पशुओं के लिए भारत में अभी तक कोई समग्र कानून नहीं !
पशुओं की रक्षा-सुरक्षा के लिए भारत में अभी तक कोई समग्र कानून नहीं है। हालांकि अब भारत सरकार पशु कल्याण, रक्षा-सुरक्षा के लिए कानून बनाने की दिशा में संवेदनशील है।
कानून का मसौदा तैयार है। अब देश के बाशिंदों से सुझाव मांगे गये हैं। नए कानून के तहत पशुओं खास तौर कुत्ता आदि की ऑनलाइन खरीद-फरोख्त की जा सकेगी। पशुओं को अनावश्यक दर्द से मुक्ति दिलाने के लिए पर्यावरण मंत्रालय ने पशु क्रूरता (स्वान प्रजनन और विपणन) निवारण नियम, 2016 की अधिसूचना पर सुझाव आमंत्रित किए है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पशु क्रूरता (स्वान प्रजनन और विपणन) निवारण नियम, 2016 की अधिसूचना पर सुझाव आमंत्रित किए हैं।
मंत्रालय सार्वजनिक जानकारी के लिए भारत के राजपत्र में प्रस्तावित मसौदा नियम अधिसूचित करेगा। कोई भी इच्छुक व्यक्ति नियमों के प्रकाशित होने के 30 दिनों के भीतर केन्द्र सरकार को प्रारूप के लिए अपने लिखित सुझाव भेज सकता है। सुझाव उप सचिव, पशु कल्याण प्रभाग, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, इंदिरा पर्यावरण भवन, नई दिल्ली को भेज सकते हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री अनिल माधव दवे ने कहा कि अब तक देश में स्वान के प्रजनन, बिक्री और खरीद पर कोई नियम नहीं थे। मंत्री ने उम्मीद जताई कि स्वान की खरीद और बिक्री को ऑनलाइन बना दिया जाएगा।
नियमों का उद्देश्य स्वान प्रजनकों और उनके विपणकों को जवाबदेह बनाना और इस प्रक्रिया में किसी भी क्रूरता की सजा से बचाना है। इसमें प्रजनकों और प्रतिष्ठानों के अनिवार्य पंजीकरण से संबधित कोई विशेष नियम या दिशा- निर्देश भी नहीं हैं। स्वान के प्रजनन और उनके विपणन व्यापार नियमों में भी तेजी से विकास किया जाएगा।
प्रस्तावित नियमों में, सभी स्वान प्रजनकों और स्वान प्रजनन प्रतिष्ठानों को संबंधित राज्य सरकारों के राज्य पशु कल्याण बोर्ड के साथ खुद को अनिवार्य रुप से पंजीकृत कराना होगा। स्वान प्रजनकों के लिए यह अनिवार्य है कि वह नर और मादा स्वान के नस्लों, ब्रिकी, खरीद, मौत की संख्या, पुनर्वास आदि का समुचित रिकॉर्ड बनाए रखें। हर स्वान प्रजनक को प्रतिवर्ष स्वान की ब्रिकी, व्यापार या अन्य जानकारी की वार्षिक रिपोर्ट राज्य बोर्ड को प्रस्तुत करनी आवश्यक होगी।

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