24 मिलियन मीट्रिक टन दलहन उत्पादन के लिए रोडमेप
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन खरीफ अभियान-2017 में कहा, वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दुगुना करने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता है। इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा की गई पहलों का उल्लेख किया।
सिंह ने बताया कि वर्ष 2021 तक दालों के उत्पादन को 24 मिलियन मीट्रिक टन तक बढ़ाने के लिए एक रोडमेप तैयार किया गया है। सिंह ने राज्यों की इस बात के लिए प्रशंसा की कि उन्होंने सभी किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड देने संबंधी लक्ष्य को प्राप्त कर लिया है तथा अन्य संबंधितों को भी अगले 2-3 महीनों में पहले चरण को पूरा करने को प्रोत्साहित किया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड स्कीम का दूसरा चरण 2017 में शुरू होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की बढ़ती हुई लोकप्रियता का भी जिक्र किया और यह भी आशा की कि राज्य इस स्कीम के तहत और अधिक कवरेज बढ़ाएंगे।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्यों को विशेषरूप से वर्षा सिंचित और पर्वतीय क्षेत्रों में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए पंरपरागत कृषि योजना को मिशन मोड में कार्यान्वित करने के लिए प्रोत्साहित किया। सिंह ने कृषि क्षेत्र में विपणन सुधार शुरू किए जाने की जरूरत पर बल दिया ताकि किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकें।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री परषोत्तम रूपाला ने अपने संबोधन में विभाग की अग्रणी योजनाओं के तहत प्राप्त की गई उपलब्धियों का उल्लेख किया और विशेषकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के बारे में जिक्र किया जिसे खरीफ 2016 से शुरू किया गया था। इस नई स्कीम के तहत बुआई पूर्व से लेकर फसल कटाई के पश्चात होने वाली हानियों तक का व्यापक जोखिम कवरेज मुहैया कराया गया है। रूपाला ने स्कीम के कार्यान्वयन में प्रौद्योगिकी अपनाने और साथ ही वर्ष 2017-18 एवं 2019-20 के दौरान कुल फसलगत क्षेत्र/किसानों के क्रमश: 40 प्रतिशत और 50 प्रतिशत की बीमा सुरक्षा के लक्ष्य प्राप्त करने को प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री सुदर्शन भगत ने बताया कि हमारे किसानों के जीवन में भौतिक सुधार लाने के लिए केंद्र सरकार की सभी अग्रणी योजनाओं को उच्च प्राथमिकता देना पूर्णत: अनिवार्य है। केंद्रीय कृषि सचिव, शोभना के. पट्नायक ने अपने संबोधन में वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लिए बहुआयामी रणनीति की आवश्यकता के बारे में उल्लेख किया।
उन्होंने उत्पादन लागत को कम करने, उत्पादकता में उपज अंतराल को कम करने और हमारे किसानों के लिए बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने हेतु प्रयास करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने इस संबंध में प्रौद्योगिकी को अपनाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

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