पर्यटन पर्व का 11वां दिन, देश भर में हेरिटेज वॉक
नई दिल्ली। भारत सदैव ही अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध रहा है। भारत का गौरवशाली अतीत और सांस्कृतिक विविधता एक ऐसा प्रभावयुक्त सम्मिश्रण पेश करती है जो हर साल लाखों पर्यटकों को देश भर में फैले पर्यटन स्थलों की ओर आकर्षित करता है।
भारत की समृद्ध विरासत अनगिनत मंदिरों, महलों, स्मारकों, किलों इत्यादि के रूप में व्यापक तौर पर परिलक्षित होती है। इससे विशेष रूप से धरोहर स्थलों पर भारत के पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भारत में पिछले कुछ सालों के दौरान पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। जब से भारत सरकार ने भारत की छवि को एक पर्यटन गंतव्य के रूप में पेश करने के लिए अतिरिक्त पहल की हैं, तभी से इस क्षेत्र में निरंतर बेहतरी देखी जा रही है।
संस्कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सक्रिय सहयोग से पर्यटन मंत्रालय ने ‘एक धरोहर को अपनाना’ पहल के तहत विभिन्न धरोहर स्थलों, स्मारकों और देश भर में फैले अन्य पर्यटन स्थलों पर विश्व स्तरीय पर्यटन सुविधाएं प्रदान करने की परिकल्पना की है।
यह परियोजना एएसआई के टिकटयुक्त स्मारकों से शुरू होगी। इसे आगे चलकर पूरे भारत के अन्य सांस्कृतिक स्थलों में अमल में लाया जाएगा। इसमें निजी-सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों अथवा व्यक्तियों को धरोहर स्थलों स्मारकों और अन्य पर्यटन स्थलों को सौंपने की परिकल्पना की गई है, ताकि पर्यटक अनुकूल सुविधाओं का ‘स्मारक मित्र’ विकास हो सके। 11वें दिन की खास बात यह रही कि ‘खादी मार्च: बस पांच मीटर’ नामक एक प्रदर्शनी का आयोजन बेंगलुरु में संस्कृति मंत्रालय और एनजीएमए द्वारा किया गया।
‘बीरेश्वर सेन की पेंटिंग्स में मनुष्य और प्रकृति की झलक’ नामक एक प्रदर्शनी आज से दिल्ली में शुरू हो गई है। भारत पर्यटन वाराणसी ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया है, जैसे अस्सी घाट से हरिश्चंद्र घाट तक हेरिटेज वॉक।
आईएचएम और आईआईटीटीएम के साथ मिलकर भारत पर्यटन कार्यालयों ने देश भर में विभिन्न स्थानों पर स्थानीय जनता और हितधारकों के लिए संवेदीकरण कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक, हेरिटेज वॉक, योग सत्र, कार्यशालाएं जैसी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया है।

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