Wednesday, 17 January 2018

उपराष्ट्रपति की नसीहत, अंग दान एक राष्ट्रीय आंदोलन होना चाहिए

     चेन्नई। भारत के उपराष्ट्रपति एम. वेंकैय्या नायडू ने देश के लोगों से अंग दान को राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन बनाने का आग्रह किया। अच्छे अवसरों की तलाश में देश छोड़कर जाने वाले लोगों से उन्होंने मातृभूमि की सेवा करने का अनुरोध किया। 

  इस संदर्भ में तमिलनाडु में 1,000 सफल लीवर प्रत्यारोपण समारोह को चेन्नई में आयोजित किया गया, जिसमें इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सी. विजय भास्कर और स्वास्थ्य सचिव डॉ. जे. राधाकृष्णन भी उपस्थित थे।
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि अंग दान मृत्यु के बाद भी जीवित रहने का एक अच्छा तरीका है। हमें अंग दान के महत्व और ऐसे कल्याणकारी कार्य के लिए भागीदारी करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद जीवित रहने का यह सर्वोत्तम तरीका है। गैर-अल्कोलिक फैटी लीवर रोग (एनएएफएलडी) विशेषतर युवाओं में यह रोग बढ़ने पर उन्होंने चिंता व्यक्त की।
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक जीवन शैली इस रोग को और अधिक बढ़ावा दे रही है। जंक फूड और मद्यपान से बचना, संतुलित आहार लेना, निष्क्रिय जीवन शैली छोड़ना और नियमित व्यायाम या योग-आसन करना लोगों के लिए विशेषतः युवाओं के लिए बहुत जरूरी है ताकि वे स्वस्थ रहें और विभिन्न बीमारियों से बचे रहें।
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि लीवर प्रत्यारोपण जैसी जटिल प्रक्रियाएं आम आदमी की पहुंच में होनी चाहिए। इसे और अधिक किफायती बनाने के लिए तमिलनाडु की तरह सरकारी चिकित्सालयों में आवश्यक विशेषज्ञता और सुविधाएं जुटाना इसका एक तरीका है। 
     उन्होंने आगे कहा कि स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में अधिकतम जनसंख्या को शामिल करना चाहिए और इनमें लीवर तथा हृदय प्रत्यारोपण जैसी प्रक्रियाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए ताकि अधिक खर्चीला होने के कारण अपेक्षित उपचार के लिए किसी भी व्यक्ति को मना न किया जा सके। आम आदमी को श्रेष्ठ और किफायती उपचार सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य संस्थाओं के बीच भागीदारी किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता होने पर सरकार द्वारा सब्सिडी भी दी जानी चाहिए।

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