Thursday, 1 February 2018

गरीबों के लिए डायलिसिस नि:शुल्‍क

     नई दिल्ली। केंद्रीय वित्‍त मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में सरकार ने राजनीतिक लाभ-हानि पर ध्‍यान दिए बिना हर क्षेत्र में गंभीरता से कार्य किए हैं।

   लोकसभा में आम बजट 2018-19 पेश करते हुए केंद्रीय वित्‍त और कॉरपोरेट मामले मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार ने देश में किसानों, गरीबों और अन्‍य कमजोर वर्गों को लाभ देने और अवि‍कसित क्षेत्रों के उत्‍थान के लिए विभिन्‍न कार्यक्रमों का शुभारंभ किया है।
     सरकार उज्‍जवला योजना के माध्‍यम से देश के गरीबों को नि:शुल्‍क गैस कनेक्‍शन प्रदान कर रही है। सौभाग्‍य योजना के माध्‍यम से चार करोड़ घरों को बिजली कनेक्‍शन से जोड़ा जा रहा है। तीन हजार से ज्‍यादा जन औषधि केंद्रों में 800 से ज्‍यादा दवाईयां कम मूल्‍य पर बेची जा रही हैं। स्‍टैंट की कीमत नियंत्रित की गई है गरीबों के लिए नि:शुल्‍क डायलिसिस हेतु विशेष योजना शुरू की गई है। 
   वित्‍त मंत्री ने कहा कि गरीबों और मध्‍यम वर्ग को आवास योनजाओं में भी ब्‍याजदर में बड़ी राहत दी जा रही है। सरकारी सेवाएं चाहे बस या ट्रेन टिकट या सभी को ऑनलाइन प्रमाण-पत्र उपलब्‍ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। दो से तीन दिन के भीतर घर पर पासपोर्ट, एक दिन में कंपनी का रजिस्‍ट्रेशन जैसे लाभ देश में बड़े वर्ग को दिए जा रहे हैं।
     उन्‍होंने कहा कि प्रमाण पत्रों को सत्‍यापित करने की बाध्‍यता खत्‍म कर दी और समूह ‘ग’ और ‘घ’ नौकरी में साक्षात्‍कार समाप्‍त करने से लाखों नौजवानों को समय और पैसे की बचत हुई है। सरकार हर व्‍यक्ति को उपयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। श्री जेटली ने कहा कि चार वर्ष पूर्व वर्तमान सरकार ने एक ईमानदार स्‍वच्‍छ और पारदर्शी सरकार देने की शपथ ली थी। सरकार ने भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के मजबूत प्रदर्शन को बनाए रखने के लिए कड़े फैसले लेने में सक्षम नेतृत्‍व का भरोसा दिलाया। 
  वित्‍त मंत्री ने कहा कि सरकार ने गरीबी को समाप्‍त करने बुनियादी ढांचे के निर्माण में तेजी लाने के साथ-साथ एक दृ‍ढ़, आत्‍म विश्‍वास से परिपूर्ण नवीन भारत के निर्माण का संकल्‍प लिया था। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने बुनियादी ढांचे के सुधारों की एक श्रृंखला को सफलतापूर्वक कार्यांवित किया है। माल और सेवाकर (जीएसीट) सहित अप्रत्‍यक्ष कर प्रणाली को सरल बना दिया गया है।
    वित्‍त मंत्री ने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी के उपयोग से गरीबों तक लाभ पहुंचाने का लक्ष्‍य और प्रभावी हुआ है। उच्‍च मूल्‍य की मुद्रा के विमुद्रीकरण से संचालन में नकदी मु्द्रा की मात्रा कम हुई है। इससे कराधान आधार और अर्थव्‍यवस्‍था को और अधिक डिजिटल बनाने में मदद मिली है। वित्‍त मंत्री ने कहा कि शोधन अक्षमता और दिवालियापन कोड को लागू किए जाने से ऋणी-ऋणदाताओं के बीच संबंध बदला है। बैंकों के पुन: पूंजीकरण से बैंक अब विकास की गति को सहायता प्रदान करने में अधिक सक्षम हो गए हैं।
     उन्‍होंने कहा कि इन सभी संरचनात्‍मक सुधारों से मध्‍यम और दीर्घावधि में भारतीय अर्थव्‍यवथा को लंबे समय तक टिकाऊ सुदृढ़ विकास गति को प्राप्‍त करने में सहायता मिलेगी। वित्‍त मंत्री ने कहा कि इसके परिणाम स्‍वरूप भारत विश्‍व की सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्‍यवस्‍थाओं में पहुंच गया है। अंतरराष्‍ट्रीय मुद्राकोष ने हाल ही में भारत के लिए अगले वर्ष में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की है।

अब स्‍टेशनों व रेलगाड़ियों में वाई-फाई सुविधा

    नई दिल्ली। देश में रेल नेटवर्क को मजबूत करने पर सरकार के जोर को ध्‍यान में रखते हुए आम बजट 2018-19 ने इस मंत्रालय के लिए आबंटन में बढ़ोतरी की गई है।

   केंद्रीय वित्‍त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने आज संसद में आम बजट 2018-19 को प्रस्‍तुत करते हुए कहा कि वर्ष 2018-19 के लिए रेलवे के पूंजीगत व्‍यय को बढ़ाकर 1,48,528 करोड़ रुपये किया गया है।
    इसका एक बड़ा हिस्‍सा क्षमता सृजन पर खर्च किया जाए। 18000 किलोमीटर के दोहरीकरण/तीसरी/चौथी लाइन के निर्माण कार्य और 5000 किलोमीटर के गेज परिवर्तन से क्षमता में वृद्धि होगी और लगभग समूचे नेटवर्क को ब्राड गेज में बदल दिया जाएगा।
    श्री जेटली ने कहा कि 2017-18 के दौरान विद्युतीकरण के लिए 4000 किलोमीटर का रेलवे नेटवर्क चालू हो जाएगा। वित्‍त मंत्री जेटली ने 2018-19 के दौरान 12000 वैगन, 5160 कोच और लगभग 700 लोकोमोटिव की खरीदारी की घोषणा की। उन्‍होंने कहा कि पूर्वी एवं पश्‍चिमी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर के काम तेजी से संपन्‍न किए जाएंगे। माल शेडों में अवसंरचना को सुदृढ़ करने और निजी साइडिंग के फास्‍ट ट्रेक कार्य शुरू करने के लिए एक प्रमुख कार्यक्रम शुरू किया गया है।
     श्री जेटली ने आश्‍वस्‍त किया कि फाग सेफ तथा ‘ट्रेन प्रोटेक्‍शन एंड वार्निंग सिस्‍टम’ जैसी प्रौदोयोगिकी का प्रयोग बढ़ाया जाएगा। अगले दो वर्षों में 4267 मानवरहित लेवल क्रासिंग को समाप्‍त कर उन्‍हें बीजी नेटवर्क में परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया है।
    इंडियन रेलवे स्‍टेशन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा 600 प्रमुख रेलवे स्‍टेशनों को पुन: विकसित करने का कार्य शुरू किया जा रहा है। 25 हजार से अधिक आगंतुक वाले सभी स्‍टेशनों में एस्‍क्‍लेटर लगाए जाएंगे। सभी रेलवे स्‍टेशनों और रेलगाड़ियों में वाई-फाई सुविधा प्रदान की जाएगी। सभी रेलवे स्‍टेशनों और रेलगाड़ियों में सीसीटीवी उपलब्‍ध कराए जाएंगे ताकि यात्रियों की संरक्षा बढ़ाई जा सके।
    वित्‍त मंत्री ने सूचित किया है कि मुंबई की परिवहन प्रणाली का विस्‍तार किया जा रहा है और 11,000 करोड़ रुपये की लागत से 90 कि.मी. दोहरी पटरियां जोड़ी जा रही हैं। लगभग 40000 करोड़ रुपये की लागत से 150 किलोमीटर अतिरिक्‍त उपनगरीय नेटवर्क योजना बनाई जा रही है जिसमें कुछ खंडों में ऊंचे उठे हुए गलियारे शामिल है।
      बेंगलुरु में महानगरीय विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए 17000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से करीब 160 किलोमीटर के उपनगरीय नेटवर्क की योजना बनाई जा रही है। भारत की पहली हाई स्‍पीड रेल परियोजना मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की आधारशिला 14 सितम्‍बर, 2017 को रखी गई। हाई स्‍पीड रेल परियोजना के लिए आवश्‍यक श्रमबल को प्रशिक्षित करने के लिए बड़ोदरा में एक संस्‍थान की स्‍थापना की जा रही है।

ग्रामीणों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए गोबर-धन योजना

    नई दिल्ली। खुले में शौच से गांवों को मुक्त करने तथा ग्रामीणों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने आज अपने बजट भाषण में गोबर-धन (गैलवनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्स धन) योजना के शुभारंभ की घोषणा की। 

    मंत्री ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत पशुओं के गोबर और खेतों के ठोस अपशिष्ट पदार्थों को कम्पोस्ट, बायो-गैस और बायो-सीएनजी में परिवर्तित किया जाएगा।
   वित्त मंत्री ने कहा कि अवसंरचना विकास, विपरीत सतह सफाई, ग्रामीण स्वच्छता आदि के लिए नमामि गंगे योजना के तहत 16,713 करोड़ रुपये की लागत से 187 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
     इनमें से 47 परियोजनाएं पूरी हो चुकी है और शेष परियोजनाएं कार्यपालन के विभिन्न चरणों में हैं। गंगा नदी के किनारे बसे 4465 गंगा गांवों को खुले में शौच से मुक्त किया जा चुका है। समावेशी समाज निर्माण के विजन के तहत सरकार ने विकास के लिए 115 आकांक्षायुक्त जिलों की पहचान की है।
   इन जिलों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, सिंचाई, ग्रामीण विद्युतीकरण, पेयजल, शौचालय तक पहुंच आदि में निवेश करके निश्चित समयावधि में विकास की गति को तेज किया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि ये 115 जिले विकास के मॉडल साबित होंगे।

नए भारत के लिए आयुष्मान भारत 2022 की घोषणा

     नई दिल्ली। सरकार ने आज आयुष्मान कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य के क्षेत्र में दो महत्तवपूर्ण पहलों की घोषणा की है।

  केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने आज संसद में आम बजट 2018-19 पेश करते हुए कहा कि इस योजना का उद्देश्य स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों से समग्र रूप से निपटना हैं। इसके तहत प्राथमिक, द्वितीय और तृतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।
  पहल हैं, स्वास्थ्य एवं देखभाल केंद्र- राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की नींव के रूप में स्वास्थ्य और आरोग्य केंद्रों की परिकल्पना की गई है। ये 1.5 लाख केंद्र स्वास्थ्य देखरेख प्रणाली को लोगों के घरों के पास लाएंगे। ये स्वास्थ्य केंद्र असंचारी रोगों और मातृत्व तथा बाल स्वास्थ्य सेवाओं सहित व्यापक स्वास्थ्य देखरेख उपलब्ध कराएंगे। ये केंद्र आवश्यक दवाईयाँ और नैदानिक सेवा भी मुफ्त उपलब्ध कराएंगे। इस महत्तवपर्ण कार्य के लिए 1200 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है।
      इन केंद्रों को अपनाने के लिए सीएसआर और लोकोपकारी संस्थाओं के जरिए निजी क्षेत्र को आमंत्रित किया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना- आयुष्मान भारत के तहत इन दुर्गामी पहलों के तहत 10 करोड़ से अधिक गरीब एवं कमजोर परिवारों (लगभग 50 करोड़ लाभार्थी) को दायरे में लाने के लिए एक फ्लेगशिप राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना शुरू की जाएगी जिसके तहत द्वितीय और तृतीय देखरेख अस्पताल में भर्ती होने के लिए प्रति परिवार 5 लाख रूपये प्रति वर्ष तक का कवरेज प्रदान किया जाएगा।
    यह विश्व का सबसे बड़ा सरकारी वित्त पोषित स्वास्थ्य देखरेख कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम के सूचारू कार्यान्वयन हेतु पर्याप्त धन राशि उपलब्ध कराई जाएगी। वित्त मंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत के तहत ये दो स्वास्थ्य क्षेत्र की पहल नए भारत वर्ष 2022 का निर्माण करेंगी। और उनसे समबर्धित उत्पादकता, कल्याण में वृद्धि होगी और इनसे मजदूरी की हानी और दरिद्रता से बचा जा सकगा। इन योजनाओं से विशेष कर महिलाओं के लिए रोजगार के लाखों अवसर सृजित होंगे।
    वित्त मंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य देखरेख की पहुंच में वृद्धि करने के उद्देश्य से देश में मौजूदा जिला अस्पतालों को अपग्रेड करके 24 नए सरकारी चिकित्सा कॉलेजों और अस्पतालों की स्थापना की जाएगी। इस कदम से सुनिश्चित होगा कि प्रत्येक 3 संसदीय क्षेत्रों के लिए कम से कम एक चिकित्सा कॉलेज और देश के प्रत्येक राज्य में कम से कम एक सरकारी चिकित्सा कॉलेज उपलब्ध हो।

कृषि क्षेत्र के लिए संस्थागत ऋण अब 11 लाख करोड़

      नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने आज संसद में आम बजट 2018-19 पेश करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की आजादी के 75वें साल में अर्थात वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का आह्वान किया है।

  मंत्री ने बजट 2018-19 में कृषि क्षेत्र के लिए अनेक नई पहलों की घोषणा करते हुए कहा, ‘हम किसानों की आमदनी बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहे हैं। हम कृषि को एक उद्यम मानते हैं और किसानों की मदद करना चाहते हैं, ताकि वे कम खर्च करके समान भूमि पर कहीं ज्यादा उपज सुनिश्चित कर सकें और उसके साथ ही अपनी उपज की बेहतर कीमतें भी प्राप्त कर सकें।’ 
   श्री जेटली ने यह घोषणा करते हुए काफी प्रसन्नता जाहिर की कि सरकार ने अब तक अघोषित सभी खरीफ फसलों के लिए उत्पादन लागत से कम से कम डेढ़ गुना एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) तय करने का निर्णय लिया है।
     मंत्री महोदय ने कहा कि यह ऐतिहासिक निर्णय देश के किसानों की आमदनी दोगुनी करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा और केंद्र एवं राज्य सरकारों के साथ सलाह-मशविरा कर नीति आयोग एक अचूक व्यवस्था कायम करेगा, जिससे कि किसानों को उनकी उपज की पर्याप्त कीमत मिल सके। एक अहम कदम के रूप में सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए संस्थागत ऋण को वर्ष 2017-18 के 10 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर वर्ष 2018-19 में 11 लाख करोड़ रुपये करने की घोषणा की।
     सरकार के विज़न को आगे बढ़ाते हुए वित्त मंत्री ने बजट 2018-19 में 500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ ‘ऑपरेशन ग्रीन्स’ लांच करने की घोषणा की, ताकि जल्द नष्ट होने वाली जिन्सों जैसे कि आलू, टमाटर और प्याज की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव की समस्या से निपटा जा सके। ‘ऑपरेशन फ्लड’ की तर्ज पर शुरू किया गया ‘ऑपरेशन ग्रीन्स’ इस क्षेत्र में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), कृषि-लॉजिस्टिक्स, प्रसंस्करण सुविधाओं और प्रोफेशनल प्रबंधन को बढ़ावा देगा। 
    श्री जेटली ने 100 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाली किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) को होने वाले लाभों के संदर्भ में पांच वर्षों की अवधि तक 100 प्रतिशत की कटौती की घोषणा की जिसकी शुरुआत वित्त वर्ष 2018-19 से होगी। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में कटाई उपरांत मूल्य संवर्द्धन में प्रोफेशनल नजरिए को बढ़ावा देना है। इसके अलावा, श्री जेटली ने यह जानकारी दी कि सरकार ने बड़े पैमाने पर जैविक खेती को बढ़ावा दिया है।
    बड़े क्लस्टरों, विशेषकर प्रत्येक 1000 हेक्टेयर में फैले क्लस्टरों में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और ग्रामीण उत्पादक संगठनों (वीपीओ) में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका कार्यक्रम के तहत क्लस्टरों में जैविक खेती करने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। 
    मंत्री ने कहा कि अत्यंत विशिष्ट औषध एवं सुगंधित पौधों की संगठित खेती में सहायता करने और इत्र, आवश्यक तेलों तथा अन्य संबंधित उत्पादों का उत्पादन करने वाले छोटे एवं कुटीर उद्योगों की मदद करने के लिए 200 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
    मौजूदा 22,000 ग्रामीण हाटों को ग्रामीण कृषि बाजारों (ग्राम) के रूप में विकसित करने की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में 86 प्रतिशत से भी अधिक छोटे एवं सीमांत किसान हैं जो सीधे एपीएमसी और अन्य थोक बाजारों में लेन-देन करने की स्थिति में हमेशा नहीं होते हैं। इन ‘ग्रामों’ में मनरेगा तथा अन्य सरकारी योजनाओँ का उपयोग करके भौतिक बुनियादी ढांचे को बेहतर किया जाएगा और इन्हें इलेक्ट्रॉनिक ढंग से ई-नाम से जोड़ा जाएगा तथा एपीएमसी के नियमन के दायरे से बाहर रखा जाएगा। 
    मंत्री ने कहा कि इससे किसान सीधे उपभोक्ताओँ और व्यापक खरीदारी करने वालों को अपनी उपज की बिक्री कर सकेंगे। श्री जेटली ने कहा कि पिछले बजट में सरकार ने ई-नाम को मजबूत करने और 585 एपीएमसी में ई-नाम की कवरेज बढ़ाने की घोषणा की थी। इनमें से 470 एपीएमसी को ई-नाम नेटवर्क से जोड़ दिया गया है और शेष एपीएमसी को मार्च 2018 तक इससे जोड़ दिया जाएगा।
   इसके अलावा 22,000 ग्रामीण कृषि बाजारों (ग्राम) और 585 एपीएमसी में कृषि विपणन से संबंधी बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए 2000 करोड़ रुपये की राशि वाला कृषि-बाजार ढांचागत कोष बनाया जाएगा। खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के लिए आवंटन को वर्ष 2017-18 के 715 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से दोगुना कर वर्ष 2018-19 के बजट अनुमान में 1400 करोड़ रुपये करने की घोषणा करते हुए श्री जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि संपदा योजना खाद्य प्रसंस्करण में निवेश को बढ़ावा देने वाला हमारा प्रमुख कार्यक्रम है और यह क्षेत्र औसतन 8 प्रतिशत सालाना की दर से आगे बढ़ रहा है। 
   मंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र के लिए आवंटन बढ़ाकर सरकार इस क्षेत्र में विशिष्ट कृषि-प्रसंस्करण वित्तीय संस्थानों की स्थापना को प्रोत्साहित करेगी और सभी 42 मेगा फूड पार्कों में अत्याधुनिक परीक्षण सुविधाओं की स्थापना करेगी। मत्स्य पालन एवं पशुपालन क्षेत्र के छोटे और सीमांत किसानों की कार्यशील पूंजी संबंधी जरूरतों की पूर्ति में मदद के लिए एक प्रमुख कदम की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री ने किसान क्रेडिट कार्डों (केसीसी) की सुविधा इस क्षेत्र को भी देने की बात कही। 
      इससे पशु, भैंस, बकरी, भेड़, मुर्गी एवं मत्स्य पालन के लिए फसल ऋण और ब्याज सब्सिडी का लाभ मिलेगा, जो अब तक केसीसी के तहत केवल कृषि क्षेत्र को ही उपलब्ध था। इसके अलावा वित्त मंत्री ने मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि बुनियादी ढांचागत विकास कोष (एफएआईडीएफ) और पशुपालन क्षेत्र की ढांचागत जरूरतों के वित्तपोषण के लिए पशुपालन बुनियादी ढांचागत विकास कोष (एएचआईडीएफ) बनाने की भी घोषणा की। 
    श्री जेटली ने बांस को ‘हरित सोना’ की संज्ञा देते हुए 1290 करोड़ रुपये के पुनर्गठित राष्ट्रीय बांस मिशन लांच करने की घोषणा की, जो पूर्ण बांस मूल्य श्रृंखला के मार्ग की बाधाएं दूर करने और समग्र रूप से बांस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर से जुड़ी अवधारणा पर आधारित है। बांस उत्पादकों को उपभोक्ताओँ से जोड़ने, संग्रह, एकत्रीकरण, प्रसंस्करण एवं विपणन के लिए सुविधाओं के सृजन, एमएसएमई, कौशल निर्माण और ब्रांड निर्माण पर फोकस होने की बदौलत यह घोषणा किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के कुशल एवं अकुशल युवाओँ के लिए रोजगार अवसर सृजित करने में अहम योगदान देगी।
    श्री जेटली ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकारों के प्रयासों में आवश्यक मदद देने और खेत में ही फसल अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए आवश्यक मशीनरी पर सब्सिडी देने के लिए एक विशेष योजना क्रियान्वित की जाएगी।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 2600 करोड़

    नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने आज संसद में आम बजट 2018-19 पेश करते हुए घोषणा कि की देश में ग्रामीण क्षेत्रों में जीविका के साधन, कृषि और संबद्ध कार्यकलापों और ग्रामीण आधारभूत सुविधाओं के निर्माण पर सरकार और अधिक धन राशि खर्च करेगी ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध हो।

  वर्ष 2018-19 में ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका और आधारभूत सुविधाओं के सृजन के लिए मंत्रालयों द्वारा 14.34 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें 11.98 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजटीय और गैर-बजटीय संसाधन शामिल हैं।
   वित्त मंत्री ने कहा कि खेती से जुड़े कार्यकलापों और स्व-रोजगार के कारण रोजगार के अलावा, इस खर्च से 321 करोड़ मानव दिवस के रोजगार, 3.17 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कों, 51 लाख नए ग्रामीण मकानों, 1.88 करोड़ शौचालयों का सृजन होगा। 
     उन्होंने बताया कि इससे कृषि को प्रोत्साहन मिलने के अलावा 1.75 करोड़ नए परिवारों को बिजली के कनेक्शन प्राप्त होंगे। प्रधानमंत्री कृषि योजना- हर खेत को पानी के अंतर्गत भू-जल सिंचाई योजना को मजबूत बनाने के लिए यह सिंचाई से वंचित 96 जिलों में शुरू होगी इसके लिए 2600 करोड़ रुपये का आबंटन किया गया है। 
   वित्त मंत्री ने बताया कि महिलाओं की स्व-सहायता समूह को ऋण को पिछले वर्ष के मुकाबले 37 प्रतिशत बढ़ाकर वर्ष 2016-17 में लगभग 42,500 करोड़ रुपये किया गया। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार को आशा है कि मार्च 2019 तक स्व-सहायता समूहों की ऋण राशि बढ़ाकर 75,000 करोड़ रूपये कर दी जाएगी। 2018-19 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका कार्यक्रम के आबंटन को पर्याप्त रूप से बढ़ाकर 5750 करोड़ रूपये किया गया है।

वरिष्ठ नागरिकों को आय में छूट की सीमा 50 हजार

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री वय वंदना योजना मार्च 2020 तक जारी रहेगी प्रधानमंत्री वय वंदना योजना के अंतर्गत निवेश की वर्तमान सीमा को बढ़ाकर 15 लाख रुपए किया गया।

    वरिष्ठ नागरिकों को गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करने के लिए केन्द्रीय वित्य एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण रियायतों की घोषणा की है। 
   संसद में आज आम बजट 2018-19 पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों तथा डाकघरों में जमा राशि पर ब्याज आय में छूट 10 हजार रुपए से बढ़ाकर 50 हजार रुपए की गई है तथा आयकर धारा 194ए के तहत स्रोत पर आयकर की कटौती नहीं की जाएगी। यह लाभ सावधि जमा योजनाओं तथा आवर्ती जमा योजनाओं में प्राप्त होने वाले ब्याज के लिए भी उपलब्ध होगा।
   वित्त मंत्री ने कहा कि धारा 80डी के अंतर्गत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम या चिकित्सा व्यय हेतु कटौती सीमा को 30 हजार रुपए से बढ़ाकर 50 हजार रुपए कर दिया गया है। अब सभी वरिष्ठ नागरिक किसी स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम या किसी चिकित्सा के संदर्भ में 50 हजार रुपए प्रतिवर्ष तक कटौती के लाभ का दावा कर सकेंगे।
  वित्त मंत्री ने धारा 80डीडीबी के अंतर्गत गंभीर बीमारी से संदर्भ में चिकित्सा खर्च के लिए कटौती सीमा को वरिष्ठ नागरिकों के मामले में 60 हजार रुपए से और अति वरिष्ठ नागरिकों के मामले में 80 हजार रुपए से बढ़ाकर सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक लाख रुपए का प्रस्ताव किया। इन रियायतों से वरिष्ठ नागरिकों को 4 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त कर लाभ प्राप्त होगा।
    टैक्स रियायतों के अतिरिक्त वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री वय वंदना योजना को मार्च 2020 तक बढ़ाया गया है।इस योजना के तहत भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा 8 प्रतिशत निश्चित प्रतिलाभ प्रदान किया जाता है। इस योजना के तहत प्रति वरिष्ठ नागरिक 7.5 लाख रुपए की मौजूदा निवेश सीमा को बढ़ाकर 15 लाख रुपए किया जा रहा है।