Thursday, 23 March 2017

बाल मज़दूरी पर पूरी तरह से प्रतिबंध

             श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय से संबद्ध परामर्श समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में चर्चा का मुख्य बिन्दु “बाल मज़दूरी (बाल मज़दूर अधिनियम में संशोधन एवं आईएलओ सम्मेलन संख्या 138 एवं 182 का समर्थन सहित)” था। 

            बैठक की अध्यक्षता करते हुए श्रम एवं रोज़गार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बंडारु दत्तात्रेय ने बैठक में मौजूद सदस्यों को एजेंडा के बारे में जानकारी दी। मंत्री ने कहा कि सरकार हमारे देश से बाल मज़दूरी को खत्म करने के प्रति वचनबद्ध है। संसद द्वारा 26 जुलाई 2016 को बाल मज़दूरी (निषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 को पारित किया जा चुका है। बंडारु दत्तात्रेय ने कहा कि इस अधिनियम के अंतर्गत 14 वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे को बाल मज़दूरी अथवा अन्य किसी संबंधित प्रक्रिया में संलिप्त करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। 

            हालांकि, अधिनियम के अंतर्गत घरेलू स्तर के गैर खतरनाक उद्यमों में इन बच्चों को मदद करने की कुछ हद तक छूट दी गई है, मगर स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह मदद विद्यालय के बाद अथवा अवकाश के दौरान ही की जा सकती है।

            इसके अतिरिक्त, किसी भी किशोर (14 से 18 वर्ष की आयु के बीच) किसी भी अधिसूचित खतरनाक व्यवसाय अथवा प्रक्रिया में रोज़गार पाने अथवा इससे जुड़ने की अनुमति नहीं दी गई है। किसी भी तरह से उपर्युक्त नियमों के उल्लंघन के संबंध में कड़ी से कड़ी सज़ा का प्रावधान किया गया है। ऐसे बालकों के पुनर्वास के लिए अलग से अनुदान का सृजन किया गया है।

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