भारतीय रेलवे में व्यापक बदलाव, महत्वपूर्ण घोषणा
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रेलवे को एक ऐसा इंजन बनाने का लक्ष्य रखा है जो नये भारत की दिशा में हमारी विकास यात्रा को नई गति प्रदान करेगी।
इसी लक्ष्य से प्रेरित होकर रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय रेलवे में व्यापक बदलाव के लिए रेल मंत्रालय द्वारा लिए गए विभिन्न निर्णयों की घोषणा आज अर्थात 28 सितंबर, 2017 को रेल भवन में की। इस अवसर पर संचार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा भी उपस्थित थे।
रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ‘रेलवे भारतीय यात्रियों के लिए सुरक्षा, गति एवं सेवा के उच्च मानक सुनिश्चित करने के साथ-साथ राष्ट्र के विकास में अहम योगदान देने के लिए भी प्रतिबद्ध है। पिछले एक माह के दौरान भारतीय रेलवे ने ये लक्ष्य सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी कदम उठाए हैं।’
रेल मंत्री पीयूष गोयल द्वारा घोषित किए गए अनेक निर्णयों का उल्लेख किया गया है। यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता, सुरक्षा को उच्च एवं स्पष्ट प्राथमिकता, नई लाइनों/आमान परिवर्तन/पटरियों के आवंटन के मुकाबले पटरी नवीकरण को प्राथमिकता, अधिकारियों द्वारा क्षेत्रीय निरीक्षण पर विशेष जोर, रखरखाव ब्लॉकों को मंजूरी दिए जाने को उच्च प्राथमिकता, शेष 5,000 मानव रहित लेवल क्रॉंसिंग को समयबद्ध ढंग से हटाना।
अगले साल से आईसीएफ कोच के बजाय एलएचबी कोचों को इस्तेमाल में लाया जाएगा, सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने के लिए रेल के डिब्बों और स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रावधान है, जिससे विशेषकर महिलाएं एवं वरिष्ठ नागरिक लाभान्वित होंगे, मैनुअल इंटरलॉकिंग के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल इंटरलॉकिंग की संख्या बढ़ाई जाएगी, वर्तमान सिग्नल प्रणाली को बेहतर किया जाएगा, टीपीडब्ल्यूएस (रेल सुरक्षा एवं चेतावनी प्रणाली और एमटीआरसी (मोबाइल ट्रेन रेडियो संचार) का उपयोग किया जाएगा।
उपनगरीय और लम्बी दूरी की रेलगाडि़यों में अत्याधुनिक सिग्नल प्रणाली लगाने पर विचार, खामियों इत्यादि का पता लगाने के लिए कैमरा, अल्ट्रासोनिक फ्रीक्वेंसी डिटेक्शन जैसी प्रौद्योगिकी का उपयोग, ड्यूटी के दौरान सभी आरपीएफ कर्मचारियों और टीटीई को उचित वर्दी में रहना होगा, ताकि पारदर्शिता लाई जा सके, आरपीएफ कर्मचारी टिकट चेकिंग नहीं करेंगे क्योंकि यह टीटीई का काम है। हालांकि वे टिकट चेकिंग दल की सहायता करेंगे।
प्रौद्योगिकी के जरिये बदलाव, निगरानी एवं यात्री सेवाओं के लिए मोबाइल एप के विस्तृत उपयोग पर विशेष जोर सभी स्टेशनों एवं रेलगाडि़यों में हाई स्पीड वाई-फाई कनेक्टिविटी होगी। 1 नवंबर, 2017 से लगभग 700 रेलगाडि़यों की गति बढ़ाने का प्रस्ताव। 48 ट्रेनों को मेल एक्सप्रेस के बजाय सुपरफास्ट एक्सप्रेस में तब्दील किया जा रहा है। ट्रेनों के आवागमन की जीपीएस आधारित रियल टाइम निगरानी से जुड़ी परियोजना में तेजी लाई जाएगी।
इसरो के जरिये सभी रेल परिसंपत्तियों के उपग्रह आधारित मानचित्रण में तेजी लाई जाएगी। ऊर्जा दक्षता, अगले 4-5 वर्षों में विद्युतीकरण का कार्य पूरा किया जाएगा। इससे ऊर्जा लागत में 10,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की राशि की बचत होगी। इसके साथ ही प्रदूषण घटेगा और आयातित डीजल पर निर्भरता भी कम होगी। रेलगाडि़यों, स्टेशनों, कार्यालय भवनों और आवासीय परिसरों में समयबद्ध ढंग से 100 फीसदी एलईडी लाइटिंग और कम ऊर्जा खपत वाले उपकरण जैसे कि पंखे, एसी इत्यादि लगाए जाएंगे।
स्टेशनों का तेजी से पुनर्विकास, दिसंबर 2018 तक लगभग 20 स्टेशनों का आधुनिकीकरण काफी तेजी से पूरा हो जाएगा जहां बेहतर बुनियादी ढांचागत एवं यात्री सुविधाएं होंगी। इनमें होटल, भोजनालय, शॉपिंग, विकलांग यात्रियों के अनुकूल सुविधाएं, मल्टीमोडल ट्रांसपोर्ट हब, सुरक्षा इत्यादि की व्यवस्था होगी। अतिरिक्त स्टेशनों की पहचान की जाएगी और स्व-वित्तपोषण वाला बिजनेस मॉडल सृजित करने के प्रयास किए जाएंगे, जैसे कि अनुबंध की अवधि का पुन:आकलन किया जाएगा, पहुंच नियंत्रण सनिश्चित किया जाएगा, उप-ठेका की आजादी होगी,इत्यादि।
बहुपयोगी केंद्रों के रूप में रेलवे स्टेशन, ऐसे अनेक स्टेशनों का इस्तेमाल योग सेंटर, कौशल प्रशिक्षण उद्देश्य, शैक्षणिक उद्देश्यों जैसी गतिविधियों के लिए बहुपयोगी केंद्रों के रूप में करने का प्रस्ताव है जहां दिनभर में कुछ ही ट्रेनें आती हैं। स्वास्थ्य एवं शैक्षणिक सुविधाओं का उन्नयन, इसके अलावा, भारतीय रेलवे द्वारा संचालित विद्यालयों और अस्पतालों में बेहतर बुनियादी ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी जिससे न केवल रेल कर्मचारीगण, बल्कि अन्य लोग भी लाभन्वित होंगे।
मानव संसाधन, मानव संसाधन के कल्याण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। शिकायत निवारण शिविर नियमित रूप से लगाए जा रहे हैं। कर्मचारियों की शिकायतें सुनने के लिए प्रत्येक क्षेत्रीय/प्रभागीय मुख्यालय में शिकायत निवारण प्रकोष्ठ स्थापित किए जा रहे हैं। बड़े पैमाने पर अधिकारों का विकेंद्रीकरण किया जा रहा है। प्रणाली की दक्षता बेहतर करने के लिए आक्रामक ढंग से प्रक्रियागत सुधार लागू किए जा रहे हैं।
संगठनात्मक स्तरों की संख्या में कमी का विश्लेषण किया जा रहा है। परिचालन में गतिशीलता सुनिश्चित करने के लिए ‘ए1’ श्रेणी के 75 स्टेशनों पर प्रतिभाशाली और उत्साही अधिकारियों को स्टेशन डायरेक्टर के रूप में तैनात किया जाएगा। मुख्यालय से पुन: आवंटन के जरिये प्रभागीय कार्यकलाप मजबूत करने के लिए अतिरिक्त एडीआरएम की तैनाती की जाएगी। क्षेत्रीय कर्मचारियों के कल्याण पर ध्यान केंद्रित करना।
ग्रुप डी श्रेणी के कर्मचारियों के कामकाज की स्थितियों को बेहतर करना। उदाहरण के लिए, गैंग-मैन को आरामदेह वर्दी और बेहतर गुणवत्ता वाले जूते दिए जाएंगे क्योंकि पटरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी इन्हीं पर होती है और उन्हें किसी विशेष दिन औसतन लगभग 15-16 किलोमीटर चलना पड़ जाता है। उनके आवासीय क्वार्टरों (गैंग हट) को भी बेहतर किया जाएगा।
लोको चालकों के रनिंग रूम को वातानुकूलित किया जा रहा है। परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण के जरिए रेलवे के राजस्व में वृद्धि, रेल परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण से वित्तीय स्थिति और परिचालन अनुपात बेहतर होगा। इसके अलावा, महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं के लिए संसाधन उपलब्ध होंगे। भूमि के मुद्रीकरण को आकर्षक बनाकर यह काम पूरा किया जाएगा, जिसके लिए विभिन्न नियमों में परिवर्तन किए जाएंगे।
इन सुधारों से हमारे राष्ट्र की जीवन रेखा को पनपने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, ये सुधार हमारे आर्थिक-सामाजिक विकास में भी अपेक्षाकृत अधिक योगदान करेंगे। भारतीय रेलवे में व्यापक परिवर्तन की प्रक्रिया जारी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह सिर्फ लोगों की मजबूरी नहीं, बल्कि लोगों की पसंद है।

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