Friday, 1 December 2017

नमामि गंगे के लिए 5 बिलियन डॉलर से भी अधिक निवेश

     नई दिल्‍ली। संयुक्त गणराज्य में भारतीय कंपनियों, अप्रवासी भारतीयों (एनआरआई) और भारतीय मूल के व्यक्तियों (पीआईओज्) ने नमामि गंगे अभियान के तहत ही घाटों, नदियों के अहातों, श्मशान घाटों और पार्कों जैसी सुविधाएं जुटाने के लिए 5 बिलियन डॉलर से भी अधिक निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है।

    लंदन में 29 नवम्‍बर 2017 को आयोजित एक रोड शो में केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा संरक्षण, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा नौवहन मंत्री नितिन गडकरी देश के प्रमुख उद्योगपतियों से गंगा सफाई अभियान में भाग लेने की अपील की। 
   रोड शो का आयोजन गंगा सफाई राष्ट्रीय अभियान तथा संयुक्त गणराज्य में भारतीय उच्च आयोग द्वारा किया गया। 
   जिन महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये गए, उनमें पटना में गंगा नदी पर घाटों और सुविधाओँ हेतु वेदांता समूह के अनिल अग्रवाल, कानपुर के लिए फोरसाइट समूह के रवि मल्होत्रा, हरिद्वार के लिए हिंदुजा समूह, कोलकाता के लिए इंडो रामा समूह के प्रकाश लोहिया शामिल हैं।
    परियोजनाओं का विकास, निर्माण तथा परिचालन इन कंपनियों द्वारा अपने कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरादायित्व (सीएसआर) संबंधी कार्यकलापों के अंतर्गत किया जाएगा। लंदन वाटर केल्टिक रेनुएबल्स, मेडिफार्म, एनएचवी प्रौद्योगिकियां और अरकाताप सहित कई कंपनियों के साथ नदी सफाई हेतु नवीन प्रौद्योगिकियों के लिए समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किये गए।
    इनके अलावा, बहुत सी कंपनियों और व्यक्तियों ने 200 से अधिक परियोजनाओं की सूची में से, जिनके लिए निजी धन जुटाने की मांग की गई थी, कुछ परियोजनाएं अपने हाथ में लेने की सहमति जताई। घाटों, श्मशान घाटों, जलाशयों, पार्कों, स्वच्छता सुविधाओं, जन सुविधाओं और नदी अहातों के विकास की, जिनके लिए अधिक धन राशि की आवश्यकता है, 10 हजार करोड़ रूपये से भी अधिक की परियोजनाएं बनाई गई हैं।
     2500 करोड रूपये से भी अधिक की परियोजनाएं जिनके लिए निजी स्रोतों से धन जुटाने की आवश्यकता है, एक पुस्तिका के रूप में भी प्रकाशित की गई हैं और स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय अभियान (एनएमसीजी) की वेबसाइट पर ई-बुकलेट के रूप में भी उपलब्ध हैं।
     सरकार व्यापारिक समुदाय से निवेदन कर रही है कि वे अपनी पसंद की परियोजनाओं में धन लगाकर नदी सफाई से जुड़े नामामि गंगे अभियान में योगदान दें।

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