Thursday, 23 March 2017

भारत में अब रचनात्मक विचारों के साथ संपत्ति का निर्माण हो

             शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि जब तक हम ज्यादा संपत्ति पैदा नहीं करते हैं तो हम सिर्फ गरीबी ही वितरित कर सकते हैं। 

           आल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (एआईएमए) द्वारा यहां आयोजित तीसरी नेशनल लीडरशिप कॉनक्लेव को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और चीन जैसे राष्ट्र पहले संपत्ति के वितरण में विश्वास करते थे, लेकिन अब उनका ध्यान ज्यादा से ज्यादा संपत्ति के निर्माण पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि एशिया विशेषकर भारत को अब रचनात्मक विचारों के साथ सामने आना है, जिससे संपत्ति का निर्माण हो। नायडू ने कहा कि भारत में पर्याप्त मात्रा में प्रतिभा है, लेकिन इसे मान्यता देने और उन्नत करने की जरूरत है।

              उन्होंने कहा कि भारत सहित एशिया के कुछ भाग अल्पविकसित हैं। जब तक इन्हें शामिल नहीं किया जाता, तब तक विकास का कोई मतलब नहीं है। मंत्री ने कहा कि विकास की प्रक्रिया में गरीबों को शामिल किए जाने की जरूरत है। नायडू ने कहा कि आज हर कहीं नई तरह की भूख है, जैसे विकास की भूख, प्रगति की भूख। एम वेंकैया नायडू ने भारत में प्रबंधन, शिक्षा और व्यावसायिकता के लिहाज से मूल्यवान सेवाएं देने के लिए एआईएमए की सराहना की। उन्होंने कहा कि अच्छा नेतृत्व और प्रबंधन किसी भी क्षेत्र के लिए अहम होता है। उन्होंने कहा कि 90 के दशक में ‘शासन’ शब्द काफी चर्चा में था और सुशासन के लिए सुधार, प्रदर्शन, बदलाव और सूचना की जरूरत है।

             नायडू ने कहा कि 2008 से वैश्विक मंदी की स्थिति बनी हुई है। अब से 10 साल के भारत चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया के एशिया के सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं बनने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ साल के दौरान एशिया के तीन देश चीन, जापान और भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो जाएंगे। 

           भारत तो जल्द ही जापान को पीछे छोड़ देगा। उन्होंने कहा कि चीन ने सस्ते विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसका उसके जीडीपी में खासा योगदान है, लेकिन भारत ने सेवा क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया है, जिससे भारत प्रमुख बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) सेवाओं वाले देश के तौर पर उभरा है। भारत को अंग्रेजी भाषा का भी खास फायदा मिला। नायडू ने कहा कि भारत को निवेश स्थल और विनिर्माण व डिजाइन हब के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र के तौर पर के तौर पर आगे बढ़ाने मेक इन इंडिया पहल शुरू की गई थी।

            नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि भारत का विकास मितव्ययी रहा है, क्योंकि हम एक उत्पाद के निर्माण में कम कार्बन, कम पूंजी और कम प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उत्पाद भी सस्ते बनते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का विकास का मॉडल एशिया और दुनिया के लिए अच्छा है।

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