सार्वभौम स्वर्ण बांड- 2016-17 की चौथी श्रृंखला
भारतीय रिजर्व बैंक के साथ सलाह करने के बाद भारत सरकार ने सार्वभौम स्वर्ण बांड- 2016-17 की चौथी श्रृंखला जारी करने का निर्णय किया है। बांड के लिए आवेदन 27 फरवरी, 2017 से 03 मार्च, 2017 तक स्वीकार किये जाएंगे। बांड 17 मार्च, 2017 को जारी होंगे। सभी बांड की बिक्री बैंकों, स्टॉक होल्डिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएचसीआईएल), निर्धारित डाकघरों और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज जैसे मान्यता प्राप्त शेयर बाजार के जरिए होगी। सार्वभौम स्वर्ण बांड 2016-17 श्रृंखला, भारत सरकार की तरफ से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी।, बांड केवल भारत के निवासियों को दिए जाएंगे, जिनमें व्यक्ति, हिन्दू संयुक्त परिवार, न्यास, विश्वविद्यालय और धर्मार्थ संस्थान शामिल हैं।
बांडों का मूल्यवर्ग स्वर्ण के संबंध में ग्राम के आधार पर होगा, जिसकी बुनियादी इकाई एक ग्राम होगी।, बांड की अवधि 8 वर्ष की होगी। ब्याज भुगतान की तिथि के आधार पर 5 साल में बांड भुनाने का विकल्प होगा। स्वीकृत न्यूनतम निवेश एक ग्राम स्वर्ण होगा। किसी कंपनी द्वारा प्रति वित्त वर्ष (अप्रैल-मार्च) प्रतिव्यक्ति 500 ग्राम से अधिक सोने में निवेश नहीं किया जा सकता है। इसके संबंध में स्वयं घोषणा करनी होगी।
संयुक्तधारक के मामले में 500 ग्राम निवेश की सीमा पहले आवेदक पर लागू होगी। बांडों का मूल्य भारतीय मुद्रा में तय किया जाएगा, जिसका आधार पिछले सप्ताह (सोमवार-शुक्रवार) का साधारण औसत होगा। इसके मद्देनजर इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने की अंतिम कीमत देखी जाएगा। बांड का भुगतान नगदी (अधिकतम 20,000 रुपये) या डिमांड ड्राफ्ट या चैक या इलैक्ट्रोनिक बैंकिंग के जरिए होगा। जीएस अधिनियम, 2006 के तहत भारत सरकार स्टॉक। निवेशकों को होल्डिंग सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।
बांड डी-मेट फार्म में बदलने योग्य होंगे। बांड का वापसी मूल्य भारतीय मुद्रा में तय किया जाएगा, जिसका आधार पिछले सप्ताह (सोमवार-शुक्रवार) का साधारण औसत होगा। इसके मद्देनजर इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने की अंतिम कीमत देखी जाएगी। बांडों की बिक्री बैंकों, एससीएचआईएल और निर्धारित डाक घरों और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज जैसे मान्यता प्राप्त शेयर बाजार के जरिए होगी, जिन्हें सीधे या एजेंटों के जरिए अधिसूचित किया जाएगा। बांडों को ऋण लेने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसका एलटीवी अनुपात समय-समय पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित साधारण स्वर्ण ऋण के बराबर होगा।
ग्राहक को पहचानो (केवाईसी) नियम वास्तविक सोने की खरीद जैसे ही होंगे। मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड/पैन या टैन/पासपोर्ट जैसे केवाईसी दस्तावेज आवश्यक होंगे। स्वर्ण बांड के ब्याज पर आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के तहत कर लगेगा और पूंजी की आय पर वही कर लगेगा, जो वास्तविक स्वर्ण के मामले में होता है।

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