अनुसूचित जनजाति को 55.43 लाख एकड वन भूमि
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने कहा कि मंत्रालय के वर्ष 2016-17 के बजट आवंटन का 70 प्रतिशत हिस्सा खर्च किया जा चुका है।
कहा कि मंत्रालय ने वन अधिकार अधिनियम के समुचित कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान दिया है। अक्तूबर, 2016 तक राज्य सरकारों से प्राप्त सूचना के अनुसार, लगभग 16.78 लाख व्यक्तिगत (वन अधिकार) अधिकार पत्र 55.43 लाख एकड़ की वन भूमि क्षेत्र के लिए दिए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त 48,192 सामुदायिक (वन अधिकार) अधिकार पत्र लगभग 47 लाख एकड़ वन भूमि क्षेत्र के लिए वितरित किए जा चुके हैं। मंत्री ने बताया कि पुदुचेरी में इरूलर (विल्ली और वेट्टईकरण सहित) जनजाति को अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल किया गया है। असम, छत्तीसगढ़, झारखंड, तमिलनाडु और त्रिपुरा में अनुसूचित जनजातियों की सूची संशोधित करने के लिए, संविधान (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति) आदेश (संशोधन), विधेयक 2016 संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोक सभा में पेश किया गया। ओराम ने कहा कि मंत्रालय जनजातीय लोगों की आवश्यकता तथा जरूरतों के अनुसार ढांचें के निर्माण के लिए कौशल विकास तथा उद्यमिता मंत्रालय के साथ सहयोग कर रहा है। 163 प्राथमिकता (जनजातीय बहुल) वाले जिलों में से प्रत्येक में एक बहु-कौशल संस्थान स्थापित करने की योजना है। अवसंरचनात्मक ढाँचे के निर्माण पर खर्च, जनजातीय कार्य मंत्रालय तथा राज्य सरकारों के बीच आधा-आधा बांटा जाएगा।
उन्होंने कहा कि ‘’वनजीवन’’ जनजाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए शोध एवं तकनीकी केन्द्र के रूप में कार्य करने हेतु जनजातीय कार्य मंत्रालय के भीतर शीर्ष कन्द्रीय संस्थान के रूप में कार्य करेगा। संसाधन केन्द्र, उद्यमशीलता तथा कौशल उन्नयन के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में सतत् आजीविका केन्द्रों के विकास एवं प्रसार का पोषण करेगा। ‘’वनजीवन’’, कौशल विकास तथा उद्यमिता मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय आदि जैसे अन्य केन्द्रीय मंत्रालयों/विभागों के साथ कौशल निर्माण के प्रयास करेगा। लघु वन उत्पाद (एमएफपी) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का उल्लेख करते हुए जुएल ओराम ने कहा कि पिछले महीने इस योजना के कार्य क्षेत्र का विस्तार अनुसचूी- 5 वाले राज्यों से बढ़ाकर देश के सभी राज्यों में लागू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि एमएफपी की मौजूदा 12 वस्तुओं की सूची में 14 अन्य वस्तुएँ भी शामिल की गईं हैं। इसके अलावा जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य की दर से 10ऽ अधिक या कम न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने के लिए भी राज्यों को छूट दी गई है।
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री ने कहा कि उनके मंत्रालय ने इसका प्रसार रोकने के लिए कई पहल किए हैं ताकि सिकल सेल वाहक (मरीज) की देखभाल की जा सके तथा आगे की पीढ़ियां इस बीमारी से बच सकें। इस बीमारी के प्रसार पर नियंत्रण के उद्देश्य से सिकल सेल प्रबंधन के लिए एक प्रोटोकॉल मार्च, 2015 में जारी किया गया था। ओराम ने कहा कि स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के साथ परामर्श के बाद नवम्बर, 2016 में राज्यों को एक संशोधित प्रोटोकॉल जारी किया गया है। इसक अनुसार, बच्चों तथा युवाओं की जांच के अलावा, गर्भवती महिलाओं की भी जांच की जानी है तथा परिवार में किसी के रोगग्रस्त पाये जाने के मामले में, परिवार के अन्य सदस्यों की भी जांच की जाएगी। कार्यक्रम में सिकल सेल वाहकों को परामर्श तथा सिकल सेल के मरीज के उपचार का भी प्रावधान है।

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