Thursday, 4 May 2017

विश्व में योग एक आंदोलन बना

          हरिद्वार में पतंजलि अनुसंधान संस्थान के उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सवा सौ करोड़ देशवासियों के आशीर्वाद की ताकत पर मेरा पूरा भरोसा है।

            प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरा अपने पर उतना भरोसा नहीं है, मुझ पर इतना भरोसा नहीं है, जितना की मुझे आपके और देशवासियों के आशीर्वाद की ताकत पर भरोसा है। और इसलिए वो आशीर्वाद ऊर्जा का स्रोत है, संस्का्र उसकी मर्यादाओं में बांध करके रखते हैं, और राष्ट्रक के लिए समर्पित जीवन जीने के लिए नित्य नई प्रेरणा मिलती रहती है। मैं आज जब आपके बीच में आया हूं, तो आप भी भली-भांति अनुभव करते होंगे कि आप ही के परिवार का कोई सदस्या आपके बीच में आया है। और मैं यहां पर पहली बार नहीं आया हूं, आप लोगों बीच बार-बार आने का मुझे सौभाग्य मिला है, एक परिवार के सदस्य के नाते आने का सौभाग्य मिला है। और ये भी मेरा सौभाग्य रहा है कि मैंने स्वामी रामदेव जी को, किस प्रकार से वो दुनिया के सामने उभर करके आते गए; बहुत निकट से मुझे देखने का सौभाग्य मिला है। उनका संकल्प और संकल्प के प्रति समर्पण, यही उनकी सफलता की सबसे बड़ी जड़ी-बूटी है। और ये जड़ी-बूटी बालकृष्ण आचार्य जी की खोजी हुई जड़ी-बूटी नहीं है; ये स्वामी जी ने खुद ने खोजी हुई जड़ी-बूटी है। बालकृष्ण जी की जड़ी-बूटी शरीर को स्व़स्थ रखने के लिए काम आती हैं, लेकिन स्वामी रामदेव जी वाली जड़ी-बूटी हर संकटों को पार कर-करके नैया को आगे बढ़ाने की ताकत देने वाली होती है।

                  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत के ऋषि-मुनियों की महान परम्परा, योग, उस पर विश्व का आकर्षण पैदा हुआ है, वे शांति की तलाश में हैं। वो बाहर की दुनिया से तंग आ करके भीतर की दुनिया को जानना, परखने के लिए प्रयास कर रहे हैं। ऐसे समय हम लोगों का कर्तव्य बन जाता है कि आधुनिक स्वरूप में योग एक ऐसा विज्ञान है; तन और मन की तंदुरूस्ती के लिए, आत्मा की चेतना के लिए, ये शास्त कितना सहज उपलब्ध हो सकता है। फुटपाथ पर भी कर सकते हो, मैदान में भी कर सकते हो, बगीचे में भी कर सकते हो, मंदिर के परिसर में भी कर सकते हो। ये बहुत बड़ा बदलाव आया है। और आज उसका परिणाम है कि 21 जून को जब विश्वर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाता है, दुनिया के हर देश में योग का उत्स‍व मनाया जाता है, अधिकतम लोग उसमें जुड़ें, उसके लिए प्रयास होता है। मुझे विश्वा के जितने लोगों से मिलना होता है, मेरा अनुभव है कि देश की बात करेंगे, विकास की बात करेंगे, राजनीतिक परिदृश्य की चर्चा करेंगे, लेकिन एक बात अवश्य करते हैं, मेरे साथ योग के संबंध में तो एक-दो सवाल जरूर पूछते हैं। ये जिज्ञासा पैदा हुई है। हमारे आयुर्वेद की ता‍कत, थोड़ा-बहुत तो हमने ही उसे नुकसान पहुंचा दिया। आयुर्वेद वालों को लगा कि आपकी दवाइयों में दम नहीं है, अब आप लोगों को ठीक कर देते हो लेकिन ठीक होते नहीं हैं। तुम बड़े कि हम बड़े, इसी लड़ाई में सारा समय बीतता गया। अच्छा होता कि हमारी सभी ज्ञान, आधुनिक से आधुनिक ज्ञान भी, उसको भी हमारी इन परम्पराओं के साथ जोड़ करके आगे बढ़ाया होता तो शायद मानवता की बहुत बड़ी सेवा हुई होती। 

              प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम तय करें, सवा सौ करोड़ देशवासी तय करें‍ कि मैं गंदगी नहीं करूंगा। कोई बड़ा संकल्पे लेने की जरूरत नहीं, इसमें जेल जाने की जरूरत नहीं है, फांसी पर लटकने की जरूरत नहीं है, देश के लिए सीमा पर जा करके जवानों की तरह मरने-मिटने की जरूरत नहीं है; छोटा सा काम- मैं गंदगी नहीं करूंगा।

              प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आपको कल्पना है एक डॉक्टर जितनी जिंदगी बचा लेता है, उससे ज्यादा बच्चों की जिंदगी आप गंदगी न करके बचा सकते हैं। आप एक गरीब को दान-पुण्य दे करके जितना पुण्य कमाते हो, गंदगी न करके एक गरीब जब स्वस्थ‍ रहता है, तो आपका दान रुपयों में देते हैं, उससे भी ज्यादा मूल्येवान हो जाता है। और मुझे खुशी है कि देश की जो नई पीढ़ी है, आने वाली पीढ़ी; छोटे-छोटे बालक, हर घर में वो झगड़ा करते हैं। अगर परिवार के वृद्ध व्यमक्ति ने, बुजुर्ग ने कोई एक अगर छोटी सी चीज फेंक दी, कार में जा रहे हैं छोटा पोता- पांच साल का, कार रुकवाता है, ठहरो, मोदी दादा ने मना किया है ये वापिस ले आओ; ये माहौल बन रहा है। छोटे-छोटे बालक भी मेरे इस स्वच्छता आंदोलन के सिपाही बन गए हैं। 

           प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे आयुर्वेद इसलिए लोगों तक नहीं पहुंचता है क्यों कि उसकी जो पद्धति है, वो आज के युग के अनुकूल नहीं है। वो इतनी सारी थैला-भर जड़ी-बूटी देंगे और फिर कहेंगे इसको उबालना, इतने पानी में उबालना, फिर इतना रस रहेगा, एक चम्मेच में लेना, फिर इसमें फलाना जोड़ना, ढिकना जोड़ना; और फिर लेना। तो जो सामान्यर व्यक्ति होता है उसको लगता है कि भई ये कौन कूड़ा-कचरा करेगा।


No comments:

Post a Comment