2022 तक भारतीय पावर ग्रिड में 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा
केंद्रीय विद्युत, कोयला, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल ने यहां आयोजित एक समारोह में भारत के इलेक्ट्रिक ग्रिड में 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा एकीकृत करने के बारे में एक अध्ययन रिपोर्ट का पहला भाग जारी किया। रिपोर्ट का दूसरा खंड जुलाई में जारी किया जाएगा जिसमें दक्षिणी तथा पश्चिमी क्षेत्रों में प्रणाली संचालन के बारे में विस्तृत व्याख्या है।
अमेरीका-भारतीय द्विपक्षीय कार्यक्रम ग्रिनिंग द ग्रिड कार्यक्रम के अंतर्गत विकसित यह अध्ययन 2022 तक भारतीय पावर ग्रिड में 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा एकीकृत करने के तकनीकी तथा आर्थिक संभावनाओं की पुष्टि करता है। अध्ययन में ऐसे एकीकरण के लिए आगे की कार्यवाई चिन्हित की गई हैं।
भारत सरकार ने 2015 में ग्रिड में 100 गीगावाट सौर ऊर्जा तथा 60 गीगावाट पवन ऊर्जा का महत्वकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया था। अध्ययन में इस चिंता के समाधान रूप में यह बताया गया है कि भारत के इलेक्ट्रिक ग्रिड द्वारा काफी अधिक नवीकरणीय ऊर्जा एकीकृत करने के काम में भिन्नता तथा अनिश्चितता का प्रबंधन कैसे किया जाएगा।
अध्ययन के परिणाम के अनुसार 100 गीगावाट सौर ऊर्जा तथा 60 गीगावाट पवन ऊर्जा में संतुलन 15 मिनट के समय में नवीकरणीय ऊर्जा आउटपुट में न्यूनतम कमी के साथ बनाया जा सकता है। भारत की वर्तमान कोयला विद्युत प्रणाली में लक्षित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के साथ मेल की भिन्नता को समाहित करने का लचीलापन है।
बड़े स्तर पर ईधन की बचत तथा बढ़ाए गए नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के कारण प्रदूषण में कमी, वर्तमान अवसंचरना ग्रिड संतुलन बनाए रखने में सक्षम, 175 गीगावाट के बाद के स्वच्छ ऊर्जा के परिदृश्य में कोयला संयंत्रों को लचीलापन के लिए प्रोत्साहन की आवश्यकता।
भारत का पावर सिस्टम कॉरपोरेशन (पोस्को) तथा अमेरीकी ऊर्जा विभाग की राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा प्रयोगशाला (एनआरईएल) तथा लारेंस बर्फले नेशनल लेब्रोलेटरी (एलबीएनएल) ने यह रिपोर्ट तैयार किया। विद्युत मंत्रालय तथा अंतरराष्ट्रीय विकास के लिए अमेरीकी एजेंसी (यूएसएड) के नेतृत्व में इसमें अग्रिम मौसम तथा विद्युत प्रणाली मॉडलिंग का उपयोग किया गया।
अध्ययन के महत्व और स्वच्छ ऊर्जा में अमेरीका-भारत सहयोग की चर्चा करते हुए यूएसएड-भारत के निदेशक माइकल सैटिंग ने कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में भारत सरकार के साथ यूएसएड काफी समय से सहयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा विकास का एक प्रमुख तत्व है और भारत को 7-8 प्रतिशत की दर से वार्षिक वृद्धि करने के लिए सतत ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि स्थापित ऊर्जा प्रणाली में नवीकरणीय ऊर्जा समाधान को शामिल करने में स्थापित नीति, संस्थान तथा बाजार ढांचे में परिवर्तन की आवश्यकता होती है। यह अध्ययन भारत में नवीकरणीय ऊर्जा को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।
इस अवसर पर विद्युत मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समय भारत के लोगों द्वारा न्यू ग्रिड, न्यू इंडिया की नई सोच के साथ परिवर्तन को अपनाने का समय है।प्रधानमंत्री की अमरीका के राष्ट्रपति से मुलाकात से भारत-अमेरीका ऊर्जा साझेदारी को बल मिला है।
इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य अतिथियों में विद्युत सचिव पी. के. पुजारी, सीईए के अध्ययन आर. के. वर्मा, पोस्को के सीईओ के. वी. एस. बाबा, पीजीसीआईएल के सीएमडी आई. एस. झा तथा एमएनआरई तथा विद्युत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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