चीनी उद्योग के लिए 4,305 करोड़ की ऋण सहायता
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने चीनी के संबंध में 27.10.2016 को जारी वर्तमान केंद्रीय आदेश की वैधता में 29.04.2017 से 28.10.2017 तक छह महीने और विस्तार देने की मंजूरी दी है।
इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार की पूर्व सहमति के साथ राज्य सरकारों को नियंत्रण आदेश जारी करने में समर्थ बनाना है ताकि उन्हें जब कभी जरूरत महूसस हो तो वे चीनी के स्टॉक-लाइसेंस आदि के बारे में निर्णय ले सकें। इससे आम लोगों के बीच उचित दर पर इन जिंसों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। साथ ही इससे जमाखोरी और मुनाफाखोरी पर लगाम लगाने में भी मदद मिलेगी। सरकार इस निर्णय को अधिसूचित करेगी और सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को इसके बारे में सूचित करेगी ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।
मंत्रिमंडल ने 27.10.2016 को आयोजित अपनी बैठक में निर्णय लिया था कि छह महीने के लिए राज्य सरकारों को चीनी की आपूर्ति, वितरण, बिक्री, उत्पादन, स्टॉक, भंडारण, खरीद और आवाजाजाही को विनियमित करने में समर्थ बनाया जाए। तदनुसार एस. ओ. 3341 (ई) दिनांक 27.10.2016 जारी किया था ताकि प्रशासनिक विभाग, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 28.04.2017 तक चीनी के स्टॉक आदि के बारे में निर्णय लेने में समर्थ बनाया जा सके।
इसके लिए दिनांक 29.09.2016 को जारी और जी. एस. आर. 929 (ई) के तहत अधिसूचित निर्दिष्ट खाद्य पदार्थों के लिए लाइसेंस आवश्यकताओं, स्टॉक की सीमा और आवाजाही पर प्रतिबंध संबंधी आदेश में संशोधन किया गया। फैक्टरी गेट और घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों पर खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा नियमित रूप से नजर रखी जा रही है। सितंबर 2016 में खुदरा कीमतों में अचानक तेजी दर्ज की गई थी। यह तेजी चीनी की वास्तविक कमी के बजाय कहीं अधिक भावनाओं पर आधारित दिखी।
चीनी की आपूर्ति को विनियमित करने और कीमत में संबंध में कयासबाजी संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए जरूरत के आधार पर उचित स्टॉक सीमा को निर्धारित करना आवश्यक था। साथ ही चालू सीजन में खपत के लिए स्टॉक की पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद पिछले साल उत्पादन में कमी के कारण जमाखोरी और मुनाफाखोरी की आशंका के मद्देनजर स्टॉक सीमा में विस्तार की आवश्यकता है।
चीनी क्षेत्र की मदद के लिए सरकार ने हाल में उद्योग के लिए 4,305 करोड़ रुपये की ऋण सहायता को मंजूरी दी है। यह रकम चीनी मिलों की ओर से सीधे करीब 32 लाख किसानों के खाते में जमा होगी। इसके अलावा प्रदर्शन आधारित उत्पादन सब्सिडी को भी बढ़ाकर 4.50 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने की पेराई कर दिया गया है जो चीनी मिलों की ओर से सीधे किसानों के खाते में जमा होगी।
घरेलू मूल्यों को उचित स्तर पर बरकरार रखने के क्रम में सरकार ने शून्य शुल्क पर 5 लाख एमटी तक कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी दी है। मिलर-रिफाइनर अपनी क्षमता के अनुरूप इसका लाभ उठा सकते हैं। इस प्रतिबंधित सीमा से चीनी उद्योग को आपूर्ति बढ़ाने और गन्ना किसानों के बकाये का भुगतान करने में मदद मिलेगी।

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