Tuesday, 20 June 2017

मध्‍य प्रदेश के 64 छोटे शहरों के लिए 275 मिलियन डॉलर का ऋण

         एशियाई विकास बैंक व भारत सरकार ने मध्‍य प्रदेश के 64 छोटे शहरों में शहरी सेवाओं के उन्‍नयन के लिए 275 मिलियन डॉलर के ऋण पत्र पर हस्‍ताक्षर किए। 

       भारत सरकार की ओर से वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामले विभाग में बहुपक्षीय संस्‍थानों के संयुक्‍त सचिव राजकुमार तथा एशियाई विकास बैंक की ओर से भारतीय मिशन के उप-निदेशक एल. बी. सोंजाजा ने ऋण पत्र पर हस्‍ताक्षर किए। इस धनराशि का उपयोग मध्‍य प्रदेश के शहरी सेवा सुधार परियोजना में किया जाएगा। 
         मध्‍य प्रदेश सरकार की ओर से शहरी विकास और आवास विभाग के सचिव विवेक अग्रवाल ने परियोजना समझौता पत्र पर हस्‍ताक्षर किए। राजकुमार ने बताया, मध्‍य प्रदेश में तेजी से हो रहे शहरीकरण के लिए बड़े निवेश की आवश्‍यकता है। शहरी अवसंरचना में सुधार के लिए पाइपों के माध्‍यम से पेयजल की निर्बाध आपूर्ति बहुत आवश्‍यक है और इससे परियोजना-क्षेत्र के निवासियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्‍ध होगा। 
            सोंजाजा ने कहा, एडीबी के निरंतर सहयोग से राज्‍य के शहरी विकास की गुणवत्ता, कार्यकुशलता और सतत विकास में बढ़ावा मिलेगा और इससे शहरी सेवाओं की उपलब्‍धता और संस्‍थागत क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ पेयजल प्रबंधन में भी सुधार होगा। इस परियोजना का मुख्‍य तत्‍व डिजाइन-निर्माण-संचालन है। 
          इसमें 10 वर्षों के लिए संचालन और रख-रखाव शामिल है। इससे पेयजल सेवा के संचालन में निरंतरता और वित्तीय स्थिरता आएगी। यह परियोजना राज्‍य के 64 छोटे और मध्‍यम शहरों में पेयजल आपूर्ति को समावेशी और निरंतरता प्रदान करेगी तथा जलवायु की विषमता से सामना करने में सहायता करेगी। 
           खजुराहो और राजनगर जैसे विरासत वाले शहरों में स्‍टॉर्म वॉटर तथा सीवेज अवसंरचना का विकास किया जाएगा। यह परियोजना राज्‍य सरकार की शहरी अवसंरचना के विकास की प्रतिबद्धता का एक उदाहरण है। 

      एडीबी द्वारा पहले दिये गए ऋण से 4 बड़े शहरों के 50 लाख निवासियों तक सुरक्षित पेयजल आपूर्ति करने में सहायता मिली थी। एडीबी द्वारा दिये गये ऋण के अतिरिक्‍त मध्‍य प्रदेश सरकार ने 124 मिलियन डॉलर की धनराशि इस योजना के लिए आवंटित की है। यह परियोजना पांच वर्षों तक चलेगी और जून, 2022 तक इसके पूरे होने की उम्‍मीद है।

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