Wednesday, 12 July 2017

महाराष्‍ट्र-कर्नाटक में शोलापुर-बीजापुर पर राष्‍ट्रीय राजमार्ग, लागत 1889 करोड़

         प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने महाराष्‍ट्र और कर्नाटक में शोलापुर-बीजापुर सेक्‍शन पर नये राष्‍ट्रीय राजमार्ग-52 के चार लेन को विकसित करने की मंजूरी दे दी है। 

       करीब 110 किलोमीटर लंबे 4 लेन वाले इस राजमार्ग के विकास पर करीब 1889 करोड़ रूपये लागत आएगी। इसमें भूमि अधिग्रहण और निर्माण पूर्व क्रिया-कलापों की लागत भी शामिल है। 
       यह सड़क वर्तमान में दो लेन की है और महाराष्ट्र के भीड़-भाड़ वाले शोलापुर, ताकली और नंदनी तथा कर्नाटक में जल्की, होर्ती और बीजापुर से गुजरती है। यह दक्षिण भारत को उत्तर भारत से जोड़ती है। 
        इस सड़क को चार लेन में विकसित करने से यह राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम के उत्तर-दक्षिण गलियारे के लिए एक वैकल्पिक मार्ग बन सकेगा। इस सड़क के विकसित हो जाने, शोलापुर और बीजापुर पर बाईपास बनने तथा 6 फ्लाइओवरों के निर्माण से यात्रा समय बचेगा और वाहनों की संचालन लागत कम होने के साथ-साथ महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्यों में बुनियादी ढांचे के सुधार में तेजी आएगी।
      यह सड़क सघन यातायात वाले बंगलुरु-चित्रदुर्ग-बीजापुर-शोलापुर-औरंगाबाद-धुले-इंदौर-ग्वालियर यातायात गलियारे का हिस्सा है। दो बाईपास के प्रावधान से शोलापुर और बीजापुर के शहरी इलाकों में भीड़-भाड़ कम हो सकेगी। इसी प्रकार 6 फ्लाईओवर के बनने से शोलापुर, मनद्रुप, जल्की और बीजापुर में यातायात की गति बढ़ने के साथ ही इलाके में भीड़-भाड़ कम हो सकेगी। 
        सड़क के किनारे ट्रकों को खड़ा करने के लिए दो स्थानों के बनने से माल ढुलाई करने वाले वाहन सुगमता से चल सकेंगे। विश्राम के लिए बनाए गए दो क्षेत्रों में दी गई सुविधाओं से भी ट्रक चालकों को लाभ मिलेगा। परियोजना के 14 किलोमीटर के क्षेत्र में दोनों तरफ सर्विस रोड़, करीब 40 किलोमीटर में स्लिप रोड़ और 24 स्थानों पर बस शेल्टरों के प्रावधान से लंबी दूरी के व्यवसायिक वाहन सुरक्षित और सुचारू रूप से चल सकेंगे। साथ ही बसे हुए-शहरी इलाकों में स्थानीय यातायात सुगम हो जाएगा।
         पर्यटकों को बीजापुर, हम्पी और चित्रदुर्ग जैसे नजदीकी महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों के लिए बेहतर सम्पर्क का लाभ मिलेगा। इस परियोजना से स्थानीय श्रमिकों के लिए रोजगार की संभावनाएं बढ़ेगी। यह अनुमान लगाया गया है कि एक किलोमीटर राजमार्ग के निर्माण के लिए कुल 4076 मानव दिवसों की जरूरत पड़ेगी। टेक्सटाइल केन्द्र होने के नाते शोलापुर को बढ़े हुए आर्थिक अवसरों से लाभ मिलेगा।

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