हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में आपसी संबंध मजबूत
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र प्रधान हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में पड़ोसी देश के साथ क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से म्यांमार के आधिकारिक दौरे पर हैं।
भारत और म्यांमार के बीच ऐतिहासिक एवं घनिष्ठ संबंध रहे हैं, जो समय के साथ निरंतर मजबूत होते रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों ही देश लंबी भूमि एवं समुद्री सीमा को साझा करते हैं। ‘लुक ईस्ट’ नीति के एक महत्वपूर्ण हिस्से के तहत भारत म्यांमार को आसियान देशों के लिए मैत्री संपर्क के रूप में देखता है। प्रधान के इस दौरे से पहले म्यांमार के राजकीय काउंसलर डाव आउंग सैन सू कई ने अक्टूबर, 2016 में भारत की यात्रा की थी। प्रधान की यात्रा गत अक्टूबर माह के बाद दोनों देशों के बीच प्रथम मंत्रिस्तरीय दौरा है और इसके साथ ही यह पिछले 12 वर्षों में किसी भी भारतीय पेट्रोलियम मंत्री की पहली यात्रा है।
अपनी यात्रा के दौरान प्रधान ने म्यांमार में अपने समकक्ष महामहिम यू पे जिन टुन से भेंट कीं, जो म्यांमार के केंद्रीय विद्युत एवं ऊर्जा मंत्री हैं। उन्होंने हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में द्विपक्षीय भागीदारी के विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। अपस्ट्रीम क्षेत्र में दोनों ही नेताओं ने म्यांमार के अपस्ट्रीम क्षेत्र में भारत की तेल एवं गैस कंपनियों की मौजूदा एवं भावी भागीदारी पर विचार-विमर्श किया। वर्तमान में ओएनजीसी विदेश लि. (ओवीएल) और गेल ने म्यांमार के गैस उत्पादक ब्लॉकों में निवेश कर रखा है।
ओवीएल और ऑयल इंडिया लि. ने उत्खनन ब्लॉकों में निवेश किया है। म्यांमार में होने वाले आगामी बोली दौर में भारतीय अपस्ट्रीम कंपनियों की रुचि होने के बारे में म्यांमार पक्ष को बता दिया गया है।

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