आर्थिक, व्यापार-उद्योग विकास में सहभागी बनेंगे जापान एवं भारत
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने जापान के आर्थिक, व्यापार एवं उद्योग मंत्री हीरोशिगे सीको की अगुवाई में आये जापानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।
इस बात को स्मरण किया कि नवम्बर, 2016 में भारत के प्रधानमंत्री की जापान यात्रा दोनों देशों के आपसी भागीदारी को और मजबूत करने के लिहाज से अत्यंत सफल रही थी। उन्होंने वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन के दौरान जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ सार्थक चर्चाएं होने की उम्मीद जताई। कहा कि भारत-जापान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) के क्रियान्वयन की गति कमोबेश स्थिर रही है। इसकी गति तेज करने की जरूरत है, ताकि भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार की व्यापक संभावनाओं का दोहन किया जा सके।
जापान के आर्थिक, व्यापार एवं उद्योग मंत्री हीरोशिगे सीको ने ‘मेक इन इंडिया’ के लिए भारत सरकार द्वारा उठाये गये विभिन्न कदमों और भारत के विकास के लिए की गई अन्य पहलों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत-जापान सहयोग बढ़ाने की काफी गुंजाइश हैं। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि 25 जापानी कंपनियां बड़े ही उत्साह के साथ वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन में शिरकत कर रही हैं।
जापानी प्रतिनिधिमंडल ने यह आग्रह किया कि भारत में जापान के वाणिज्य एवं उद्योग मंडलों (जेसीसीआईआई) द्वारा समय-समय पर उठाये जाने वाले ट्रांसफर प्राइसिंग आकलन के मुद्दे के साथ-साथ अन्य मसलों को भी सुलझाये जाने की जरूरत है, ताकि भारत में और ज्यादा जापानी निवेश आकर्षित किया जा सके। जापान के व्यावसायिक प्रतिनिधियों ने भारत में अपने कारोबार के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही यह भी बताया कि वे भारत में विभिन्न क्षेत्रों में अपने व्यवसाय का विविधीकरण करना चाहते हैं। इनमें कृषि, विद्युत, रेलवे व लॉजिस्टिक क्षेत्र और एटीएम का निर्माण इत्यादि शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि वे भारत के विकास में अपनी ओर से योगदान करना चाहते हैं। श्रीमती सीतारमण ने भारत से जापान को होने वाले विभिन्न उत्पादों के निर्यात में वृद्धि के लिए जापानी प्रतिनिधिमंडल से आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया। इनमें तिल के बीज, सुरिमी फिश और भारतीय जेनेरिक दवाएं शामिल हैं। दोनों पक्षों ने यह उम्मीद जताई कि वचनबद्धता के निरंतर जारी रहने से दोनों देशों के बीच साझेदारी और ज्यादा बढ़कर नये स्तर पर पहुंच जायेगी।

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