भारत की आबादी सवा अरब, आयकर रिटर्न सिर्फ 3.7 करोड़ !
केन्द्रीय वित्त् मंत्री अरुण जेटली ने इस आशय के संकेत दिये हैं कि वर्ष 2015-16 में कुल जनसंख्या 125 करोड़ में केवल 3.7 करोड़ लोगों ने आयकर रिटर्न दाखिल किया। इनमें 99 लाख लोगों ने 2.5 लाख रुपये से अपनी आय कम दिखाई।
इन्होंने कोई कर का भुगतान नहीं किया, 1.95 करोड़ लोगों ने अपनी आय पांच लाख रुपये से कम दिखाई, 52 लाख लोगों ने अपनी आय पांच से दस लाख रुपये के बीच दिखाई। केवल 24 लाख लोगों ने अपनी आय दस लाख रुपये से अधिक दिखाई। इसके लिए कोई ठोस प्रमाण की जरूरत नहीं कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यकक्ष कर दोनों के मामले में भारत अभी भी कर अदा करने के मामले में बड़ा गैर- अनुपालना वाला समाज बना हुआ है। गरीबी उन्मूलन, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए जरूरी व्यय के मामले पर कर अदा न करने के कारण समझौता करना पड़ा है।
सात दशक तक एक सामान्य भारतीय नकदी और चेक द्वारा लेन-देन करता रहा है। ‘पक्का ’ और ‘कच्चा ’ खाता व्यापार की भाषा है। कर चोरी न तो गलत माना जाता है और न ही अनैतिक। यह जीने का एक रास्ता था। कई सरकारों ने सार्वजनिक हितों से समझौते के बाद भी इसे ‘सामान्य’ रूप से चलने दिया। प्रधानमंत्री के निर्णय का इरादा एक नया ‘सामान्य’ बनाने का है। यह भारत और भारतीयों के खर्च करने की रुपरेखा में परिवर्तन चाहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उच्चतर मूल्य वर्ग के करेंसी नोटों के लीगल टेंडर होने की समाप्ति के निर्णय को दो महीने बीत चुके हैं। परिणामस्वरूप उन नोटों का विमुद्रीकरण हो गया है। जब किसी देश की 86 प्रतिशत करेंसी जो कि उसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 12.2 प्रतिशत है, को बाजार से निचोड़कर बाहर फेंका जाएगा। इसके स्थान पर नई मुद्रा लाई जाएगी तो स्पष्ट तौर पर इस निर्णय के महत्वपूर्ण परिणाम होंगे।
नरेंद्र मोदी सरकार का पहले दिन से ही यह एकदम स्पष्ट था कि वह छाया अर्थ व्यवस्था और काले धन के खिलाफ कदम उठाएगी। इस दिशा में सरकार का सर्वोच्च न्यायलय के आदेश पर एसआइटी का गठन करना पहला कदम था। प्रधानमंत्री ने ब्रिसबेन में जी-20 देशों के सम्मेलन में इसका प्रस्ताव दिया था कि आधार के अपक्षरण और लाभ के हस्तांरतरण की दिशा में सूचना साझेदारी के अंतरराष्ट्रीय सहयोग की गति तेज की जानी चाहिए। इस उद्देश्य को अमेरिका के साथ की गई व्यवस्था ने आगे बढ़ाया। राजग सरकार ने स्विटजरलैंड के साथ 2019 से लागू होने वाली व्यववस्था को भी पूरा किया। इसके तहत स्विटजरलैंड में रखे गए भारतीय नागरिकों के धन का विस्तृत विवरण और इसी तरह भारत में स्विस नगरिकों के धन के बारे में एक-दूसरे को सूचना देने का प्रावधान है।
नरेंद्र मोदी सरकार का पहले दिन से ही यह एकदम स्पष्ट था कि वह छाया अर्थ व्यवस्था और काले धन के खिलाफ कदम उठाएगी। इस दिशा में सरकार का सर्वोच्च न्यायलय के आदेश पर एसआइटी का गठन करना पहला कदम था। प्रधानमंत्री ने ब्रिसबेन में जी-20 देशों के सम्मेलन में इसका प्रस्ताव दिया था कि आधार के अपक्षरण और लाभ के हस्तांरतरण की दिशा में सूचना साझेदारी के अंतरराष्ट्रीय सहयोग की गति तेज की जानी चाहिए। इस उद्देश्य को अमेरिका के साथ की गई व्यवस्था ने आगे बढ़ाया। राजग सरकार ने स्विटजरलैंड के साथ 2019 से लागू होने वाली व्यववस्था को भी पूरा किया। इसके तहत स्विटजरलैंड में रखे गए भारतीय नागरिकों के धन का विस्तृत विवरण और इसी तरह भारत में स्विस नगरिकों के धन के बारे में एक-दूसरे को सूचना देने का प्रावधान है।
वर्ष 1996 से मॉरिशस के साथ चली आ रही दोहरा कर बचाव संधि पर फिर बातचीत की जा रही है। संधि प्रभावी ढंग से वापसी (राउंड ट्रिपिंग) को बढ़ावा देने वाली है। इसी तरह की संधियों पर साइप्रस और सिंगापुर के साथ भी फिर से बातचीत हुई। भारत के बाहर अवैध संपत्ति से संबंधित काले धन कानून ने एक खिड़की खोली है जिसके तहत ऐसे खुलासों के लिए 60 प्रतिशत कर के साथ दस साल की कैद का प्रावधान है। 45 प्रतिशत कर वाली आयकर खुलासा घोषणा स्कीम (आईडीएस)-2016 सफल रही। काले धन के जरिये खर्च करने पर दो लाख से अधिक के खर्च पर पैन कार्ड अनिवार्य करने से बाधा पैदा हुई है। सन् 1988 में बना बेनामी कानून कभी भी लागू नहीं किया गया। अब इसमें संशोधन किया गया है। इसे क्रियान्वित किया गया है।

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