शोध व तकनीकी सृजन तथा प्रसार के लिए मोतिहारी में एक नये शोध केन्द्र की स्थापना की गयी है एवं छह वैज्ञानिकों की नियुक्ति भी की गई है। पटना, पूसा, सबौर, मधेपुरा, कैमुर एवं बक्सर में समेकित कृषि प्रणाली मॉडल का विकास किया गया है। ये मॉडल खाद्य एवं पोषण सुरक्षा एवं आय बढ़ाने में सहायक होगें। राज्य में करीब 1450 किसानों ने समेकित कृषि प्रणाली को अपनाया है जिससे उनको प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष 1.8 से 2.5 लाख तक आमदनी हुई है।
    श्री सिंह ने कहा कि कृषि के साथ अन्य विकल्पों जैसे डेयरी, मत्स्य, मधुमक्खी, रेशम, मशरूम, फसल प्रसंस्करण व मूल्य संवर्द्धन आदि के उचित उपयोग से कृषक अतिरिक्त रोजगार दिवस व आमदनी अर्जित कर सकेंगे।
   केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार एवं झारखंड प्रदेश के लिए प्रगतिशील कृषक डेटा बेस तैयार किया गया है जिसमें कृषि के विभिन्न क्षेत्रों में कृषकों द्वारा किये गये कार्य की जानकारी दी गई है ताकि अन्य कृषक इन जानकारियों का लाभ उठा सके एवं उस कृषक से संपर्क स्थापित कर सके।

एमबीबीएस ग्रेजुएट कम से कम दो वर्ष तक ग्रामीण इलाकों में सेवा अवश्‍य करें

    चेन्‍नई। उपराष्‍ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने सभी राज्‍य सरकारों से अपील की है कि वे कम से कम हाई स्‍कूल के स्‍तर तक मातृभाषा को एक अनिवार्य विषय बनाएं।

  उपराष्‍ट्रपति आज चेन्‍नई में सविता इंस्टीइट्यूट ऑफ मेडिकल एंड टेक्नीकल साइंसेज में 11वां दीक्षांत भाषण दे रहे थे। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि कोई भी बच्‍चा किसी अन्‍य भाषा की तुलना में अपनी मातृभाषा में ज्‍यादा अच्‍छी तरह समझ सकता है।
    उन्‍होंने कहा कि अपने पैदाइशी भाषा में वह अपने विचारों को प्रभावशाली तरीके से अभिव्‍यक्‍त कर सकता है। हम आमतौर पर अपनी मातृभाषा में अपने विचारों को बेहतर तरीके से अभिव्‍यक्‍त करते हैं। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि हम बहु सांस्‍कृतिक और बहुभाषी विश्‍व में रहते हैं।
   उन्‍होंने कहा चूंकि भाषा और संस्‍कृति एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, हमें देश के अनेक जनजातीय समूहों द्वारा बोली जाने वाली अनेक भाषाओं सहित अपनी स्‍वदेशी भाषाओं को मजबूत बनाने की जरूरत है। भाषा किसी संस्‍कृति की जीवन रेखा है और एक तरीके से यह एक वृहद सामाजिक परिवेश को परिभाषित करती है, जिसमें एक समाज रहता है।
   उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि महान व्‍यक्तियों का जीवन मेडिकल सहित सभी छात्रों के इतिहास के पाठ्यक्रम का हिस्‍सा होना चाहिए। कोई भी देश जो अपने इतिहास और संस्‍कृति को भूल जाता है, वह कभी समृद्ध नहीं हो सकता। 
   उन्‍होंने कहा कि किसी को भी अपना अतीत याद रखना चाहिए और भविष्‍य के लिए योजना बनानी चाहिए तथा उसके अनुसार आगे बढ़ना चाहिए। हमें अपनी जड़ों तक पहुंचना चाहिए, अपनी संस्‍कृति को जानना चाहिए। 
  उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि निजी क्षेत्र को स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र के वि‍कास में बड़ी भूमिका निभानी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि समाज ने मेडिकल के छात्रों को बहुत कुछ दिया और उन्‍हें कम से कम दो वर्ष ग्रामीण इलाकों में गांव वालों की सेवा करके समाज को कुछ न कुछ अवश्‍य देना चाहिए। 
   उन्‍होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में डॉक्‍टरों और स्‍वास्‍थ्‍य देखरेख सुविधाओं की भारी कमी है और सभी तक स्‍वास्‍थ्‍य देखरेख की पहुंच कायम करने के लिए जबरदस्‍त बदलाव की आवश्‍यकता है।

Thursday, 22 February 2018

भविष्‍य में सस्‍ते आवास की जरूरत को पूरा करने के लिए आधुनिक टेक्‍नोलॉजी

    नई दिल्ली। आवास और शहरी मामलों के राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) हरदीप पुरी ने कहा है कि सरकार ने आवासीय बोर्डों, रेलवे, रक्षा और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के सामने उनकी आवासीय परियोजनाओं के लिए नई टेक्‍नोलॉजी अपनाने का प्रस्‍ताव रखा है ताकि आवासीय क्षेत्र को प्रोत्‍साहित किया जा सके। 

   भवन निर्माण सामग्री और टेक्‍नोलॉजी संवर्द्धन परिषद द्वारा भविष्य की भवन निर्माण सामग्री और निर्माण टेक्नोलॉजी के बारे में आयोजित राष्‍ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन करते हुए श्री पुरी ने कहा कि बीएमटीपीसी नई और उभरती हुई प्रोद्योगिकी को बढ़ावा दे रही है जो भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल है। 
   इस अवसर पर मंत्रालय के अपर सचिव राजीव रंजन मिश्रा, सीपीडब्‍ल्‍यूडी के महानिदेशक अभय सिन्‍हा, हुडको के मुख्‍य प्रबंध निदेशक डा. रवि कांत, बीएमटीपीसी के कार्यकारी निदेशक डा. शैलेश अग्रवाल, मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारी और भवन निर्माण सामग्री के विभिन्‍न विशेषज्ञ मौजूद थे।
   श्री पुरी ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में इस समय आवास की कमी को ध्‍यान में रखते हुए आवश्‍यक बुनियादी ढांचे के साथ शहरी इलाकों में 1.2 करोड़ से ज्‍यादा मकान बनाने की जरूरत है। इस लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए चारों तरफ उपयुक्‍त कार्रवाई करना जरूरी है। इसमें अन्‍य उपायों के अलावा, उपयुक्‍त भवन निर्माण सामग्री और टेक्‍नोलॉजी की पहचान और उसका चयन शामिल है ताकि न केवल गुणवत्‍ता, टिकाऊपन और गति मिल सके बल्कि सुरक्षा और देश के पर्यावरण हितों की रक्षा हो सके।
    इस अवसर पर श्री पुरी ने ‘निरंतर विकास के लिए भवन निर्माण सामग्री और आवास टेक्‍नोलॉजी’ शीर्षक से एक प्रकाशन और ‘बांस से बने घर और निर्माण’ पर एक मोबाइल एप जारी किया। प्रकाशन में राष्‍ट्रीय सेमिनार विषय वस्‍तु के साथ विभिन्‍न विषयों पर 38 पेपर हैं। राष्‍ट्रीय सेमिनार के साथ भविष्‍य में भवन निर्माण सामग्री और निर्माण टेक्‍नोलॉजी विषय पर एक प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें विभिन्‍न भवन निर्माण उत्‍पाद और निर्माण टेक्‍नोलॉजी को दर्शाया गया है। 24 फर्मों/कंपनियों ने अपने उत्‍पाद, टेक्‍नोलॉजी और प्रणालियां प्रदर्शित की हैं। 
     भवनों के निर्माण में पर्यावरण के अनुकूल, गति के साथ, गुणवत्‍तापूर्ण, मशीनीकरण आदि के लिए भवन निर्माण विज्ञान का विकास हुआ है। बदलती जरूरतों के साथ विभिन्‍न संस्‍थानों और उद्योगों-सार्वजनिक और निजी दोनों के अनुसंधान और विकास प्रयासों के जरिए भवन‍ निर्माण सामग्री और निर्माण कार्य के क्षेत्र में लगातार सुधार हुआ है। उत्‍पादन के क्षेत्र में ईंट गारा, कंक्रीट और स्‍टील जैसी मूलभूत सामग्री के नए अविष्‍कार हुए हैं।
     औद्योगिक और निर्माण कचरे का लाभकारी इस्‍तेमाल हुआ है और विभिन्‍न साझेदारों द्वारा हरित तथा स्‍मार्ट भवन निर्माण सामग्री सहित अत्‍याधुनिक निर्माण तरीकों की शुरूआत की गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना, अमृत और सरकार के स्‍मार्ट सिटी कार्यक्रम के कार्यान्‍वयन के साथ इस क्षेत्र के विकास की समीक्षा जरूरी हो गई है, जिसका उद्देश्‍य आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर निर्माण करना होगा।

शहजादा करीम आगा खान ने राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की

   नई दिल्ली। राष्‍ट्रपति भवन में शहजादा आगा खान का स्‍वागत करते हुए राष्‍ट्रपति ने इस्‍माइली समुदाय के उनके नेतृत्‍व की हीरक जयंती के लिए उन्‍हें बधाई दी।

  उन्‍होंने कहा कि शहजादे ने विनम्रता से समुदाय का नेतृत्‍व किया है और वे मानवता की भलाई के दीप्तिमान उदाहरण हैं।
  राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत देश में और विश्‍व के अन्‍य हिस्‍सों में किये जा रहे विकास संबंधी पहलों में शहजादे आगा खान के समर्थन की सराहना करता है। 
  उन्‍होंने कहा कि आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क (एकेडीएन) के कार्यक्रम और स्‍वच्‍छ भारत, स्किल इंडिया, विरासत संरक्षण, महिला सशक्तिकरण या ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ाना जैसी भारत की महत्‍वपूर्ण पहलें एक दूसरे की पूरक हैं।
    राष्‍ट्रपति ने इस बात पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की कि एकेडीएन ने भारत के साथ न केवल सामाजिक क्षेत्र की परियोजनाओं बल्कि ऐतिहासिक स्‍मारकों के संरक्षण और शहरी नवीनीकरण के क्षेत्र में भी साझेदारी की है। कल दिल्‍ली में संरक्षित की गई सुंदर नर्सरी के उद्घाटन के बारे में बताते हुए राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत विभिन्‍न संरक्षण परियोजनाओं में एकेडीएन की सहायता की सराहना करता है।

Wednesday, 21 February 2018

उत्तराखंड में जल एवं स्‍वच्‍छता को बढ़ावा, गंगा ग्राम का शुभारंभ

  नई दिल्ली। केन्‍द्रीय पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्री सुश्री उमा भारती ने आज एक विशेष पहल के रूप में बागोरी गंगा ग्राम परियोजना, बागोरी में नई स्‍वजल परियोजना और उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के डूंडा गांव में गंगोत्री स्‍वच्‍छ प्रतीक स्‍थल का शुभारंभ किया।

  इन परियोजनाओं से स्‍वच्‍छता सुनिश्चित होने के साथ-साथ गंगा किनारे स्थित गांवों में रहने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाएं भी मिलेंगी। इसके अलावा, रोजगार भी सृजित होंगे। ओडीएफ (खुले में शौच मुक्‍त) गांव बागोरी भी उन 24 पायलट गंगा गांवों में शामिल है जिनका चयन इस वर्ष ‘गंगा ग्राम’ में तब्‍दील करने के लिए किया गया है।
   इस दिशा में पहले कदम के रूप में मंत्री ने बागोरी में 11.88 लाख रुपये की लागत वाली ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन योजना का उद्घाटन किया। उन्‍होंने लोगों से गंगा ग्राम को संपूर्ण अर्थ में एक वास्‍तविकता में तब्‍दील करने के मिशन में शामिल होने का आग्रह किया।
    गंगा जलग्रहण क्षेत्र में वृक्षारोपण को काफी बढ़ावा देने के लिए सुश्री उमा भारती के साथ-साथ उत्तराखंड के पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्री प्रकाश पंत, पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्रालय में सचिव परमेश्‍वरन अय्यर, स्‍थानीय विधायक और केन्‍द्र एवं राज्‍य सरकार के अन्‍य अधिकारियों ने भी धरासू एनएमसीजी नर्सरी में आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लिया। इस वर्ष उत्तरकाशी के गंगा जलग्रहण क्षेत्र में 1.5 लाख से भी ज्‍यादा पौधे लगाए जाएंगे।
   मंत्री ने लोगों से अनुरोध करते हुए कहा कि नदी किनारे वृक्षारोपण करना आम जनता का भी उत्तरदायित्व है। उन्‍होंने यह भी कहा कि समुदायों की भागीदारी के जरिए एकीकृत विकास सुनिश्चित करना गंगा ग्राम अवधारणा के केंद्र में है। सुश्री उमा भारती ने बागोरी में नई स्‍वजल परियोजना का भी उद्घाटन किया जिसके लिए 32 लाख रुपये से भी ज्‍यादा का बजट रखा गया है।
    ‘स्‍वजल’ दरअसल समुदाय के स्‍वामित्‍व वाला पेयजल कार्यक्रम है जिसका उद्देश्‍य पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है। प्रकाश पंत ने कहा कि राज्‍य सरकार उत्तराखंड के सैकड़ों गांवों को जलापूर्ति करने की योजना बना रही है।
   उन्‍होंने लोगों से आगे आने और नई स्‍वजल परियोजना को ठीक उसी तरह से अपनाने का अनुरोध किया जिस प्रकार पुरानी स्वजल योजना को अपनाया गया था। बाद में सुश्री उमा भारती ने सडग गांव का भी दौरा किया जहां वर्ष 1996 से ही स्‍वजल योजना सफलतापूर्वक चलाई जा रही है। केन्‍द्रीय मंत्री ने स्‍वच्‍छ प्रतीक स्‍थल के रूप में गंगोत्री का भी शुभारंभ किया। 
    ओएनजीसी अपने सीएसआर कोष के जरिए गंगोत्री को स्‍वच्‍छता के उच्‍च स्‍तर पर ले जाने में मदद करेगी। इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है। 
    केन्‍द्रीय आवास एवं शहरी मामले, पर्यटन एवं संस्‍कृति मंत्रालयों, राज्‍य सरकारों, नगरपालिका और स्‍थानीय एजेंसियों के सहयोग से पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्रालय (एमडीडब्‍ल्‍यूएस) द्वारा एसआईपी परियोजना का समन्वयन किया जा रहा है। 
   पेयजल एवं स्‍वच्‍छता सचिव, जो स्‍वजल के प्रथम परियोजना निदेशक भी थे, ने अपने संबोधन में गंगा ग्राम, स्‍वजल और एसआईपी परियोजनाओं से संबंधित मंत्रालय की योजनाओं के बारे में संक्षिप्‍त ब्‍योरा पेश किया।

चारधाम परियोजना: उत्‍तराखंड में सिल्‍कयारा बेंद बारकोट टनल को मंजूरी

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने उत्तराखंड में 4.531 किलोमीटर लंबी दो लेन वाली दो तरफा सिल्कयारा बेंद बारकोट टनल के निर्माण को मंजूरी दे दी है।

   इस टनल से निकलने काएक सुरक्षित मार्ग भी होगा। इसमें उत्तराखंड में चैनेज के बीच धारसू-यमनोत्री सेक्शन पर 25.400 किलोमीटर और 51.000 किलोमीटर का दो प्रवेश मार्ग होगा। ये परियोजना उत्तराखंड राज्य में राजमार्ग संख्या 134 (पुराने राजमार्ग संख्या 94) के बीच में पड़ेगी।
   इसका काम इंजीनियरिंग, अधिप्राप्ति और निर्माण मोड के तहत किया जाएगा। इसका वित्त पोषण सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय द्वारा एनएच(ओ) स्कीम के तहत किया गया है। 
  यह महत्वाकांक्षी चार धाम परियोजना का हिस्सा है। परियोजना निर्माण की अवधि 4 वर्ष है। इसके निर्माण पर 1119.69 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत आएगी। परियोजना का कुल खर्च 1383.78 करोड़ रूपये होगा।
    इसमें भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास,निर्माण पूर्व की अन्य गतिविधियां तथा 4 वर्षों तक टनल की मरम्मत और परिचालन के खर्च भी शामिल होंगे। टनल के निर्माण से चारधाम यात्रा के एक धाम यमुनोत्री तक जाने के लिए हर तरह के मौसम में संपर्क मार्ग उपलब्ध होगा।
    इससे क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास के साथ ही व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे धारसू से यमुनोत्री के बीच सड़क मार्ग की दूरी करीब 20 किलोमीटर कम हो जाएगी और यात्रा समय भी करीब एक घंटा कम हो जाएगा।
    प्रस्तावित टनल के निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में उन पेड़ों को हटाने से बचाया जा सकेगा, जिन्हें 25.600 किलोमीटर लंबे सड़क मार्ग के उन्नयन के दौरान मूल नक्शे के तहत काटा जाना था। यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) के जरिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित की जाएगी।
   एनएचआईडीसीएल सरकार की पूर्ण स्‍वामित्‍व वाली कंपनी है, जिसकी स्थापना 2014 में राज्यों से लगी अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर सड़कों के विकास के लिए की गई थी।
      परियोजना का उद्देश्य उत्तराखंड में 4.531 किलोमीटर लंबी दो लेन वाली दो तरफा टनल का निर्माण करना है, इसके साथ ही इसमें 328 मीटर लंबे संपर्क सड़क तथा धारसू-यमनोत्री के बीच निकलने केसुरक्षित मार्ग का निर्माण भी शामिल है।

60,000 करोड़ रुपए का राष्‍ट्रीय शहरी आवास कोष

     नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने 60,000 करोड़ रुपए के राष्‍ट्रीय शहरी आवास कोष (एनयूएचएफ) के गठन को मंजूरी दे दी है।

   यह कोष निर्माण सामग्री एवं प्रौद्योगिकी संवर्धन परिषद (बीएमटीपीसी) में होगा। बीएमपीटीसी आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय का एक स्‍वायत्‍ताशासी निकाय है, जो संस्था पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत पंजीकृत है।
  मंत्रालय ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत अब तक 39.4 लाख मकानों के निर्माण की मंजूरी दी है। राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों की ओर से योजना को अच्‍छी प्रतिक्रिया मिली है।
    योजना के तहत करीब दो-तीन लाख मकान हर महीने मंजूर किए जा रहे हैं। अब तक 17 लाख से ज्‍यादा मकानों का निर्माण शुरू हो चुका है और पांच लाख मकान बनकर तैयार हो चुके हैं।
  प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत ऋण आधारित ब्‍याज सब्सिडी योजना (सीएलएसएस) के तहत जहां आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्‍ल्‍यूएस), निम्‍न आय वर्ग (एलआईजी) और मध्‍य आय वर्ग (एमआईजी) के लाभार्थियों के लिए कर्ज की व्‍यवस्‍था बैंकों और एचएफसी की ओर से की गई है, वहां से लगातार अच्‍छी प्रतिक्रिया मिल रही है।
   योजना के तहत पिछले आठ महीनों में करीब 87 हजार आवास ऋण मंजूर किए जा चुके हैं और 40,000 आवेदन विचारार्थ हैं। देश की आजादी के 75 साल पूरे होने के मौके पर 2022 तक 1.2 करोड़ मकानों की कमी को पूरा करते हुए देश में सबके लिए आवास सुनिश्चित करने का लक्ष्‍य रखा गया है।
     अगले चार वर्षों में एनयूएचएफ जरूरी धन जुटाने का काम करेगा, ताकि लाभार्थी आधारित व्‍यक्तिगत आवास (बीएलसी), भागीदारी में किफायती आवास (एएचएफ), स्‍व-स्‍थाने स्‍लम पुनर्वास (आईएसएसआर) और सीएलएसएस जैसी विभिन्‍न योजनाएं टिकी रह सकें, इनके लिए केन्‍द्रीय मदद का रास्‍ता आसान बनें और शहरी क्षेत्रों में मकानों की कमी को आसानी से पूरा किया जा सके।

Tuesday, 20 February 2018

भारतीय डाक द्वारा ऑनलाइन उपभोक्ता सर्वेक्षण की शुरूआत

   नई दिल्ली। भारतीय डाक ने वर्ष 1854 में अपनी शुरूआत से ही संचार क्षेत्र में देश के नागरिकों की मूलभूत आवश्यकता की पूर्ति की है।

   भारतीय डाक वर्षों से नागरिकों को विभिन्न सेवाएं प्रदान कर रहा है। इनमें घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय डाक सुविधाएं, देश और विदेशो में पैसे भेजने की सुविधाएं, छोटी बचत, डाक टिकट संग्रह, जीवन बीमा, खुदरा सेवाएं और बिल भुगतान आदि सम्मिलित हैं। 
  भारतीय डाक द्वारा नागरिकों को विभिन्न सुविधाएं प्रदान करने के कारण इस संबंध में उनकी प्रतिक्रिया जानना आवश्यक है। सेवा में सुधार और उपभोक्ता संतुष्टि भारतीय डाक के लिए आवश्यक है।
  इस संबंध में भारतीय डाक द्वारा एक ऑनलाइन उपभोक्ता सर्वेक्षण की शुरुआत की गई है, जहां कोई भी उपभोक्ता सेवाओं के संबंध में अपना प्रतिक्रिया और सुझाव प्रदान कर सकता है। 16 फरवरी, 2018 से प्रारंभ हुआ यह सर्वेक्षण तीन माह तक चलेगा और 15 मई, 2018 तक भारतीय डाक की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगा।
   कोई भी नागरिक डाक सेवाओं की गुणवत्ता के संबंध में अपने सुझाव दे सकता है। सर्वेक्षण में प्राप्त सुझावों के आधार पर सेवाओं में सुधार के प्रयास किए जाएंगे और इससे डाक सेवाओं में सुधार के क्षेत्रों की पहचान संभव हो सकेगी।

संसद भवन में शिशु सदन की सुविधा शीघ्र

    नई दिल्ली। संसद भवन में शीघ्र ही शिशु सदन (क्रेच) की स्थापना की जाएगी। लोकसभा अध्यक्ष की प्रत्यक्ष देखरेख में शिशु सदन का विकास कार्य प्रगति पर है और एक वरिष्ठ अधिकारी इसके कार्य पर निगरानी रख रहे हैं। 

   केन्द्रीय महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी ने 29 मार्च, 2017 को लिखे एक पत्र में लोकसभा अध्यक्ष को संसद भवन में शिशु सदन की कमी के संबंध में सूचित किया था। अपने पत्र में श्रीमती गांधी ने कहा कि संसद में कार्य करने वाले कुल अधिकारियो में से एक तिहाई से अधिक महिलाओ के होने के कारण शिशु सदन का प्रावधान अतिआवश्यक है। 
   इस पत्र पर त्वरित कार्रवाई करते हुए लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने सूचित किया कि शीघ्र ही संसद भवन परिसर में शिशु सदन की शुरुआत की जाएगी। इसके बाद महिला और बाल विकास मंत्रालय ने लोकसभा अध्यक्ष को इसके लिए ट्विटर पर धन्यवाद दिया। मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017 के अंतर्गत स्वस्थ कार्यक्षेत्र, विविधता को बनाए रखने और शिशु सदन सुविधा की प्रत्यक्ष स्थापना संबंधी प्रावधान किए गए हैं।
   कर्मचारियों से शिशु सदन पंजीकरण के आवेदन स्वीकार करते समय मानक संचालन प्रकिया (एसओपी) का अनुपालन किया जाता है। 1500 स्वायर फुट के केंद्र का संचालन योग्य व्यक्तियों द्वारा किया जाएगा। जिससे बच्चों का संपूर्ण विकास सुनिश्चित किया जाएगा और इसमें बच्चो को दूध पिलाने के लिए अलग कक्ष का प्रावधान भी किया जाएगा। 
  केंद्र सरकार द्वारा इस महत्वपूर्ण कदम से दूरगामी परिणाम होंगे और इससे निजी संस्थानो,केंद्र और राज्य सरकारो के संगठनो को महिलाओ के लिए शिशु सदन स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा।

Monday, 19 February 2018

22,000 ग्रामीण हाट एवं 585 मण्‍ड़ियों की आधारभूत संरचना का विकास

   नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा है कि सरकार अन्न एवं कृषि उत्पादों के भण्डारो के साथ किसान की जेब को भरा व् उनकी आय को बढ़ा देखना चाहती है।

  सरकार इस दिशा में तेजी से कदम उठा रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने यह बात आज नई दिल्ली में ‘कृषि 2022 - डबलिंग फार्मर्स इनकम’ पर आयोजित की जारी रही दो दिवसीय कार्यशाला (19-20 फरवरी 2018) के उद्घाटन समारोह में कही।
    इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार, कृषि राज्य मंत्री परषोतम रुपाला, गजेन्द्र सिंह शेखावत, श्रीमती कृष्णा राज, कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव एस के पटनायक उपस्थित थे। 
  इनके अलावा केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारीगण, वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री, व्यापार उद्योग के प्रतिनिधि, पेशवरों के संगठन, कॉर्पोरेट एवं निजी क्षेत्र कम्पनियो के प्रतिनिधि, किसान और किसान समितियों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद और बैंकर्स ने भी इस कार्यशाला में हिस्सा लिया। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा सरकार किसानों की आय बढ़ाने के हर संभव प्रयास कर रही है।
    यही वजह है कि वर्ष 2018-19 के लिए कृषि एवं किसान कल्याण के बजटीय आवंटन को पिछले वर्ष यानि 2017-18 के 51,576 करोड़ से बढा कर 2018-19 में 58,080 करोड़ करते हुए, सरकार ने किसानों की आय दोगुना करने के लिए निर्धारित ‘सात सूत्रीय’ रणनीति के प्रत्येक सूत्र के लिए प्रचुर धन राशि की उपलब्धता सुनिश्चित की है। यह बजट किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलवाने के उद्देश्‍य से कृषि मंडियों के लिए नए सुधारों की शुरूआत करता है।
     इस बजट में 2000 करोड़ रुपये की घोषणा की गई है जो कि कृषि विपणन में खुदरा बाजार के महत्व को दर्शाता है। इसके माध्‍यम से 22,000 ग्रामीण हाट एवं 585 मण्‍ड़ियों की आधारभूत संरचना का विकास हो सकेगा।
     श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमत्री के वायदे के मुताबिक 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की वृहद योजना को अमली जामा पहनाने का काम सरकार ने अप्रैल 2016 से ही एक समिति के गठन से शुरू कर दिया था, जिसमे वरिष्ठ अर्थशास्त्री, भारत सरकार के खाद्य प्रसंकरण, फसल, पशु पालन एवं डेरी तथा नीति प्रभागो के संयुक्त सचिव; नीति आयोग के कृषि सलाहकार एवं कई अन्य गैर सरकारी सदस्य को शामिल किया गया।
     सरकार चाहती है कि कृषि नीति एवं कार्यक्रमों को ‘उत्पादन केंद्रित’ के बजाय ‘आय केंद्रित’ बनाया जाए। इस महत्वाकांक्षी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए सरकार द्वारा प्रधानमंत्री जी द्वारा सुझाए ‘बहु-आयामी सात सूत्रीय’ रणनीति को अपनाने पर बल दिया गया, जिसमे शामिल हैं, प्रति बूंद अधिक फसल के सिद्धांत पर पर्याप्त संसाधनों के साथ सिंचाई पर विशेष बल। प्रत्येक खेत की मिटटी गुणवत्ता के अनुसार गुणवान बीज एवं पोषक तत्वों का प्रावधान। कटाई के बाद फसल नुक्सान को रोकने के लिए गोदामों और कोल्डचेन में बड़ा निवेश। खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहन।
     राष्ट्रीय कृषि बाज़ार का क्रियान्वन एवं सभी 585 केन्द्रों पर कमियों को दूर करते हुए ई – प्लेटफार्म की शुरुआत। जोखिम को कम करने के लिए कम कीमत पर फसल बीमा योजना की शुरुआत। डेयरी-पशुपालन, मुर्गी-पालन, मधुमक्खी –पालन, मेढ़ पर पेड़, बागवानी व मछली पालन जैसी सहायक गतिविधियों को बढ़ावा देना।
   केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि भारत जैसे विशाल और आर्थिक विषमताओं वाले देश में दूर-दराज के दुर्गम इलाकों तक और समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक अनाज की भौतिक और आर्थिक पहुँच सुनिश्चित करना एक कठिन चुनौती साबित हो रही थी। परन्तु 2014-15 के दौरान सरकार की अनुकूलनीतियों, कारगर योजनाओं और प्रभावी क्रियान्वयन ने इस कार्य को बखूबी अंजाम दिया।
     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ‘क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर’ विकसित करने की ठोस पहल की गई है। इसके लिये राष्ट्रीय-स्तर की परियोजना लागू की गई है, जिसके अंतर्गत किसानों को जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकें अपनाने के लिये जागरूक एवं सक्षम बनाया जा रहा है।

मानव संसाधन को लाभ में परिवर्तित करना एक बड़ी चुनौती

   मुंबई। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि शिक्षा का इस्‍तेमाल छात्रों में सशक्‍त चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्‍यों के समावेश के लिए होना चाहिए।

   श्री नायडू मुंबई में आर ए पोद्दार कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स के हीरक जंयती समारोह के उद्घाटन के बाद एक सभा को संबोधित कर रहे थे। महाराष्‍ट्र के आवास मंत्री प्रकाश मेहता और गणमान्‍य व्‍यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।
    उपराष्ट्रपति ने इस मौके पर अभिभावकों, शिक्षकों, स्कूलों और कॉलेजों से छात्रों के लिए तनावमुक्‍त वातावरण सुनिश्चित करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि कई बार माता-पिता उन संकेतों या मानसिक तनाव के लक्षणों को समझने में विफल होते हैं, जिससे उनके बच्‍चे जूझ रहे होते हैं।
   श्री नायडू ने कहा कि‍ यह महत्वपूर्ण विषय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मन से करीब से जुड़ा रहा और इसी वजह से उन्‍होंने परीक्षाओं के कारण होने वाले तनाव से मुक्‍त होने के उपायों पर 'परीक्षा वारियर्स' नाम से एक पुस्‍तक भी लिखी है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश के विशाल मानव संसाधन को लाभ में परिवर्तित करना एक बड़ी चुनौती है।
    उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में भारत के विकास की गति को तेज करने के लिए हमें विशाल मानव संसाधन को लाभ के रूप में इस्‍तेमाल करना होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा के जारिए लोगों के व्‍यक्तित्‍व का ऐसा समग्र विकास होना चाहिए जिससे वह अपने करियर के चुनाव तथा आगे अपने जीवन के हर पड़ाव पर जरुरी जानकारियां जुटाने में सक्षम हों सकें।
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि‍ शिक्षा का इस्‍तेमाल युवाओं को सशक्‍त और बौद्धिक रूप से सजग बनाने, उनमें विश्‍लेषण कौशल वि‍कसित करने तथा नयी संभावनाएं तलाशने में सक्षम बनाने के लिए होना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि गुणवत्‍ता और समावेशी शिक्षा प्रदान किए बिना सिर्फ अधिक से अधिक इमारतें बनाने भर से ‘न्‍यू इंडिया’ का निर्माण संभव नहीं होगा। 
    उपराष्‍ट्रपति‍ ने कहा कि शिक्षा सिर्फ सुलभ ही नहीं बल्कि सस्‍ती भी होनी चाहिए और साथ ही लोगों को रोजगार उपलब्‍ध कराने के साथ ही बौद्धिक रूप से जागरुक बनाने का माध्‍यम भी बननी चाहिए।

Sunday, 18 February 2018

स्कूली शिक्षा के प्रारंभिक दिनों में मजबूत नींव डालने की आवश्यकता

    केरल। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि शैक्षणिक संस्थानों को अनिवार्य रूप से छात्रों को विविध और समृद्ध अध्ययन अनुभव प्रदान करना चाहिए।

  वह आज केरल के कोझिकोड में फारूक महाविद्यालय में रौजाथुल उलूम एसोसिएशन के प्लेटिनम जुबली समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केरल के स्थानीय प्रशासन मंत्री के टी जलील एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि जीवन पर्यंत शिक्षार्थी बनने के लिए हमें अपनी स्कूली शिक्षा के प्रारंभिक दिनों में मजबूत नींव डालने की आवश्यकता होती है।
     उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण यह है कि उत्सुक बनने, अवलोकन करने, विश्लेषण करने, समन्वय करने, निष्कर्ष निकालने, परिकल्पना का परीक्षण करने एवं ज्ञान के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की क्षमता विकसित हो। 
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा प्रबंधकों, शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं को एक ऐसी प्रणाली का विकास करना चाहिए जिसमें मार्गदर्शी सिद्धांतों के रूप में ‘समानता‘ और ‘गुणवत्ता‘ हो। उन्होंने कहा कि हमारे लिए प्रत्येक छात्र महत्वपूर्ण है और प्रत्येक छात्र तथा युवाओं के साथ व्यतीत किया गया समय बहुमूल्य होता है।
     उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा मुक्ति का एक माध्यम है और यह हमें निर्भरता से मुक्त करता है और आत्म विश्वास की भावना का संचार करता है। उन्होंने कहा कि अगर हम अच्छी शिक्षा की सुविधा को विस्तारित नहीं करते हैं तो हमारे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच बड़ी खाई उत्पन्न हो जाएगी जो आर्थिक प्रगति का लाभ समाप्त कर सकती है।

21वीं सदी ज्ञान अर्थव्यवस्था का युग

   नई दिल्ली। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने नई दिल्ली में दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी महाविद्यालय की हीरक जयंती समारोहों को संबोधित किया।

  इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के डीएवी परिवार ने हमारे देश में कई पीढि़यों तक आधुनिक वैज्ञानिक परिपेक्ष्यों पर आधारित एवं भारतीय परंपराओं से भी प्रेरित रही शिक्षा प्रदान की है। 
  मानव समाज का स्थायी विकास भारतीय मूल्यों एवं आधुनिक विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के संगम के जरिये संभव है। वास्तव में, डीएवी संस्थानों का दर्शन, जिसकी खोज पहली बार 19वीं शताब्दी में हुई थी, आज 21वीं सदी में भी हमारे लिए मजबूती से खड़ा है। 
    राष्ट्रपति ने कहा कि 21वीं सदी ज्ञान अर्थव्यवस्था का युग है। आज के समय में नए विचारों, नवीन दृष्टिकोण एवं नवोन्मेषण की ताकत धन से कहीं अधिक है। उन्होंने उदाहरण के रूप में ऑनलाइन वाणिज्य, परिवहन एवं पर्यटन में युवाओं एवं उनकी र्स्टाट अप कंपनियों की सफलता की ओर इंगित किया। 
   उन्होंने कहा कि पूंजीगत निवेश से अधिक ऐसी सफलताओं के लिए मानव प्रतिभा एवं बुद्धिमत्ता ज्यादा बड़े कारण हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि रोजगार की परिभाषा बदल रही है। रोजगार अब कोई पारंपरिक नौकरी नहीं रह गया है। अपने लिए एवं दूसरों के लिए स्व रोजगार अवसरों का सृजन करना अब अधिक संभव हो गया है। स्व रोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान कर रही है। 
     उन्होंने छात्रों से अपने कैरियर के विकास एवं दूसरों के लिए अवसरों का निर्माण करने के लिए ऐसे अवसरों का उपयोग करने का आग्रह किया।

Wednesday, 14 February 2018

100 आदर्श स्मारकों में विश्व स्तरीय सुविधाएं उपलब्‍ध

     नई दिल्ली। भारत की गौरवशाली संस्कृति और विरासत के उन्नयन के लिए अपने अथक प्रयासों को जारी रखते हुए भारत सरकार का संस्कृति मंत्रालय पूरे विश्व को भारत की सांस्कृतिक जीवंतता से रू-ब-रू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    आज नई दिल्‍ली में बजट 2018-19 के साथ-साथ संस्कृति मंत्रालय की उपलब्धियों पर भी मीडिया को संबोधित करते हुए संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने आज कहा कि एक राष्‍ट्र के रूप में भारत की विशेष अहमियत को ध्‍यान में रखते हुए देश के नागरिकों विशेष रूप से युवाओं को अपनी स्वदेशी संस्कृति, देश के बहु-आयामी स्वरूप, वैभव, समृद्धि और ऐतिहासिक महत्व से पुनः जोड़ने की अविलंब आवश्यकता है। 
   डॉ. महेश शर्मा ने यह जानकारी दी कि वर्ष 2018-19 में संस्कृति मंत्रालय के बजट आवंटन में लगभग 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2018-19 में संस्कृति मंत्रालय के बजट आवंटन में पिछले बजट (अर्थात् 2,738.47 करोड़ रुपये) की तुलना में 104 करोड़ रुपये (अर्थात् 2483 करोड़ रुपये) की वृद्धि हुई है। कुल वित्तीय आवंटन में से 974.56 करोड़ रुपये भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को आवंटित किए गए है जो वर्ष 2017-18 के आवंटन से 5.42 प्रतिशत अधिक है।
     संस्‍कृति मंत्री ने बताया कि विशेषकर युवाओं के बीच भारतीय संस्‍कृति को लोकप्रिय एवं बहुप्रिय बनाने के लिए संस्‍कृति मंत्रालय द्वारा कई कार्य किए गए हैं जैसे कि 100 आदर्श स्मारक, टिकट वाले सभी स्मारकों हेतु ई-टिकट सुविधा, भारत का सांस्कृतिक मानचित्रण, राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव, गंगा महोत्सव, 8वां थिएटर ओलंपियाड, विदेशों में फेस्टिवल ऑफ इंडिया का आयोजन, डिजिटलीकरण इत्‍यादि। 
    डॉ. महेश शर्मा ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षित प्रतिष्ठित स्मारकों में विश्व स्तरीय सुविधाओं के सृजन पर विशेष बल देने के लिए वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली के प्रति आभार प्रकट किया। आदर्श स्मारकों पर केंद्रीय वित्त मंत्री के बजट भाषण के उद्धरण नीचे दिए गए हैं। बजट घोषणाः भारत में पर्यटन स्थलों की प्रचुरता है। यह प्रस्ताव है कि दस प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों को आधारभूत सुविधाओं व कौशल विकास से युक्‍त व्यावहारिक दृष्टिकोण, प्रौद्योगिकी के विकास, निजी निवेश आकर्षित करके, ब्रांडिंग व विपणन का अनुसरण करते हुए आदर्श पर्यटन गंतव्यों के रूप में विकसित किया जाए।
     इसके अतिरिक्त, आंगुतकों का अनुभव बढ़ाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के 100 आदर्श स्मारकों में पर्यटक सुविधाओं का उन्नयन किया जाएगा। डा. महेश शर्मा ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 10 स्मारकों के संरक्षण और उन्में विश्व स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य पहले ही शुरू कर दिया है।
      शेष स्मारकों (अजंता और एलोरा गुफाएं और गोलकोंडा किला) में सुविधाओं के डिजाइन की तैयारी (डिजाइन, प्राक्कलन आदि) पूरे ज़ोरों पर है जिसे मार्च, 2018 तक पूरा किया जाएगा। ताज महलः भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने सुविधाओं से संबंधित सभी प्रस्तावों को मंजूर कर दिया है। मुख्य चालू कार्यों में यह शामिल है, उन्नत टिकटिंग और लाइन प्रबंधन प्रणाली और ताज परिसर के पूर्वी और पश्चिमी प्रवेश द्वारों के साथ घुमने वाले दरवाजे लगाना, ऊंचे मू्ल्य के टिकट धारकों के लिए विशेष सुविधाएं। आगंतुकों के प्रवेश के लिए स्लॅाट बनाना (3 घंटा प्रत्येक), दक्षिण गेट को प्रवेश के लिए बंद करना, बाहर निकलने की अनुमति होगी। टिकट शुल्क रु. 40 से बढाकर रु. 50 करना, नीरी रिपोर्ट की सिफारिशों के बाद मुख्य समाधियों में प्रवेश के लिए रु. 200 की विशेष टिकट शीघ्र ही शुरु की जाएगी।
    इसका तात्पर्य पैसा कमाना नहीं है अपितु निर्मित भवनों की सुरक्षा और बेहतर जन प्रबंधन सुनिश्चित करना है। ताज कॅारिडोर क्षेत्र में ताज महल और आगरा किले के बीच हरियाली को विकसित करना, महताब बाग से रात्रि दर्शन; और लपका संस्कृति से निपटने के लिए पर्यटन मंत्रालय, एडीए और स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय।
      लाल किलाः स्मारकों के संरक्षण (26 कार्य) से संबंधित तकरीबन 48 चालू कार्य, 6 संग्रहालयों और प्रदर्शनियों को शामिल करने के लिए ब्रिटिश काल के बैरक भवनों का नवीकरण, बगीचों और भूदृश्यों (7 कार्य) का विकास और छाता बाजार की सीलिंग से पेंटिंग्स की वापसी सहित स्मारकों की वैज्ञानिक सफाई (9 कार्य)। प्रमुख कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं, मुगल कालीन भवनों का संरक्षण, भूदृश्यों का विकास, सीपीडब्ल्यूडी को किले के अंदर पूरा इलेक्ट्रीकल सोलूसन को विकसित करने तथा लाहोरी गेट पर प्रोजेक्शन मैपिंग का कार्य सौंपा गया है।
    लाल किले में चार प्रदर्शनियों का आयोजन किया जा रहा है। 1857-भारत के स्वतंत्रता संग्राम की पहली लड़ाई, विश्वयुद्ध-क्ष् में भारत का योगदान, नेताजी सुभाषचंद्र बोस और आईएनए, और सरदार बल्लभ भाई पटेल पर प्रदर्शनी, पुराना किलाः झील के सामने सुविधाएं विकसित करने तथा उनमें सुधार करने के लिए एनबीसीसी का प्रस्ताव। कार्य शीघ्र ही शुरू होना है। भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण ने स्‍मारक के अंदर  संरक्षण कार्य प्रारंभ कर दिया है। 
    हुमायुं का मकबराः एककेटीसी के सहयोग से सुविधाएं मुहैया कराने का कार्य जिसमें एक व्याख्या केंद्र, जलपान गृह, पार्किंग, स्मारिका बिक्री पटल आदि शामिल हैं, पूरे जोरों पर है। खुजराहो मंदिर समूहः राष्ट्रीय संस्कृति निधि योजना के तहत इण्डियन ऑयल फाउण्डेशन के सहयोग से प्रदान की जाने वाले सुविधाओं से संबंधित कार्य।
     इस प्रस्ताव में निम्नलिखित शामिल हैं, सूर्य मंदिर, कोणार्क, ओडिशा: राष्‍ट्रीय संस्‍कृति निधि योजना के तहत इण्‍डियन ऑयल फाउण्‍डेशन के सहायोग से प्रदान की जाने वाले सुविधाओं से संबंधित कार्य। इस प्रस्‍ताव में निम्‍नलिखित शामिल हैं। आगरा किला, हम्‍पी स्‍मारक समूह, तटीय मंदिर महाबलिपुरम और गोलकोंडा किला: प्रथम चरण का कार्य संबंधित अधीक्षण पुरातत्‍वविदों द्वारा पहले ही शुरू कर दिया गया है।
   प्रथम चरण के कार्य में स्‍मारक के अन्‍दर संकेतक, कूड़ेदान रैम्‍प और रास्‍ते, पेयजल सुविधाएं और सफाई शामिल हैं। डा. महेश शर्मा ने प्रेस को 100 आदर्श स्मारकों में विश्व स्तरीय सुविधाएं जैसे शौचालय खण्‍ड, संकेतक, पेय जल सुविधाएं, रास्‍ते और रैंप (दिव्‍यांगों के लिए), बैठने के लिए बेंच, कूड़ेदान, बेहतर पार्किंग सुविधाएं, टिकिट काउंटर और बेहतर पंक्ति प्रबंधन, भूदृश्‍य निर्माण आदि के बारे में भी बताया।
    इसके अलावा, उन्होंने यह भी सूचित किया कि भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण ने 27 आदर्श स्‍मारकों में (प्रथम चरण में) सुविधाएं (पेयजल, बेंच, कूड़ेदान, रैम्‍प और रास्‍ते तथा साफ-सफाई) प्रदान करने का कार्य शुरू कर दिया है। शेष 73 आदर्श स्‍मारकों के लिए प्रस्‍तावों को अनुमोदन प्रदान किया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि सभी 100 स्‍मारकों में डिजाइनिंग और सुविधाओं (शौचालय, जलपान गृह, स्‍मारिका बिक्री पटल, भोजनालय, प्रदीप्‍तीकरण और पार्किंग) के निष्‍पादन के कार्य वापकोस, एन पी सी सी और एन बी सी सी को सौंपने का प्रस्‍ताव है।
  वापकोस और टीसीआईएल ने 218 संरक्षित स्‍मारकों में निर्माण/शौचालय खंडो का नवीकरण शुरू कर दिया है। स्‍मारक परिसरों में किसी प्रकार के अतिक्रमण और अवैध कब्‍जे को विफल करने के लिए अहाता दीवार द्वारा स्‍मारकों और पुरातत्‍वीय स्‍थलों की सुरक्षा करना। करीब 200 स्‍मारकों में अहाता दीवार का कार्य वापकोस और टीसीआईएल को दिया गया है।
   संस्‍कृति मंत्री ने सांस्‍कृतिक मानचित्रण की योजना के बारे में भी विस्‍तार से बताया जिसे 490 करोड़ रुपये के परिव्‍यय के साथ अगले तीन वर्षों के दौरान 622 जिलों में क्रियान्वित किया जा रहा है। इसके तहत देश के हर कोने में मौजूद सभी कलाकारों को केन्‍द्रीय पोर्टल पर पंजीकृत कराया जा रहा है और एक प्रतिस्‍पर्धी प्रक्रिया के जरिए इन कलाकारों को विभिन्‍न श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा।
    इससे न केवल इन कलाकारों को सहायता प्रदान करने में मदद मिलेगी, बल्कि इससे विभिन्‍न कलाओं और शिल्प को संरक्षित करने में भी मदद मिलेगी। संस्‍कृति मंत्री ने बताया कि इस तरह के लगभग 1 करोड़ कलाकार पहले ही इस पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं। संस्‍कृति मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि तीन नए संग्रहालय खोले जाएंगे।
   इसमें से एक संग्रहालय कुंभ मेले की थीम पर इलाहाबाद में खोला जाएगा। इसी तरह अयोध्या में भगवान राम पर एक आभासी (वर्चुअल) संग्रहालय खोला जाएगा। इसी तरह स्थानीय संस्कृति को पर‍लक्षित करने वाला एक संग्रहालय गोरखपुर में खोला जाएगा।

वस्‍त्र क्षेत्र के लिए 6000 करोड़ रुपये के विशेष प्रोत्‍साहन की घोषणा

    नई दिल्ली। केन्‍द्रीय वस्‍त्र मंत्री श्रीमती स्‍मृति जुबिन ईरानी ने कहा है कि सूक्ष्म, लघु व मझौले उद्यमों के पुनर्वर्गीकरण तथा 250 करोड़ रुपये वार्षिक टर्नओवर वाली कम्‍पनियों को कर में 5 प्रतिशत की छूट से विनिर्माण क्षेत्र को सहायता मिलेगी व कपड़ा क्षेत्र में रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

  आज मीडिया को जानकारी देते हुए उन्‍होंने कहा कि रेशम और कृत्रिम धागों पर सीमा शुल्‍क में वृद्धि से बाजार में सस्‍ते चीन निर्मित परिधान उत्‍पाद की बाढ़ को कम करने में मदद मिलेगी। इससे पावरलूम क्षेत्र के घरेलू विनिर्माताओं को लाभ मिलेगा। 
  वस्‍त्र क्षेत्र के लिए 2016 में 6000 करोड़ रुपये के विशेष प्रोत्‍साहन की घोषणा की गई थी। 1800 करोड़ रुपया पहले ही जारी किया जा चुका है। वर्तमान वित्‍तवर्ष में 300 करोड़ रुपये जारी किए जाएंगे। 
     मंत्री ने कहा कि वस्‍त्र उद्योग में कौशल विकास के लिए हुए आवंटन में 100 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हस्‍त निर्मित और मशीन द्वारा निर्मित परिधानों के सदंर्भ में जीएसटी में किए गए सुधार से व्‍यापार करने में आसानी हुई है। धागों पर जीएसटी दर 18 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत कर दी गई है। परिधान क्षेत्र के लिए व्‍यापारिक योजना का समर्थन 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत कर दिया गया है।
     श्रीमती ईरानी ने परिधान क्षेत्र में 16 प्रतिशत की वृद्धि दर का श्रेय सब्सिडी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्‍वयन को दिया। मुद्रा ऋण योजना के तहत 28000 बुनकरों को 138 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी गई। परिधान क्षेत्र में काम करने वाले 1.8 लाख लोगों ने औपचारिक रूप से कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (ईपीएफओ) में खाता खोला है।
     मंत्री ने कहा कि हस्‍तकला शिविरों का दूसरा दौर देश के विभिन्‍न भागों में आयोजित किया जाएगा। इस महीने 19 से 24 तारीख तक आयोजित होने वाले इन शिविरों का विशेष फोकस पूर्वोत्‍तर क्षेत्र होगा। उन्‍होंने बुनकरों को प्रोत्‍साहन देने के उद्देश्‍य से संसद सदस्‍यों को इन शिविरों में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह करते हुए पत्र लिखा है।
     वस्‍त्र मंत्री तथा मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारी इन शिविरों में भाग लेंगे। पहले दौर में पिछले वर्ष 7 से 17 अक्‍तूबर तक देश के 247 जिलों में 394 शिविर आयोजित किए गए थे।

भारत दूध का प्रमुख उत्‍पादक

   मोतिहारी। केन्‍द्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री राधामोहन सिंह ने आज मोतिहारी में पूर्वी चंपारण जिले के प्रथम डेयरी संयंत्र की आधारशिला रखी। श्री सिंह ने इस अवसर पर उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि भारत एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गया है कि वह अब अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी उद्यमियों को बड़ी संख्‍या में अवसर प्रदान करने लगा है।

   कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा की गई विभिन्‍न पहलों से ही डेयरी क्षेत्र में उल्‍लेखनीय विकास संभव हो पाया है। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने दुधारू पशुओं की उत्‍पादकता बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएं क्रियान्वित की हैं।
    श्री सिंह ने कहा कि भारत दूध का प्रमुख उत्‍पादक है और वह पिछले दो दशकों से वैश्विक स्‍तर पर नंबर वन पायदान पर विराजमान है। दूध उत्‍पादन साठ के दशक के लगभग 17-22 मिलियन टन से बढ़कर वर्ष 2016-17 में 165.4 मिलियन टन के अत्‍यंत उच्‍च स्‍तर पर पहुंच गया है। वर्ष 2013-14 के मुकाबले वर्ष 2016-17 में दूध उत्‍पादन में 20.12 प्रतिशत की उल्‍लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। 
     श्री सिंह ने कहा आगे कहा कि 2016-17 के दौरान प्रति व्‍यक्ति दुग्‍ध उपलब्‍धता में 15.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2013-14 में प्रति व्‍यक्ति दुग्‍ध उपलब्‍धता 307 ग्राम थी, जो 2016-17 में बढ़कर 355 ग्राम हो गई है। इसी तरह 2014-17 के दौरान डेयरी उद्योग से जुड़े किसानों की आय में 2011-14 की तुलना में 23.77 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पिछले 3 वर्षों के दौरान भारत में दुग्‍ध उत्‍पादन में 6.3 प्रतिशत प्रति वर्ष की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वैश्विक वृद्धि दर 2.1 प्रतिशत से अधिक है। 
     कृषि मंत्री ने कहा कि विशेषकर भूमिहीन और सीमांत किसानों के लिए डेयरी उद्योग आजीविका के साधन और खाद्य सुरक्षा के रूप में विकसित हुआ है। लगभग 8 करोड़ किसान डेयरी व्‍यापार से जुड़े हुए हैं और ये कुल दुधारू पशुओं के 80 प्रतिशत का पालन-पोषण करते हैं। पशुपालन, डेयरी और मत्‍स्‍य पालन विभाग ने कई योजनाएं प्रारंभ की हैं, जिनका उद्देश्‍य डेयरी उद्योग से जुड़े किसानों की आय को दोगुना करना है। भारत के 75वें स्‍वतंत्रता दिवस (2022) के अवसर पर किसानों की आय दोगुनी करने के प्रधानमंत्री के लक्ष्‍य को ध्‍यान में रखते हुए इन योजनाओं को लागू किया गया है। डेयरी उद्योग से जुड़े किसानों की आय दोगुनी करने के लिए दो तरीके अपनाये जा सकते हैं- पहला, उत्‍पादकता बढ़ाकर दुग्‍ध उत्‍पादन में वृद्धि और दूसरा, दूध की प्रति किलोग्राम कीमत बढ़ाकर। 
    श्री सिंह ने कहा कि दुधारू पशुओं की देसी नस्‍लों के संरक्षण और विकास के लिए दिसंबर 2014 में पहली बार देश में राष्‍ट्रीय गोकुल मिशन शुरू किया गया। इस योजना के तहत 28 राज्‍यों से प्राप्‍त प्रस्‍तावों के लिए 1350 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसमें से 503 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं। कृषि मंत्री ने कहा कि गोकुल ग्राम की स्‍थापना राष्‍ट्रीय गोकुल मिशन का एक प्रमुख हिस्‍सा है। 
     उन्‍होंने कहा कि गोकुल ग्राम दुधारू पशुओं की देसी नस्‍लों के विकास में मुख्‍य भूमिका निभाएंगे। इन केन्‍द्रों में विकसित किए गए देसी नस्‍ल के पशु किसानों को पशु प्रजनन के लिए उपलब्‍ध कराए जाएंगे। देश में इस समय 12 अलग-अलग राज्‍यों में 18 गोकुल ग्राम स्‍थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा सरकार ने आंध्र प्रदेश में नेल्‍लौर के चिंतालादेवी में तथा मध्‍य प्रदेश में होशंगाबाद के इटासी में देसी नस्‍ल के दुधारू पशुओं के संरक्षण और विकास के लिए दो प्रजनन केन्‍द्र बना रही है।
    इसमें से चिंतालादेवी केन्‍द्र का काम पूरा हो चुका है। इन केन्‍द्रों को राष्‍ट्रीय कामधेनु प्रजनन केन्‍द्र का नाम दिया गया है। नई योजना के तहत गायों की 41 और भैंसो की 13 प्रजातियों को संरक्षित किया जाएगा। केन्‍द्रीय मंत्री ने कहा कि दुधारू पशुओं की प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए नवम्‍बर 2016 में 825 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ राष्‍ट्रीय गोकुल मिशन के तहत राष्‍ट्रीय पशु उत्‍पादकता मिशन की शुरूआत की गई।
      इसका उद्देश्‍य देश में दुग्‍ध उत्‍पादन में बढ़ोतरी के साथ इस व्‍यवसाय को ज्‍यादा लाभकारी बनाना है। इस बीच, पशु संजीवन के तहत देश में विशिष्‍ट पहचान पत्र के जरिए 9 करोड़ दुधारू पशुओं की पहचान की जा रही है। सरकार ने इस योजना के लिए धन आवंटित कर दिया है। इस योजना के तहत सभी पशुओं को नकुल स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड जारी करने की भी व्‍यवस्‍था की गई है।

Tuesday, 13 February 2018

सरकारी महिला कर्मचारियों को भी सैरोगेसी मातृत्व अवकाश

  नई दिल्ली। केंद्रीय पूर्वोत्तर विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा व अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि महिला सरकारी कर्मचारियों को सैरोगेसी के अंतर्गत भी मातृत्व अवकाश का लाभ मिलेगा।

  उन्होंने कहा कि तलाकशुदा बेटियों को भी पारिवारिक पेंशन के योग्य माना जाएगा यदि तलाक का मुकदमा पेंशनभोगी/ पारिवारिक पेंशनभोगी के मृत्यु के पूर्व दाखिल किया गया हो।
  ऐसी स्थिति में भी वह पारिवारिक पेंशन की हकदार होगी, यदि मुकदमे का फैसला पेंशनभोगी/ पारिवारिक पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद आया हो। मंत्री आज यहां कार्मिक, लोक शिकायत व पेंशन मंत्रालय द्वारा आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
    उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि दिव्यांग व्यक्ति की देखभाल करने वाले की पेंशन राशि 4500 रुपये से बढ़ाकर 6750 रुपये प्रति माह कर दी गई है। उन्होंने कहा कि ये क्रांतिकारी कदम हैं जो लैंगिंक समानता को बढ़ावा देंगे। भविष्य के समाज को ध्यान में रखते हुए ये मात्र वित्तीय सुधार नहीं है बल्कि सामाजिक सुधार है। 
   डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का जोर कमजोर तबको का कल्याण करने पर है। इस साल के बजट में वरिष्ठ नागरिकों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस अवसर पर मंत्री ने सरकार तथा मंत्रालय द्वारा प्रारंभ किए गए विभिन्न कार्यक्रमों का उल्लेख किया। केंद्रीय कार्मिक व प्रशिक्षण सचिव अजय मित्तल, डीएआरपीजी व पेंशन सचिव वी के येपेन तथा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

भारत का वन क्षेत्र दुनिया के शीर्ष दस देशों में

    नई दिल्ली। केन्‍द्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने देश में वनाच्‍छादित क्षेत्रों में हो रही वृद्धि के महत्‍व को रेखांकित करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में दुनिया भर में जहां वन क्षेत्र घट रहे हैं वहीं भारत में इनमें लगातर बढोतरी हो रही है।

   डॉ. हर्ष वर्धन ने आज यहां ‘भारत वन स्‍थिति रिपोर्ट 2017’ जारी करते हुए कहा कि वन क्षेत्र के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष 10 देशों में है। उन्‍होंने कहा कि ऐसा तब है जबकि बाकी 9 देशों में जनसंख्‍या घनत्‍व 150 व्‍यक्‍ति/वर्ग किलोमीटर है और भारत में यह 382 व्‍यक्‍ति/वर्ग किलोमीटर है।
    उन्‍होंने कहा कि भारत के भू-भाग का 24.4 प्रतिशत हिस्‍सा वनों और पेड़ों से घिरा है, हालांकि यह विश्‍व के कुल भूभाग का केवल 2.4 प्रतिशत हिस्‍सा है ओर इनपर 17 प्रतिशत मनुष्‍यों की आबादी और मवेशियों की 18 प्रतिशत संख्‍या की जरूरतों को पूरा करने का दवाब है।
   डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि वनों पर मानवीय आबादी और मवेशियों की संख्‍या के बढ़ते दवाब के बावजूद भारत अपनी वन सम्‍पदा को संरक्षित करने और उसे बढ़ाने में सफल रहा है। उन्‍होंने कहा कि संयुक्‍त राष्‍ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत को दुनिया के उन 10 देशों में 8 वां स्‍थान दिया गया है जहां वार्षिक स्‍तर पर वन क्षेत्रों में सबसे ज्‍यादा वृद्धि दर्ज हुई है।
    भारत वन स्‍थिति रिपोर्ट का हवाला देते हुए डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि ताजा आकलन यह दिखाता है कि देश में वन और वृक्षावरण की स्‍थिति में 2015 की तुलना में 8021 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। उन्‍होंने कहा कि इसमें 6,778 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि वन क्षेत्रों में हुई है, जबकि वृक्षावरण क्षेत्र में 1243 वर्ग किलोमीटर की बढोत्‍तरी दर्ज की गई है। देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र में वनों और वृक्षावरण क्षेत्र का हिस्‍सा 24.39 प्रतिशत है। 
   पर्यावरण मंत्री ने कहा कि इसमें सबसे उत्‍साहजनक संकेत घने वनों का बढ़ना है। घने वन क्षेत्र वायुमंडल से सर्वाधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्‍साइड सोखने का काम करते हैं। उन्‍होंने कहा कि घने वनों का क्षेत्र बढ़ने से खुले वनों का क्षेत्र भी बढ़ा है।
   उन्‍होंने कहा कि रिपोर्ट तैयार करने में वैज्ञानिक पद्धति का इस्‍तेमाल किया गया है। राज्‍यों में वनों की स्‍थिति के राज्‍यवार आंकड़े पेश करते हुए डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि इस मामले में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल का प्रदर्शन सबसे अच्‍छा रहा। आंध्र प्रदेश में वन क्षेत्र में 2141 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई, जबकि कर्नाटक 1101 किलोमीटर और केरल 1043 वर्ग किलोमीटर वृद्धि के साथ दूसरे व तीसरे स्‍थान पर रहा।
    उन्‍होंने कहा कि क्षेत्र के हिसाब से मध्‍य प्रदेश के पास 77414 वर्ग किलोमीटर का सबसे बड़ा वन क्षेत्र है, जबकि 66964 वर्ग किलोमीटर के साथ अरूणाचल प्रदेश और छत्‍तसीगढ क्रमश: दूसरे व तीसरे स्‍थान पर है। कुल भू-भाग की तुलना में प्रतिशत के हिसाब से लक्षद्वीप के पास 90.33 प्रतिशत का सबसे बड़ा वनाच्‍छादित क्षेत्र है। इसके बाद 86.27 प्रतिशत तथा 81.73 प्रतिशत वन क्षेत्र के साथ मिजोरम और अंडमान निकोबार द्वीप समूह क्रमश: दूसरे व तीसरे स्‍थान पर है।
   डॉ. हर्ष वर्धन ने वन  रिपोर्ट तैयार करने को एक बड़ा काम बताते हुए कहा कि वर्ष 2019 में जारी की जाने वाली अगली रिपोर्ट के लिए काम अभी से शुरू कर दिया गया है। केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु राज्‍य मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि रिपोर्ट तैयार करने के दौरान 1800 स्‍थानों का व्‍यक्‍तिगत रूप से और वैज्ञानिक तरीके से सर्वेक्षण किया गया।
     उन्‍होंने समाज और मीडिया से वन क्षेत्रों के संरक्षण जैसे बड़े काम में पूरा सहयोग देने की अपील की। पर्यावरण मंत्रालय में सचिव सी.के. मिश्रा ने वनों के आर्थिक महत्‍व को रेखांकित करते हुए कहा कि वनों के महत्‍व को समझा जाना चाहिए और वन सम्‍पदा का इस्‍तेमाल तर्कसंगत तरीके से होना चाहिए। उन्‍होंने जोर देकर कहा कि वनों का महत्‍व उसमें तथा उसके आस-पास रहने वाले लोगों के लिए सबसे अधिक है, इसलिए यह समझना सबसे जरूरी है कि आखिर यह पूरी कोशिश किसके लिए की जा रही है।
    श्री मिश्रा ने कहा कि वनों के महत्‍व को अलग संदर्भ में नहीं देखा जा सकता। वनों के फायदे आम लोगों तक पहुंचे यह देखा जाना जरूरी है। उन्‍होंने कृषि वानिकी और वन क्षेत्रों के क्षरण पर विशेष ध्‍यान दिए जाने पर भी जोर दिया। रिपोर्ट के ताजा आंकलन के अनुसार देश के 15 राज्‍यों और केंद्रशासित प्रदेशों का 33 प्रतिशत भू-भाग वनों से घिरा है। 
    इनमें से 7 राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों जैसे मिजोरम, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, नगालैंड, मेघालय और मणिपुर का 75 प्रतिशत से अधिक भूभाग वनाच्‍छादित है, जबकि त्रिपुरा, गोवा, सिक्‍किम, केरल, उत्‍तराखंड, दादर नागर हवेली, छत्‍तीसगढ और असम का 33 से 75 प्रतिशत के बीच का भूभाग वनों से घिरा है। देश का 40 प्रतिशत वनाच्‍छादित क्षेत्र 10 हजार वर्ग किलोमीटर या इससे अधिक के 9 बड़े क्षेत्रों के रूप में मौजूद है।
    भारत वनस्‍थिति रिपोर्ट 2017 के अनुसार देश में कच्‍छ वनस्‍पति का क्षेत्र 4921 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें वर्ष 2015 के आकलन की तुलना में कुल 181 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। कच्‍छ वनस्‍पति वाले सभी 12 राज्‍यों में कच्‍छ वनस्‍पति क्षेत्र में पिछले आंकलन की तुलना में सकारात्‍मक बदलाव देखा गया है। कच्‍छ वनस्‍पति जैव विविधता में समृद्ध होती है जो कई तरह की पारिस्‍थितिकीय आवश्‍यकताओं को पूरा करती है।
    रिपोर्ट के अनुसार देश में वाह्य वन एवं वृक्षावरण का कुल क्षेत्र 582.377 करोड़ घन मीटर अनुमानित है, जिसमें से 421.838 करोड़ घन मीटर क्षेत्र वनों के अंदर है, जबकि 160.3997 करोड़ घन मीटर क्षेत्र वनों के बाहर है। पिछले आंकलन की तुलना में बाह्य एवं वृक्षावरण क्षेत्र में 5.399 करोड़ घन मीटर की वृद्धि हुई है, जिसमें 2.333 करोड़ घन मीटर की वृद्धि वन क्षेत्र के अंदर तथा 3.0657 करोड़ घन मीटर की वृद्धि वन क्षेत्र के बाहर हुई है।
    इस हिसाब से यह वृद्धि पिछले आंकलन की तुलना में 3 करोड़ 80 लाख घन मीटर रही। रिपोर्ट में देश का कुल बांस वाला क्षेत्र 1.569 करोड़ हेक्‍टेयर आकलित किया गया है। वर्ष 2011 के आकलन की तुलना में देश में कुल बांस वाले क्षेत्र में 17.3 लाख हेक्‍टेयर की वृद्धि हुई है। बांस के उत्‍पादन में वर्ष 2011 के आकलन की तुलना में 1.9 करोड़ टन की वृद्धि दर्ज हुई है।
    सरकार ने वन क्षेत्र के बाहर उगाई जाने वाली बांस को वृक्षों की श्रेणी से हटाने के लिए हाल ही में संसद में एक विधेयक पारित किया है। इससे लोग निजी भूमि पर बांस उगा सकेंगे जिससे किसानों की आजीविका बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे देश में हरे-भरे क्षेत्रों का दायरा भी बढ़ेगा और कार्बन सिंक बढाने में भी मदद मिलेगी।
  वन महानिदेशक और विशेष सचिव डॉ. सिद्धांत दास, अतिरिक्‍त महानिदेशक श्री एस.दास गुप्‍ता के अलावा भारतीय वन सर्वेक्षण विभाग के कई वरिष्‍ठ सेवा निवृत्‍त अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्‍थित थे। रिपोर्ट में दी गई जानकारी देश की वन सम्‍पदा की निगरानी और उसके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित प्रबंधन व्‍यवस्‍था और नीतियां तय करने में काफी सहायक है।
   यह रिपोर्ट भारत सरकार की डिजिटल इंडिया की संकल्‍पना पर आधारित है, इसमें वन एवं वन संसाधनों के आकलन के लिए भारतीय दूर संवेदी उपग्रह रिसोर्स सेट-2 से प्राप्‍त आंकड़ों का इस्‍तेमाल किया गया है। रिपोर्ट में सटीकता लाने के लिए आंकड़ों की जांच के लिए वैज्ञानिक पद्धति अपनाई गई है।
   जल संरक्षण के मामले में वनों के महत्‍व को ध्‍यान में रखते हुए रिपोर्ट में वनों में स्‍थित जल स्रोतों का 2005 से 2015 के बीच की अवधि के आधार पर आकलन किया गया है, जिससे पता चला है कि ऐसे जल स्रोतों में आकलन अवधि के दौरान 2647 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज हुई है।