Thursday, 24 August 2017

भारत नेपाल में बुनियादी ढांचा बनाने, सामाजिक संस्थानों की स्थापना के लिए कटिबद्ध

        उप-राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि भारत नेपाल में भौतिक बुनियादी ढांचा बनाने, सामाजिक संस्थानों की स्थापना के लिए कार्य कर रहा है। उप-राष्ट्रपति ने भारत दौरे पर आए नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा से आज मुलाकात के दौरान ये बातें कहीं।

     उप-राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी बात-चीत से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही टेराई रोड, रेल लिंक, एकीकृत चेक पोस्टों के साथ ही रक्सौल-आमलेखगंज तेल पाइपलाइन जैसे परियोजनाओं पर भी नए सिरे से ध्यान दिया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि जलविद्युत क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग की भी अपार संभावनाएं थी। दोनों देशों को 1996 में हस्ताक्षरित पंचेश्वर परियोजना के शीघ्र परिचालन के लिए काम करना चाहिए। इसके साथ जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हमें दोनों देशों के लोगों के लाभ के लिए जल संसाधन क्षेत्र में भी अपने सहयोग को बढ़ाने की आवश्यकता है। 
  उप-राष्ट्रपति ने कहा कि नेपाल अपने सबसे प्रमुख कार्य संविधान को लागू करने और प्रगतिशील और समावेशी राजनीतिक एजेंडे की स्थापना करने में लगी हुई है। नेपाल के समाज के हर वर्ग की आकांक्षाओं को पूरा करने वाली एक राजनीतिक व्यवस्था स्थापित करना जैसे महत्वपूर्ण कार्य में भी लगी है। 
     उन्होंने स्थानीय निकाय चुनावों के दो चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री और नेपाल सरकार को बधाई दी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत को नेपाल में आगामी चुनाव में किसी भी चुनाव संबंधी सहायता करने में खुशी होगी। 
   उप-राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों के बीच खुली सीमा होना हमारे संबंधों को विशिष्टता प्रदान करती है। इससे दोनों देशों के लोगों को काफी लाभ भी होता है। उन्होंने चेतावनी दी कि हमें दुश्मनों द्वारा खुली सीमा के दुरुपयोग के प्रति सतर्क भी रहना चाहिए। 
       उन्होंने कहा कि भारत नेपाल पुलिस और सशस्त्र बल पुलिस को उपकरणों, वाहनों और प्रशिक्षण के माध्यम से सुदृढ़ता प्रदान कर रहा है। उप-राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सभी पड़ोसी देशों के साथ काम करना चाहता है। हमारी सरकार का प्रयास 'सबका सहयोग, सबका विकास' भारत और भारत के बाहर दोनों जगह लागू होता है। 
       उन्होंने आगे कहा कि भारत अन्य सभी पड़ोसी देशों के साथ समावेशी विकास प्राप्त करने की इच्छा रखता है। उन्होंने कहा कि भारत नौकरी बढ़ाने तथा सभी पड़ोसी देशों के घरेलू क्षेत्रों की विकास के लिए भी सहायता प्रदान करने को उत्सुक है।

भारत-नेपाल आर्थिक साझेदारी के उर्जा, जल संसाधन, निवेश पर सहमत

      प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि भारत को छीमेकी मित्र राष्ट्र नेपाल को प्रधान मंत्री शेर बहादुर देउबा जी, अन्य नेपाली अतिथिगण, तपायींहरू का भारत मा हार्दिक स्वागत गर्दा मलाई धेरे ख़ुशी लागद छ मेरा सौभाग्य है कि मुझे भारत में प्रधानमंत्री देउबा जी का स्वागत करने का अवसर मिला है।

     प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि आपकी ये यात्रा एक ऐसे ऐतिहासिक समय पर हो रही है जब हम अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। हालांकि हमारे संबंध हिमालय जितने पुराने हैं। 
  प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि हमारे दोनों देशों की नियति एक दूसरे से जुड़ी हुई है। एक दूसरे की समृद्धि और सुख में दोनों देशों की ही महत्वपूर्ण भागीदारी रही है। हम एक दूसरे की उपलब्धियों पर गर्व करते हैं, ठीक वैसे ही, जैसे एक दूसरे की पीड़ा का अनुभव भी करते हैं। एक करीबी पड़ोसी और मित्र देश की तरह भारत, नेपाल में शांति, स्थायित्व और उसकी आर्थिक समृद्धि के प्रति हमेशा सजग रहता है। भारत को नेपाल के विकास और आर्थिक प्रगति के प्रयासों में साझीदार होने का सौभाग्य प्राप्त है। 
        प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि लोकतंत्र से आई उन्नति, शांति की स्थापना और सर्वांगीण विकास के लिए नेपाल के नागरिकों की उपलब्धियों की हम भूरी भूरी प्रशंसा करते है, सराहना करते हैं। मैं नेपाल सरकार को बधाई देता हूं कि स्थानीय निकाय के चुनावों को दो चरणों में सफलता पूर्वक कराया गया। नेपाल में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए, आपने जिस तरह व्यक्तिगत तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उसकी हम प्रशंसा करते हैं। 
         मुझे पूरा विश्वास है कि आपके कुशल और अनुभवी नेतृत्व में, समाज के सभी वर्गों से बात करने की प्रक्रिया को जारी रखते हुए, नेपाल अपने सभी नागरिकों की आकांक्षाओं को समाहित करते हुए, संविधान को सफलता के साथ लागू कर सकेगा। साथियों, आज प्रधानमंत्री देउबा और मैंने, दोनों देशों की साझेदारी की असीम संभावनाओं पर बहुत विस्तार से और बहुत सकारात्मक बातचीत की है। हमने विभिन्न स्तर पर, अलग-अलग क्षेत्रों में, दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने वाले नए रास्तों और नए अवसरों पर विशेष तौर से ध्यान दिया है।
      हमें खुशी है कि नेपाल में भारत के सहयोग से चल रही विकास परियोजनाओं, जैसे काम हो रहा है। आज, हमने संयुक्त रूप से कटैया-कुसहा और रक्सौल-परवानिपुर ट्रांसमिशन लाइन्स का उद्घाटन किया है। इससे भारत द्वारा नेपाल को दी जा रही लगभग 350 मेगावॉट बिजली में 100 मेगावॉट अतिरिक्त बिजली और जुड़ जाएगी। हम अपनी आर्थिक साझेदारी के विभिन्न आयामों, जैसे उर्जा, जल संसाधन और भूकंप के बाद के कार्यों में साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
       प्रधानमंत्री देउबा और मैं इस बात पर सहमत हुए हैं कि पहले से चल रहे कार्यों को तय समय सीमा में पूरा करने के लिए अपने प्रयास हम और बढ़ाएंगे। मुझे ख़ुशी हुई जब देउबा जी ने मुझे बताया की अरुण-3 (थ्री) के लिए नेपाल में भूमि का मामला सुलझा लिया गया है। मैं देउबाजी का धन्यवाद करता हूं कि उसके शिलान्यास के लिए उन्होंने मुझे नेपाल का निमंत्रण दिआ है, मैं उनका आभारी हूँ। हम इस बात भी सहमत हुए हैं कि पंचेश्वर प्रोजेक्ट के लिए अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में भी तेजी लाई जाएगी। 
    नेपाल में आई बाढ़ के संदर्भ में बात करें, तो मैंने भारत की तरफ से हर संभव सहायता का प्रस्ताव फिर दोहराया है। हम इस बात पर भी सहमत हुए हैं कि सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ नियंत्रण को और मजबूत किया जाए और एक दूसरे के हितों को ध्यान में रखते हुए इसके पर सोचा जाए। हम दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने पर भी सहमत हुए हैं। यह न सिर्फ दोनों देशों के नागरिकों के हित में होगा, बल्कि क्षेत्रीय समृद्धि के लिए भी यह बहुत ही आवश्यक है।
      नेपाल के लोगों और नेपाल की सरकार की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए, नेपाल के विकास में अपनी साझेदारी बढ़ाने के लिए, भारत पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए, हम कई ऐसे विकास पर सहमत हुए हैं जो नेपाल की विकास हैं। इसमें भारत की सहायता के अंतर्गत धनगढ़ी में स्थापना पर सैद्धांतिक सहमती हुई है।
      मुझे खुशी है कि आज जिन आठ पर हस्ताक्षर किये गए हैं, उनमें से चार भूकंप के बाद पुनर्निर्माण कार्यों के लिए भारत की तरफ से किए गए एक बिलियन डॉलर की सहायता के वायदे और आगे बढ़ाएंगे। रक्षा क्षेत्र और सुरक्षा में सहयोग हमारी पार्टनरशिप का बहुत महत्वपूर्ण पहलू है। 
     हमारे सुरक्षा हित भी एक दूसरे पर निर्भर हैं और एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि आपकी इस यात्रा ने परस्पर सहयोग के हमारे प्रयासों को और गतिशीलता दी है। मुझे विश्वास है कि हमारी आज की चर्चा और जिन समझौतों पर हमने सहमति जताई है,वो हमारे द्विपक्षीय संबंधों में एक नई ऊर्जा का संचालन करेंगे।
       इन्हीं शब्दों के साथ, मैं आपका और आपके साथ आए शिष्ठ मंडल का भारत में एक बार फिर स्वागत करता हूं। मुझे उम्मीद है कि आपका भारत में ये प्रवास बहुत ही सुखद रहेगा।

निर्णय के समय गरीबों एवं साधारण नागरिकों का ध्‍यान आवश्‍यक

        प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने भारत सरकार में कार्यरत 70 से अधिक अतिरिक्त सचिवों एवं संयुक्त सचिवों के एक समूह से मुलाकात एवं बातचीत की।

    इस तरह की पांच बैठकों की श्रृंखला में यह पहली बैठक थी। बातचीत के दौरान अधिकारियों ने डिजिटल एवं स्‍मार्ट गवर्नेंस, प्रशासनिक प्रक्रियाओं एवं जवाबदेही, पारदर्शिता, किसानों की आय दोगुनी करने, कौशल विकास, स्‍वच्‍छ भारत, उपभोक्‍ता अधिकार, पर्यावरण सुरक्षा और 2022 तक नए भारत के निर्माण जैसे विषयों पर अपने अनुभवों को साझा किया। 
     प्रधानमंत्री ने कहा कि नागरिकों के कल्‍याण एवं संतुष्टि के लिए विकास एवं सुशासन का संयोजन आवश्‍यक है। उन्‍होंने कहा कि सुशासन, अधिकारियों के लिए एक प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्‍होंने सरकार के सभी अंगों को समरसता एवं तालमेल के साथ काम करने पर जोर दिया ताकि हरसंभव बेहतरीन परिणाम हासिल किया जा सके। 
     उन्‍होंने कहा कि सभी अधिकारियों को निर्णय लेते समय गरीबों एवं साधारण नागरिकों का ध्‍यान अवश्‍य रखना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया सकारात्मक उम्मीदों के साथ भारत की ओर देख रही है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया को लगता है कि वैश्विक संतुलन के लिए एक सफल भारत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत के आम नागरिकों से भी उत्कृष्टता के लिए एक मजबूत अंत:प्रवाह है।
       विनम्र पृष्ठभूमि से आने वाले युवा सीमित संसाधनों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं और खेलों में सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त कर रहे हैं। उन्‍होंने अधिकारियों को प्रतिभा के इस सहज उदय को बढ़ावा देने के लिए उस उत्‍साह एवं ऊर्जा को याद करते हुए काम करने के लिए कहा, जिसे उन्‍होंने अपनी सेवा के पहले तीन साल के दौरान दिखाई होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि अधिकारियों के लिए राष्‍ट्र के फायदे के लिए अपना सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन करने का यह एक अनूठा अवसर है। 
        उन्‍होंने साइलो तोड़ने और सरकार के विभिन्‍न विभागों के बीच कुशल आंतरिक संचार के महत्‍व पर जोर दिया।उन्होंने निर्णय लेने में गति और दक्षता की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अच्छे इरादे से लिए जाने वाले ईमानदार निर्णय को केंद्र सरकार द्वारा हमेशा प्रोत्साहित किया जाएगा। 
     उन्होंने अधिकारियों को भारत के 100 सबसे पिछड़े जिलों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा ताकि उन्‍हें विभिन्न विकास मानकों पर राष्ट्रीय औसत स्तर के करीब लाया जा सके।