Wednesday, 12 July 2017

नई दूरसंचार नीति कनेक्टिविटी के बजाय अप्लिकेशन संचालित

        संचार मंत्री मनोज सिन्‍हा ने कहा है कि उनका मंत्रालय नई दूर संचार नीति तैयार कर रहा है, जो राष्‍ट्रीय दूर संचार नीति, 2012 की तुलना में कनेक्टिविटी की बजाय अप्लिकेशन संचालित होगी।

 यहां 'सूचना संचार प्रौद्योगिकी : नई संचालन विधियों का जन्‍म' विषय पर एक सेमिनार को संबोधित करते हुए उन्‍होंने कहा कि नई नीति में अंतिम इस्तेमालकर्ता पर ध्‍यान केन्द्रित किया जायेगा।
        उसमें दूरसंचार सेवाओं की उपलब्‍धता के विस्‍तार के नए अवसर तलाश किए जायेंगे। उन्‍होंने कहा कि नई नीति तैयार करने के लिए पहली बार सरकार ने विभाग से बाहर के विशेषज्ञों के एक समूह को शामिल करने का निर्णय किया है, ताकि नई नीति के बारे में नागरिकों और हितभागियों से अधिक से अधिक जानकारी एवं सुझाव प्राप्‍त किए जा सकें।
         मंत्री ने कहा कि ज्ञान के घनत्‍व वाले युग में दूरसंचार क्षेत्र ने सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए अनिवार्य ढांचे का स्‍थान ले लिया है। उन्‍होंने कहा कि देश में अप्रैल 2017 तक टेलीफोन कनेक्‍शनो की संख्‍या 1.2 अरब के करीब पहुच चकी थी, जिसमें 1.17 अरब वायरलेस टेलीफोन शामिल हैं। इसी प्रकार ब्रॉडबैंड कनेक्‍शनों की संख्‍या भी बढ़कर 27.652 करोड़ पर पहुंच गयी है।
         सिन्‍हा ने यह भी कहा कि दूरसंचार क्षेत्र में एफडीआई इक्विटी पूंजी निवेश अप्रैल 2016 से मार्च 2017 की अवधि में 556.4 करोड़ अमरीकी डालर का हुआ, वर्ष 2013-14 की तुलना में चार गुणा अधिक है। औसत निवेश हर वर्ष करीब 1.3 अरब अमरीकी डालर का रहा है।
         मंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम और डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था के लिए अंतर-निहित कनेक्टिविटी की आवश्‍यकता है। उन्‍होंने कहा कि सरकार सड़क ढांचे पर भी निरंतर ध्‍यान दे रही है, जो आर्थिक विकास के लिए आवश्‍यक है।
         इस अवसर पर दूरसंचार सचिव सुश्री अरुणा सुंदरराजन ने कहा कि दुनिया भारत को विकास के इंजन के रूप में देखना चाहती है। भारत से यह उम्‍मीद की जा रही है कि वह 7.6 की मौजूदा विकास दर को 10 प्रतिशत पर पहुंचाए।

No comments:

Post a Comment