Wednesday, 22 February 2017

हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में आपसी संबंध मजबूत

             पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) धर्मेन्‍द्र प्रधान हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में पड़ोसी देश के साथ क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने के उद्देश्‍य से म्‍यांमार के आधिकारिक दौरे पर हैं।

            भारत और म्‍यांमार के बीच ऐतिहासिक एवं घनिष्‍ठ संबंध रहे हैं, जो समय के साथ निरंतर मजबूत होते रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि दोनों ही देश लंबी भूमि एवं समुद्री सीमा को साझा करते हैं। ‘लुक ईस्‍ट’ नीति के एक महत्‍वपूर्ण हिस्‍से के तहत भारत म्‍यांमार को आसियान देशों के लिए मैत्री संपर्क के रूप में देखता है। प्रधान के इस दौरे से पहले म्‍यांमार के राजकीय काउंसलर डाव आउंग सैन सू कई ने अक्‍टूबर, 2016 में भारत की यात्रा की थी। प्रधान की यात्रा गत अक्‍टूबर माह के बाद दोनों देशों के बीच प्रथम मंत्रिस्‍तरीय दौरा है और इसके साथ ही यह पिछले 12 वर्षों में किसी भी भारतीय पेट्रोलियम मंत्री की पहली यात्रा है।

                अपनी यात्रा के दौरान प्रधान ने म्‍यांमार में अपने समकक्ष महामहिम यू पे जिन टुन से भेंट कीं, जो म्‍यांमार के केंद्रीय विद्युत एवं ऊर्जा मंत्री हैं। उन्‍होंने हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में द्विपक्षीय भागीदारी के विभिन्‍न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। अपस्‍ट्रीम क्षेत्र में दोनों ही नेताओं ने म्‍यांमार के अपस्‍ट्रीम क्षेत्र में भारत की तेल एवं गैस कंपनियों की मौजूदा एवं भावी भागीदारी पर विचार-विमर्श किया। वर्तमान में ओएनजीसी विदेश लि. (ओवीएल) और गेल ने म्‍यांमार के गैस उत्‍पादक ब्‍लॉकों में निवेश कर रखा है।

            ओवीएल और ऑयल इंडिया लि. ने उत्‍खनन ब्‍लॉकों में निवेश किया है। म्‍यांमार में होने वाले आगामी बोली दौर में भारतीय अपस्‍ट्रीम कंपनियों की रुचि होने के बारे में म्‍यांमार पक्ष को बता दिया गया है। 



 

गर्भवती महिलाओं के लिए चिंता

           महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी ने बच्चों को जन्म देने के लिए  गर्भवती महिलाओं को सी-सेक्शन सर्जरी के लिए मजबूर करने की अस्पतालों की बढ़ती प्रवृत्ति के बारे में गहरी चिंता व्यक्त की है। 

         विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि सी-सेक्शन सर्जरी सामान्य रूप से कुल डिलिवरी की 10 से 15 प्रतिशत होनी चाहिए। हालांकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण परिवार-4 रिपोर्टों में इस प्रतिशतता को बहुत अधिक बताया गया है। तमिलनाडु में यह प्रतिशतता 34 प्रतिशत और तेलंगाना में 58 प्रतिशत पायी गयी है। निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में यह स्थिति चिंताजनक रूप से बहुत अधिक है। तेलंगाना में, निजी अस्पतालों में सी-सेक्शन डिलिवरी करवाने वाली  महिलाओं की संख्या कुल डिलिवरी की 75 प्रतिशत है। श्रीमती मेनका संजय गांधी को सुबर्णा घोष की एक याचिका प्राप्त हुई है। 

           इस याचिका पर एक लाख से अधिक महिलाओं ने हस्ताक्षर कर रखे हैं। श्रीमती मेनका संजय गांधी ने इस मामले को स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा के साथ उठाया है। उन्होंने सुझाव दिया गया है कि इस खतरनाक प्रवृत्ति में कटौती करने का एक तरीका यह है कि सभी अस्पतालों और नर्सिंग होम में होने वाले सामान्य प्रसवों की तुलना में सी-सेक्शन सर्जरियों के संबंध में जानकारी का सार्वजनिक खुलासा करने का आदेश दिया जाए है। उन्होने यह भी सुझाव दिया है कि स्वास्थ्य मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सहयोग से चिकित्सीय समुदाय के साथ भावी माताओं के साथ-साथ मिलकर एक अभियान चला सकता है। 

            स्वास्थ्य मंत्री को भेजे अपने संदेश में श्रीमती मेनका संजय गांधी ने इस ओर इशारा किया है कि सी-सेक्शन सर्जरी से न केवल माता के स्वास्थ्य पर बल्कि प्रसव के बाद उसके लगातार काम करने की क्षमता पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है। अधिकांश मामलों में सी-सेक्शन सर्जरी ने महिला के प्रजनन स्वास्थ्य को भी प्रभावित किया है।

अंत्योदय एक्सप्रेस राष्ट्र को समर्पित

                  रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने अंत्योदय एक्सप्रेस के 22 डिब्बों की नई रेक का निरीक्षण किया। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ए. के. मित्तल, सदस्य (यातायात) मोहम्मद जमशेद, सदस्य (रोलिंग स्टॉक) रविंद्र गुप्ता, सदस्य (ट्रैक्शन) ए. के. कपूर, रेलवे बोर्ड के अन्य सदस्य और उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आर. के.  कुलश्रेष्ठ तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद थे। 

             प्रभु ने नई अंत्योदय रेक की सराहना की है और इसे देश की आम जनता को समर्पित किया।  रेल गाड़ियों में यात्री सुविधाओं के स्तर में सुधार करने के लिए लगातार प्रयासों और एक मजबूत ब्रांड का सृजन करने के लिए रेलमंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने रेल बजट भाषण 2016-17 में यह घोषणा की थी कि इस सरकार का सचमुच मानना ​​है कि आम आदमी के जीवन में सुधार लाए बगैर भारत का भाग्य नहीं बदलेगा। आम आदमी न केवल हमारे नीति निर्माण का केंद्र बिंदु है बल्कि सार्वजनिक बहस और हमारी विचार धारा में भी सर्वव्यापी है।

              हम आम आदमी के लिए सघन मार्गों पर चलाई जाने वाली लंबी दूरी की पूरी तरह अनारक्षित, सुपरफास्ट ट्रेन सेवा शुरू करने का प्रस्ताव करते हैं। इस संबंध में 22 अंत्योदय डिब्बे इंटेग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई में तैयार किए गए। ये डिब्ब पूरी तरह अनारक्षित एलएचबी द्वितीय श्रेणी के हैं। जिनमें,  कुशन लगी सामान रैक जो सीटों के रूप में प्रयोग की जा सकती हैं।   डूरवे क्षेत्र में अतिरिक्त हैंडहोल्ड्स लगे हैं। सामान रैक के पास जे-हुक लगाए गए हैं।  

            डिब्बे के दोनों सिरों पर मल्टीपल यूनिट केबल लगाए गए हैं। डिब्बों में यात्रियों की आंतरिक आवाजाही के लिए गलियारे की व्यवस्था। पीने योग्य पानी की मशीन,  मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट, चोरी रोकने के लिए ताले लगे अग्निशमन यंत्र, एफआरपी (फाइबर प्रबलित प्लास्टिक) मॉड्यूलर शौचालय, सुखदायक इंटीरियर रंग योजना,  शौचालय प्रयोग में होने की सूचना देने वाला डिस्प्ले बोर्ड,  एलईडी लाइट्स,  डोरवे और गैंगवे में एसएस स्लिप फ्री फर्श, बाह्य पेंटिंग के लिए रोधी भित्तिचित्र कोटिंग,। यात्री जनता को सस्ते मूल्य पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अंत्योदय एक्सप्रेस गाड़ियों की शुरूआत भारत रेलवे के प्रयास में एक प्रमुख कदम होगा। इससे भारतीय रेलवे एक मजबूत ब्रांड के रूप में उभरेगी।

साइबर स्वच्छता केंद्र : बॉटनेट क्लीनिंग एवं मालवेयर विश्लेषण केंद्र का शुभारंभ

               ‘स्‍वच्‍छ भारत’ अभियान का दायरा बढ़ाकर इसमें साइबर वर्ल्‍ड को भी लाते हुए इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने उन मालवेयर एवं बॉटनेट के विश्‍लेषण के लिए साइबर स्‍वच्‍छता केंद्र-बॉटनेट क्‍लीनिंग एवं मालवेयर विश्‍लेषण केंद्र का शुभारंभ किया जो नेटवर्कों एवं प्रणालियों को बुरी तरह प्रभावित कर देते हैं।

            यह इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान का एक हिस्‍सा है। जिसका उद्देश्‍य भारत में बॉटनेट के संक्रमण का पता लगाकर एक सुरक्षित साइबर स्‍पेस का सृजन करना,  अधिसूचित करने के साथ-साथ क्‍लीनिंग को सुनिश्‍चित करना,  अंतिम उपयोगकर्ताओं की प्रणालियों को सुरक्षित करना है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। इस केंद्र का परिचालन इंडियन कंप्यूटर एमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन) द्वारा किया जा रहा है। इस केंद्र का लक्ष्‍य सरकार और उद्योग जगत के बीच आपसी समन्‍वय को बढ़ाना है, ताकि सभी उपयोगकर्ताओं के बीच साइबर स्‍वच्‍छता को प्रोत्‍साहित किया जा सके। इसके साथ ही भारत में एक सुदृढ़ एवं सुरक्षित इंटरनेट परितंत्र का सृजन भी किया जा सके। 

                इस अवसर पर इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा, ‘भारत पूरी दुनिया की अंकरूपण (डिजिटाइजेशन) प्रक्रिया की अगुवाई करने जा रहा है। भारत उन देशों के प्रतिष्‍ठित क्‍लब में शामिल हो गया जिन्‍होंने अपने नागरिकों के इस्‍तेमाल के लिए मालवेयर क्‍लीनिंग प्रक्रियाएं पहले से ही स्‍थापित कर रखी हैं। वर्तमान में हमारे यहां ऐसे 13 बैंक और इंटरनेट सेवा प्रदाता हैं, जो इस सुविधा का उपयोग कर रहे हैं। देश में डिजिटल दायरे का विस्‍तार होने के साथ ही मुझे वर्ष के आखिर तक साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में स्‍टार्ट-अप की संख्‍या में काफी वृद्धि होने की उम्‍मीद है।’ 

                 रवि शंकर प्रसाद ने यह भी कहा, ‘विभिन्‍न क्षेत्रों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका और इंटरनेट के जरिए लेन-देन एवं डेटा के आदान-प्रदान में हो रही वृद्धि के साथ-साथ डिजिटल इंडिया की दिशा में तेजी से बढ़ते हमारे कदमों को देखते हुए साइबर सुरक्षा सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण कारक के रूप में उभर कर सामने आई है। प्रधानमंत्री ने यह बात दोहराई है। साइबर खतरों का सामना करना कोई ऐसा कार्य नहीं है जो सिर्फ सरकार अथवा किसी संगठन अथवा किसी व्‍यक्‍ति द्वारा ही संपन्‍न किया जाए।

                      इसके लिए भागीदारी की अवधारणा को अपनाने की जरूरत है। आज लांच किया गया यह केंद्र इंटरनेट सेवा प्रदाताओं और उद्योग जगत के साथ तालमेल बैठाकर काम करेगा। यह केंद्र नागरिकों के बीच बॉटनेट और मालवेयर संक्रमण के बारे में जागरूकता भी बढ़ाएगा। इसके अलावा यह केंद्र लोगों की डिवाइस को सुरक्षित रखने के लिए आवश्‍यक कदम भी उठाएगा।’
 

              मंत्री ने साइबर स्‍वच्‍छता केंद्र का शुभारंभ करने के अवसर पर घोषणाएं कीं, राष्‍ट्रीय साइबर समन्‍वय केंद्र का परिचालन जून, 2017 तक शुरू हो जाएगा। क्षेत्रवार सीईआरटी का गठन किया जाएगा, जो सीईआरटी-इन के अंतर्गत काम करेंगी। सीईआरटी का गठन राज्‍य स्‍तर पर भी किया जाएगा।  10 और एसटीक्‍यूसी (मानकीकरण परीक्षण और गुणवत्ता प्रमाणन) इकाइयों की स्‍थापना की जाएगी। ऐसे किसी  भी स्‍टार्ट-अप को परीक्षण शुल्‍क देना होगा, जो साइबर सुरक्षा की तलाश में कोई डिजिटल प्रौद्योगिकी पेश करेगा, इसमें 50 प्रतिशत की कमी की जाएगी। सशक्त नामित फॉरेंसिक लैब्स साइबर अपराध को साबित करने वाले एक प्रमाणित प्राधिकरण के रूप में काम करेंगी। 

                केंद्र सरकार इस दिशा में इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (आईएसपी) और एंटी-वायरस कंपनियों के साथ अच्‍छा तालमेल बैठाते हुए कार्य करेगी। इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में सचिव सुश्री अरुणा सुंदरराजन ने कहा, ‘हमारे देश में आईसीटी से जुड़े बुनियादी ढांचे के बढ़ते दायरे को देखते हुए साइबर सुरक्षा का खतरा अब और भी ज्‍यादा गंभीर एवं प्रत्‍यक्ष हो गया है। आज आम आदमी को हैंकिंग, स्‍पैमिंग, मालवेयर और आंकड़ों की चोरी होने की समस्‍याओं का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, इसके बावजूद इन मसलों के साथ-साथ इनसे संरक्षण के बारे में जागरूकता काफी कम है।

                इस दिशा में आपस में सहयोग करने के साथ-साथ साइबर स्‍वच्‍छता केंद्र जैसे सोल्‍यूशंस पेश करने की जरूरत है ताकि भारत के नागरिकों के लिए एक सुदृढ़ एवं सुरक्षित साइबर वर्ल्‍ड सुनिश्‍चित किया जा सके।’ यूएसबी प्रतिरोध, यह एक डेस्‍कटॉप सिक्‍योरिटी सोल्‍यूशन है, जो यूएसबी मास स्टोरेज डिवाइस के खतरों से रक्षा करता है। एपसंविद, यह एक डेस्‍कटॉप सोल्‍यूशन है, जो व्हाइट लिस्‍टिंग के जरिए वास्‍तविक एप्‍लीकेशन को इंस्‍टॉल करने की सुविधा देकर प्रणालियों की रक्षा करता है।

            इससे द्वेषपूर्ण एप्‍लीकेशन से होने वाले खतरों की रोकथाम करने में भी मदद मिलती है। एम-कवच, यह स्‍वदेश में ही विकसित किया गया एक सोल्‍यूशन है, जो मोबाइल में उभरने वाले सुरक्षा संबंधी खतरों का निवारण करता है।

दवाइयों की गुणवत्ता , विश्व का सबसे बड़ा दवा सर्वेक्षण

            स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने नकली और बिना मानक गुणवत्ता वाली दवाइयों की समस्याओं के लिए एक सर्वेक्षण करने से संबंधित कार्य राष्ट्रीय बायोलॉजिकल्स संस्थान (एनआईबी), नोएडा को सौंपा था। एनआईबी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। 

           आवश्यक दवाइयों की राष्ट्रीय सूची (एनएलईएम) 2011 के 15 विभिन्न चिकित्सीय श्रेणियों से संबंधित 224 दवाई मोलेक्यूल्स को दवाई सर्वेक्षण के सांख्यिकीय डिजाइन में शामिल किया गया है। इस सर्वेक्षण के एक हिस्से के रूप में 23 खुराक फॉर्म्स नमूनों से संबंधित 47,954 दवा नमूनों को खुदरा ब्रिकी केंद्रों, सरकारी सूत्रों और आठ हवाई अड्डों और समुद्री बंदरगाहों सहित 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 654 जिलों की आपूर्ति श्रृंखला से लिया गया है। 

               1800 से अधिक नमूना लेने वाले अधिकारियों (एसडीओ) और सिविल सोसायटी / भारतीय फार्मेसी परिषद (पीसीआई) के प्रतिनिधियों को दवाई सर्वेक्षण पद्धति का राष्ट्रव्यापी प्रशिक्षण देश भर में 28 केंद्रों पर दिया गया। सिविल सोसायटी / भारतीय फार्मेसी परिषद (पीसीआई) के प्रतिनिधियों की भूमिका यह देखने की थी कि दवाओं के नमूने दवाई पद्धति के अनुसार लिए गए हैं। किसी पूर्वाग्रह को दूर करने के लिए अत्यधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता बरती गई है।

                सभी नमूनों की परीक्षण / विश्लेषण भेषज आवश्यकताओं के अनुसार एनएबीएल से मान्यता प्राप्त केन्द्र और राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में की जाए। कुल मिलाकर 47,012 नमूनों में से 13 नमूने नकली पाए गए। 1,850 नमूने (एनएसक्यू) मानक गुणवत्ता के नहीं पाए गए। इस प्रकार भारत में बिना मानक क्वालिटी की दवाइयां 3.16 प्रतिशत और नकली दवाइयां 0.0245 प्रतिशत पाई गई।

             दवाइयों की गुणवत्ता निर्धारित करने के लिए किया गया। यह औषधि सर्वेक्षण अभी तक का वैज्ञानिक रूप से डिजाइन किया गया सबसे बड़ा और पेशेवर रूप से निष्पादित किया गया सर्वेक्षण है। इस पूरी सर्वेक्षण रिपोर्ट को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट  तथा केन्द्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की वेबसाइट पर है।

कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमत 55.37 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल



         पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीनस्‍थ पेट्रोलियम नियोजन एवं विश्‍लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के सूचना के अनुसार भारतीय बास्‍केट के कच्चे तेल की अंतर्राष्‍ट्रीय कीमत 55.37 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई। यह 20 फरवरी, 2017 को दर्ज कीमत 54.97 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से अधिक है।

              रुपये के संदर्भ में भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत 21 फरवरी, 2017 को बढ़कर 3708.85 रुपये प्रति बैरल हो गई, जबकि 20 फरवरी, 2017 को यह 3681.51 रुपये प्रति बैरल थी। रुपया 21 फरवरी, 2017 को 66.98 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर के स्तर पर बंद हुआ।

राष्‍ट्रपति का गुयाना के गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्‍या पर संदेश

             राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सहकारी गणराज्‍य गुयाना के गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर वहां की सरकार और लोगों को बधाई तथा शुभकामनाएं दी हैं। 

           राष्ट्रपति मुखर्जी ने सहकारी गणराज्‍य गुयाना के राष्‍ट्रपति महामहिम ब्रिगेडियर (सेवा निवृत्‍त) डेविड आर्थर ग्रेन्‍जर को भेजे अपने संदेश में कहा, ‘मुझे, भारत सरकार, यहां के लोगों और अपनी ओर से गुयाना के गणतंत्र दिवस के अवसर पर महामहिम आपको बधाई देते हुए काफी प्रसन्‍नता हो रही है। भारत और गुयाना के बीच संबंध साझा मूल्‍यों और समान विचारों की ठोस नींव पर आधारित है।

        हाल ही में प्रधानमंत्री मोसेज नागामोतो की भारत यात्रा और सितम्‍बर 2016 में न्‍यूयॉर्क में संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा (यूएनजीए) से अलग गुयाना तथा भारत के विदेश मंत्रियों की बैठक से हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और बल मिला है।

             मुझे विश्‍वास है कि आगामी वर्षों में दोनों देशों के बीच सहयोग और बढ़ेगा। मैं इस अवसर पर महामहिम आपके कल्‍याण और गुयाना के मित्रवत लोगों की सतत प्रगति और समृद्धि की कामना करता हूं।

राष्‍ट्रपति का ब्रुनेई दारुस्सलाम के राष्‍ट्रीय दिवस की पूर्व संध्‍या पर संदेश

             राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने ब्रुनेई दारुस्सलाम के राष्ट्रीय दिवस की पूर्व संध्या पर वहां के सुल्‍तान और लोगों को बधाई तथा शुभकामनाएं दी हैं।

             राष्ट्रपति मुखर्जी ने ब्रुनेई दारुस्सलाम के सुल्‍तान महामहिम हाजी हसन-अल बलकि़या मुइज्‍जा‍द्दीन वद्दौलाह को भेजे अपने संदेश में कहा, ‘मुझे, भारत सरकार, यहां के लोगों और अपनी ओर से ब्रुनेई दारुस्सलाम के राष्‍ट्रीय दिवस के अवसर पर महामहिम आपको और वहां के लोगों को बधाई देते हुए काफी प्रसन्‍नता हो रही है। भारत और ब्रुनेई दारुस्सलाम के बीच मित्रता और सहयोग के पारंपरिक नजदीकी संबंध है। 

              मुझे विश्वास है कि दोनों मित्र देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध और सुदृढ़ होंगे तथा आगामी वर्षों में इससे दोनों ओर के लोगों को फायदा होगा। महामहिम मैं आपके बेहतर स्वास्थ्य और कल्‍याण तथा ब्रुनेई दारुस्सलाम के मित्रवत लोगों की सतत प्रगति और समृद्धि की कामना करता हूं।

अमेरिका में नए प्रशासन के बाद द्विपक्षीय आवाजाही की एक अच्‍छी शुरुआत

           संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका के कांग्रेस के एक 26 सदस्‍यीय द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्‍त रूप से प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी से मुलाकात की। 

          प्रधानमंत्री ने भारत में प्रतिनिधियों का स्‍वागत किया। उन्‍होंने कहा कि यह अमेरिका में नए प्रशासन व कांग्रेस के बाद द्विपक्षीय आवाजाही की एक अच्‍छी शुरुआत का शुभ संकेत है। प्रधानमंत्री ने राष्‍ट्रपति डॉनल्‍ड ट्रंप के साथ हुई अपनी सकारात्‍मक बातचीत को याद किया। उन्‍होंने पिछले ढाई साल के दौरान उपजे संबंधों को और गहराई देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई। 

             इस संदर्भ में उन्‍होंने भारत-अमेरिकी भागीदारी के लिए कांग्रेस के मजबूत द्विदलीय समर्थन को माना। प्रधानमंत्री ने उन संभावित क्षेत्रों के बारे में अपना दृष्टिकोण साझा किया जहां दोनों देश कहीं अधिक करीबी के साथ काम कर सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क को कहीं अधिक सुविधाजनक बनाने की कोशिश की गई।

             जिससे एक-दूसरे की समृद्धि में योगदान करने में मदद मिली। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री ने अमेरिकी अर्थव्‍यवस्‍था और समाज को समृद्ध बनाने में कुशल भारतीय प्रतिभाओं की भूमिका का उल्‍लेख किया। उन्‍होंने कुशल पेशेवरों की आवाजाही पर एक विचारात्‍मक, संतुलित और दूरदर्शी दृष्टिकोण विकसित करने का आग्रह किया।