भारतीय वस्त्र उद्योग में 30 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश
वस्त्र मंत्रालय ने वस्त्र क्षेत्र के विकास के लिए अनेकानेक ठोस कदम उठाये, जिनके तहत रोजगार सृजन, निवेश एवं उत्पादन बढ़ाने और निर्यात संवर्धन पर ध्यान केन्द्रित किया गया। विभिन्न कदमों के क्षेत्रवार अवलोकन और उपलब्धियों का उल्लेख किया गया है। कपड़ा मंत्रालय ने विभिन्न उपायों का एक विशेष पैकेज पेश किया, ताकि परिधान क्षेत्र को आवश्यक सहायता सुलभ हो सके ।
विश्व स्तर पर इसकी प्रतिस्पर्धी क्षमता बेहतर हो सके। एक करोड़ लोगों, ज्यादातर महिलाओँ के लिए रोजगार; 30 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश और 74,000 करोड़ रुपये का निवेश – ये सभी उपलब्धियां तीन वर्षों में हासिल की जानी हैं। पैकेज को केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 22 जून, 2016 को मंजूरी दी गई थी। यह पैकेज एक रणनीतिक निर्णय है जिससे भारतीय वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र मजबूत एवं सशक्त होगा। यह विश्व बाजार में लागत के लिहाज से भारतीय वस्त्र क्षेत्र की प्रतिस्पर्धी क्षमता बेहतर होने से संभव हो पाएगा। यह कदम इस वजह से भी विशेष अहमियत रखता है कि इसमें महिला सशक्तिकरण के जरिये सामाजिक बदलाव लाने की अपार संभावनाएं हैं। दरअसल, वस्त्र उद्योग में 70 फीसदी कामगार महिलाएं ही हैं और सृजित होने वाले ज्यादातर नये रोजगार महिलाओं को ही मिलने की संभावना है। विशेष पैकेज में कामगार अनुकूल ऐसे अनेक उपाय शामिल हैं जिनसे रोजगार सृजन, व्यावसायिक स्तर और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
कर्मचारी भविष्य निधि योजना से जुड़े सुधारः प्रति महीने 15,000 रुपये से कम कमाई करने वाले वस्त्र उद्योग के नये कर्मचारियों के लिए भारत सरकार प्रथम तीन वर्षों तक कर्मचारी भविष्य निधि योजना के तहत नियोक्ताओं के समूचे 12 फीसदी योगदान को वहन करेगी। यही नहीं, प्रति माह 15,000 रुपये से कम करने वाले कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) को वैकल्पिक बनाया जाएगा। ओवरटाइम की सीमा बढ़ानाः आईएलओ के मानकों के अनुरूप कामगारों के लिए ओवरटाइम के घंटे प्रति सप्ताह आठ घंटे से ज्यादा नहीं होंगे। नियत अवधि वाले रोजगार की शुरुआत करनाः उद्योग के विशेष सीजन संबंधी स्वरूप को ध्यान में रखते हुए वस्त्र क्षेत्र के लिए नियत अवधि वाले रोजगार की शुरुआत की जाएगी। संशोधित टफ्स के तहत अतिरिक्त प्रोत्साहनः संशोधित टफ्स के तहत वस्त्र इकाइयों को दी जाने वाली सब्सिडी को 15 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी किया जा रहा है।
इससे रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। मेड-अप क्षेत्र की विशेष स्थिति और क्षमता को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने इस क्षेत्र के लिए 7 दिसंबर, 2016 को एक विशेष पैकेज को मंजूरी दी थी। परिधान पैकेज के लिए 6,006 करोड़ रुपये के स्वीकृत बजट के भीतर समयबद्ध कदमों को मंजूरी दी गई है, ताकि मेड-अप क्षेत्र में अगले तीन वर्षों के दौरान बड़े पैमाने पर 11 लाख तक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगारों का सृजन हो सके। तीन वर्षों की अवधि के बाद अतिरिक्त उत्पादन एवं रोजगार के आधार पर मेड-अप के लिए अतिरिक्त 10 फीसदी की बढ़ी हुई प्रौद्योगिकी उन्नयन कोष योजना (टफ्स) सब्सिडी के जरिये उत्पादन संबंधी प्रोत्साहन देना। यह वस्त्रों के लिए दी जाने वाली सब्सिडी के समान ही है। प्रधानमंत्री परिधान रोजगार प्रोत्साहन योजना (पीएमपीआरपीवाई) (परिधानों के लिए) का विस्तारीकरण मेड-अप क्षेत्र में करना, ताकि ईपीएफओ में नामांकित होने वाले सभी नये कर्मचारियों के लिए उनके रोजगार के प्रथम तीन वर्षों में नियोक्ता योगदान का अतिरिक्त 3.67 फीसदी हिस्सा प्रदान किया जा सके, जो प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना (पीएमआरपीवाई) के तहत पहले से ही कवर किये जाने वाले 8.33 फीसदी के अलावा है। यह मेड-अप क्षेत्र के लिए एक विशेष प्रोत्साहन के रूप में है।
श्रम कानूनों का सरलीकरणः मेड-अप निर्माण क्षेत्र में अनुमति योग्य ओवरटाइम को बढ़ाकर प्रति तिमाही 100 घंटे तक करना और प्रति माह 15,000 रुपये से कम कमाई करने वाले कर्मचारियों के लिए ईपीएफ में कर्मचारियों के अंशदान को वैकल्पिक बनाना। इस पैकेज से वस्त्र क्षेत्र में रोजगार सृजन बढ़ने और 11 लाख लोगों तक के लिए रोजगार सृजित होने की आशा है। इससे निर्यात में 2.8 अरब अमेरिकी डॉलर की संचयी वृद्धि होगी, लगभग 6000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होगा और वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र में कामागारों को अपेक्षाकृत ज्यादा लाभ हासिल होंगे। कोष योजना 30 दिसंबर, 2015 को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद मंत्रालय ने 13 जनवरी, 2016 को संशोधित प्रौद्योगिकी उन्नयन कोष योजना (ए-टफ्स) की शुरुआत की थी। संशोधित पुनर्गठित प्रौद्योगिकी कोष योजना (आरआर-टफ्स) के स्थान पर शुरू की गई ए-टफ्स का उद्देश्य वस्त्र उद्योग में प्रौद्योगिकी उन्नयन को सुविधाजनक बनाना है। संशोधित योजना के दिशा-निर्देश 29 फरवरी, 2016 को अधिसूचित किये गये थे। नई योजना के विशेष लक्ष्य वस्त्र उद्योग को प्रोत्साहन देकर रोजगार सृजन एवं निर्यात को बढ़ावा देना, जिससे विशेषकर महिलाओं को रोजगार मिलेंगे और वैश्विक निर्यात में भारत का हिस्सा बढ़ेगा।
निर्यात एवं रोजगार के लिए तकनीकी वस्त्रों को प्रोत्साहन देना, जो तेजी से विकसित हो रहा है। प्रसंस्करण उद्योग में बेहतर गुणवत्ता को प्रोत्साहन देना और वस्त्र क्षेत्र द्वारा फैब्रिक के आयात की जरूरत पर रोकथाम सुनिश्चित करना। संशोधित योजना से वस्त्र क्षेत्र में “मेक इन इंडिया” को बढ़ावा मिलेगा, एक लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित होने की आशा है और 30 लाख से ज्यादा रोजगार सृजित होंगे। 17,822 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 12,671 करोड़ रुपये पुरानी योजना के तहत प्रतिबद्ध देनदारियों के लिए और 5,151 करोड़ रुपये ए-टफ्स के तहत नये मामलों के लिए हैं। एकीकृत कौशल विकास योजना 25 दिसंबर, 2014 को सुशासन दिवस पर एकीकृत कौशल विकास योजना (आईएसडीएस) का स्तर 12वीं योजना के दौरान बढ़ाया गया है। इस दिशा में 15 लाख व्यक्तियों को प्रशिक्षित करने के लिए 1,900 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। आईएसडीएस का उद्देश्य उद्योग उन्मुख प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिये वस्त्र उद्योग में कुशल श्रमशक्ति की अहम कमी को पूरा करना है। 86 क्रियान्वयनकारी एजेंसियों द्वारा तीन घटकों के जरिये यह क्रियान्वित की जा रही है।

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