Thursday, 2 March 2017

भारतीय रेलवे के प्रमुख माल ढुलाई कदमों का आगाज

                 रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने कहा कि विगत वर्षों के दौरान देश के कुल यातायात में रेलवे की हि‍स्‍सेदारी काफी घट गई है। 

           रेलवे अपना दो-तिहाई राजस्‍व केवल माल ढुलाई और मुख्‍यत: आठ जिंसों की ढुलाई से अर्जित करती है। वैश्विक स्‍तर पर छाई सुस्‍ती से परिवहन क्षेत्र ही सबसे ज्‍यादा प्रभावित हुआ है। इससे रेलवे की माल ढुलाई आमदनी प्रभावित हुई है। हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय रेलवे ने अपनी कुल माल ढुलाई में बढ़ोतरी करने की दिशा में अच्‍छा प्रदर्शन किया है। रेल मंत्री समस्‍त हितधारकों के साथ सलाह-मशविरा कर अपनी माल ढुलाई नीतियों में निरंतर परिवर्तन करने के साथ-साथ उन्‍हें तर्कसंगत भी बनाते रहे हैं, ताकि और ज्‍यादा माल ढुलाई को रेलवे की ओर आकर्षित किया जा सके। 

               इन बदलावों के लिए भारतीय रेलवे ने यातायात संबंधी नीतियां बनाने हेतु बाजार उन्‍मुख अवधारणा अपनाई है। माल ढुलाई नीति में किये गये ये उल्‍लेखनीय सुधार बजट में की गई घोषणाओं के अनुरूप ही हैं। प्रभु ने इन बदलावों के प्रति सकारात्‍मक नजरिया अपनाने के साथ-साथ अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए हितधारकों का आह्वान किया। उन्‍होंने कहा कि माल ढुलाई में बेहतरी होने पर सभी विजेता साबित होंगे, चाहे वह रेलवे हो अथवा उपभोक्‍ता या समस्‍त परितंत्र। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री के व्‍यापक विकास एजेंडे को ध्‍यान में रखते हुए ही रेलवे अपने कदम उठा रही है। 

                उन्‍होंने यह भी कहा कि डबल स्टैक ड्वार्फ कंटेनर ट्रेन की अवधारणा एक अच्‍छा आइडिया है, क्‍योंकि इससे समय की बचत होगी और इसके साथ ही यह किफायती भी होगी। इसी तरह प्रदूषण, जन स्‍वास्‍थ्‍य और त्‍वरित परिवहन के दृष्टिकोण से रो-रो सेवाओं की अवधारणा भी अत्‍यंत उपयोगी है। उन्‍होंने कहा कि हाल ही में रेल मंत्रालय ने गैर-किराया राजस्‍व के साथ-साथ ईंधन की लागत बचाने की दिशा में भी विभिन्‍न कदम उठाये हैं। सुरेश प्रभु ने कहा कि हमने ऊर्जा के मोर्चे पर अगले 10 वर्षों में 41,000 करोड़ रुपये की बचत करने का लक्ष्‍य रखा है। इसके साथ ही रेलवे ने विस्‍तारीकरण और क्षमता वृद्धि की व्‍यापक योजना शुरू की है। 

             रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ए. के. मित्तल ने कहा कि माल ढुलाई के और ज्‍यादा हिस्‍से को रेलवे की तरफ आकर्षित करना एक बड़ चुनौती है। इस उद्देश्‍य की पूर्ति के लिए सभी हितधारकों को आपस में मि‍लकर काम करने की जरूरत है। सदस्‍य (यातायात) मोहम्‍मद जमशेद ने भारतीय रेलवे की व्‍यवसाय योजना 2017-18 की संक्षिप्‍त रूपरेखा पेश की। 2016-17 के रेल बजट में रेल मंत्री ने यह घोषणा की है कि या तो कन्टेनरीकरण अथवा नये वितरण मॉडलों के जरिये माल ढुलाई के बास्‍केट को बढ़ाने के लिए एक कार्य योजना विकसित एवं क्रियान्वित की जायेगी। ‘रोल-ऑन रोल-ऑफ’ इसी तरह का एक नया वितरण मॉडल है जो मल्‍टी मोडल परिवहन सेवाएं उपलब्‍ध करा सकता है।

                   रो-रो सेवाओं का शुभारंभ कोंकण रेलवे पर हुआ था। बाद में ईसीआर एवं एनएफआर में भी इसे पिछले वर्ष सफलतापूर्वक शुरू किया गया था। राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हरित परिवहन के लिए पॉयलट परियोजना इसी तरह की अगली ऐसी सेवा है जिसका शुभारंभ आज भारतीय रेलवे में किया जा रहा है। एनसीआर में 127 प्रवेश/निकासी स्‍थल हैं। इस क्षेत्र में अवस्थित 9 प्रमुख प्रवेश/निकासी स्‍थलों से 75 प्रतिशत हल्‍के वाणिज्यिक वाहन और भारी ट्रक गुजरते हैं। प्रतिदिन लगभग 66,000 ट्रक दिल्‍ली में प्रवेश करते हैं। इनमें से लगभग 38 प्रतिशत अथवा 25,000 ट्रकों की गिनती भारी ट्रकों में होती है। इनमें से लगभग 60 प्रतिशत अर्थात 15,000 ट्रक दिल्‍ली आगमन के लिए निर्दिष्‍ट नहीं होते हैं। इस मॉडल के तहत ट्रकों की आवाजाही दिन के समय भी हो सकती है, जिन पर पहले प्रात: 7 बजे से लेकर रात्रि 11 बजे तक पाबंदी लगी हुई थी। 

                प्रवेश स्‍थलों पर लगने वाली लंबी-लंबी लाइनें छोटी हो जायेंगी जिससे समय की बचत होगी और इसके साथ ही रो-रो सेवा के परिचालन के दौरान ट्रक ड्राइवरों को पर्याप्त आराम भी मिल सकेगा। इस मॉडल से पूरे एनसीआर में स्‍वास्थ्‍य के लिए हानिकारक वायु प्रदूषण में काफी कमी आयेगी। रो-रो सेवाओं से इन भारी और हल्‍के वाणिज्यिक वाहनों को दिल्‍ली की सीमा में प्रवेश करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। रो-रो सेवाओं के तहत इन वाणिज्यिक वाहनों को दिल्‍ली के बाहर स्थित रेलवे टर्मिनलों/पीएफटी पर रेलवे के फ्लैट वैगनों में लादा जायेगा। फिर उसके बाद शहर से होते हुए उन्‍हें दिल्‍ली की सीमा से बाहर वैगनों से नीचे उतार दिया जायेगा। इसका उद्देश्‍य दिल्‍ली में भीड़–भाड़ कम करना है।

                   पारगमन समय में 8-10 घंटे की बचत होने की आशा है क्‍योंकि दिन के समय किसी भी वाणिज्यिक वाहन को एनसीआर के अंदर प्रवेश करने की इजाजत नहीं है। पर्यावरण मुआवजा शुल्‍क (ईसीसी) की बचत - लगभग 1400-2600 रुपये। दिल्‍ली में प्रवेश करने के लिए टोल टेक्‍स की बचत – लगभग 500-900 रुपये। ईंधन की बचत होगी और इसके साथ ही आने-जाने में कम समय लगेगा। वायु एवं ध्‍वनि प्रदूषण में कमी, दिल्‍ली की सड़कों पर भीड़-भाड़ में कमी, सड़क दुर्घटनाओं में कमी, परिवहन से निकलने वाले कार्बन उत्‍सर्जन में कमी – इस लिहाज से परिवहन के समस्‍त साधनों में रेलवे का प्रदर्शन सबसे अच्‍छा है। 

           एक नया मॉडल, जिसमें सड़कों पर आवाजाही के साथ अनुकूलता की परिकल्‍पना की गई है। इसके साथ ही हरित परिवहन के जरिये प्रमुख महानगरों में प्रदूषण घटाने के राष्‍ट्रीय प्रयासों में भारतीय रेलवे की भागीदारी सुनिश्चित होगी। भारतीय रेलवे अपने हर परिचालन के दौरान प्रमाणित कार्बन क्रेडिट भी अर्जित करेगी।

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