Wednesday, 11 October 2017

महिलाओं के पुनर्वास में एनजीओ की महत्वपूर्ण भूमिका

   नई दिल्ली। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के भागीदार गैर-सरकारी संगठनों के पहले सम्मेलन का नई दिल्ली में आयोजन किया गया।

   महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी ने महिलाओं और बच्चों के लिए नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों का कार्यान्वयन : चुनौतियां और आगे की राह नामक सम्मेलन का उद्घाटन किया। पूरे देश के विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के 130 से अधिक प्रतिभागियों ने इस सम्मेलन में भाग लिया। जिसका उद्देश्य महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के बारे में संवेदनशील बनाना और अपने अनुभवों तथा विचारों को साझा करने का अवसर प्रदान करना था।
     श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा कि एनजीओ बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं क्योंकि सरकार की अनेक योजनाएं, कार्यक्रम और नीतियां जमीनी स्तर पर एनजीओ की सहायता से लागू की जा रही हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने वन स्टॉप सेंटर, बेटी बचाओ, बेटी पढाओ, महिला हेल्पलाइन, महिलाओं के लिए राष्ट्रीय नीति, तस्करी के खिलाफ विधेयक, बाल दुर्व्यवहार के खिलाफ राष्ट्रीय गठबंधन और ऐसी अन्य अनेक पहलें शुरू की हैं। 
    उन्होंने एनजीओ से इन पहलों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ बेहतर आपूर्ति के लिए अपने सुझाव देने का अनुरोध किया। श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई महत्वपूर्ण योजना बेटी बचाओ, बेटी पढाओ ने एक शानदार सफलता दर्शायी है क्योंकि 161 बीबीबीपी जिलों में से 104 में जन्म के समय लिंग अनुपात में बढ़ती प्रवृत्ति को देखी गई है। यह लोगों के रूख में स्पष्ट परिवर्तन को दर्शाता है। 
     उन्होंने एनजीओ से योजना की आगे सफलता को सुनिश्चित करने के लिए आगे आने को कहा। श्रीमती मेनका संजय गांधी ने प्रतिभागियों के साथ आधे घंटे तक बातचीत की जिसमें उन्होंने जमीनी स्तर विभिन्न मुद्दों और समस्याएं के बारे में प्रकाश डाला। श्रीमती मेनका गांधी ने कहा कि मंत्रालय प्रतिभागियों द्वारा दिए गए सुझावों के अनुसार सरपंच और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पहले से ही प्रशिक्षण दे रहा है।
   उन्होंने यह आश्वासन दिया कि महिलाओं और बाल विकास के क्षेत्र में एनजीओ के लिए जल्द ही ऑनलाइन सुविधा जुटाई जाएगी ताकि वे अपनी शिकायतें और मुद्दों को उठाने में समर्थ हो सकें। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने विभिन्न क्षेत्रों में एनजीओ द्वारा निभायी गई भूमिका की सराहना की। 
   उन्होंने कहा कि एनजीओ तस्करी की गई महिलाओं के पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से संबंधित मुद्दें चिंता का विषय बन गए हैं। गैर-सरकारी संगठनों को इस क्षेत्र में सरकार के साथ काम करने के लिए आगे आना चाहिए।
    महिला एवं बाल विकास सचिव राकेश श्रीवास्तव ने एनजीओ की महत्वपूर्ण भूमिका की प्रशंसा करते हुए आशा व्यक्त की कि सरकार और एनजीओ के बीच साझेदारी बढ़ेगी और इससे योजनाओं और कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक लागू करने में मदद करेगी।
   सम्मेलन व्यापक विषयों पर आधारित था। महिलाओं के खिलाफ हिंसा:रोकथाम और न्याय तक पहुंच में सहायता प्रदान करना, महिलाओं के लिए राष्ट्रीय नीति:लिंग समानता के लिए नीतिगत हस्तक्षेप, महिलाओं और बच्चों के तस्करी:राज्य संस्थानों की भूमिका, साइबर अपराध और बच्चे:रोकथाम और हानि कमी करना, किशोर न्याय अधिनियम का कार्यान्वयन: संरचनात्मक चुनौतियां और बच्चों को मुख्य धारा में लाना, जमीनी स्तर पर मौजूदा आपूर्ति प्रणाली की वर्तमान स्थिति में विद्यमान समस्याओं और खामियों का पता लगाना, रचनात्मक नीति निर्माण और कार्यक्रम कार्यान्वयन के लिए सम्मेलन के दौरान चर्चा किए गए विषयों का मूल्यांकन करते हुए उपायों को विकसित करना, महिलाओं के सशक्तिकरण और बाल सुरक्षा के लिए इन संगठनों की भागीदारी बढ़ाना।

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