Thursday, 26 October 2017

बिजली भारत में आर्थिक विकास का भविष्य

   नई दिल्ली। विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आर.के. सिंह ने यहां तीसरे ग्लोबल इंवेस्टर्स इंडिया फोरम को संबोधित किया।

   इस समारोह का थीम था विचार, नवाचार, और भारत में लागू और निवेश करना। इसमें विश्व उद्योग जगत की बड़ी हस्तियों ने भाग लिया। समारोह को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि भारत में भविष्य की बढ़ती बिजली खपत को देखते हुए आशा की जाती है कि प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत अंधाधुंध गति से बढ़ेगी और अगले 5 से 7 वर्षों में तिगुनी हो जाएगी।
    विद्युत मंत्री ने उद्योग जगत के सदस्यों को आश्वासन दिया कि सरकार बिजली क्षेत्र में निवेश करने में सभी संभव सहायता देगी और सभी बाधाओं को दूर करेगी। उन्होंने कहा कि बिजली भारत में आर्थिक विकास का भविष्य है और यह विकास उद्योग जगत की भागीदारी के बिना नहीं हो सकता। 
   सिंह ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने का आमंत्रण दिया। भारत में बिजली क्षेत्र को नया स्वरूप दिए जाने के बारे में आर.के. सिंह ने कहा उनका मंत्रालय राज्य सरकार/बिजली खरीद समझौता (पीपीए) का सम्मान करने वाली बिजली वितरण कंपनियों तथा दोष के लिए दंड सहित अनेक विषयों पर कानूनों को संहिताबद्ध करने के अंतिम चरण में है। 
  लाइसेंस नवीकरण के पहले व्यस्त लोड सहित 100 प्रतिशत बिजली आवश्यकता कवर करने के लिए बिजली वितरण कंपनियों को पीपीए से जोड़ना होगा। नवीकरणीय खरीद दायित्वों को वैधानिक बनाया जाएगा, स्मार्ट मीटर अनिवार्य किए जाएंगे और बिजली बिल भुगतान नहीं करने के लिए दंड लगाया जाएगा। 
   सिंह ने बताया कि निकट भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से होने वाले परिवर्तनों के साथ चलने के लिए उद्योग को हरित ऊर्जा गलियारा, बैट्री भंडारण प्रौद्योगिकी, ग्रिड सुधार व इलेक्ट्रिक वाहन कार्यक्रम में निवेश करने के लिए सरकार के साथ साझेदारी करने की आवश्यकता है। 
    उन्होंने उपरोक्त लक्ष्य को हासिल करने के लिए भविष्य की रणनीति सरकार के साथ मिलकर तय करने के लिए उद्योग जगत को आमंत्रित किया। सिंह ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा में दुनिया का नेतृत्व करने का हमारा समय आ गया है और इस कोशिश में उद्योग जगत को पीछे नहीं रहना चाहिए। 
   समारोह का आयोजन एसौचेम द्वारा किया गया जिसमें विश्व उद्योग जगत के दिग्गज उपस्थित थे, जिन्होंने विद्युत मंत्री तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से विचार-विमर्श किया।

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