पूर्वी भारत व दक्षिण पूर्व एशिया के आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहा असम
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने असम के गुवाहाटी में 'नमामि ब्रह्मपुत्र' महोत्सव का उद्घाटन किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि असम पूर्वी भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहा है।
यह प्रधानमंत्री के एक्ट ईस्ट पॉलिसी को लागू करने का गेटवे और सबसे प्रभावी स्थान है। उन्होंने कहा कि दक्षिण पूर्व एशिया भारत के निवेश और व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है। भारत जल्द ही आसियान के साथ अपने सहयोग के 25 वर्षों का जश्न मनाएगा। राष्ट्रपति ने कहा कि असम के पास विशाल क्षमता है। यह प्राकृतिक संसाधनों में समृद्ध है। यहां के लोग बहुत मेहनती होते हैं। प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सही नीतियों का होना बेहद जरूरी है।
असम की विविध और विशिष्ट संस्कृति का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की विविधता का प्रबंधन इसकी योग्यता है, जिसमें विविधता में एकता बनाए रखने की क्षमता है। यह न केवल अभिजात वर्ग पर निर्भर है, बल्कि उन सामान्य लोगों पर भी निर्भर है, जो दृढ़ विश्वास, आपसी समझ और सद्भाव के लिए प्रतिबद्ध थे। उन्होंने कहा कि भारतीयों को तर्कसंगत माना जाता है, लेकिन असहिष्णु कभी नहीं माना जाता। असम के महान विद्वान और सामाजिक सुधारक शंकरदेव की शिक्षाओं सहित हमारी परंपराओं ने कभी भी असहिष्णुता की अनुमति नहीं दी।
राष्ट्रपति ने कहा कि ब्रह्मपुत्र नदी असम और इस क्षेत्र की जीवन रेखा है। इस क्षेत्र के लोगों की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और हर दिन की दिनचर्या इसके आसपास ही घूमती है। उन्होंने असम की संस्कृति के साथ-साथ इसकी क्षमता को प्रदर्शित करने हेतु 'नमामि ब्रह्मपुत्र' जैसे वार्षिक महोत्सव की शुरूआत के लिए राज्य सरकार की सराहना की।

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