Tuesday, 3 January 2017

कुपोषित गर्भवती महिला को 6000 का लाभ


            देश में गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली माताओं को लाभ पहुंचाने के लिए मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम का अखिल भारतीय विस्‍तार किया गया है। भारत सरकार मानव विकास के लिए पोषण के रूप में विशेष तौर पर सर्वाधिक कमजोर समुदायों में प्रत्‍येक महिला की इष्‍टतम पोषण स्थिति को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

           यह गर्भावस्‍था और स्‍तनपान दोनों की अवधि के दौरान अधिक महत्‍वपूर्ण है। एक महिला के पोषण की स्थिति और उसके स्‍वास्‍थ्‍य प्रभावों के साथ-साथ उसके शिशु के स्‍वास्‍थ्‍य और विकास के लिए भी महत्‍वपूर्ण है। कुपोषित महिला अधिकांश कम वजन वाले बच्‍चे को जन्‍म देती है। इस कुपोषण का प्रारंभ गर्भाशय से होता है तो विशेष रूप से इसका प्रभाव महिला के सम्‍पूर्ण जीवन चक्र पर पड़ता है। आर्थिक और सामाजिक दवाब के कारण बहुत सी महिलाओं को अपनी गर्भावस्‍था के अंतिम दिनों तक परिवार के लिए आजीविका कमानी पड़ती है। समाधान के लिए महिला और बाल विकास मंत्रालय ने राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अनुसार गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं के लाभ हेतु सशर्त नकद हस्‍तांतरण योजना मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम का गठन किया गया था।

            इस योजना के अंतर्गत गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली माताओं को नकद प्रोत्‍साहन प्रदान किया जाता है। इस योजना में प्रसव से पूर्व और पश्‍चात आराम, गर्भधारण और स्‍तनपान की अ‍वधि में स्‍वास्‍थ्‍य और पोषण स्थिति में सुधार एवं जन्‍म के छह महीनों के दौरान बच्‍चे को स्‍तनपान कराना बच्‍चे के विकास के लिए अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है। इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार, राज्‍य सरकार अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में नियमित रूप से रोजगार करने वाली अथवा इसी प्रकार की किसी योजना की पात्र महिलाओं को छोड़कर सभी गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली माताओं को पहले दो जीवित शिशुओं के जन्‍म के लिए तीन किस्‍तों में 6000 रुपये का नकद प्रोत्‍साहन देय है। मातृत्‍व लाभ करीब 51.70 लाख गर्भवती महिलाओं को मिलने की उम्‍मीद है।

विश्‍व में बसे 3.12 करोड़ भारतीय

          वर्तमान में लगभग 3.12 करोड़ अर्थात करीब 31.2 मिलियन प्रवासी भारतीय समूचे विश्‍व में बसे हुए हैं। जिनमें से 1.34 करोड़ अर्थात 13.4 मिलियन व्‍यक्ति भारतीय मूल के हैं। 1.78 करोड़ अर्थात 17.8 मिलियन अनिवासी भारतीय हैं। 

        प्रथम प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन नई दिल्‍ली में जनवरी 2003 में किया गया था। अब तक प्रवासी भारतीय दिवस सम्‍मेलनों के 13 संस्‍करणों का आयोजन हो चुका है। पिछले का आयोजन दक्षिण अफ्रीका से महात्‍मा गांधी की वापसी की 100वीं वर्षगांठ के साथ जनवरी, 2015 में गुजरात के गांधी नगर में किया गया था। 7 जनवरी को युवा प्रवासी भारतीय दिवस का उद्घाटन युवा मामले एवं खेल मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) विजय गोयल और विदेश राज्‍य मंत्री जनरल वी. के. सिंह के द्वारा किया जायेगा।

            सूरीनाम के 36 वर्षीय उप-राष्‍ट्रपति माइकल अश्विन अधिन विशेष अतिथि होंगे। युवा प्रवासी भारतीय दिवस सत्र में युवा प्रवासी भारतीयों को भारत की संस्‍कृति और विरासत के साथ-साथ समकालीन भारत दोनों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और भारतीय जड़ों से जोड़ने की मंशा रहेगी। ‘‘भारत के परिवर्तन में प्रवासी युवाओं की भूमिका’’ विषय के साथ उद्घाटन सत्र होगा। ‘‘भारत को जानो’’ कायक्रमों के अंतर्गत युवा प्रवासी भारतीय दिवस में भारतीय मूल के करीब 160 युवा भागीदारी करेंगे। मिशन और विदेशों में स्‍थित वाणिज्य दूतावास 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस मनाएंगे। प्रवासी भारतीय में 4000 से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है।

अब 'पासपोर्ट" भी  होंगे 'डिजीटल"


अब 'पासपोर्ट" भी 'डिजीटल" होंगे। जी हां, भारत सरकार ने पासपोर्ट बनवाने के सिस्टम को काफी सरल करने के साथ ही डिजीटल सेप देने का मन बनाया है। इससे पासपोर्ट को रखने व खोने का झंझट खत्म हो जायेगा। डिजीटल अथवा ई-पासपोर्ट को चाहे मोबाइल में रखें या फिर कम्प्यूटर में सुरक्षित रखें। 

    अब पासपोर्ट बनवाएंगे तो बॉयोमीट्रिक जानकारियों वाला ई-पासपोर्ट आएगा। केंद्र सरकार पासपोर्ट जैसे दस्‍तावेजों को और ज्‍यादा सुरक्षित बनाने के लिए नए ई-पासपोर्ट जारी करेगी। ई-पासपोर्ट में इलेक्‍ट्रॉनिक चिप होगी। इस चिप में वो सारी सूचनाएं होगी जो पासपोर्ट के डाटा पेज पर होती हैं। ई-पासपोर्ट के जरिए इमिग्रेशन अधिकारियों को धोखाधड़ी का पता लगाने और पासपोर्ट का गलत इस्‍तेमाल रोकने में मदद मिलेगी। विदेश मंत्रालय ई-पासपोर्ट के बाद डिजिटल पासपोर्ट को लांच कर सकता है। इस डिजिटल पासपोर्ट को मोबाइल में भी रखा जा सकेगा। 

           संसद के शीतकालीन सत्र में विदेश राज्‍य मंत्री विदेश मंत्री वी के सिंह ने कहा था कि केंद्र सरकार ने नासिक के इंडिया सिक्‍योरिटी प्रेस में ई-पासपोर्ट को बनाने के लिए इलेक्‍ट्रॉनिक कॉन्‍टेक्‍टलेस इनलेजस की खरीद को मंजूरी दी थी। भारत सरकार ने पासपोर्ट बनवाने के सिस्टम को काफी सरल बनाया है।  बर्थ सर्टिफिकेट के लिए अब तक नियम था कि 1989 के बद पैदा हुए लोगों को पासपोर्ट बनवाने के लिए बर्थ सर्टिफिकेट देना जरूरी होगा लेकिन अब इसमें बदलाव कर दिया गया है। अब जन्मतिथि के प्रूफ के तौर पर बर्थ सर्टिफिकेट के अलावा स्कूल का ट्रांसफर सर्टिफिकेट या किसी एजुकेशन बोर्ड से जारी हाईस्कूल का सर्टिफिकेट दिया जा सकता है। इनकम टैक्स विभाग से जारी पैन कार्ड भी दिया जा सकता है। इसमें आवेदन करने वाले की जन्मतिथि होना जरूरी है। बर्थ सर्टिफिकेट के तौर पर आधार कार्ड भी दिया जा सकता है। इसमें जन्मतिथि होनी चाहिए। ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र और जीवन बीमा कंपनी से जारी किया गया पॉलिसी बॉन्ड भी दिया जा सकता है। शीघ्र ही डाक घर भी पासपोर्ट बनाएंगे।