Tuesday, 7 March 2017

भूजल में आर्सेनिक एवं प्रदूषण से निपटने के लिए जनआंदोलन

             केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने कहा है कि गंगा बेसिन में आर्सेनिक की समस्‍या से करोडों लोग प्रभावित हो रहे हैं। 

           इस समस्‍या के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए एकसमग्र आंदोलन चलाए जाने की जरूरत है। नई दिल्‍ली में केंद्रीय भूमि जल बोर्ड की ओर से ‘गंगा बेसिन के भूजल में आर्सेनिक की समस्या एवं निराकरण’ विषय पर आयोजित कार्याशाला का उदघाटन करते हुए उन्‍होंने कहा कि भूजल में आर्सेनिक की समस्‍या सेनिपटने के लिए इस कार्यशाला की रिपोर्ट आने के बाद मंत्रालय एक व्‍यापक कार्ययोजना तैयार करेगा। जिसमें राज्‍य सरकारों एवं गैर सरकारी संगठनों का भी सहयोग लिया जायेगा। 

               विकास में जनभागिदारी के महत्‍व पर जोर डालते हुए उन्‍होंने कहा कि भूजल में आर्सेनिक एवं अन्‍य प्रदूषण से निपटने के लिए भी जनआंदोलन खडा करना पडेगा। इसी प्रकार जल के सदुपयोग को भी जन आंदोलन बनाये जाने की जरूरत है। सुश्री भारती ने कहा कि उन्‍होंने भी ऐसे कई गांव देखे हैं जहां जल संरक्षण के क्षेत्र में महत्‍वपूर्ण कार्य हुआ है। सुश्री भारती ने कहा कि ग्रामीण भारत को पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करने में 85ऽ के आसपास योगदान भूजल का है। भारत सरकार की योजनाओं में भूजल संसाधनों की स्थिरता एक बडा एजेंडा है। क्योंकि बदलती जीवन शैली और बढ़ती जनसंख्या के साथ पानी की मांग भी बढ़ रही है। भूजल संसाधनों का संरक्षण करने और उन्हें बचाने की अत्यन्त जरूरत है। 

             सुश्री भारती ने कहा कि भूजल संसाधनों से संबंधित समस्याओं में से एक प्रमुख समस्या पानी की गुणवत्ता की है। भूजल में आर्सेनिक की मौजूदगी जहर के समान है। यह मानव स्वास्थ्य के‍ लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। उन्‍होंने कहा कि केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड और जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय द्वारा गंगा बेसिन में कृत्रिम पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे भूजल की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलेगी। केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री ने विश्वविद्यालयों, आईआईटी और अनुसंधान संस्थानों में काम कर रहे भूजल विशेषज्ञों से आह़वान किया कि वे भी अपने महत्‍वपूर्ण सुझाव दें, ताकि मंत्रालय को इससमस्‍या के समाधान के लिए भविष्य की रणनीति बनाने में सहायता मिल सके। 

                  कार्यशाला के उदघाटन सत्र में केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण राज्‍य मंत्री संजीव बालियान ने कहा कि भूजल में आर्सेनिक की समस्‍या से देश की 50 फीसदी जनता जूझ रही है। उन्‍होंने कहा कि इससमस्‍या से निपटने के लिए सभी विभागों को एक सामूहिक सोच बनानी पडेगी। मिलकर कार्य करना होगा। मंत्रालय के सचिव डॉ अमरजीत सिंह ने इस अवसर पर कहा कि गंगा नदी से ही सर्वोधिक जल मिल रहा है। यही नदी आर्सेनिक से ज्‍यादा प्रदूषित है। 

            इस समस्‍या के निजात पाने के लिए राज्‍यों में टास्‍क फोर्स बनाकर कार्य किया जायेगा। उल्‍लेखनीय है कि इस एक दिवसीय इस कार्यशाला में देशभर के विभिन्‍न राज्‍यों एवं संस्‍थानों से  आए 300 से ज्‍यादा प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला के लिए 23 प्रपत्र चुने गए जिसमें से सात प्रपत्रों पर विशेषज्ञों एवंभूजल वैज्ञानिकों के बीच विस्‍त़त चर्चा हुई।

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