विशेषकर असम, गुजरात अति-वर्षा के कारण प्राकृतिक आपदा झेलनी पड़ी
आकाशवाणी के मन की बात में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा मनुष्य का मन ही ऐसा है कि वर्षाकाल मन के लिये बड़ा लुभावना काल होता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा पशु, पक्षी, पौधे, प्रकृति- हर कोई वर्षा के आगमन पर प्रफुल्लित हो जाते हैं। लेकिन कभी-कभी वर्षा जब विकराल रूप लेती है, तब पता चलता है कि पानी की विनाश करने की भी कितनी बड़ी ताक़त होती है। प्रकृति हमें जीवन देती है, हमें पालती है, लेकिन कभी-कभी बाढ़, भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदायें, उसका भीषण स्वरूप, बहुत विनाश कर देता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा पिछले कुछ दिनों से भारत के कुछ हिस्सों में विशेषकर असम, गुजरात, राजस्थान, बंगाल के कुछ हिस्से, अति-वर्षा के कारण प्राकृतिक आपदा झेलनी पड़ी है। जहाँ हो सके, वहाँ मंत्रिपरिषद के मेरे साथी भी पहुँच रहे हैं। राज्य सरकारें भी अपने-अपने तरीक़े से बाढ़ पीड़ितों को मदद करने के लिए भरसक प्रयास कर रही हैं। सामाजिक संगठन भी, सांस्कृतिक संगठन भी, सेवा-भाव से काम करने वाले नागरिक भी, ऐसी परिस्थिति में लोगों को मदद पहुँचाने के लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा भारत सरकार की तरफ़ से, सेना के जवान हों, वायु सेना के लोग हों, हर कोई ऐसे समय आपदा पीड़ितों की सेवा करने में जी-जान से जुड़ जाते हैं। बाढ़ से जन-जीवन काफी अस्त-व्यस्त हो जाता है। खास कर के हमारे किसान भाइयों को, फ़सलों को, खेतों को जो नुकसान होता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा इन दिनों मौसम का जो पूर्वानुमान मिलता है, उसके कारण क़रीब-क़रीब अनुमान सही निकलते हैं। धीरे-धीरे हम लोग भी स्वभाव बनाएँ कि मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार अपने कार्यकलापों की भी रचना कर सकते हैं, तो उससे हम नुकसान से बच सकते हैं। जब भी मैं ‘मन की बात’ के लिये तैयारी करता हूँ, तो मैं देख रहा हूँ, मुझसे ज्यादा देश के नागरिक तैयारी करते हैं।

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