भारत में विश्व जल संसाधन का सिर्फ 4 प्रतिशत हिस्सा
नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नई दिल्ली में भारत जल सप्ताह 2017 का शुभारंभ किया। भारत जल सप्ताह 2017 के उद्घाटन अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि मुझे 5वें भारत जल सप्ताह का उद्घाटन करते हुए प्रसन्नता हो रही है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि मैं विशेषकर यूरोपीय यूनियन के देशों तथा दूसरी जगहों से आए अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत करना चाहू्ंगा। वह इस अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर भारतीय समकक्षों के साथ विचार-विमर्श करने में शामिल हो रहे हैं।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि मानव जीवन के लिए जल आवश्यक है। वास्तव में मानव शरीर का 60 प्रतिशत हिस्सा जल है। यह कहा जा सकता है कि जल स्वयं जीवन है। जल के बिना किसी भी क्षेत्र में मानवीय गतिविधि पूरी नहीं हो सकती।
आज विश्व इस विषय पर चर्चा कर रहा है कि क्या सूचना प्रवाह ऊर्जा प्रवाह से अधिक महत्वपूर्ण है। यह एक अच्छा प्रश्न है। लेकिन जल प्रवाह भी महत्वपूर्ण है। यह अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी और मानव समानता का मूल है। जलवायु परिवर्तन और संबंधित पर्यावरण चिंताओं को देखते हुए जल विषय के रूप में और महत्वपूर्ण हो गया है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि भारत में हमारे कुछ अग्रणी कार्यक्रमों के केंद्र में जल है। मैं यह कहना चाहूंगा कि भारत का आधुनिकीकरण जल प्रबंधन के आधुनिकीकरण पर निर्भर हैं। यह आश्चर्य नहीं है कि विश्व की 17 प्रतिशत आबादी वाले हमारे देश के पास विश्व के जल संसाधन का सिर्फ 4 प्रतिशत हिस्सा है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि भारतीय कृषि और उद्योग के लिए समान रूप से जल का बेहतर और कारगर इस्तेमाल एक चुनौती है। इसके लिए हमें अपने गांव और शहरों में नए मानक स्थापित करने होंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि भारत में 54 प्रतिशत लोग अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं, फिर भी राष्ट्रीय आय में उनका हिस्सा केवल 14 प्रतिशत है।
कृषि को और मूल्य आकर्षक बनाने तथा किसान समुदाय की समृद्धि में सुधार के लिए सरकार ने अनेक नई परियेजनाएं शुरू की है, इन परियोजनाओं में शामिल हैं, हर खेत को पानी – प्रत्येक खेत के लिए पानी: इसके लिए जल की आपूर्ति और उपलब्धता में वृद्धि आवश्यक। ‘प्रति बूंद’, अधिक फसल – इसके लिए उत्पादकता सुधार में टपक सिंचाई और संबंधित तरीकों का उपयोग आवश्यक।
2022 तक कृषि आय दुगुनी करना: इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार सिंचाई क्षेत्र का तेजी से विस्तार कर रही है और 99 लम्बित सिंचाई परियोजनाओं को पूरा कर रही है। ऐसी 60 प्रतिशत परियोजनाएं सूखा प्रभावित क्षेत्रों में है।’
राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि अब मैं भारत की औद्योगिकीकरण और जल की भूमिका पर बात करना चाहूंगा। मेक इन इंडिया मिशन के अंतर्गत भारत जीडीपी में मैन्यूफैक्चरिंग का हिस्सा बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रहा है। हम जीडीपी में वर्तमान 17 प्रतिशत की हिस्सेदारी 2025 तक बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने के लिए संकल्पबद्ध हैं।
उद्योग को बड़े स्तर पर जल की आवश्यकता होती है। इलेक्ट्रोनिक हार्डवेयर, कम्प्यूटर तथा मोबाईल फोन बनाने के मामले में विशेष रूप से। यह सारे क्षेत्र मेक इन इंडिया के फोकस में हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि भारत में अभी 80 प्रतिशत जल का उपयोग कृषि कार्य में किया जाता है और उद्योग में जल का उपयोग केवल 15 प्रतिशत होता है। आने वाले वर्षों में इस अनुपात में बदलाव होगा।
जल की कुल मांग भी बढ़ेगी। इसलिए औद्योगिक परियोजनाओं के ब्लू प्रिंट में सक्षम तरीके से जल के उपयोग और पुन: उपयोग को शामिल किया जाना चाहिए। इस समस्या के समाधान में व्यवसाय और उद्योग को भागीदारी करनी होगी। इसलिए मुझे खुशी है कि इस सम्मेलन में मैन्यूफैक्चरिंग कम्पनियों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित हैं।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि भारत का शहरीकरण पहले की तुलना में बहुत अधिक तेजी से हो रहा है। स्मार्ट सिटी कार्यक्रम के अंतर्गत 100 आधुनिक सिटी बनाने या उन्नत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हम सभी जानते हैं कि स्मार्ट सिटी के मूल्यांकन के लिए जल का पुन: उपयोग, ठोस कचरा प्रबंधन तथा बेहतर स्वच्छता ढांचा और व्यवहार मानक हैं।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि शहरी भारत में प्रतिदिन 40 बिलियन लीटर गंदा जल उत्पन्न होता है। इस जल के विषैले प्रभाव को कम करने और सिंचाई या अन्य कार्यों में इस जल के उपयोग के लिए प्रोद्योगिकी अपनाना महत्वपूर्ण है। यह शहरी नियोजन कार्यक्रम का हिस्सा होना चाहिए।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि मैं जल अनुभव के बारे में भारत में क्षेत्रीय भिन्नता की ओर भी संकेत देना चाहूंगा। एक तरफ भू-जल संसाधनों का अंधाधुन दोहन किया जा रहा है, और हमारे उत्तरी और पश्चिमी राज्य जर्जर हो रहे हैं तो दूसरी और पूर्वी व पूर्वोत्तर राज्यों में नदियों के ऊफान और नियमित बाढ़ की चुनौती बनी हुई है। प्रत्येक वर्ष इससे आबादी को नुकसान होता है और अनगिनत परिवारों में त्रासदी आती है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि ऐसी त्रासदियों से केवल बहुहितधारक और बहुपक्षीय दृष्टिकोण से निपटा जा कसता है। इस कार्य में जहां संभव हो नदियों को आपस में जोड़ने का लक्ष्य शामिल है। नदियों को स्वच्छ रखने के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के उपयोग के उद्देश्य से नदी प्रणाली का प्रबंधन बेसिन व्यापी करना आवश्यक है। नमामि गंगे परियोजना एक अच्छी शुरूआत है।
हमें ऐसी सोच को देश की अन्य नदी प्रणालियों तक और भारतीय उपमहाद्वीप विशेषकर देश की पूर्वी हिस्सों तक ले जाना चाहिए। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि निष्कर्ष के रूप में, मैं आग्रह करूंगा कि जल का प्रबंधन स्थानीय स्तर पर किया जाना चाहिए। इस कार्य में गांव और पड़ोसी समुदाय को शसक्त बनाना चाहिए और उन्हें जल संसाधन प्रबंधन, आवंटन और मूल्य क्षमता के लिए सक्षम बनाया जाना चाहिए।
21वीं शताब्दी की किसी भी जल नीति में जल के मूल्य को शामिल करना होगा। समुदायों सहित सभी हितधारकों की सोच को व्यापक बनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, हमें लोगों को जल परिमाण निर्धारित करने से आगे लाभ परिमाण निर्धारित करने की ओर बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि निश्चित रूप से लाभ परिमाण का निर्धारण गतिशील होगा। यह मैपिंग तथा मानव समाज में आजीविका के तौर-तरीकों के अनुमानों से जुड़ा होगा और यह विकसित होता रहेगा।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि मानव सम्मान के लिए जल तक पहुंच एक पर्याय है। भारत में 6 सौ हजार गांवों तथा शहरी क्षेत्रों की आबादी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना केवल परियोजना प्रस्ताव नहीं है। यह पवित्र संकल्प है। सरकार ने भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरा होने पर 2022 तक सभी ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सप्लाई सुनिश्चित करने की रणनीतिक योजना बनाई है। उस वर्ष तक का लक्ष्य है 90 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों में पाईप से पानी सप्लाई करना।
इस अवसर पर केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण, सड़क परिवहन और राजमार्ग व शिपिंग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के अंतर्गत 27 परियोजनाएं इस साल तक पूरी हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि 1 करोड़ 88 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई सुविधा प्रदान करने के लिए अगले साल तक 285 नई सिंचाई परियोजनाओं पर काम शुरू हो जाएगा।
गडकरी ने कहा कि बूंद-बूंद सिंचाई या ड्रिप सिंचाई और पाइपलाइन के जरिए सिंचाई सरकार के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में होंगी क्योंकि इससे बड़ी मात्रा में पानी की बचत होगी और इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण में निहित लागत भी घट जाएगी।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री ने कहा कि जल, बिजली, परिवहन और संचार विकास के चार सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि सरकार हर घर में सुरक्षित पेयजल और हर खेत में सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने की इच्छुक है।
इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा सरदार सरोवर परियोजना के हालिया उद्घाटन का उल्लेख किया, जो 4 करोड़ से भी अधिक लोगों को पानी मुहैया कराएगी और 8 लाख हेक्टेयर भी से अधिक भूमि को सिंचाई सुविधा सुलभ कराने में मदद करेगी।
गडकरी ने कहा कि बाढ़ और सूखे से लोगों को बचाने के लिए नदियों को आपस में जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नदियों को आपस में जोड़ने के लिए 30 परियोजनाओं को मंजूरी दे दी गई है जिनमें से तीन परियोजनाओं यथा केन-बेतवा, पार-तापी-नर्मदा और दमन गंगा-पिंजल परियोजनाओं पर काम तीन माह के भीतर शुरू हो जाएगा।
मंत्री ने कहा कि सरकार नदियों को आपस में जोड़ने के लिए एक बड़ा कोष बनाने की संभावनाएं तलाश रही है। गडकरी ने कहा कि शोधित अपशिष्ट जल के उपयोग के लिए नए तरीके ढूंढ़ने होंगे। गडकरी ने कहा कि उन्होंने एनटीपीसी के बिजली संयंत्रों में पुनरावर्तित (रिसाइकिल्ड) पानी का उपयोग करने की संभावना तलाशने के लिए विद्युत मंत्री से अनुरोध किया है।
उन्होंने नदी के 70 फीसदी पानी का उपयोग करने के लिए अभिनव तरीकों की खोज करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया जो समुद्र में चला जाता है। पंचेश्वर परियोजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जल संसाधन मंत्रालय में सचिव जल्द ही लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए नेपाल का दौरा करेंगे। उन्होंने आशा व्यक्त की कि परियोजना पर काम जल्द ही शुरू हो जाएगा।
गडकरी ने यह भी उम्मीद व्यक्त की कि ‘भारत जल सप्ताह’ के दौरान होने वाले विचार-विमर्श और चर्चाओं से कुछ अच्छे सुझाव सामने आएंगे। केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री सुश्री उमा भारती ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार वर्ष 2022 तक देश के हर घर में सुरक्षित पेयजल और प्रत्येक खेत में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए गंभीरतापूर्वक काम कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘यह गंभीर चिंता का विषय है कि भूजल का स्तर खतरनाक रूप से नीचे जा रहा है। हमने भूजल का दुरुपयोग किया है एवं इसे बर्बाद किया है। हमें पानी, नदियों एवं भूजल का सम्मान करना होगा और देश में बहने वाली नदियों को अविरल एवं निर्मल बनाना होगा।’
भारत जल सप्ताह 2017 के शुभारंभ सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि जल और ऊर्जा दो महत्वपूर्ण संसाधन हैं जिनका समुचित संरक्षण और इष्टतम उपयोग राष्ट्र के समेकित विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि देश के 112 जिलों में 20 प्रतिशत से भी कम सिंचाई कवरेज है। उन्होंने यह भी कहा कि पानी की कमी और बाढ़ प्रबंधन की चुनौतियों का सामना करने के लिए समयबद्ध उपायों की जरूरत है। मंत्री ने कहा कि सरकार ने भूजल के टिकाऊ प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय भूजल प्रबंधन सुधार योजना का प्रस्ताव किया है जो विश्व बैंक से सहायता प्राप्त 6,000 करोड़ रुपये की योजना है।
केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने ‘आईडब्ल्यूडब्ल्यू -2017’ में भाग ले रहे सभी प्रतिनिधियों का धन्यवाद किया और आशा व्यक्त की कि पानी और ऊर्जा के बुनियादी मुद्दों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित सत्र नीति निर्माताओं और राष्ट्र के लिए अत्यंत लाभदायक साबित होंगे।

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