Wednesday, 27 September 2017

भारत व इथोपिया के बीच सूचना, संचार व मीडिया के क्षेत्र में सहयोग पर करार

      नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल ने भारत और इथोपिया के बीच सूचना, संचार और मीडिया के क्षेत्र में सहयोग पर करार पर हस्‍ताक्षर को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। 

     इसका उद्देश्‍य दोनों देशों के बीच सूचना, संचार और मीडिया के बढ़ते प्रभाव के दृष्‍टिगत सूचना के प्रकटीकरण और समावेशी विकास के लिए इसका इस्‍तेमाल करना है। इससे आदान-प्रदान कार्यक्रमों के माध्‍यम से व्‍यक्ति से व्‍यक्ति संपर्क को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे सूचना, संचार और मीडिया के क्षेत्र में सर्वोत्‍तम पद्धतियों को दोनों देशों के बीच साझा करने का भी अवसर मिलेगा।
     इस करार से रेडियो, प्रिंट मीडिया, टेलीविजन, सोशल मीडिया जैसे जन संचार माध्‍यमों आदि में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। दोनों देशों के बीच जनता के प्रति जवाबदेही के अवसर भी मुहैया होंगे। यह करार संस्‍थागत फ्रेमवर्क के माध्‍यम से दोनों देशों के बीच प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान, उन्‍हें एक-दूसरे की सर्वोत्‍तम पद्धतियों से सीख हासिल करने, साम्‍यता और सम्‍पूर्णत के अवसर मुहैया कराएगा।

देश की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका

     नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि कृषि लोगों के जीवन और देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जंहा 50 प्रतिशत से अघिक लोग अपनी आजिविका के लिए कृषि पर निभर हैं। 

  देश को विकसित करने के लिए कृषि और किसान, दोनों को विकसित करने की जरूरत है। कृषि मंत्रालय अपने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से न केवल कृषि के विकास के लिए बल्कि किसानों के कल्य़ाण के लिए भी काम करता है। सिंह ने यह बात आज कृषि भवन, नई दिल्ली में स्टार्ट अप कंपनियों के सीईओ के साथ हुई बैठक में कही।
      राधा मोहन सिंह ने कहा कि देश में कृषि विकास का लक्ष्य है; 2012 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करना। सीमित संसाधनों और जमीन के निश्चित क्षेत्र की उपलब्धता के साथ, यह प्रोदोयोगिकी की सहायता के बिना हासिल नहीं किया जा सकता है। साथ ही इसे कम लागत, किसान के अनुकूल एवं मापनीय होने की जरूरत है। कृषि मंत्रालय किसानों के हित कई योजनाएं चला रहा है, जैसे कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, राष्ट्रीय कृषि बाजार-(ई – नेम), परंपरागत कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना आदि।
      यह सभी योजनाएं किसानों को विभिन्न तरह की सहायता प्रदान कर रही है। जैसे मृदा स्वास्थ्य कार्ड। इससे मिटटी के स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी और उर्वरकों की लागत भी कम हो जाएगी। इस कार्यक्रम के लिए लाखों मिट्टी के नमूनो का विशलेषण करना होगा जिसमें अत्यधिक समय और परिश्रम की आवश्यकता है।
      मिट्टी के नमूने की जांच के लिए ऐसे तकनीकी की जरूरत है। जिसमें कम लागत वाले हाथ से धारित (हैंड डिवाइस) से काम हो जाए, अथार्त इसके लिए मृदा संवेदक या मिट्टी की उर्वरता मूल्यांकन के किसी भी गैर विनाशकारी विधि की जरूरत है। जो कि तकनीक का उपयोग करके मिट्टी के स्वास्थ्य का दूरस्थ रूप से मूल्याकंन कर सकें।
      प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जिसके अंर्तगत फसल की क्षति का आकलन समय पर और सही रूप में करने की जरूरत है ताकि किसानों को जल्द से जल्द और सटीक बीमा दावा समाघान के जरिए उन्हें लाभ पहुचाया जा सके। इसके लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ने विभिन्न प्रोद्योगिकियों जैसे कि स्मार्ट फोन आधारित एंड्राइड एप्लिकेशन द्वारा फसल कटौती प्रयोगों का डेटा संग्रह, फसल क्षति, मध्य मौसम में प्रतिकूलता, क्षेत्र विसंगति एवं फसल कटाई के बाद नुकसान के आकलन के लिए उपग्रह एवं ड्रोन का प्रयोग।
      बीमाधारक किसानों की संख्या बढ़ाने के लिए सूचना एवं तकनीकी आधारित आधारित समाधान को प्रोत्साहित किया है। सिंह ने कहा कि इसके लिए तकनीकी समाधान विकसित करने की आवश्यक्ता है। राधा मोहन सिंह ने कहा कि किसानों के अनुकूल मंत्रालय के विभिन्न कार्यक्रमों के लिए आवश्यक विभिन्न प्रोदयोगिकी जैसे सेंसर प्रदयोगिकी, बिग डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, एप डेवलपमेंट, जीआईएस आधारित पोर्टल का विकास, विभिन्न कृषि आकलन के लिए कम लागत वाले उपकरण शामिल हैं।
     यह मंत्रालय इन विभिन्न प्रकार की प्रोदयोगिकयों और उनके विकास को बढ़ावा देगा जो किसानों के कल्याण के लिए अंतत: इस्तेमाल किया जा सकता है। केन्द्रीय कृषि मंत्री द्वारा इस संबंध में विभाग में एक और ग्रुप गठन करने के लिए कहा जिससे इन सभी स्टार्ट अप के साथ आगे कार्य कर सकें।

दूरसंचार उद्योग भारत में 4 मिलियन रोजगार देगा

   नई दिल्ली। संचार मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा है कि अभी भारत 1.2 अरब से अधिक ग्राहक आधार और लगभग 450 मिलियन इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा दूरसंचार बाजार है। 

    मनोज सिन्हा भारत मोबाइल कांग्रेस -2017 का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन को अपनाने और डेटा उपभोग में घातांकीय वृद्धि से दूरसंचार उद्योग 2017 तक लगभग 38.25 मिलियन डॉलर के राजस्व वाला उद्योग हो जाएगा। वर्ष 2014 से 2017 की अवधि में 5.2ऽ की सीएजीआर वृद्धि दर्ज की गई। 
    उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में इस क्षेत्र में निवेश लगभग 220 प्रतिशत बढ़ा है। मोबाइल कवरेज को बढ़ाने के लिए ऑपरेटरों ने पिछले 15 महीनों में 0.2 मिलियन से अधिक साइटें शुरू की हैं। प्रत्येक 3 मिनट में एक नई साइट शुरू की जा रही है। सिन्हा ने कहा कि ग्रामीण बाजार में सरकार और दूरसंचार कंपनियों के निरंतर ध्यान देने से करीब 4 मिलियन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होगे। 
      मोबाइल फोन और डेटा उपयोग की बिक्री में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की। मोबाइल उपकरणों से ट्रैफ़िक कुल ई-कॉमर्स ट्रैफ़िक का 70ऽ योगदान देता है। भारतीय ई-कॉमर्स बाजार 2021 से 125 मिलियन डॉलर तक 2.8 गुना बढ़ने की संभावना है। मोबाइल डिवाइस इस वृद्धि को तेजी देंगे। 
        उन्होंने कहा कि डिजिटल भारत के लक्ष्यों का मौलिक आधार देश का संचार उद्योग है, जो केवल लोगों से जुड़ा ही नहीं है, बल्कि नौकरियों का भी सृजन किया है। ज्ञान के लिए एक उपकरण बन गया है। खजाने में योगदान दिया है। आर्थिक विकास और वित्तीय समावेशन का विस्तार किया है। सरकार की डिजिटल इंडिया योजना के तीन प्रमुख उदाहरण हैं। प्रत्येक नागरिक को उपयोगिता के रूप में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, मांग पर शासन और सेवाएं तथा नागरिकों का डिजिटल सशक्तिकरण। 
       संचार मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ सालों में सरकार ने प्रौद्योगिकी, स्मार्ट शहरों, आपस में जुड़े सुपर हाईवे पर ध्यान दिया है। नागरिकों के लिए ई-गवर्नेंस सेवाओं की डिलीवरी में तेजी आई है। यह सभी दूरसंचार क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) के आने से लोग न केवल इंटरनेट से आपस में जुड़ेगे बल्कि अरबों मशीनें और उपकरण जैसे पहनने योग्य वस्त्र, कार, घर, औद्योगिक उपकरण, घरेलू एपलांस आदि शामिल होंगे। 
     'डिजिटल इंडिया' पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ कम लागत का स्मार्टफोन, नवीनतम तकनीकों को अपनाने और घातांकीय इंटरनेट वृद्धि अरबों को इंटरनेट से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। संचार मंत्री ने कहा कि दूरसंचार और आईटी वर्तमान में सकल घरेलू उत्पाद में 16.5 प्रतिशत योगदान देते हैं। इसमें वृद्धि की बहुत सारी संभावनाएं हैं।
     उम्मीद है कि एनटीपी 2018 के साथ, भारतीय दूरसंचार बाजार 2020 तक 6.6 लाख रुपये का राजस्व स्तर से आगे निकला जाएगा। सरकार कारोबारी सहजता के लिए और नवाचार और निवेश के अनुकूल वातावरण बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।
      इस अवसर पर दूरसंचार सचिव सुश्री अरुणा सुंदरराजन ने कहा कि भारत मोबाइल कांग्रेस प्रधानमंत्री की दृष्टि से पूरी तरह से जुड़ने और डिजिटल रूप से सशक्त भारत के लिए मंच का वादा करता है।
     उन्होंने कहा कि वर्ष के अंत तक एक लाख ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड के साथ जोड़ने के लिए भारत-नेट प्रोजेक्ट को लागू करने में सात गुनी तेजी से काम किया गया। उन्होंने बताया कि 2019 तक 1 लाख वाई-फाई हॉटस्पॉट्स का लक्ष्य और 2022 तक भारत में 700 मिलियन इंटरनेट उपयोगकर्ता का लक्ष्य हासिल करना है।

भारत में विदेशी पर्यटकों का आगमन बढ़ा

    नई दिल्ली। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने यहां विश्‍व पर्यटन दिवस के अवसर पर संस्‍कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित एक समारोह में यात्रा, पर्यटन और आतिथ्‍य उद्योग की विभिन्‍न श्रेणियों में राष्‍ट्रीय पर्यटन पुरस्‍कार 2015-16 प्रदान किये। 

    पर्यटन राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) अल्‍फोंस कन्‍ननथनम ने समारोह की अध्‍यक्षता की। समारोह में राज्‍यों के पर्यटन मंत्री, केन्‍द्र और राज्‍य सरकारों के अधिकारी, प्रमुख होटलों के मालिक, ट्रेवल एजेंट और टूर ऑपरेटर सहित यात्रा और आतिथ्‍य उद्योग के सदस्‍य, पर्यटन और आतिथ्‍य संस्‍थानों के छात्र, ट्रेवल मीडिया तथा पत्रकार उपस्थित थे। 
     इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने अतुल्‍य भारत 2.0 अभियान: एक विरासत अपनाएं परियोजना और नए अतुल्‍य भारत वेबसाइट का शुभारंभ भी किया। अतुल्‍य भारत 2.0 अभियान डिजिटल और सोशल मीडिया पर अधिक ध्‍यान केंद्रित कर बाजार आधारित प्रचार योजनाओं और उत्‍पाद विशिष्‍टता के आधार पर रचनात्‍मकता के लिए विश्‍वभर में किये जा रहे मौजूदा वर्गीकृत प्रचार में हो रहे परिवर्तन को दर्शाता है। 
      एक विरासत अपनाएं परियोजना का उद्देश्‍य पर्यटक सुविधाएं विकसित करने के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों को विरासत स्‍थल सौंपना है। इन स्‍थलों को अपनाकर वे स्‍मारक मित्र बन जायेंगे। नया अतुल्‍य भारत वेबसाइट मौजूदा वेबसाइट का उन्‍नत संस्‍करण हैं जिसमें कई उपयोगी सुविधाएं हैं। इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने कहा कि पर्यटन विश्‍व के सबसे बड़े उद्योग में से एक है।
      इसके विकास का अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि दुनिया भर में पर्यटकों की संख्या 1950 में 2.2 करोड़ थी जो 2016 में बढ़कर 123 करोड़ हो गई। विश्व के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में पर्यटन उद्योग का 10.2 प्रतिशत का योगदान है। अनुमान है कि दुनिया में प्रत्‍येक दसवां व्यक्ति पर्यटन उद्योग में कार्य करता है। भारत में भी बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका पर्यटन उद्योग से जुड़ी हुई है। 
      वर्ष 2016 में सकल घरेलू उत्पाद में पर्यटन का 9.6 प्रतिशत और कुल रोजगार में 9.3 प्रतिशत योगदान था। पर्यटन उद्योग स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करने और गरीबी दूर करने में महत्‍वपूर्ण योगदान दे सकता है। एक आकंलन के अनुसार, पर्यटन उद्योग में 10 लाख रुपये का निवेश कर लगभग 90 लोगों को रोजगार प्रदान किया जा सकता है, जबकि कृषि क्षेत्र में लगभग 45 लोगों और विनिर्माण क्षेत्र में लगभग 13 लोगों के लिये रोजगार उपलब्‍ध होता है।
      राष्ट्रपति ने कहा कि समावेशी पर्यटन विकास से समेकित आर्थिक विकास को सुदृढ़ किया जा सकता है। प्रत्येक नागरिक को अपने स्तर पर पर्यटकों को अच्छा अनुभव प्रदान करने का प्रयास करना चाहिए। पर्यटन के प्रति जागरूक समाज में सरकार की भूमिका केवल दिशा और सुविधाजनक वातावरण प्रदान करने की है। 
     राष्ट्रपति ने कहा कि पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से संस्कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा आज शुरू की गयी एक विरासत परियोजना अपनाएं से हमारे समृद्ध और विविध विरासत स्मारकों को पर्यटक-अनुकूल बनाने की भरपूर संभावनाएं हैं। 
     उन्होंने आशा व्यक्त की कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों की भागीदारी से यह परियोजना हमारी विरासत के रखरखाव में मददगार साबित होगी। पर्यटन राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) अल्‍फोंस कन्‍ननथनम ने अपने संबोधन में राष्‍ट्रीय पर्यटन पुरस्‍कार 2015-16 के विजेताओं को बधाई दी और आग्रह किया कि विश्‍वभर के यात्रियों के लिए भारत को सबसे पसंदीदा गंतव्‍य स्‍थान बनाने के लिए सभी प्रतिबद्ध हों।
      उन्‍होंने कहा कि भारत में विदेशी पर्यटकों का आगमन बढ़ा है और घरेलू पर्यटक यात्राओं में वृद्धि हुई है। विश्‍व आर्थिक फोरम के यात्रा और पर्यटन प्रतिस्‍पर्धी सूचकांक 2017 में भारत की रैंकिंग वर्ष 2015 में 65वें स्‍थान से बढ़कर 52वें स्‍थान पर पहुंच गई थी और अब भारत का स्‍थान 12 पॉइंट और बढ़कर 40वां है। 
    उन्‍होंने कहा कि भारत एक ऐसा गंतव्‍य स्‍थल है जहां सभी यात्रियों की जरूरतें पूरी होती हैं। हमारा सामूहिक लक्ष्‍य भारत में पर्यटन क्षेत्र को स्‍थायी और जिम्‍मेदार तरीके से विकसित करना है। बडे पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने, गरीबी उन्‍मूलन, स्‍थानीय समुदायों के आर्थिक और सामाजिक लाभ तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए अपनी अंतरनीहित क्षमताओं के कारण पर्यटन का वांछनीय स्‍थान है। 
        उन्‍होंने यात्रा और पर्यटन उद्योग के नेताओं से पर्यटन पर अपने अभिनव विचार साझा करने का आग्रह किया ताकि इसे प्रधानमंत्री के महान विचार बदलते भारत के पर्यटन क्षेत्र में साकार किया जा सके। पर्यटन मंत्रालय में सचिव श्रीमती रश्मि वर्मा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से भारत का पर्यटन क्षेत्र बढि़या प्रदर्शन कर रहा है और इसकी वृद्धि दर विश्‍व पर्यटन की औसतन वृद्धि दर से अधिक है। 2016 में भारत में 8.80 मीलियन विदेशी पर्यटकों का स्‍वागत किया था जो 2015 की तुलना में 9.7 प्रतिशत अधिक था। जनवरी से जुलाई 2017 की अवधि के दौरान विदेशी पर्यटकों के आगमन में 15.7 प्रतिशत की दो अंकीय वृद्धिदर रही, जिसके कारण वर्तमान वर्ष में भी पर्यटन के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं।
       यह पर्यटन क्षेत्र के हमारे साझेदारों की समर्थन और सहयोग के बिना संभव नहीं था। भारत सरकार का पर्यटन मंत्रालय प्रतिवर्ष यात्रा, पर्यटन और आतिथ्‍य उद्योग की विभिन्‍न श्रेणियों में राष्‍ट्रीय पर्यटन पुरस्‍कार प्रदान करता है। यह पुरस्‍कार राज्‍य सरकारों केन्‍द्र शासित प्रदेशों, वर्गीकृत होटलों, विरासत होटलों, मान्‍यता प्राप्‍त ट्रेवल एजेंटों, टूर ऑपरेटरों, पर्यटक परिवहन संचालकों, व्‍यक्तियों और अन्‍य निजी संगठनों को अपने-अपने क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए प्रदान किये जाते हैं। 
     राष्‍ट्रीय पर्यटन पुरस्‍कार पिछले कुछ वर्षों से यात्रा, पर्यटन और आतिथ्‍य क्षेत्रों में उपलब्धियों के लिए प्रतिष्ठित सम्‍मान माने जाते हैं। पुरस्‍कार समारोह की तिथि का चयन विश्‍व पर्यटन दिवस के उपलक्ष्‍य में किया गया जो प्रतिवर्ष 27 सितम्‍बर को मनाया जाता है। विश्‍व पर्यटन दिवस मनाने का उद्देश्‍य पर्यटन के महत्‍व और इसकी सामाजिक सांस्‍कृतिक राजनीतिक तथा आर्थिक मूल्‍यों के प्रति अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय में जागरूकता बढ़ाना है।

सौभाग्य : बिजली हर घर योजना

   नई दिल्ली। प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना सौभाग्य नामक नई स्कीम का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 25 सितंबर सन् 2017 को किया गया।

 इसका उद्देश्य ग्रामीण के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी देश में सभी घरों का विद्युतीकरण सुनिश्चत करना है। इस योजना के उद्देश्यों, विशेताओं, अपेक्षित परिणामों और क्रियान्वयन रणनीति की विस्तृत जानकारी देते हैं।
इस नई योजना का उद्देश्य क्या है ?
सौभाग्य का उद्देश्य अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी सुनिश्चत करते हुए सभी घरों में बिजली पहुंचाना और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के सभी शेष गैर विद्युतिकृत घरों में बिजली कनेक्शन सुलभ कराना है, ताकि देश में सभी घरों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके। 
     अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी और घरों में बिजली कनेक्शन मुहैया कराने में क्या-क्या शामिल हैं ?
घरों में बिजली कनेक्शन देने के कार्य में संबंधित घर से निकटतम विद्युत खंबे से सर्विस केबल घर तक लाना, बिजली मीटर लगाना, एलईडी बल्ब और एक मोबाईल चार्जिंग प्वाइंट के साथ एकल विद्युत प्वाइंट के लिए तार डालना शामिल है। यदि सर्विस केबल लाने के लिए संबंधित घर के निकट विद्युत खंबा उपलब्ध नहीं है तो कंडेक्टर एवं संबंधित उपकरणों के साथ अतिरिक्त खंबा लगाया जाना भी इस योजना में शामिल है।
     
क्या हर गैर विद्युतीकृत घर को पूरी तरह से मुफ्त में बिजली कनेक्शन दिया जाएगा ?
हाँ। गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे। इस योजना के तहत सिर्फ 500 रूपये के भुगतान पर अन्य घरों को भी विद्युत कनेक्शन मुहैया कराए जाएंगे। इस राशि की वसूली बिजली बिलों के साथ 10 किस्तों में डिस्कॉम विद्युत विभागों द्वारा की जाएगी।
   
क्या मुफ्त बिजली कनेक्शन में उपभोग या खपत के लिए मुफ्त बिजली भी शामिल है ?
इस योजना में किसी भी श्रेणी के उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली मुहैया कराने का कोई प्रावधान नहीं है। संबंधित उपभोक्ताओं को खपत की गई बिजली की कीमत का भुगतान डिस्कॉम विद्युत विभाग की तात्कालिक शुल्क दरों के अनुसार करना होगा।
   
भारत सरकार के पूर्ववर्ती कार्यक्रम सभी के लिए 24ग7 बिजली का भी समान उद्देश्य है। अतः यह इस कार्यक्रम से किस तरह भिन्न है ?
सभी के लिए 24न्7 बिजली राज्यो के साथ एक संयुक्त पहल है जिसमें विशिष्ट राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश के रोड़ मैप एवं कार्य योजना को अंतिम रूप देने के लिए विद्युत क्षेत्र के सभी सेग्मेंटों अर्थात विद्युत उत्पादन, पारेषण एवं वितरण, उर्जा दक्षता, डिस्कॉम की माली हालत इत्यादि को शामिल किया गया है, ताकि राज्यों केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ विचार-विमर्श कर सभी को 24 घंटे बिजली सुलभ कराई जा सके। सभी के लिए बिजली से संबंधित दस्तावेजों में विद्युत क्षेत्र की समस्त वैल्यु चेन के लिए आवश्यक विभिन्न कदमों का विवरण शामिल है। सभी घरों को कनेक्टिविटी मुहैया कराना 24न्7 विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। सौभाग्य बिजली मुहैया कराने के मसले का समाधान करने की दिशा में एक आवश्यक संरचनात्मक सहायता है।
    
वितरण क्षेत्र में दो प्रमुख योजनांए यथा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए डीडीयूजीजेवाई और शहरी क्षेत्रों के लिए आईपीडीएस पर पहले से ही अमल किया जा रहा है, अतः एक नई योजना की आवश्यकता क्यों है ?
दीन दयाल उपाध्यायाय ग्राम ज्योति योजना ( डीडीयूजीजेवाई) के तहत गांवों/ घरों में बुनियादी विद्युत ढांचे का सृजन, मौजूदा बुनियादी ढांचे को मज़बूत एवं विस्तार करना,मौजूदा फीडरों/ वितरण ट्रांसफॉर्मरों उपभोक्ताओं के यहां मीटर लगाना शामिल है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनियता बेहतर की जा सके। इसके अलावा अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी के साथ-साथ केवल उन बीपीएल परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन मुहैया कराए जाते हैं, जिसकी पहचान राज्यो द्वारा अपनी सूची के मुताबिक की जाती है। हालांकि ऐसे कई गांव हैं जहां काफी पहले ही विद्युतीकरण हो चुका है लेकिन कई कारणों से अनेक घरों में बिजली कनेक्शन अब तक सुलभ नहीं हो पाए हैं। 
      कई ऐसे गरीब परिवार है जिनके पास बीपीएल कार्ड नहीं है, लेकिन ये परिवार आरंभिक कनेक्शन चार्ज अदा करने में समर्थ नहीं है। अनप़ढ़ लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि विद्युत कनेक्शन कैसे लिया जाता है? दूसरे शब्दों में, अनपढ़ लोगों के लिए बिजली कनेक्शन लेने के मार्ग में बाधाएं आती है। कई जगहों पर आस-पास बिजली के खंबे नहीं है। विद्युत कनेक्शन लेने के लिए संबंधित घरों से अतिरिक्त खंबे एवं कंडक्टर लगाने का प्रभार लिया जाता है।
   इसी तरह शहरी क्षेत्रों में एकीकृत विद्युत विकास योजना (आईपीडीएस) के तहत बिजली सुविधा मुहैया कराने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा स्थापित किया जाता है, लेकिन कुछ परिवारों को मुख्यतः उनकी आर्थिक स्थिति के कारण अब तक विद्युत कनेक्शन नहीं मिल पाए हैं क्योंकि वे आरंभिक कनेक्शन चार्ज अदा करने में समर्थ नहीं है। इन सभी कमियों को दूर करने और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के सभी गैर विद्युतिकृत परिवारों को बिजली कनेक्शन मुहैया कराने से संबंधित प्रवेश बाधा दूर करने और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी मुहैया कराने के मुद्दे को सुलझाने के लिए ही सौभाग्य का शुभारंभ किया गया है।
   
क्या सौभाग्य योजना की लागत डीडीयुजीजेवाई के तहत उपलब्ध परिव्यय से अलग है ?
हां, सौभाग्य योजना पर आने वाली 16,320 करोड़ रूपये की लागत डीडीयुजीजेवाई के तहत किए जा रहे निवेश के अलावा है।
   
राज्यों को धनराशि के आबंटन का पैमाना क्या है ?
योजना के तहत परियोजनाओं को मंजूरी राज्यों द्वारा पेश की जाने वाली विस्तृत परियोजना रिपोर्टों (डीपीआर) के आधार पर दी जाएगी। इस योजना के तहत धनराशि का कुछ भी अग्रिम आवंटन नहीं किया जाता है।
    
योजना को पूरे देश में कैसे लागू किया जाएगा ?
परियोजना से संबंधित प्रस्ताव राज्यों की डिस्कॉम विद्युत विभाग द्वारा तैयार किए जाएंगे और भारत सरकार के सचिव (विद्युत) की अध्यक्षता वाली अंतर-मंत्रालय निगरानी समीति द्वारा स्वीकृत किए जाएंगे। मंजूर परियोजनाओं के तहत विद्युतिकरण कार्य संबंधित डिस्कॉम/विद्युत विभाग द्वारा पूरे किए जाएंगे। ये कार्य टर्नकी ठेकेदारों अथवा विभाग अथवा उन उपयुक्त ऐजेंसियों के ज़रिए पूरे किए जाएंगे जो मानकों के मुताबिक इस कार्य को पूरा करने में समर्थ है।
 
समयबद्ध ढंग से लक्ष्य प्राप्ति के लिए रणनीति क्या है ?
घरों को बिजली कनेक्शन तेज़ी से मुहैया कराने के लिए गांवों/ग्रामीण कलस्टरों में लाभार्थियों की पहचान के लिए शिविर लगाए जाएंगे। इसके तहत मोबाइल एप/ वेब पोर्टल के साथ अत्याधुनिक सूचना प्रोद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाएगा। बिजली कनेक्शन से संबंधित आवेदनों को इलेक्ट्रॉनिक ढंग से भी पंजीकृत किया जाएगा और आवेदक की फोटो, पहचान कार्ड की प्रति और/अथवा विभिन्न विवरण जैसे की मोबाइल नंबर/आधार नंबर/बैंक खाता संख्या इत्यादि सहित समस्त दस्तावेजीकरण कार्य संबंधित शिविरों में ही मौके पर पूरे किए जाएंगे, ताकि जल्द से जल्द कनेक्शन दिए जा सके।
    ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत/सार्वजनिक संस्थानों को भी आवेदन पत्र इकट्ठा करने एवं प्रलेखन कार्य पूरा करने के साथ-साथ बिजली बिलों के वितरण, राजस्व संग्रह और अन्य मान्य गतिविधियों के लिए भी अधिकृत किया जाएगा।
    
विद्युत नेटवर्क में 4 करोड़ घरों को शामिल करने पर बिजली की मांग में अनुमानित वृद्धि कितनी होगी ?
प्रतिघर 1 किलोवाट के औसत लोड और प्रतिदिन 8 घंटे तक लोड के औसत उपयोग को ध्यान में रखते हुए प्रतिवर्ष लगभग 28000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली और लगभग 80000 मिलियन युनिट अतिरिक्त उर्जा की आवश्यकता होगी। यह एक परिवर्तनीय आंकड़ा है। आय के साथ-साथ बिजली उपयोग की आदत बढ़ने पर बिजली की मांग में परिवर्तन होना तय है। इन अनुमानों के परिवर्तित होने पर भी इस आंकड़े में तब्दीली होगी।
    
उन घरों के लिए क्या प्रावधान है जहां ग्रिड लाइने उपलब्ध कराना संभव नहीं है ?
सुदुर एवं दूर-दराज के इलाको में अवस्थित घरों को 200 से लेकर 300 वाट के सोलर पावर पैक और 5 एलईडी लाइट, 1 डीसी पंखा, 1 डीसी पावर प्लग के साथ बैटरी बैकिंग सुलभ कराई जाएगी। इसके साथ ही 5 वर्षों के लिए मरम्मत एवं रखरखाव सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी।
    
सौभाग्य के तहत कितने गैर विद्युतिकृत घरों को कवर किया जाएगा ?
देश में लगभग 4 करोड़ गैर विद्युतिकृत घर होने का अनुमान लगाया गया है, जिनमें से लगभग 1 करोड़ बीपीएल ग्रामीण परिवारों को डीडीयुजीजेवाई की मंज़ूर परियोजनाओं के तहत पहले भी कवर किया जा चुका है। अतः कुल 300 लाख घरों को इस योजना के तहत कवर किए जाने की आशा है जिनमें से 250 लाख घर ग्रामीण क्षेत्रों में और 50 लाख घर शहरी क्षेत्रों में है।
  
क्या इस योजना में अवैध उपभोक्ताओं को माफ करते हुए इसमें उन्हें पंजीकृत कराने की सुविधा दी जाएगी? क्या स्कीम में कुछ इस तरह का भी लक्षित किया गया है ?
अवैध कनेक्शनों की समस्या से संबंधित डिस्कॉम विद्युत विभाग अपने-अपने नियमों नियमनों के अनुसार निपटेगा। हांलाकि इस योजना में स्पष्ट शब्दों में यह उल्लेख किया गया है कि ऐसे डिफॉल्टरों को इस योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा जिनके कनेक्शन काटे जा चुके हैं।
   
यह योजना लोगों के लिए उनके दैनिक जीवन मे किस तरह उपयोगी साबित होगी ?
बिजली सुविधा मुहैया कराई जाने से निश्चित तौर पर लोगों के जीवन की गुणवत्ता और मानव विकास पर हर पहलु से सकारात्मक असर पड़ेगा। पहला, बिजली सुलभ होने से घर को रोशन करने के लिए केरोसिन का विकल्प मिल जाएगा और घर के अंदर केरोसिन से होने वाला प्रदूषण समाप्त हो जाएगा और इस तरह लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिलेगी। इसके अतिरिक्त बिजली सुविधा से देश के सभी हिस्सों में दक्ष एवं अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने में मदद मिलेगी। 
    सुर्यास्त के बाद घरों के रोशन होने से वहां रहने वाले लोगों विशेषकर महिलाओं को अधिक व्यक्गित सुरक्षा महसूस होगी। इसी तरह सूर्यास्त के बाद सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेगी। बिजली सुलभ होने से सभी क्षेत्रों में शिक्षा सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा और सुर्यास्त के बाद घरों में बेहतर रोशनी मिलने से बच्चे अपनी पढ़ाई पर और ज़्यादा समय दे सकेंगे और इस तरह भविष्य में अपने करियर में ज़्यादा आगे बढ़ सकेंगे। घरों के रोशन होने से इस बात की भी संभावना बढ़ गई है कि महिलांए पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा अध्ययन कर सकेंगी और आर्थिक रूप से भी अधिक आमदनी अर्जित कर सकेगी।
     
इस योजना से आर्थिक विकास और रोज़गार सृजन को कैसे बढ़ावा मिलेगा ?
घरों को रोशन करने के लिए केरोसिन के बजाए बिजली का उपयोग होने पर केरोसिन पर वार्षिक सब्सिडी घट जाएगी। इसके साथ ही पेट्रोलियम उत्पादो का आयात घटाने में भी मदद मिलेगी। हर घर में बिजली सुलभ होने से संचार के सभी साधनों यथा रेड़ियो, टेलीविजन, इंटरनेट, मोबाइल इत्यादि का कहीं अधिक उपयोग संभव हो पाएगा जिससे लोग इन संचार साधनों के ज़रिए सभी तरह की आवश्यक सूचनांए प्राप्त कर सकेंगे।
     किसानों को नई एवं बेहतर कृषि तकनीकों, कृषि मशीनरी, गुणवत्ता पूर्ण बीजों इत्यादि के बारे में जानकारी मिल पाएगी जिससे कृषि उत्पादन के साथ-साथ किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव हो पाएगी। इसके अतिरिक्त किसान एवं युवा कृषि आधारित लघु उद्योग लगाने की संभावनाएं भी तलाश सकेंगे।
        
विश्वसनीय विद्युत सेवांए उपलब्ध होने से दैनिक उपयोग की वस्तुओं वाली नई दुकाने, विनिर्माण कार्यशालाएं, आटा मिलें, कुटीर उद्योग इत्यादि खोलने मे भी आसानी होगी। इस तरह की आर्थिक गतिविधियों से प्रत्यक्ष के साथ-साथ अप्रत्यक्ष रोज़गार भी सृजित होंगे। स्वयं इस योजना के क्रियान्वयन से भी रोज़गार सृजित होंगे क्योकि घरों में विद्युतिकरण कार्य के लिए अर्द्धकुशल कुशल कामगारों की आवश्यकता पड़ेगी। इस योजना के क्रियान्वयन के दौरान लगभग 1,000 लाख दैनिक श्रम दिवस सृजित होंगे। 16,000 करोड़ रूपये से भी अधिक की राशि व्यय होने से कुछ सकारात्मक बाह्य असर पड़ेंगे जिससे और अधिक रोज़गार सृजन में मदद मिलेगी जिससे अर्थिक विकास की गति बढ़ेगी।
 
क्या इस योजना के बारे में आम जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने की कोई योजना है ताकि अधिक से अधिक लोग इससे लाभान्वित हो सके ?
भारत सरकार रेड़ियो, प्रिंट मीडिया, टेलीविजन, श्राइन बोर्डों इत्यादि के ज़रिए प्रचार-प्रसार अभियान चलाएगी। विभिन्न शोध अध्ययनों से पता चला है कि बिजली कनेक्शन की लागत, बिजली के उपयोग, केरोसिन के मुकाबले बिजली उपयोग की लागत, बिजली उपयोग के फायदों (प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष) इत्यादि सहित बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया के बारे में जागरूकता न होने के कारण भी घरेलु विद्युतिकरण की प्रक्रिया धीमी है। अतः इस योजना के सभी पहलुओं से लोगों को अवगत कराने के लिए मल्टीमीडिया अभियान शुरू किया जाएगा। 

डिस्कॉम के अधिकारी बिजली के साथ-साथ सौभाग्य के बारे में भी जागरूकता बढ़ाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में भी शिविर लगाएंगे। विद्यालय के शिक्षकों, ग्राम पंचायत के सदस्यों और स्थानीय साक्षर/शिक्षित युवाओं को भी इस जागरूकता अभियान से जोड़ा जाएगा।