अनुसंधान के तरीकों में बदलाव
केंद्रीय विद्युत, कोयला, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा और खान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल ने खनन और ईंधन उद्योगों के लिए अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियां–(एनएक्सजीएनएमआईएफयू)-2017 पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय कोयला खनन कंपनियों और विद्युत संयंत्रों द्वारा किए गए प्रयासों के कारण देश में कोयला और विद्युत का उत्पादन आवश्यकता से अधिक हो गया है।
उन्होंने केंद्रीय खनन और ईंधन अनुसंधान संस्थान धनबाद के कार्य की सराहना की। जिसने विद्युत संयंत्रों में आपूर्ति किए गए कोयले की गुणवत्ता सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि अब नवाचार विचारों को लागू करने की जरूरत है ताकि उपयोगकर्ताओं को विद्युत सस्ती कीमत पर मिलती रहे। उन्होंने कहा कि कोयला और खनन क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के कार्यों में लगे सभी हितधारकों को स्थाई रूप से सुरक्षित, उचित और निपुण खनन की नई प्रौद्योगिकियों के लिए कार्य करना होगा।
उन्होंने वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के वैज्ञानिकों से देश में अनुसंधान के तरीकों में बदलाव लाने के लिए नए और बड़े विचारों को तलाशने के लिए कहा। इस सम्मेलन का आयोजन 15 से 17 फरवरी के दौरान नई दिल्ली में केंद्रीय खनन और ईंधन अनुसंधान संस्थान धनबाद ने किया है। यह आयोजन सीएसआईआर की स्थापना के 75 वर्ष होने की स्मृति में आयोजित प्लेटिनम जुबली समारोह के अवसर पर किया गया।
सीएसआईआर के महानिदेशक गिरीशसाहनी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। सम्मेलन में भू-खनन स्थिति की जटिलता, खान सुरक्षा, निगरानी और जोखिम प्रबंधन, स्वच्छ कोयला पहल, तरल मैथनॉल और यूरिया के लिए कोयला,शेल गैस और भूमिगत कोयला गैसीकरण दोहन, तेल और गैस क्षेत्रों में तकनीकी विकास वैकल्पिक स्वच्छ ऊर्जा पहलों से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

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