कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के 8.11 करोड़ सदस्य, न्यूनतम मजदूरी अब 350 रुपये
रोजगार सृजन भारत सरकार की पहली प्राथमिकता है। बेरोजगारी वृद्धि के एक दशक के बाद केंद्र सरकार मूल विकास की रणनीति के लिए रोजगार लाने का काम कर रही है, मेक इन इंडिया के माध्यम से औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। स्किल इंडिया के माध्यम से रोजगार दक्षता को बढ़ाया जा रहा है। स्टार्ट अप इंडिया के माध्यम से नवाचार व उद्यमिता को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
श्रम एंव रोजगार मंत्रालय प्रत्येक श्रमिक की रोजगार सुरक्षा, वेतन सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। श्रम कानूनों के प्रवर्तन में पारदर्शिता व जवाबदेही लाने के साथ-साथ, मंत्रालय ने कामगारों के गौरव का एहसास व उसे स्थापित करने के लिए सामाजिक सुरक्षा और रोजगार के मार्ग व गुणवत्ता को बढ़ाने के प्रावधानों के माध्यम से कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मातृत्व लाभ (संशोधन) विधेयक, 2016, के तहत मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 के अंतर्गत आने वाली महिलाओं का मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह किए जाने का प्रावधान।
यह अवकाश महिला के दो जीवित बच्चों की जरूरी देखभाल के लिए है। इसके साथ ही सरोगेट माता के लिए 12 सप्ताह का अवकाश, बच्चे को गोद लेने वाली महिला के लिए रोजगार प्रदाता और कामगार की आपसी रजामंदी से घर से काम करने की सुविधा, 50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों के लिए यह सुविधा देना आवश्यक है। इसके अलावा बच्चे की दैनिक देखभाल की सुविधा भी नियमों के अंतर्गत इस विधेयक में की गई है। कर्मचारी प्रतिपूर्ति अधिनियम 1923 के तहत कर्मचारियों के अधिकारों और दंड को मजबूत करने के लिए 9 अगस्त 2016 को लोकसभा में कर्मचारी प्रतिपूर्ति (संशोधित) विधेयक 2016 लोकसभा में पारित किया गया।
सरकार ने केंद्र के अंतर्गत आने वाले सभी क्षेत्रों में काम करने वालों के लिए निम्ननतम वेतन में 42 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की। कृषि, गैर कृषि, निर्माण आदि सभी क्षेत्रों के लिए यह पहली बार था, जब इसमें एक साथ बढ़ोतरी हुई हो। गैर कृषि क्षेत्र में सी श्रेणी क्षेत्र में काम करने वाले की मजदूरी को 246 रुपए दैनिक से बढ़ाकर 350 किया गया, बी श्रेणी क्षेत्र में 437 रुपए दैनिक और एक श्रेणी क्षेत्र के मजदूरों के लिए 523 रुपए दैनिक किया गया। राज्य कर्मचारी बीमा के लिए वेतन की अधिकतम सीमा को 15 हजार रुपए से बढ़ाकर 21 हजार रुपए किया गया। कर्मचारी भविष्य निधि पर दावे निपटान की सीमा को 30 दिन से घटाकर 20 दिन किया गया।
पेंशन निकालने की वैकल्पिक आयु सीमा को 60 वर्ष से घटाकर 58 वर्ष किया गया। वह भी 4 प्रतिशत प्रोत्साहन के साथ। बंधक मजदूरों के पुनर्वास योजना को आर्थिक सहायता की प्रतिकात्मक मात्रा 20 हजार रुपए से बढ़ाकर 3 लाख रुपए किया गया। जबकि, तस्करी, यौन शोषण और ट्रांसजेंडर से बचाए गए विकलांग, महिलाओं और बच्चों को 3 लाख रुपए दिए जाएंगे, विशेष श्रेणी की महिलाओं और नाबालिगों को 2 लाख रुपए दिए जाएंगे। सामान्य बंघक मजदूर वयस्क को 1 लाख रुपए दिए जाएंगे। कर्मचारी राज्य बीमा निगम के अंतर्गत मातृत्व लाभ की सीमा को 12 सप्ताह से 26 सप्ताह का करने के लिए निर्णय लिया गया। बच्चा गोद लेने वाली माताएं भी मातृत्व लाभ लेंगी। कप्यूटराइज्ड सिस्टम के माध्यम से 2,37,579 निरीक्षण नियत किए जा चुके हैं। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन 8.11 करोड़ सदस्यों को यूएएन आवंटित कर चुका है। लगभग 2.82 करोड़ सदस्य इसे अपने मोबाइल नंबरों पर सक्रिय कर सेवाओं का लाभ ले रहे हैं।
केवल भारतीय कर्मचारियों के लिए ही नहीं बल्कि भारत में आने और बाहर जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय कर्मचारियों के लिए भी सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन सुविधा शुरू की है। कर्मचारी राज्य बीमा योजना-कर्मचारी राज्य बीमा निगम-ईएसआईसी (श्रम एवं रोजगार मंत्रालय) एक सामाजिक सुरक्षा संगठन है जो बीमारी में आकस्मिक व्यय, प्रसव, अपंगता, काम के दौरान घायल होने पर मृत्यु होने पर लाभार्थियों को व्यापक मेडिकल देखभाल और नगद लाभ उपलब्ध कराता है। बीमित व्यक्तियों की संख्या 2.03 करोड़ है। लाभार्थियों की संख्या का आंकड़ा 7.89 करोड़ है। औषधालयों के उच्चीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है, ईएसआईसी भवनों में 24 औषधायलों को 30 बिस्तर के अस्पताल तक उच्चीकृत करने के लिए चिन्हित किया जा चुका है। ये अस्पताल चैबीसों घंटे सेवाएं उपलब्ध कराएंगे। पैथोलॉजिकल एवं एक्स-रे सुविधा भी सभी औषधालयों में प्रदान की जाएगी।
प्रत्येक राज्य में मातृ एवं शिशु देखभाल चिकित्सालयः कर्मचारी राज्य बीमा निगम ने प्रत्येक राज्य में मातृ एवं शिशु देखभाल चिकित्सालय स्थापित करने के मानदंडों को तैयार करने के लिए एक समिति का गठन किया है। सार्वजनिक रोजगार सेवाओं में बदलाव और मजबूत बनाने के लिए जीवंत मंच की तरह नेशनल कॅरियर सेवा लागू कर रहा रहा है। एनसीएस पोर्टल, सूचना प्रोद्यौगिकी का प्रयोग से रोजगार संबंधी सेवाएं मसलन, नौकरी मिलान, कॅरियर परामर्श, कौशल विकास कोर्स, प्रशिक्षुता आदि उपलब्ध कराकर नौकरी चाहने वालों, नियोक्ताओं और अन्य हितधारकों को एक मंच पर लाता है। इसमें 52 क्षेत्रों के 3600 से ज्यादा व्यवसायों में कॅरियर कोष शामिल है। लगभग 3.71 करोड़ से ज्यादा उम्मीदवार, 14.8 लाख प्रतिष्ठान एनसीपी पोर्टल पर पंजीकृत हैं। ये अब तक 3.25 लाख रिक्तियां भर चुके हैं। युवाओं को रोजगार के अवसरों को बढ़ाने और उन्हें बेहतर बनाने के लिए उभरते जॉब पोर्टल, प्लेसमेंट संगठनों और संस्थानों से करार किए गए हैं।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों को व्यवसायिक मार्गदर्शन व परामर्श सेवाएं व कंप्यूटर कोर्स के प्रशिक्षण के लिए 24 नेशनल कॅरियर सर्विस सेंटर चलता है। पिछले 2 सालों में लगभग 3.8 लाख अ.जा/अ.ज.जा उम्मीदवारों व्यवसायिक मार्गदर्शन व परामर्श प्रदान किया जा चुका है। 33 हजार उम्मीदवार सचिवीय प्रैक्टिस आशुलिपि/टंकन का अभ्यास कर चुके हैं, 4300 उम्मीदवार विशेष कोचिंग योजना कर चुके है और 7800 उम्मीदवारों ने कंप्यूटर प्रशिक्षण कोर्स किया है। 24 अनुसूचित जाति/जनजाति नेशनल कॅरियर सेंटर एनसीएस पोर्टल के साथ एकीकृत हैं। इसके अतिरिक्त 21 नेशनल कॅरियर सर्विस सेंटर निशःक्तजनों के लिए प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। पिछले 2 सालों में लगभग 69 हजार निशःक्तजनों की सहायता की गई और 24 हजार का विभिन्न संगठनों पुनर्वास किया गया है।


