समाज संगठनों के साथ भागीदारी करेगा नीति आयोग
सरकार की नीतियों और योजनाओं को लागू करने में नागरिक समाज संगठनों की भूमिका के आलोक में नीति आयोग ने बुधवार, 10 मार्च 2017 को राष्ट्रीय राजधानी में प्रमुख सामाजिक संगठनों और कई मंत्रालयों के बीच भागीदारी को लेकर एक कार्यक्रम का आयोजन किया।
सरकार की सामाजिक क्षेत्र की पहल को आगे बढ़ाने के लिए विचार-विमर्श के इस कार्यक्रम में 17 से ज्यादा अग्रणी स्वयंसेवी संगठनों के सदस्यों और 15 केंद्रीय मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। स्वयंसेवी संगठनों के सदस्यों ने ग्रामीण विकास मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, एफएसएसएआई, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा की। शिक्षा, स्वास्थ्य, बुजुर्गों की देखभाल, महिला सशक्तिकरण, हथकरघा के क्षेत्र में ग्रामीण विकास से संबंधित देशभर में काम करने वाले सामाजिक सेवाओं से जुड़े स्वयंसेवी संगठन इसमें शामिल हुए।
समावेशी विकास को सुनिश्चित करने में सामाजिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते नीति आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया ने कहा, ‘सरकार और सामाजिक संगठनों के बीच प्रभावी साझेदारी से खासकर सामाजिक क्षेत्र में सरकारी संसाधनों का भरपूर व प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।’ सभी नागरिकों के जीवन पर एक स्थायी प्रभाव बनाने के लिए एक सहयोगी दृष्टिकोण की क्षमता पर जोर देते हुए नीति आयोग के कार्यकारी अधिकारी(सीईओ) अमिताभ कांत ने कहा कि सरकार और सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय से गरीबी उन्मूलन, भूखमरी खत्म करने और अभाव के अन्य सभी रूपों को मिटाने के लिए नवोन्मेषी समाधान की तलाश की जा सकती है।
बैठक में राष्ट्रीय, राज्य, जिला और जमीनी स्तर पर सरकारी सेवाओं में प्रभावी सुधारने लाने में सरकार और सामाजिक संगठनों की साझेदारी को मजबूत बनाने के रास्ते की तलाश पर चर्चा की गई। निगरानी और मूल्यांकन प्रक्रियाओं के लिए धन का आवंटन के जरिये सामाजिक क्षेत्र में सेवा मुहैया कराने से संबंधित मुद्दों जिसमें सामाजिक संगठनों की स्वनियमन का मुद्दा भी शामिल है, पर विस्तृत चर्चा की गई। अपने काम की प्रकृति और उसके प्रभाव प्रकाश डालते हुए प्रत्येक नागरिक समाज संगठन ने क्षेत्रवार सरकारी मंत्रालयों एवं विभागों के साथ समन्वय की सिफारिशें कीं।
इसमें स्वैच्छिक संगठनों और सरकार के बीच एक स्थायी भागीदारी के विकास के लिए सिफारिशें की गईं। इन संगठनों में प्रथम, हेल्प एज इंडिया, सुलभ इंटरनेशनल, प्रधान, अक्ष्य पात्र और प्रयास जैसे स्वैच्छिक संगठन शामिल हैं। साझेदारी की भावना को आगे बढ़ाते हुए फैसला किया गया कि प्रभावी शासन के लिए निश्चित समय अंतराल पर इस तरह की चर्चाएं आयोजित की जाती रहेंगी।

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