Monday, 13 November 2017

भारत की प्रथम एयर डिस्पेंसरी पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्‍थापित की जाएगी

     नई दिल्ली। देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में ही भारत की प्रथम एयर डिस्पेंसरी स्‍थापित की जाएगी, जो एक हेलिकॉप्‍टर में अवस्थित होगी।

 केन्‍द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (डोनर) मंत्रालय ने इस पहल के लिए आरंभिक वित्त पोषण के एक हिस्‍से के रूप में 25 करोड़ रुपये का योगदान पहले ही कर दिया है।
    इस आशय की जानकारी यहां देते हुए केन्‍द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार), पीएमओ, कार्मिक, जन शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्‍य मंत्री डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय इस तरह के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में हेलिकॉप्‍टर आधारित डिस्पेंसरी-ओपीडी सेवा सुलभ कराने की संभावनाएं तलाश रहा था।
      उन्होंने कहा कि ऐसे सुदूरवर्ती क्षेत्रों में यह सेवा उपलब्‍ध कराई जाएगी जहां कोई भी डॉक्‍टर या चिकित्‍सा सुविधा सुलभ नहीं होती है और जरूरतमंद मरीजों को किसी भी तरह की चिकित्‍सा सेवा नहीं मिल पाती है। 
    उन्‍होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय का यह प्रस्‍ताव स्‍वीकार कर लिया गया है और यह अब केन्‍द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय में अनुमोदन के अंतिम चरण में है। डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने विमानन क्षेत्र और हेलिकॉप्‍टर सेवा/पवन हंस के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद ये बातें कहीं।
    डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि केन्‍द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय इस प्रस्‍ताव को गंभीरता के साथ आगे बढ़ा रहा है, ताकि वर्ष 2018 के आरंभ में यह केन्‍द्र सरकार की ओर से पूर्वोत्तर क्षेत्र की आम जनता को एक अनुपम उपहार के रूप में प्राप्‍त हो सके।
   डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने यह जानकारी दी कि आज भी भारत की लगभग एक तिहाई आबादी को अस्‍पतालों में समुचित ढंग से बिस्तर उपलब्‍ध नहीं हो पाता है जिसके चलते दूरदराज के इलाकों में रहने वाले निर्धन मरीजों को आवश्‍यक चिकित्‍सा सेवा सुलभ नहीं हो पाती है।
     उन्‍होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की पहल पर पूर्वोत्तर क्षेत्र में किए जा रहे इस प्रयोग को अन्‍य पहाड़ी राज्‍यों जैसे कि हिमाचल प्रदेश और जम्‍मू-कश्‍मीर में भी अपनाया जा सकता है। डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि आरंभ में इस योजना के तहत हेलिकॉप्‍टर को दो स्‍थलों यथा मणिपुर के इम्‍फाल और शिलांग के मेघालय में अवस्थित किया जाएगा।
     इन दोनों ही शहरों में प्रमुख स्नातकोत्तर चिकित्सा संस्थान हैं जहां के विशेषज्ञ डॉक्टर आवश्‍यक उपकरणों एवं सहायक कर्मचारियों के साथ हेलिकॉप्‍टर के जरिए पूर्वोत्तर क्षेत्र के सभी आठों राज्‍यों के विभिन्‍न स्‍थानों पर पहुंच कर डिस्‍पेंसरी/ओपीडी सेवा मुहैया करा सकते हैं।
      उन्‍होंने कहा कि वापसी के दौरान उसी हेलिकॉप्‍टर से जरूरतमंद मरीज को शहर में लाकर संबंधित अस्‍पताल में भर्ती भी कराया जा सकता है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए अन्‍य नई हेलिकॉप्‍टर सेवाएं उपलब्‍ध कराने की योजनाओं का उल्‍लेख करते हुए उन्‍होंने कहा कि आरंभ में इम्‍फाल, गुवाहाटी और डिब्रुगढ़ के आसपास अवस्थित क्षेत्र में छह मार्गों पर दोहरे इंजन वाले तीन हेलिकॉप्‍टरों का परिचालन सुनिश्चित किया जाएगा।

सामाजिक आधारभूत ढांचे के विकास में शिक्षा की अहम भूमिका

   नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि सामाजिक आधारभूत ढांचे के विकास में शिक्षा की अहम भूमिका है। 
  शिक्षा निर्धनता और पिछड़ेपन के दुष्चक्र को रोकने में सफल रहती है। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू इस्कॉन के संस्थापक और आचार्य श्रील भक्तिवेदांता स्वामी प्रभुपाद की 121 वीं जयंती के अवसर पर आयोजित पूर्व पश्चिम संस्कृति समारोह को संबोधित कर रहे थे।
   उपराष्ट्रपति नायडू ने कहा कि सदियों से भारत ने ज्ञान के साथ-साथ अपनी समृद्ध संस्कृति का केंद्र होने के कारण असंख्य लोगों को जीवन के सही मार्ग पर चलने की शिक्षा दी है। 
     उन्होंने कहा कि भारत महापुरूषों को धरती रहा है, जिन्होंने मानवता की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। वेंकैया नायडू ने कहा कि वैश्वीकरण और प्रौद्योगिकी के कारण आज विश्व एक दूसरे के संपर्क में है। बहुसंस्कृतिवाद सार्वलौकिक है।
       उन्होंने कहा इन सब की शुरूआत से पहले स्वामी प्रभुपाद ने पूर्व और पश्चिम के बीच एक सेतु का निर्माण किया था जोकि संस्कृति का सेतु था। इसने भारत की विशाल सांस्कृतिक विरासत से पश्चिम का परिचय कराया। 
     उपराष्ट्रपति ने कहा कि हम एक विशेष समय में मिल रहे है जहा एक और दुनियाभर में विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से प्रगति हो रही है और वही दूसरी और आतंकवाद पर्यावरण में गिरावट, नशीले पदार्थों का सेवन, घृणा, भूखमरी और निर्धनता चुनौतियों के रूप में हमारे सामने खड़ी है।
    उन्होंने कहा कि संस्कृति दूसरे मायनों में सामाजिक आधारभूत ढांचे को संभालने वाला शक्ति है और यह नैतिक और न्यायसंगत मूल्यों में जान डाल देती है। ये मूल्य आज के आधुनिक जीवन शैली में तेजी से विलुप्त हो रहे हैं।