जीन में बदलाव कर बच्चों का जन्म !
खबर तो यही कि है कि चीनी वैज्ञानिक ने जुड़वां शिशुओं के पैदा होने से पहले ही उनमें आनुवांशिक बदलाव करने का दावा किया है। उन्होंने यूट्यूब पर वीडियो डालकर अपने प्रयोग के बारे में बताया।
इस खबर से वैज्ञानिक स्तब्ध हैं और बहस शुरू हो गई है। खबर है कि चीन के एक वैज्ञानिक ने दावा किया है कि उन्होंने दुनिया के पहले ऐसे शिशुओं को पैदा करने में सफलता पाई है, जिनके जीन्स में बदलाव किए गए हैं।
चीनी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हे जियानकुई ने यूट्यूब पर नवजात जुड़वा बहनों का वीडियो डालकर दावा किया कि इनके जीन्स में बदलाव किए गए हैं, जिससे इनका एचआईवी से बचाव हो सकेगा।
खबर है कि एचआईवी से रोकना मकसद, शेनझान के अनुसंधानकर्ता ही जियानकुई ने कहा कि उन्होंने सात दंपतियों के बांझपन के उपचार के दौरान भ्रूणों को बदला जिसमें अभी तक एक मामले में संतान के जन्म लेने में यह परिणाम सामने आया। इन जुड़वा बहनों का डीएनए सीआरआईएसपीआर तकनीक से बदला गया। उन्होंने कहा कि उनका मकसद किसी वंशानुगत बीमारी का इलाज या उसकी रोकथाम करना नहीं है, बल्कि एचआईवी, एड्स वायरस से भविष्य में संक्रमण रोकने की क्षमता इजाद करना है, जो लोगों के पास प्राकृतिक रूप से हो।
खबर है कि जियानकई ने कहा कि इस प्रयोग में शामिल माता-पिताओं ने अपनी पहचान जाहिर करने या साक्षात्कार देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह यह भी नहीं बताएंगे कि वे कहां रहते हैं और उन्होंने यह प्रयोग कहां किया। खबर है कि ऐसे किया प्रयोग, जियानकुई के ऑनलाइन किए गए दावे के बारे में एमआईटी टेक्नॉलजी रिव्यू के इंडस्ट्री जर्नल लेख प्रकाशित हुआ है। इस वीडियो के रिलीज होने के बाद से वैज्ञानिकों में बहस छिड़ी हुई है।
जियानकुई का कहना है कि 'लुलू' और 'नाना' नाम की इन बहनों को आईवीएफ तकनीक से पैदा किया गया और गर्भ में प्रवेश होने से पहले ही अंडाणु में बदलाव कर दिए गए थे। उनके मुताबिक, ''शुक्राणुओं के प्रवेश के बाद भ्रूणविज्ञानी ने सीआरआईएसपीआर प्रोटीन को भी प्रवेश कराया। जिसका मकसद बच्चियों को एचआईवी संक्रमण से बचाना था''।
खबर है कि अनुसंधानकर्ता के इस दावे की स्वतंत्र रूप से कोई पुष्टि नहीं हो सकी है और इसका प्रकाशन किसी पत्रिका में भी नहीं हुआ है, जहां अन्य विशेषज्ञों ने इस पर अपनी मुहर लगाई होध् एमआईटी टेक्नॉलजी रिव्यू ने चेतावनी दी है कि यह तकनीक नैतिक रूप से सही नहीं है क्योंकि भ्रूण में परिवर्तन भविष्य की पीढ़ियों को विरासत में मिलेगा और अंततः समूचे जीन को प्रभावित कर सकता है।
खबर है कि डीएनए लंबी उम्र के लिए अच्छे जीन्स का होना जरूरी है। जीन्स हमें अपने माता पिता से मिलते हैं। अकसर देखा गया है कि जो मां बाप लंबा जीते हैं, उनके बच्चों की उम्र भी लंबी होती है। इसकी वजह हमारे डीएनए में छिपी है। सही जीन के होने से हमारी जीवन प्रत्याशा बढ़ सकती है। हमारी उम्र पर इनका 25 से 30 फीसदी तक असर होता है।
खबर है कि महिलाएं आम तौर पर पुरुषों से लंबा जीती हैं। ऐसा क्यों है, इसका जवाब शायद हमारे क्रोमोजोम में छिपा है। महिलाओं में दो एक्स क्रोमोजोम होते हैं, जबकि पुरुषों में एक एक्स और एक वाय. अगर वाय में कुछ गड़बड़ी हो जाए, तो एक्स कोई मदद नहीं कर सकता। इसलिए पुरुषों में जीन डिफेक्ट अधिक देखे जाते हैं।
खबर है कि अच्छी सेहत के लिए सही तरह का खाना बेहद जरूरी है। जैसे कि मेडिटरेनियन डाइट यानी भूमध्यसागर के इलाकों में रहने वाले लोगों का खान पान. ऑलिव ऑयल, सब्जियां और सलाद खाने वालों की उम्र लंबी होती है। साथ ही, दिन भर में कितनी कैलोरी लेते हैं, ये भी उम्र को निर्धारित करता है। सही आहार के जरिए अपने वजन पर काबू करने वाला लंबा जीता है।
खबर है कि अमेरिका में हुए एक शोध में देखा गया कि जो लोग अपनी बढ़ती उम्र को ले कर सकारात्मक रवैया रखते हैं, वे लंबा जी पाते हैं. रिसर्च के अनुसार रिटायर होने के बाद आराम करने वालों की तुलना में वो लोग जो साठ-पैंसठ की उम्र के बाद भी खुद को व्यस्त रखते हैं, वे चार साल लंबा जीते हैं. यानी बुढ़ापे में व्यस्त रहने से उम्र लंबी होती है।
खबर है कि महिलाएं आम तौर पर पुरुषों से लंबा जीती हैं। ऐसा क्यों है, इसका जवाब शायद हमारे क्रोमोजोम में छिपा है। महिलाओं में दो एक्स क्रोमोजोम होते हैं, जबकि पुरुषों में एक एक्स और एक वाय. अगर वाय में कुछ गड़बड़ी हो जाए, तो एक्स कोई मदद नहीं कर सकता। इसलिए पुरुषों में जीन डिफेक्ट अधिक देखे जाते हैं।
खबर है कि अच्छी सेहत के लिए सही तरह का खाना बेहद जरूरी है। जैसे कि मेडिटरेनियन डाइट यानी भूमध्यसागर के इलाकों में रहने वाले लोगों का खान पान. ऑलिव ऑयल, सब्जियां और सलाद खाने वालों की उम्र लंबी होती है। साथ ही, दिन भर में कितनी कैलोरी लेते हैं, ये भी उम्र को निर्धारित करता है। सही आहार के जरिए अपने वजन पर काबू करने वाला लंबा जीता है।
खबर है कि अमेरिका में हुए एक शोध में देखा गया कि जो लोग अपनी बढ़ती उम्र को ले कर सकारात्मक रवैया रखते हैं, वे लंबा जी पाते हैं. रिसर्च के अनुसार रिटायर होने के बाद आराम करने वालों की तुलना में वो लोग जो साठ-पैंसठ की उम्र के बाद भी खुद को व्यस्त रखते हैं, वे चार साल लंबा जीते हैं. यानी बुढ़ापे में व्यस्त रहने से उम्र लंबी होती है।
नियमित रूप से कसरत करना और चलते फिरते रहना सेहत और उम्र दोनों के लिए अच्छा है. जो लोग जॉगिंग करते रहे हैं, उसका फायदा उन्हें तब भी मिलता है, जब वे बुढ़ापे में दौड़ना भागना बंद कर देते हैं। कसरत करने से शरीर की कोशिकाओं में ऐसे बदलाव होते हैं, जो कसरत करना छोड़ने पर भी बने रहते हैं. कसरत करने से शरीर लंबी उम्र के लिए तैयार होता है।

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