डॉ. अम्बेडकर विदेश में डॉक्टरेट डिग्री प्राप्त करने वाले पहले भारतीय
डॉ. भीम राव अम्बेडकर भारत की पहली पीढ़ी के पेशेवर रूप में प्रशिक्षित अर्थशास्त्रियों में से एक थे। वे अर्थशास्त्र में औपचारिक रूप से प्रशिक्षित पहले भारतीय राजनीतिक नेता थे। उनके शोध पत्र शिक्षा जगत की प्रमुख पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए।
डॉ. अम्बेडकर 1916 में अमेरीका से लौटे और मुम्बई के एक कॉलेज में तीन वर्षों तक अर्थशास्त्र का अध्यापन किया। इसके बाद में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में डॉक्टरेट करने चले गए। उन्हें लंदन डॉक्टरेट 1923 में प्रदान किया गया और कोलंबिया वन उपाधि 1927 में दी गई। अपने लंदन प्रवास के दौरान उन्होंने वकालत भी की। डॉ. अम्बेडकर विदेश में डॉक्टरेट डिग्री प्राप्त करने वाले पहले भारतीय थे। डॉ. अम्बेडकर वह व्यक्ति थे जिन्होंने काम के घंटे 14 से घटाकर 8 घंटे करने पर बल दिया। उन्होंने भारत में नेशनल इंप्लायमेंट एजेंसी स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत के जलसंसाधन के क्षेत्र में डॉ. अम्बेडकर का बहुत बड़ा योगदान है।
वायसराय की एक्सक्युटिव काउंसिल (1942-1946) के सदस्य रहते हुए डॉ. अम्बेडकर ने देश में जलसंसाधन विकास के लिए निश्चित अखिल भारतीय नीति बनाने का अभियान चलाया। अपने कार्य को पूरा करने के लिए उन्होंने केंद्रीय जल मार्ग, सिंचाई तथा नौवहन आयोग की आधारशिला रखी। यह आयोग वर्तमान समय के केंद्रीय जल आयोग का रूप था। उन्होंने एकीकृत रूप से नदियों के विकास के लिए नदी घाटी प्राधिकरण या निगम बनाने की वकालत की और देश में नदी बेसिन के बहु-उद्देशीय विकास का विचार प्रस्तुत किया। 65 वर्ष बाद आज भी देश के जल क्षेत्र के बारे में उनके विचार प्रासांगिक हैं।
डॉ. अम्बेडकर चिकित्सा सहायता योजना : डीएएफ द्वारा यह योजना अपने कोष से लागू की जाती है। योजना के अतंर्गत अनुसूचित जाति और जनजाति के वैसे व्यक्तियों को जिनके परिवार की आय 2,50,000 सालाना है उन्हें किडनी, सर्जरी, ह्रदय, लीवर, कैंसर और मस्तिष्क की गंभीर बीमारियों से पीड़ित रोगों और अंग प्रत्यारोपण तथा स्पाइनल सर्जरी सहित खतरनाक बीमारियों में चिकित्सा सहायता दी जाती है। पिछले तीन वर्षो के दौरान कार्यक्रम के अतंर्गत 168 रोगियों को सहायता दी गई है। अंतरजातीय विवाह के माध्यम से सामाजिक एकीकरण के लिए डॉ. अम्बेडकर योजना : इस योजना का उद्देश्य सामाजिक रूप से उठाए जाने वाले बड़े कदम यानी अंतरजातीय विवाह की सराहना करना और अंतरजातीय रूप से विवाहित जोड़ों को वैवाहिक जीवन के प्रारंभिक चरण में परिवार बसाने में सहायता प्रदान करना है। दो किस्तों में प्रत्येक जोड़े को 5 लाख रूपये जारी किए जाते हैं। पिछले तीन वर्षों में इस कार्यक्रम के अंतर्गत 121 विवाहित जोड़ों को सहायता प्रदान की गई है।
15 जनपथ नई दिल्ली में डॉ. अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र : प्रधानमंत्री ने इस केंद्र की आधारशिला 20 अप्रैल, 2015 को रखी। यह अंतर्राष्ट्रीय केंद्र 197.00 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किया जा रहा है। केंद्र अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों के आयोजन में सहायता देगा तथा डॉ. अम्बेडकर से संबंधित और अन्य संबद्ध विषयों पर शोध के लिए मंच प्रदान करेगा। दिसंबर, 2017 तक इसके तैयार हो जाने की आशा है। विश्वविद्यालयों में डॉ. अम्बेडकर पीठ : अम्बेडकर फाउंडेशन ने देश के 21 केंद्रीय/ राज्य विश्व विद्यालयों/ संस्थानों में अम्बेडकर पीठ की स्थापना की है ताकि पीठ शिक्षा और शोध केंद्रों के रूप में काम करे। प्रत्येक पीठ को संविधान, राजनीति, अर्थशास्त्र और कला जैसे विषयों पर डॉ. अम्बेडकर के विचारों के प्रसार के लिए प्रति वर्ष 35 लाख रूपये दिए जाते हैं। इन पीठों ने सामाजिक आर्थिक विषयों तथा समाज के कमजोर वर्गों के सांस्कृतिक पहलुओं पर अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के पेपर प्रकाशित किए हैं।
भारत इंटरफेस फॉर मनी (भीम) : प्रधानमंत्री ने 30 दिसंबर, 2016 को डिजिधन मेले में डॉ. बी आर अम्बेडकर को समर्पित आधार आधारित एप्लिकेशन की घोषणा की। भीम भारत सरकार की पहल है और इसका उद्देश्य मोबाइल फोन के माध्यम से तेजी से सुरक्षित, विश्वसनीय, नकद रहित भुगतान में सहायता देना है। भीम अन्य एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) एप्लिकेशनों और बैंक खातों के साथ अंतर संचालन करता है। उद्यमिता : अनुसूचित जाति उप योजना के तहत पिछले तीन वर्षों में आर्थिक गतिविधियों हेतु लिये गये ऋण पर दी गई सब्सिडी से 17 लाख से भी ज्यादा लोग लाभान्वित हुए हैं।
पिछले तीन वर्षों के दौरान उद्यमिता के लिए निगमों द्वारा 12 लाख से भी ज्यादा लाभार्थियों को ऋण दिये गये हैं। अनुसूचित जातियों का शैक्षणिक सशक्तिकरण छात्रवृत्तियों, विद्यार्थियों के लिए छात्रावास, कोचिंग सुविधाओं और परिसरों, संस्थानों के सृजन/उन्नयन के लिए पूंजी इत्यादि के जरिए किया जाता है। भारत सरकार का मानना है कि सभी के लिए शिक्षा सशक्तिकरण की कुंजी है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता से जुड़े बजट का लगभग 54 प्रतिशत हिस्सा अनुसूचित जातियों से जुड़ी छात्रवृत्तियों पर खर्च किया जाता है।
गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे अनुसूचित जातियों के लोगों के उत्थान के लिए राज्यों को 100 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। इस सहायता का उपयोग आर्थिक गतिविधियों हेतु लिये गये ऋण पर प्रति व्यक्ति अधिकतम 10,000 रुपये की सब्सिडी प्रदान करने में किया जाता है। पिछले तीन वर्षों से भी अधिक अवधि के दौरान इस सब्सिडी से लगभग 17 लाख लोग लाभान्वित हुए हैं। 50 प्रतिशत अथवा उससे ज्यादा की अनुसूचित जाति आबादी वाले गांवों में बुनियादी ढांचागत सुविधाएं (सोलर लाइट, पेयजल, सड़कें इत्यादि)।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम : यह विभिन्न निगमों को इक्विटी पूंजी मुहैया कराता है और फिर ये निगम आय सृजन से जुड़ी गतिविधियों के लिए लक्षित समूह को रियायती वित्त उपलब्ध कराते हैं। ये निगम लक्षित समूह के कौशल विकास का कार्य भी पूरा करते हैं। निगम को मुहैया करायी जाने वाली इक्विटी बाद में अनुसूचित जातियों के लाभार्थियों को ऋण के रूप में वितरित की जाती है।
अनुसूचित जातियों के लाभार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी गतिविधियों में जीवन कौशल विकास संबंधी प्रशिक्षण भी दिया जाता है, जिनमें परिधान सिलाई, मोबाइल की मरम्मत, हस्तशिल्प, बिजली मिस्त्री, नलसाजी (पलम्बिंग), मोटर ड्राइविंग, सौंदर्य और सेहत, सुरक्षा गार्ड, स्वास्थ्य सेवा इत्यादि शामिल हैं। लघु स्तर के विभिन्न व्यवसायों की स्थापना के लिए ऋण दिये गये हैं जिनमें किराने की दुकानें, हार्डवेयर की दुकानें, जूते बनाने वाली दुकानें, दर्जी की दुकानें, फर्नीचर बनाने एवं मरम्मत की दुकानें, फोटोग्राफी, दवा की दुकानें, कृषि में पॉली-हाउस, वाणिज्यिक वाहनों की खरीद, कंप्यूटर मरम्मत की दुकानें, ई-रिक्शा, सुअर पालन फार्म, सिले-सिलाये परिधान, स्वच्छता वाहन, इत्यादि शामिल हैं।
इसके लिए 50000 रुपये से लेकर 30 लाख रुपये तक के ऋण दिये गये हैं, जिनका पुनर्भुगतान 3 से 10 वर्षों में किया जाना है। इन पर 3.5 प्रतिशत से लेकर 10 प्रतिशत तक ब्याज देय हैं। इसके अलावा, कौशल विकास सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2017-18 में चार क्षेत्र विशेष कौशल परिषदों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये हैं। इनमें सौंदर्य एवं सेहत क्षेत्र कौशल परिषद, परिधान मेड-अप्स एवं गृह सज्जा क्षेत्र कौशल परिषद, हस्तशिल्प एवं कालीन क्षेत्र कौशल परिषद और सुरक्षा क्षेत्र कौशल विकास परिषद शामिल हैं।
आदर्श ग्राम योजना : केन्द्र प्रायोजित प्रायोगिक योजना प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (पीएमएजीवाई) का कार्यान्वयन 2500 अनुसूचित जाति बहुल गावों के समेकित विकास के लिए किया जा रहा है जहां अनुसूचित जाति आबादी 50 प्रतिशत से अधिक है। 5 राज्यों में 372 गावों को आदर्श ग्राम के रुप में घोषित किया गया है। इसका लक्ष्य अवसंरचना संबंधित परियोजनाओं के लिए वित्त पोषण में अंतरों को पाटना है। अनुसूचित जाति कल्याण कार्यक्रम भारत सरकार के 26 विभागों/मंत्रालयों में 2017-18 में अनुसूचित जाति कल्याण के लिए 233 योजनाओं हेतु 52393.55 करोड़ रुपये की एक राशि आवंटित की गयी है। यह 2016-17 की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है। इन योजनाओं के तहत यह राशि इन योजनाओं के लिए आवंटित कुल बजट के लगभग 20.20 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करती है।
पीने का पानी एवं स्वच्छता विभाग : सार्वभौमिक स्वच्छता कवरेज अर्जित करने तथा स्वच्छता पर ध्यान केंद्रित करने के प्रयासों में तेजी लाने के लिए भारत के प्रधानमंत्री ने 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन की शुरूआत की। इस मिशन का लक्ष्य 2019 तक स्वच्छ भारत अर्जित करना है जोकि महात्मा गांधी की 150वीं जन्म शताब्दी पर उन्हें एक उपयुक्त श्रद्धांजलि होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता मिशन का अर्थ होगा, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के स्तरों में बेहतरी लाना। इस कार्यक्रम का संचालन पीने का पानी एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है। इस योजना के तहत पिछले तीन वर्षों के दौरान अनुसूचित जाति के परिवारों के लिए बनाये गये शौचालयों की कुल संख्या 76.8 लाख की रही है।
राष्ट्रीय ग्रामीण पीने का पानी कार्यक्रम : देश में पीने के पानी की सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। भारत सरकार केन्द्र सरकार द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय ग्रामीण पीने का पानी मिशन के तहत वित्तीय सहायता उपलबध कराने के द्वारा राज्य सरकारों के प्रयासों का संपूरण करती है। इस कार्यक्रम के तहत अनुसूचित जाति बहुल निवास स्थानों को राज्य / केन्द्र शासित प्रदेशों में कवर किया गया है तथा पीने के पानी की सुविधाएं उपलब्ध करायी गयी हैं। पिछले तीन वर्षों के दौरान कुल 30414 अनुसूचित जाति के निवास स्थानों को कवर किया गया है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति हब का उद्देश्य राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति उद्यमियों की मदद के लिए एक सहायतापूर्ण परितंत्र का विकास करना है। यह अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति के उपक्रमों को व्यावसायिक सहायता उपलब्ध कराता है जिससे कि उन्हें सार्वजनिक खरीद प्रकिया में कारगर ढंग से भाग लेने में सक्षम बनाया जा सके। चुने हुए उद्यमियों को उद्योग के विशेषज्ञों, सीपीएसई एवं इनक्युबेटर्स द्वारा सहायता एवं संरक्षण प्रदान किया जाता है। यह हब सूक्ष्म, लघु एवं मझौले उपक्रम मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (एनएसआईसी) द्वारा संचालित किया जाएगा। सूक्ष्म, लघु एवं मझौले उपक्रम मंत्रालय ने 2016-2020 की अवधि के लिए 490 करोड़ रुपये का एक प्रारंभिक आवंटन किया है।

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