नदियों की गाद निकालने के लिए नया व्यापक कानून
नई दिल्ली। केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने नदियों की गाद निकालने के मुद्दे से निपटने के लिए एक नया व्यापक कानून की मांग की है।
उन्होंने नई दिल्ली में अपने मंत्रालय से संबंधित संसदीय सलाहकार समिति की बैठक को बाढ़ प्रबंधन के मुद्दे पर संबोधित करते हुए कहा कि यह नया कानून राज्यों के परामर्श से तैयार किया जाएगा। देश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए गडकरी ने कहा कि देश में बाढ़ की चुनौतियों को प्रभावी ढंग से निपटना जरूरी है।
कहा कि नदियों को जोड़ने और बांधों के निर्माण जैसे कार्यों को भी बाढ़ को कम करने के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए। गडकरी ने कहा कि हमें अपने देश में बाढ़ के पूर्वानुमान करने वाले नेटवर्क को भी मजबूत करना और सुधारना होगा। बाढ़ के पूर्वानुमान की मल्टी-मॉडल एन्सेबल (एमएमई) और वैश्विक पूर्वानुमान प्रणाली (जीएफएस) के परिणाम का संदर्भ देते हुए मंत्री ने कहा कि पूर्वानुमान का समय पांच से सात दिनों तक बढ़ाया जाने का प्रस्ताव है।
मंत्री ने सदस्यों को बताया कि ओडिशा में महानदी डेल्टा के लिए 0.5 मीटर समोच्च अंतराल के डिजिटल एलिवेशन मॉडल का उपयोग भूक्षेत्र के पूर्वानुमान का सीमित डेटा के साथ किया गया है। उन्होंने कहा कि इसके परिणाम को राज्य सरकार द्वारा सत्यापन किया जा रहा है और 2018 तक इसके कार्यान्वयन की संभावना है। गडकरी ने कहा कि रडार डेटा को इनुडेशन पूर्वानुमान मॉडल के साथ एकीकृत किया जाना है।
साथ ही मंत्री ने कहा कि देश में अन्य बाढ़ प्रवण क्षेत्रों के लिए इसी तरह की डिजिटल एलिवेशन मॉडल को 2020 तक लागू करने की योजना है। बैठक में भाग लेने वाले संसद सदस्यों ने देश में बाढ़ प्रबंधन के लिए मंत्रालय द्वारा उठाए गए उपायों का समर्थन किया। एक सदस्य ने सुझाव दिया कि नदियों को जोड़ने की परियोजना पर पर अधिक बल दिया जाना चाहिए।
एक और सदस्य का मानना था कि बाढ़ को रोकने के लिए गंगा नदी के किनारे अधिक तटबंध का निर्माण किया जाना चाहिए। संसद सदस्यों ए टी (नाना) पाटिल, श्रीमती अंजू बाला, बहादुर सिंह कोली, धर्मबीर भालेराम, प्रेम सिंह चंदूमाजरा, सुनील कुमार मंडल और स्वामी साक्षी महाराज (सभी लोकसभा) तथा राज्यसभा सांसद राम नारायण डूबी ने इस बैठक में भाग लिया।
मंत्रालय में राज्यमंत्रियों डॉ सत्यपाल सिंह और डॉ अर्जुन राम मेघवाल, सचिव डॉ अमरजीत सिंह, केन्द्रीय जल आयोग के अध्यक्ष नरेन्द्र कुमार, एनडीडब्ल्यूए के महानिदेशक एस मसूद हुसैन तथा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बैठक में भाग लिया।

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