Wednesday, 14 December 2016



स्थानीय सरकार की प्रबंधकीय क्षमता बढ़ाएंगे : नायडू

समावेशी, सुरक्षित, लचीले एवं टिकाऊ शहरों के निर्माण के जरिये न्यायसंगत शहरी विकास के सपने को साकार करने हेतु अगले 20 वर्षों के लिए क्रियान्वयन योजना विकसित करने पर विशेष जोर देते हुए एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 68 देशों ने नई दिल्ली में अपने तीन दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ किया। आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन और शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने ‘आवास एवं शहरी विकास संबंधी एशिया-प्रशांत मंत्रिस्तरीय सम्मेलन’ का उद्घाटन किया।

 नायडू ने कहा कि शहरी विकास के लाभों से किसी भी व्यक्ति का वंचित न रहना सुनिश्चित करने और शहरों को समावेशी, सुरक्षित, लचीला (प्राकृतिक आपदाओं एवं अन्य जोखिमों का सामना करने की क्षमता) और टिकाऊ बनाने में गवर्नेंस ही कुंजी है। इस क्षेत्र के ज्यादातर देशों में गवर्नेंस से जुड़ी संरचनाओं के अत्यंत कमजोर रहने पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान सरकार ने भारत में शहरों की स्थानीय सरकारों की तकनीकी, नियोजन एवं प्रबंधकीय क्षमताएं बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न नए शहरी मिशनों के तहत ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने, क्षमता निर्माण, शहरों के संसाधन आधार में वृद्धि, इत्यादि के जरिये इसे सुनिश्चित किया जा रहा है। नायडू ने यह भी कहा कि सतत विकास के तीन सिद्धांतों अर्थात न्याय संगतता, अर्थव्यवस्था एवं पर्यावरण में चौथे आयाम के रूप में गवर्नेंस को भी जोड़ने की जरूरत है। नायडू ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र का वैश्विक शहरी आबादी में 55 फीसदी हिस्सा है। एक अरब से भी अधिक लोग झुग्गियों में रहते हैं और प्राकृतिक आपदाओं के कारण पूरी दुनिया में होने वाली मौतों में 75 फीसदी हिस्सा इसी क्षेत्र का है।

नायडू ने सदस्य देशों से आग्रह किया कि इस क्षेत्र में हो रहे त्वरित शहरीकरण से उपजी चुनौतियों का सामना करने के लिए वे एकजुट होकर प्रयास करें। मंत्री ने कहा कि दुनिया के 15 सबसे बड़े शहरों में से 10 शहर इसी क्षेत्र में हैं, जिनमें से टोक्यो, नई दिल्ली और शंघाई की गिनती शीर्ष 3 शहरों में होती है। इस तथ्य के मद्देनजर अगले दो वर्षों के दौरान इस क्षेत्र में व्यापक शहरीकरण तय है। अगले 20 वर्षों के लिए भारत की शहरी विकास रणनीतियों का विवरण देते हुए नायडू ने कहा कि नए शहरी एजेंडे के उद्देश्यों में सहकारी संघवाद के अनुरूप एकीकृत शहरी नीतियां तैयार करना, पूंजी के प्रवाह, भूमि एवं श्रम से संबंधित बाधाओं को हटाना और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में परस्पर तालमेल बैठाते हुए इनका विकास करना भी शामिल हैं।