विकास के लिए केन्द्र व राज्यों के बीच समन्वय आवश्यक
भारत सरकार के केन्द्रीय सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्री कलराज मिश्र की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
भारत सरकार के एमएसएमई राज्य मंत्री हरिभाई पारथीभाई चौधरी एवं मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारीगण भी इस अवसर पर उपस्थित थे। राज्यों-संघ शासित क्षेत्रों की ओर से अंडमान एवं निकोबार दीप समूह के उपराज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी, गुजरात के मंत्री रोहित भाई पटेल, हरियाणा के मंत्री विपुल गोयल, मणिपुर के मंत्री बिश्वजीत सिंह, मिजोरम के मंत्री एच. रोहलुना, ओडिशा के मंत्री जोगेन्द्र बेहरा, उत्तर प्रदेश के मंत्री सत्यदेव पचौरी और उत्तराखंड के मंत्री मदन कौशिक ने इस बैठक में भाग लिया।
उन्होंने अपने-अपने संघ शासित क्षेत्रों-राज्यों की ओर से विचार पेश किये। कॉयर बोर्ड के अध्यक्ष सी.पी. राधाकृष्णन और केवीआईसी के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना भी इस अवसर पर मौजूद थे। इस अवसर पर कलराज मिश्र ने कहा कि यह सहकारी संघवाद की भावना पर सरकार द्वारा दिये जा रहे विशेष जोर एवं राज्यों-संघ शासित क्षेत्रों के साथ जारी विचार-विमर्श के अनुरूप एक अनूठा प्रयास है। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम क्षेत्र के समग्र विकास के लिए केन्द्र एवं राज्यों के बीच समन्वय एक आवश्यक अवयव है। यह बैठक इस दिशा में एक अच्छा प्रयास है। ऐसे अनेक क्षेत्र हैं, जिनमें केन्द्र एवं राज्यों के प्रयासों के बीच बढि़या तालमेल बैठाने की जरूरत है।
इस अवसर पर केन्द्रीय एमएसएमई राज्य मंत्री हरिभाई पारथीभाई चौधरी ने कहा कि यदि केन्द्र एवं राज्य आपस में तालमेल बैठाकर काम करें, तो भारत दुनिया का विनिर्माण केन्द्र (हब) बन सकता है। इससे सभी हितधारक लाभान्वित हो सकते हैं। उन्होंने रोजगार उपलब्ध कराने के लिए एमएसएसई क्षेत्र की व्यापक संभावनाओं पर विशेष जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग स्वरोजगार को अपनाएं, ताकि रोजगार तलाशने वालों की संख्या कम हो सके। राज्यों के उप राज्यपाल एवं मंत्रियों ने अपने यहां मौजूद समस्याओं का उल्लेख किया और मूल्यवान सुझाव दिए।
भारत सरकार ने एमएसएमई पर विशेष ध्यान दिया है। वित्त वर्ष 2017-18 के बजट में इस मंत्रालय के लिए आवंटन को वित्त वर्ष 2016-17 की तुलना में एक ही बार में 87 फीसदी बढ़ा दिया गया है। प्रधानमंत्री ने भी 31 दिसंबर, 2016 को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में एमएसएमई को दी जा रही सुविधाओं का उल्लेख किया। उल्लेखनीय है कि मुख्यत: एमएसएमई द्वारा ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं।
कुछ राज्यों जैसे कि पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और राजस्थान ने अपने यहां एमएसएमई नीतियां तैयार की हैं। इस बैठक में एक बार फिर सभी राज्यों से यह आग्रह किया गया कि वे अपने यहां एमएसएमई नीति तैयार करें, ताकि एमएसएमई को बढ़ावा दिया जा सके।

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