Wednesday, 27 December 2017

175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्‍य

     नई दिल्‍ली। नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने ‘नये भारत’ के लिए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के एक स्‍वच्‍छ ऊर्जा भविष्‍य के स्‍वप्‍न को साकार करने के लिए कई कदम उठाए हैं। भारत ने विश्‍व में सबसे बड़ा नवीकरणीय क्षमता विस्‍तार कार्यक्रम आरंभ किया है।

    सरकार का लक्ष्‍य नवीकरणीय ऊर्जा पर भरपूर जोर देने के जरिए स्‍वच्‍छ ऊर्जा के हिस्‍से में बढ़ोतरी करना है। भारत में नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा के विकास तथा उपयोग के मुख्‍य वाहक ऊर्जा सुरक्षा, बिजली की कमी, ऊर्जा पहुंच, जलवायु परिवर्तन आदि रहे हैं। 
     ग्रिड कनेक्‍टेड नवीकरणीय ऊर्जा के तहत पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान 27.07 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का क्षमता संवर्धन किया गया है, जिसमें सौर ऊर्जा से 12.87 गीगावाट, पवन ऊर्जा से 11.70 गीगावाट, लघु पनबिजली से 0.59 गीगावाट तथा जैव ऊर्जा से 0.79 गीगावाट शामिल है।
   स्‍वच्‍छ ऊर्जा क्षेत्र की वृद्धि दर से उत्‍साहित होकर भारत सरकार ने लक्षित राष्‍ट्रीय निर्धारित योगदान (आईएनडीसी) पर संयुक्‍त राष्‍ट्र जलवायु परिवर्तन संरचना सम्‍मेलन को प्रस्‍तुत अपने प्रतिवेदन में कहा है कि भारत प्रौद्योगिकी के अंतरण एवं हरित जलवायु निधि समेत निम्‍न लागत अंतराष्‍ट्रीय वित्‍त की सहायता से 2030 तक गैर-फॉसिल ईंधन आधारित ऊर्जा संसाधनों से 40 प्रतिशत संचयी बिजली ऊर्जा क्षमता अर्जित करेगा।
     30.11.2017 तक देश में सोलर रूफ टॉप परियोजनाओं से 863.92 मेगावाट समेत 16611.73 मेगावाट की सकल क्षमता के साथ सौर ऊर्जा परियोजनाएं संस्‍थापित की गई हैं। सरकार सृजन आधारित प्रोत्‍साहनों (जीबीआई), पूंजी एवं ब्‍याज सब्सिडियों, व्‍यावहार्य अंतराल निधियन, रियायतपूर्ण वित्‍त, वित्‍तीय प्रोत्‍साहनों जैसे विभिन्‍न प्रोत्‍साहनों के जरिए नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
        राष्‍ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन का उद्देश्‍य फॉसिल आधारित ऊर्जा विकल्‍पों के साथ सौर ऊर्जा को प्रतिस्‍पर्धी बनाने के अंतिम उद्देश्‍य के साथ बिजली सृजन एवं अन्‍य उपयोगों के लिए सौर ऊर्जा के विकास एवं उपयोग को बढ़ावा देना है। 
    राष्‍ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन का लक्ष्‍य दीर्घकालिक नीति, बड़े स्‍तर पर परिनियोजन लक्ष्‍यों, महत्‍वाकांक्षी अनुसंधान एवं विकास तथा महत्‍वपूर्ण कच्‍चे माल, अवयवों तथा उत्‍पादों के घरेलू उत्‍पादन के माध्‍यम से देश में सौर ऊर्जा सृजन की लागत को कम करना है। 
     नवीकरणीय ऊर्जा, फॉसिल ईंधन आधारित सृजन की तुलना में लगातार लागत प्रतिस्‍पर्धी बनती जा रही है। वर्ष 2022 तक 175 गीगावाट के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए पिछले दो वर्षों के दौरान सोलर पार्क, सोलर रूफटॉप योजना, सौर रक्षा योजना, नहर के बांधों तथा नहरों के ऊपर सीपीयू सोलर पीवी पॉवर प्‍लांट के लिए सौर योजना, सोलर पंप, सोलर रूफटॉप आदि के क्रियान्‍वयन के लिए बड़े कार्यक्रम/योजनाएं आरंभ की गई हैं।
    वर्ष 2022 तक 175 गीगावाट के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा कार्यान्वित की जा रही विभिन्‍न योजनाओं को वित्‍तीय समर्थन उपलब्‍ध कराने के अतिरिक्‍त विभिन्‍न नीतिगत उपाय आरंभ किये जा रहे हैं तथा विशेष कदम उठाए जा रहे हैं।
    इनमें नवीकरणीय खरीद बाध्‍यता (आरपीओ) के मजबूत क्रियान्‍वयन और नवीकरणीय सृजन बाध्‍यता (आरजीओ) के लिए बिजली अधिनियम एवं टैरिफ नीति में अनुकूल संशोधन करना; हरित ऊर्जा गलियार परियोजना के माध्‍यम से बिजली पारेषण नेटवर्क का विकास; टैरिफ आधारित प्रतिस्‍पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्‍यम से सौर एवं पवन ऊर्जा की खरीद के लिए दिशा-निर्देश, राष्‍ट्रीय अपतटीय पवन ऊर्जा नीति को अधिसूचित किया जाना, पवन ऊर्जा परियोजनाओं को फिर से मजबूत बनाने, सोलर फोटोवोल्‍टेक सिस्‍टम्‍स/डिवाइसिस की तैनाती के लिए मानक निर्धारित करना, अंतरराज्‍यीय पारेषण प्रणाली प्रभारों तथा मार्च, 2019 तक कमीशन की जाने वाली परियोजनाओं के लिए सौर तथा पवन बिजली के अंत:राज्‍यीय बिक्री से होने वाले नुकसान की माफी के लिए आदेश; रूफटॉप परियोजनाओं के लिए बड़े सरकारी परिसरों/भवनों की पहचान करने; मिशन वक्‍तव्‍य एवं स्‍मार्ट सिटी के विकास के लिए दिशा-निर्देशों के तहत रूफटॉप सोलर एवं 10 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा के प्रावधान को अनिवार्य बनाना, नये निर्माण या उच्‍चतर फर्श क्षेत्र अनुपात के लिए रूफटॉप सोलर के अनिवार्य प्रावधान के लिए भवन उपनियमों में संशोधन; सौर परियोजनाओं के लिए अवसंरचना दर्जा; कर मुक्‍त सोलर बांड जारी करने; दीर्घकालिक ऋण उपलब्‍ध कराने; बैंकों/एनएचबी द्वारा गृह ऋण के हिस्‍से के रूप में रूफटॉप सोलर का निर्माण; वितरण कंपनियों को प्रोत्‍साहित करने तथा नेट-मीटरिंग को अनिवार्य बनाने के लिए समेकित बिजली विकास योजना (आईपीडीएस) में उपयों को शामिल करना तथा इस लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए हरित जलवायु निधि के रूप में भी द्वीपक्षीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय दानकर्ताओं से फंड जुटाना आदि शामिल हैं। 
    नवीकरणीय ऊर्जा की अनुमानित क्षमता : स्‍वदेशी नवीकरणीय संसाधनों के बढ़ते उपयोग से महंगे आयातित फॉसिल ईंधनों पर भारत की निर्भरता में कमी आने की उम्‍मीद है। लगभग 3 प्रतिशत बंजर भूमि के अनुमान के साथ भारत के पास 1096 गीगावाट की वाणिज्यिक अक्षय ऊर्जा स्रोतों से अनुमानित अक्षय ऊर्जा क्षमता है, जिसमें पवन - 302 गीगावॉट; लघु हाइड्रो - 21 गीगावाट; जैव ऊर्जा 25 गीगावाट; और 750 गीगावाट सौर ऊर्जा शामिल है। 
    लक्ष्‍य : भारत सरकार ने 2022 के आखिर तक 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा संस्‍थापित क्षमता का लक्ष्‍य निर्धारित किया है। इसमें से 60 गीगावाट पवन ऊर्जा से, 100 गीगावाट सौर ऊर्जा से, 10 गीगावाट बायोमास ऊर्जा से तथा पांच गीगावाट लघु पनबिजली से शामिल है। 2017-18 के लिए 14550 मेगावाट ग्रिड नवीकरणीय ऊर्जा (पवन 4000 मेगावाट, सौर 10000 मेगावाट, लघु पनबिजली ऊर्जा 200 मेगावाट, जैव ऊर्जा 340 मेगावाट एवं अवशिष्‍ट से ऊर्जा 10 मेगावाट) निर्धारित किया गया है।

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