बंदरगाह आधुनिकीकरण की 400 परियोजनाओं पर खर्च होंगे 7 लाख करोड़
सागरमाला में 7 लाख करोड़ रूपये से ज्यादा के अनुमानित बुनियादी निवेश की 400 से अधिक की परियोजनाओं को बंदरगाह आधुनिकीकरण, नये बंदरगाह का विकास, बंदरगाह सम्पर्क में वृद्धि, बंदरगाह से जुड़े उद्योग और तटीय समुदाय विकास जैसे सम्पूर्ण क्षेत्रों की पहचान की जा चुकी है। इन परियोजनाओं को संबंधित केन्द्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, बंदरगाहों और अन्य एजेंसियों के माध्यम से सार्वजनिक-निजी साझेदारी आधार पर कार्यान्वित किया जाएगा।
सागरमाला के अंतर्गत 14 परियोजनाओं के लिए 242.92 करोड़ रूपये जारी किये जा चुके है। इसके अलावा, मंत्रालय सागरमाला के अंतर्गत विशेष परियोजनाओं के लिए भी वित्त पोषण कर रहा है। गोघा-दाहेज आरओ-पैक्स नौका सेवा परियोजना के लिए 58.5 करोड़ रूपये जारी किये जा चुके है। मंदवा पर आरओ-आरओ सेवा परियोजना के लिए 43.46 करोड़ रूपये जारी किये जा चुके है। बंदरगाह आधुनिकीकरण और नवीन बंदरगाह विकास के आधार पर अगले 20 वर्षों के लिए 142 बंदरगाह क्षमता विस्तार परियोजनाओं लागत 91,434 करोड़ रूपये खर्च होंगे।
इसके अलावा टीईएफआर ने वधवम, इनायम, सागर द्वीप, पाराद्वीप, बाहरी हार्बर, सिरकाजी, बेलेकैरी नामक छह नये बंदरगाह स्थलों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। भारतीय पोर्ट रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 9 प्रमुख बंदरगाहों पर 25 कार्यो का दायित्व सँभाला है। सागरमाला के अंतर्गत चिन्ह्ति 27 रेल सम्पर्क परियोजनाओं से भारतमाला योजना के अंतर्गत 18 परियोजनाओं सहित 45 परियोजनाओं को एमओआरटीएच और एनएचएआई के द्वारा पूरा किया जाएगा। शेष 34 परियोजनाओं को राज्य पीडब्ल्यूडी बंदरगाह प्राधिकरणों और सागरमाला विकास कंपनी के द्वारा एमओआरटीएच और एनएचएआई के सहयोग से पूरा किया जाएगा। बंदरगाह के अंतर्गत औद्योगिकीकरण के नेतृत्व में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए सभी समुद्री राज्यों और संघ शासित प्रदेशों को शामिल करते हुए 14 तटीय आर्थिक क्षेत्र का प्रस्ताव दिया गया है।
एक स्थानिक-आर्थिक क्षेत्र की अवधारणा के रूप में सेज को समुद्र तट से 300 से 500 किलोमीटर तक और समुद्र तट के अंदरूनी क्षेत्र को 200 से 300 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है। सागरमाला परियोजना की अभिकल्पना एक्जिम की आवाजाही के लिए लागत और समय में कमी, घरेलू कार्गो और भविष्य में बंदरगाह से सटे औद्योगिक विकास की क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ऊर्जा, सामग्री और असतत विनिर्माण से जुड़े तीन क्षेत्रों में 29 महत्वपूर्ण बंदरगाह संबद्ध औद्योगिक समूहों की सागरमाला के अंतर्गत पहचान की जा चुकी है। गुजरात और तमिलनाडु में प्रस्तावित समुद्री समूहों के मास्टर प्लान तैयार कर लिए गए है। प्रमुख बंदरगाहों पर भूमि की उपलब्धता के आधार पर, जहाजरानी मंत्रालय जेएनपीटी पर सेज और एन्नौर में मुक्त व्यापार वेयरहाऊसिंग जोन का विकास कर रहा है।
मछुआरे समुदाय के विकास में सहायता के लिए मंत्रालय पशुपालन डेयरी और मत्स्य पालन विकास के साथ सागरमाला के अंतर्गत चुनिंदा मत्स्य हार्बर परियोजनाओं को आंशिक वित्त पोषण कर रहा है। इस संबंध में ससून गोदी के आधुनिकीकरण और उन्नयन की परियोजना को 52.17 करोड़ रूपये की लागत से पहले ही अनुमोदित किया जा चुका है। जहाजरानी मंत्रालय तटीय समुदायों के लिए आजीविका/रोजगार अवसरों को बढ़ाने से जुड़ी कई परियोजनाओं पर भी कार्य कर रहा है और इसके लिए सागरमाला के अंतर्गत 16.9 करोड़ रूपये पहले ही जारी किये जा चुके है एवं 20 तटीय जिलों में 20 हजार से ज्यादा लोगों को कौशल परियोजनाओं में शामिल किया गया है। इसमें गुजरात के भावनगर जिले में अलंग-सोसिया शिपयार्ड में श्रमिकों के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण शामिल है। सागरमाला कार्यकम के अंतर्गत चिन्ह्ति परियोजनाओं में बुनियादी निवेश 7 लाख करोड़ रूपये से ज्यादा होने की संभावना है। इससे अगले 10 वर्षों में 40 लाख सीधे रोजगारों सहित एक करोड़ नये रोजगारों के सृजन की क्षमता और 110 बिलियन अमरीकी डॉलर के द्वारा निर्यातों में संवर्द्धन, 35 हजार से 40 हजार करोड़ प्रतिवर्ष की रसद लागत में बचत के साथ-साथ घरेलू जलमार्गों (अंतर्देशीय और तटीय) के अंश को दोगुना किया जाएगा।
मछुआरे समुदाय के विकास में सहायता के लिए मंत्रालय पशुपालन डेयरी और मत्स्य पालन विकास के साथ सागरमाला के अंतर्गत चुनिंदा मत्स्य हार्बर परियोजनाओं को आंशिक वित्त पोषण कर रहा है। इस संबंध में ससून गोदी के आधुनिकीकरण और उन्नयन की परियोजना को 52.17 करोड़ रूपये की लागत से पहले ही अनुमोदित किया जा चुका है। जहाजरानी मंत्रालय तटीय समुदायों के लिए आजीविका/रोजगार अवसरों को बढ़ाने से जुड़ी कई परियोजनाओं पर भी कार्य कर रहा है और इसके लिए सागरमाला के अंतर्गत 16.9 करोड़ रूपये पहले ही जारी किये जा चुके है एवं 20 तटीय जिलों में 20 हजार से ज्यादा लोगों को कौशल परियोजनाओं में शामिल किया गया है। इसमें गुजरात के भावनगर जिले में अलंग-सोसिया शिपयार्ड में श्रमिकों के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण शामिल है। सागरमाला कार्यकम के अंतर्गत चिन्ह्ति परियोजनाओं में बुनियादी निवेश 7 लाख करोड़ रूपये से ज्यादा होने की संभावना है। इससे अगले 10 वर्षों में 40 लाख सीधे रोजगारों सहित एक करोड़ नये रोजगारों के सृजन की क्षमता और 110 बिलियन अमरीकी डॉलर के द्वारा निर्यातों में संवर्द्धन, 35 हजार से 40 हजार करोड़ प्रतिवर्ष की रसद लागत में बचत के साथ-साथ घरेलू जलमार्गों (अंतर्देशीय और तटीय) के अंश को दोगुना किया जाएगा।
जहाजरानी मंत्रालय ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए देश भर के सभी प्रमुख बंदरगाहों में सौर और पवन ऊर्जा पर आधारित विद्युत प्रणाली स्थापित करने की प्रक्रिया में है। मंत्रालय ने 2017 तक देश भर के 12 प्रमुख बंदरगाहों पर 90.64 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता और 4 प्रमुख बंदरगाहों पर 70 मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इन सौर परियोजनाओं पर कुल व्यय करीब 407.7 करोड़ होने का अनुमान है।

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