गोबर एवं गांवों के जैविक कचरे को एक अच्छी गुणवत्ता वाली जैविक खाद में बदला
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 16 मई से 31 मई,2017 तक स्वच्छता पखवाड़ा मनाया। इस दौरान मंत्रालय के परिसर में चलाए जाने वाले स्वच्छता अभियान से बाहर निकलकर कृषि मंडियों, मछली बाजारों तथा कृषि विज्ञान केंद्रों के आसपास स्थित गांवों में जागरूकता कार्यक्रम एवं सफाई अभियान चलाया गया।
स्वच्छता अभियान के संदेश का मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया। स्वच्छता पखवाड़े के दौरान कुछ ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष बल दिया गया जिन्हें अनुकूल परिणाम प्राप्त करने के लिए पखवाड़े के बाद भी जारी रखा जाएगा। कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग ने किसानों को सफाई के प्रति जागरूक करने के लिए स्वच्छता पखवाड़े का आयोजन किया। स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को स्वच्छ रखने एवं किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र (एनसीओएफ) द्वारा एक कचरा निपटान तकनीक (वेस्ट डी-कम्पोजर तकनीक) का विकास किया गया है जिसके द्वारा जानवरों के गोबर एवं गांवों के जैविक कचरे को बहुत कम लागत में एक अच्छी गुणवत्ता वाली जैविक खाद में बदला जा सकता है।
पखवाड़े के दौरान एनसीओएफ द्वारा 142 गांवों/कृषि मंडियों में इस तकनीक का प्रदर्शन किया गया। देश में इस तकनीक के बारे में जानकारी का प्रचार-प्रसार करने के लिए इस तकनीक के संबंध में विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित होने वाले 80 समाचार पत्रों में विज्ञापन जारी किए गए। इसके अतिरिक्त वर्ष 2017-18 के दौरान कम्पोस्ट वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित करने के लिए आरकेवीवाई के तहत राज्यों को 36 करोड़ रु. की निधि एवं 250 ई-नेम एपीएमसी को 12.5 करोड़ रु. जारी करने का निर्णय भी लिया गया।
इसके अतिरिक्त इस विभाग के अंतर्गत आने वाले विभिन्न कार्यालयों में सामान्य स्वच्छता गतिविधियों के अलावा गहन सफाई अभियान चलाया गया। स्वच्छता पखवाड़ा पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन विभाग के मुख्यालय तथा इस विभाग के संबद्ध, अधीनस्थ एवं स्वायत्तशासी संस्थानों/कार्यालयों में मनाया गया। पखवाड़े के दौरान 11 राज्यों के 20 मछली बाजारों में सफाई अभियान चलाया गया। इसके अलावा, एक स्वच्छता पदयात्रा निकालने के साथ-साथ 23 जागरूकता अभियान चलाए गए तथा मछली रखरखाव पर राज्य स्तर की 3 कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं। स्वच्छता अभियानों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, मंत्रालयों और सरकारी अधिकारियों तथा आम लोगों की प्रतिभागिता भी सुनिश्चित की गई।
इसके अतिरिक्त इस विभाग के अंतर्गत आने वाले विभिन्न कार्यालयों में सामान्य स्वच्छता गतिविधियों के अलावा गहन सफाई अभियान चलाया गया। स्वच्छता पखवाड़ा पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन विभाग के मुख्यालय तथा इस विभाग के संबद्ध, अधीनस्थ एवं स्वायत्तशासी संस्थानों/कार्यालयों में मनाया गया। पखवाड़े के दौरान 11 राज्यों के 20 मछली बाजारों में सफाई अभियान चलाया गया। इसके अलावा, एक स्वच्छता पदयात्रा निकालने के साथ-साथ 23 जागरूकता अभियान चलाए गए तथा मछली रखरखाव पर राज्य स्तर की 3 कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं। स्वच्छता अभियानों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, मंत्रालयों और सरकारी अधिकारियों तथा आम लोगों की प्रतिभागिता भी सुनिश्चित की गई।
नियमित सफाई कार्यों के अलावा क्षेत्रीय चारा केंद्र, हिसार द्वारा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, मिर्जापुर और हिसार के मिर्जापुर गांव में जागरूकता अभियान चलाया गया। इसी प्रकार सेंट्रल हर्ड रजिस्ट्रेशन स्कूल, रोहतक के स्टाफ द्वारा सीसाना में स्थित अस्पताल परिसर में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। इस विभाग के अधीन प्रजनन सुधार संस्थानों ने विभिन्न फार्मों, राजकीय, कृषि और पशुपालन प्रबंधन कार्यों में लगे हुए कार्मिकों/कर्मचारियों के लिए जागरूकता सत्र जैसे कार्यकलाप भी किए गए। इसके अतिरिक्त पशुपालन स्वास्थ्य प्रभाग के अधीनस्थ संस्थानों के अधिकारियों ने अपने अधीनस्थ कार्मिकों को जैविक निपटान प्रणाली और स्वच्छ उर्जा उपयोग के बारे में जानकारी दी।
विभाग में वर्ष 2017-18 के दौरान स्वच्छता कार्य योजना (एसएपी) के तहत स्वच्छता संबंधी बुनियादी कार्यकलापों यथा वर्मी कम्पोस्ट इकाइयों की स्थापना, जैव बायोगैस संयंत्रों को स्थापित करने, अपशिष्ट पुनर्चक्रण पर राज्य स्तर की कार्यशालाओं के आयोजन और स्लरी/वाश वाटर टैंकों आदि को स्थापित करने के लिए 5.32 करोड़ आबंटित किए गए हैं। स्वच्छता पखवाड़े के दौरान कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग/आईसीएआर के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय, सभी 102 अनुसंधान संस्थान और 671 कृषि विज्ञान केंद्रों ने पखवाड़ा कार्यकलापों में सक्रिय भाग लेने के साथ-साथ व्यापक आधार पर सफाई अभियान चलाया।
आईसीएआर के संस्थानों द्वारा कार्यशालाओं, संगोष्ठियों, जागरूकता शिविरों, रैलियों, नुक्कड़ नाटकों और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं (अर्थात स्वच्छ भारत – क्या स्वस्थ भारत ?, “स्वच्छता का महत्व”) का आयोजन किया गया। आईसीएआर संस्थानों और 671 केवीके के माध्यम से गोद लिए गए गांवों में जागरूकता और संवेदनशीलता कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। किसानों और ग्रामीण युवकों की सक्रिय प्रतिभागिता के साथ विभिन्न आईसीएआर संस्थानों और केवीके द्वारा 5200 से अधिक गांवों में स्वच्छता कार्यकलाप किए गए।
इन कार्यकलापों के एक भाग के रूप में स्वच्छ कृषि प्रौद्योगिकियों, अभ्यासों और कृषि संबंधी व्यर्थ पदार्थों से आमदनी करने की 130 संबंधित प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित किया गया जिसमें जैव कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट को तैयार करने, छाछ के अपेक्षित उपयोग, स्ट्रा संवर्धन, गंदे पानी का परिष्करण, कपास और मत्स्य से संबंधित व्यर्थ पदार्थों का उपयोग आदि शामिल हैं।

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