भारत का निर्यात लक्ष्य 900 बिलियन यूएस डॉलर
भारत का लक्ष्य 2020 तक भारत को वैश्विक स्तर पर मुख्य निर्यात हिस्सेदार बनाना और साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संगठनों के स्तर पर भारत के बढ़ते महत्व के अनरूप नेतृत्वकारी भूमिका में लाना है। लक्ष्य भारत के उत्पाद निर्यात और सेवाओं को मौजूदा 465.9 बिलियन यूएस डॉलर (2013-14) से बढ़ा कर 2019-20 तक 900 बिलियन यूएस डॉलर बढ़ाना है।
विश्व निर्यात के स्तर पर भारत की हिस्सेदारी को 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.5 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। दिसंबर 2014 के बाद से 18 महीनों तक नकारात्मक बढ़ोतरी के बाद जून 2016 में निर्यात आंकड़ों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। सितंबर, अक्टूबर और नवंबर के महीने में निर्यात में सकारात्कम वृद्धि देखी गई। अप्रैल से नवंबर 2016 के दौरान 174.9 बिलियन यूएस डॉलर का निर्यात हुआ जबकि इसी अवधि के दौरान 2015 में 174.7 बिलियन यूएस डॉलर का निर्यात हुआ था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दामों और सोने के निर्यात में अहम गिरावट से जनवरी 2016 के शुरुआत से ही व्यापार घाटा एक अंकों में रहा।
वर्तमान में जीईएम पीओसी पोर्टल के जरिये 86 श्रेणियों में 4000 से अधिक उत्पाद और परिवहन सेवाएं उपलब्ध हैं। फिलहाल, जीईएम में 1600 उत्पाद विक्रेता और सेवा प्रदाता तथा करीब 1500 सरकारी अधिकारी पंजीकृत हैं। जीईएम से 45 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन हो चुका है। जीईएम के जरिये खरीदारी में दामों में 10-20 प्रतिशत की कमी और कुछ मामलों में तो 56 प्रतिशत तक की कमी आई है। जीईएम अधिकतम सुशासन, न्यूनतम सरकार, मेक इन इंडिया, व्यापार में सुगमता व डिजीटल इंडिया को प्रोत्साहित करने का माध्यम है। विक्रेताओं को समय से भुगतान कर जीईएम न केवल प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित कर रहा है बल्कि लघु व्यापारिक ईकाइयों/व्यापारियों को भी सरकारी संगठनों के साथ व्यापार करने को भी प्रोत्साहित कर रहा है। डब्ल्यूटीओ का व्यापार सुविधा समझौता एक अंतरराष्ट्रीय ढांचा तैयार कर व्यापार में लागत को कम करने की दिशा में मील का पत्थर है।
व्यापार सुविधा समझौता (टीएफए) में सामानों की आवाजाही, उनकी निकासी और पारगमन की प्रक्रिया में तेजी लाने के प्रावधान हैं। इस समझौते में व्यापार सुविधा और कस्टम के अनुपालन से जुड़े मुद्दों पर कस्टम एवं अन्य उपयुक्त प्राधिकरणों में कारगर सहयोग के लिए विभिन्न उपायों का भी उल्लेख किया गया है। ये उद्देश्य भारत की ‘कारोबार में सुगमता’ वाली पहल के अनुरूप हैं। विशेष और अलग व्यवहार के अनुरूप विकासशील व कम विकसीत देशों को अलग श्रेणियों “ए” “बी” “सी” में बांटा गया है। “ए” श्रेणी में उन वचनबद्धताओं को रखा गया है जिसे अधिसूचित देश को टीएफए के लागू होने के साथ ही पूरा करना होता है। ‘बी’ श्रेणी में उन वचनबद्धताओं को शामिल किया गया है जिसे पूरा करने के लिए अधिसूचित देश थोड़ा समय मांग सकता है जबकि श्रेणी ‘सी’ में शामिल वचनबद्धताओं के लिए विकासशील व कम विकसित देश तकनीकी सहायता पाने के हकदार होंगे। फरवरी, 2016 में मंत्रीमंडल से मंजूरी मिलने के बाद भारत ने मार्च, 2016 में डब्ल्यूडीओ को टीएफए के अंतर्गत ‘ए’ श्रेणी की वचनबद्धातओं को अधिसूचित कर अप्रैल, 2016 में इसे मंजूरी दे दी। टीएफए के अंतर्गत कुल प्रावधानों का तकरीबन 70 प्रतिशत ‘ए’ श्रेणी में अधिसूचित किया गया है। भारत ने ‘सी’ श्रेणी में किसी भी प्रावधान को नहीं रखा है।
मंत्रीमंडल ने इन प्रावधानों को लागू करने व घरेलू समन्वय के लिए मंत्रीमंडल सचिव की अध्यक्षता में व्यापार सुविधा पर राष्ट्रीय समिति (एनसीटीएफ) के गठन को भी मंजूरी दे दी है। डीजीएफटी ने 27 अक्टूबर, 2016 को विदेशी मुद्रा प्राप्ति और आयात निर्यात कोड से जुड़े आंकड़ों को साझा करने के लिए वस्तु एवं सेवा नेटवर्क (जीएसटीएन) के साथ एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इससे जीएसटी के तहत करदाताओं के निर्यात लेन-देन की प्रोसेसिंग के मजबूत होने, पारदर्शिता बढ़ने और मानवीय हस्तक्षेप कम होने की उम्मीद है। डीजीएफटी ने 14 राज्यों, 2 केंद्र सरकार की एजेंसियों व जीएसटीएन के साथ आंकड़ों को साझा करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। राज्यों के स्तर पर 14 राज्यों के वाणिज्य कर विभाग ने डीजीएफटी के साथ वैट वापसी के लिए ई-बीआरसी प्राप्त करने के लिए समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए। ये राज्य महाराष्ट्र, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, हरियाणा, तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल, गोवा, बिहार हैं।इसके अतिरिक्त, वित्त मंत्रालय, परवर्तन निदेशालय, कृषि व खाद्य प्रसंस्करण निर्यात विकास प्राधिकरण और जीएसटीएन ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।
भारत ने 12-14 अक्टूबर, 2016 को नई दिल्ली के भारत व्यापार प्रोत्साहन संगठन, प्रगति मैदान में ब्रिक्स देशों के पहले व्यापार मेले का आयोजन किया। ब्रिक्स व्यापार मेले में 397 प्रदर्शकों ने हिस्सा लिया और 14,612 व्यापारिक प्रतिनिधि भी शामिल हुए। मेले में प्रमुख क्षेत्रों जैसे कि कृषि व कृषि प्रसंस्करण, ऑटो और ऑटो उपकरणों, रसायनों, स्वच्छ ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य और औषधि, कपड़ा तथा परिधान, बुनियादी ढांचा, सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग सामान, पर्यटन, रत्न एवं आभूषणों का प्रतिनिधित्व रहा। ब्रिक्स व्यापार मेले में 1601 बिजनेस टू बिजनेस (बीटूबी) बैठकों का आयोजन हुआ। ब्रिक्स व्यापार मेले के दौरान ब्रिक्स व्यापार मंच की बैठक भी हुई जिसमें स्वच्छ ऊर्जा, ढांचागत विकास व वित्त जैसे मसलों पर चर्चा की गई। भारतीय गणराज्य के वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय तथा रूसी संघ के आर्थिक विकास मंत्रालय के बीच द्विपक्षीय व्यापार व आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए।
भारत और भूटान के बीच व्यापार, वाणिज्य व पारगमन पर प्रस्तावित सहमति पर को हस्ताक्षर हुए। भारत-ग्रीस जेईसी का सत्र हुआ। जीईसी के मिनट्स पर सहमति हस्ताक्षर हेलेनिक गणराज्य के विदेश मामलों के अतिरिक्त मंत्री जॉर्ज कत्रोग्लोस ने किया। इननोप्रोम, रूस के येकातेरिनबर्ग में हर साल होने वाला सबसे बड़ा व्यापार मेला है। जुलाई, 2016 तक चले इननोप्रोम-2016 में भारत ने ‘साझेदार देश’ के रूप में 117 भारतीय कंपनियों के साथ हिस्सा लिया। महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश व झारखंड राज्य सहित कई सारे मंत्रालय विभाग सार्वजनिक उपक्रम जैसे कि भारी उद्योग मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक व आईटी विभाग, पर्यटन मंत्रालय, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन, एनटीपीसी, एनएचपीसी, नीपको व पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ने इसमें हिस्सा लिया। मेले में 95 देशों के 700 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए। इननोप्रोम 2016 में प्रतिभाग से वैश्विक व रूसी उत्पादकों के साथ सीधे संवाद करने, अपने आप में सर्वोत्तम उत्पादन तकनीकों से परिचित होने व अंतरराष्ट्रीय तथा अंतर-औद्योगिक नेटवर्क बनाने का मौका मिला।
विश्व निर्यात के स्तर पर भारत की हिस्सेदारी को 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.5 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। दिसंबर 2014 के बाद से 18 महीनों तक नकारात्मक बढ़ोतरी के बाद जून 2016 में निर्यात आंकड़ों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। सितंबर, अक्टूबर और नवंबर के महीने में निर्यात में सकारात्कम वृद्धि देखी गई। अप्रैल से नवंबर 2016 के दौरान 174.9 बिलियन यूएस डॉलर का निर्यात हुआ जबकि इसी अवधि के दौरान 2015 में 174.7 बिलियन यूएस डॉलर का निर्यात हुआ था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दामों और सोने के निर्यात में अहम गिरावट से जनवरी 2016 के शुरुआत से ही व्यापार घाटा एक अंकों में रहा।
वर्तमान में जीईएम पीओसी पोर्टल के जरिये 86 श्रेणियों में 4000 से अधिक उत्पाद और परिवहन सेवाएं उपलब्ध हैं। फिलहाल, जीईएम में 1600 उत्पाद विक्रेता और सेवा प्रदाता तथा करीब 1500 सरकारी अधिकारी पंजीकृत हैं। जीईएम से 45 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन हो चुका है। जीईएम के जरिये खरीदारी में दामों में 10-20 प्रतिशत की कमी और कुछ मामलों में तो 56 प्रतिशत तक की कमी आई है। जीईएम अधिकतम सुशासन, न्यूनतम सरकार, मेक इन इंडिया, व्यापार में सुगमता व डिजीटल इंडिया को प्रोत्साहित करने का माध्यम है। विक्रेताओं को समय से भुगतान कर जीईएम न केवल प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित कर रहा है बल्कि लघु व्यापारिक ईकाइयों/व्यापारियों को भी सरकारी संगठनों के साथ व्यापार करने को भी प्रोत्साहित कर रहा है। डब्ल्यूटीओ का व्यापार सुविधा समझौता एक अंतरराष्ट्रीय ढांचा तैयार कर व्यापार में लागत को कम करने की दिशा में मील का पत्थर है।
व्यापार सुविधा समझौता (टीएफए) में सामानों की आवाजाही, उनकी निकासी और पारगमन की प्रक्रिया में तेजी लाने के प्रावधान हैं। इस समझौते में व्यापार सुविधा और कस्टम के अनुपालन से जुड़े मुद्दों पर कस्टम एवं अन्य उपयुक्त प्राधिकरणों में कारगर सहयोग के लिए विभिन्न उपायों का भी उल्लेख किया गया है। ये उद्देश्य भारत की ‘कारोबार में सुगमता’ वाली पहल के अनुरूप हैं। विशेष और अलग व्यवहार के अनुरूप विकासशील व कम विकसीत देशों को अलग श्रेणियों “ए” “बी” “सी” में बांटा गया है। “ए” श्रेणी में उन वचनबद्धताओं को रखा गया है जिसे अधिसूचित देश को टीएफए के लागू होने के साथ ही पूरा करना होता है। ‘बी’ श्रेणी में उन वचनबद्धताओं को शामिल किया गया है जिसे पूरा करने के लिए अधिसूचित देश थोड़ा समय मांग सकता है जबकि श्रेणी ‘सी’ में शामिल वचनबद्धताओं के लिए विकासशील व कम विकसित देश तकनीकी सहायता पाने के हकदार होंगे। फरवरी, 2016 में मंत्रीमंडल से मंजूरी मिलने के बाद भारत ने मार्च, 2016 में डब्ल्यूडीओ को टीएफए के अंतर्गत ‘ए’ श्रेणी की वचनबद्धातओं को अधिसूचित कर अप्रैल, 2016 में इसे मंजूरी दे दी। टीएफए के अंतर्गत कुल प्रावधानों का तकरीबन 70 प्रतिशत ‘ए’ श्रेणी में अधिसूचित किया गया है। भारत ने ‘सी’ श्रेणी में किसी भी प्रावधान को नहीं रखा है।
मंत्रीमंडल ने इन प्रावधानों को लागू करने व घरेलू समन्वय के लिए मंत्रीमंडल सचिव की अध्यक्षता में व्यापार सुविधा पर राष्ट्रीय समिति (एनसीटीएफ) के गठन को भी मंजूरी दे दी है। डीजीएफटी ने 27 अक्टूबर, 2016 को विदेशी मुद्रा प्राप्ति और आयात निर्यात कोड से जुड़े आंकड़ों को साझा करने के लिए वस्तु एवं सेवा नेटवर्क (जीएसटीएन) के साथ एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इससे जीएसटी के तहत करदाताओं के निर्यात लेन-देन की प्रोसेसिंग के मजबूत होने, पारदर्शिता बढ़ने और मानवीय हस्तक्षेप कम होने की उम्मीद है। डीजीएफटी ने 14 राज्यों, 2 केंद्र सरकार की एजेंसियों व जीएसटीएन के साथ आंकड़ों को साझा करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। राज्यों के स्तर पर 14 राज्यों के वाणिज्य कर विभाग ने डीजीएफटी के साथ वैट वापसी के लिए ई-बीआरसी प्राप्त करने के लिए समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए। ये राज्य महाराष्ट्र, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, हरियाणा, तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल, गोवा, बिहार हैं।इसके अतिरिक्त, वित्त मंत्रालय, परवर्तन निदेशालय, कृषि व खाद्य प्रसंस्करण निर्यात विकास प्राधिकरण और जीएसटीएन ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।
भारत ने 12-14 अक्टूबर, 2016 को नई दिल्ली के भारत व्यापार प्रोत्साहन संगठन, प्रगति मैदान में ब्रिक्स देशों के पहले व्यापार मेले का आयोजन किया। ब्रिक्स व्यापार मेले में 397 प्रदर्शकों ने हिस्सा लिया और 14,612 व्यापारिक प्रतिनिधि भी शामिल हुए। मेले में प्रमुख क्षेत्रों जैसे कि कृषि व कृषि प्रसंस्करण, ऑटो और ऑटो उपकरणों, रसायनों, स्वच्छ ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य और औषधि, कपड़ा तथा परिधान, बुनियादी ढांचा, सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग सामान, पर्यटन, रत्न एवं आभूषणों का प्रतिनिधित्व रहा। ब्रिक्स व्यापार मेले में 1601 बिजनेस टू बिजनेस (बीटूबी) बैठकों का आयोजन हुआ। ब्रिक्स व्यापार मेले के दौरान ब्रिक्स व्यापार मंच की बैठक भी हुई जिसमें स्वच्छ ऊर्जा, ढांचागत विकास व वित्त जैसे मसलों पर चर्चा की गई। भारतीय गणराज्य के वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय तथा रूसी संघ के आर्थिक विकास मंत्रालय के बीच द्विपक्षीय व्यापार व आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए।
भारत और भूटान के बीच व्यापार, वाणिज्य व पारगमन पर प्रस्तावित सहमति पर को हस्ताक्षर हुए। भारत-ग्रीस जेईसी का सत्र हुआ। जीईसी के मिनट्स पर सहमति हस्ताक्षर हेलेनिक गणराज्य के विदेश मामलों के अतिरिक्त मंत्री जॉर्ज कत्रोग्लोस ने किया। इननोप्रोम, रूस के येकातेरिनबर्ग में हर साल होने वाला सबसे बड़ा व्यापार मेला है। जुलाई, 2016 तक चले इननोप्रोम-2016 में भारत ने ‘साझेदार देश’ के रूप में 117 भारतीय कंपनियों के साथ हिस्सा लिया। महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश व झारखंड राज्य सहित कई सारे मंत्रालय विभाग सार्वजनिक उपक्रम जैसे कि भारी उद्योग मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक व आईटी विभाग, पर्यटन मंत्रालय, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन, एनटीपीसी, एनएचपीसी, नीपको व पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ने इसमें हिस्सा लिया। मेले में 95 देशों के 700 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए। इननोप्रोम 2016 में प्रतिभाग से वैश्विक व रूसी उत्पादकों के साथ सीधे संवाद करने, अपने आप में सर्वोत्तम उत्पादन तकनीकों से परिचित होने व अंतरराष्ट्रीय तथा अंतर-औद्योगिक नेटवर्क बनाने का मौका मिला।


No comments:
Post a Comment